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Author: dindiaadmin

UP

राज्य
गरमाता राजनैतिक पारा अमित त्यागी और एस.पी. सिंह धारात्मक परिवर्तन एक समय चक्र में पूर्ण होता है। बदलाव धीरे धीरे दिखाई देता है। उत्तर प्रदेश सरकार एक साल पूरा होने की तरफ बढ़ रही है। सरकार के द्वारा नीतिगत फैसलों से जनता में अच्छा संदेश जा रहा है। कानून व्यवस्था में सुधार ऊपरी स्तर पर भी दिख रहा है और अंदरूनी स्तर पर भी एंकाउंटर द्वारा सफाई अभियान जारी है। ऐसे ही एंकाउंटर राजनैतिक दलों द्वारा अपने अपने भीतर भी किए जा रहे हैं। भाजपा को समझ आ चुका है कि संघटन में बाहरी नेताओं से नुकसान होता है। वह अब अपने पुराने नेताओं को संगठन में वरीयता देने जा रही है। बूथ लेवेल पर मजबूती की तैयारी की जा रही है। हर माह मण्डल स्तरीय बैठकों में बूथ टोली को मतदाताओं से करीब रिश्ता बनाने का कहा गया है। मण्डल स्तर भाजपा में ब्लॉक स्तर की इकाई होता है। भाजपा में संगठनात्मक रूप से कुल 1471 मण्डल हैं। भाजपा ...

New Delhi Book Fair 2018

राष्ट्रीय
नई दिल्ली पुस्तक मेला-2018 मुखर हुआ राष्टï्रवादी विमर्श द्य सोनाली मिश्रा हते हैं रंग बदलता है, किताबों का, मेलों का और रंग बदलता है हवाओं का, विमर्शों का। क्योंकि हर रंग सत्ता को समेटे होता है। वह रंग कुछ भी हो सकता है, वह धारा कोई भी हो सकती है, कभी इधर के चेहरे चमक सकते हैं, तो कभी उधर के। नई दिल्ली में जनवरी में जब पुस्तकों का सबसे बड़ा बाजार सजा, तो राष्ट्रवादी स्वरों की थोड़ी फुसफुसाहट थी। दरअसल यह फुसफुसाहट पिछले वर्ष के पुस्तक मेले में सफलतापूर्वक आयोजित किए गए विमर्शों के आधार पर हो रही फुसफुसाहट थी। इस सरकार के आने के बाद से ही ऐसे विमर्शों के तेज होने की अपेक्षा थी, पर ऐसा न होने से लोग निराश हो रहे थे। पर जनवरी 2018 में आयोजित पुस्तक मेला राष्ट्रवादी वैचारिक मंथन के प्रेमियों के लिए सुखद आश्चर्य के साथ आया। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने इस वर्ष पुस्तक मेले में...

नेशनल मेडिकल कमिशन बिल और आईएमए द्वारा उसका विरोध

TOP STORIES
Ashutosh Kumar Singh वा अरब आबादी वाले भारत की स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रुप से चलाने के लिए जिस व्यवस्था की जरूरत आज महसूस की जा रही है, उसको पूरा करने के लिए सरकार राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक-2017 (एनएमसी बिल-2017) ला रही है। संसद के इसी सत्र में इस विधेयक को लोकसभा में प्रस्तुत किया गया था। विधायी प्रक्रिया के अनुरूप यह विधेयक अब स्थाई समिति के पास है। इसी साल के बजट सत्र में इस पर अंतिम निर्णय होने की संभावना है। भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार की दिशा में इस बिल को क्रांतिकारी बताया जा रहा है। गौरतलब है कि स्वास्थ्य शिक्षा किसी भी देश के स्वास्थ्य व्यवस्था को सुचारू रुप से चलाने के लिए जरूरी घटक होता है। स्वास्थ्य व्यवस्था को गतिमान बनाने के लिए एक ऐसी विधायी व्यवस्था की जरूरत होती है जो समय के साथ-साथ कदम ताल मिलाए। यही सोचकर सरकार ने एनएमसी बिल जल्द से...

डॉक्टरी पेशे की प्रतिष्ठा पर संकट

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डॉक्टरी पेशे की प्रतिष्ठा पर संकट अरूण तिवारी हले मैक्स, फिर फोर्टिस और फिर मेदान्ता। आरोप लगा कि मौतें इलाज में लापरवाही के कारण हुई। डेंगू पीडि़त बच्चे के पिता को पहले तो 16 लाख रुपये का खर्च बता दिया। पिता ने अपना घर गिरवी रखकर किसी तरह 15.88 लाख रुपये का इंतजाम किया। अस्पताल को पैसे मिल गये, तो पीडि़त को सरकारी अस्पताल का रास्ता दिखा दिया। जहां जाकर बच्चे की मौत हो गई। क्रूरता की हद यह कि सरकारी अस्पताल में ले जाने के लिए निजी अस्पताल ने अपनी एम्बुलेंस तक मुहैया नहीं कराई। ऐसा नहीं है कि इलाज में लापरवाही की ये पहली, दूसरी अथवा तीसरी घटनायें थीं। सरकारी अस्पतालों में इनसे भी ज्यादा लापरवाही बरतने के मामले संभव हैं। किंतु इलाज को लेकर निजी अस्पतालों में हुए अपराध ज्यादा संगीन इसलिए मानने चाहिए, चूंकि मरीज की दुर्दशा के ज्यादातर मामलों में वजह, लापरवाही से ज्यादा, पूर्ण नियो...

Self-Study

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स्वाध्याय सुरेश चंद्र ध्याय संस्कृत का एक संयुक्त शब्द है जिसका संधि विच्छेद स्व+अध्याय होता है Óएवं इसका अर्थ होता है स्वयं के जीवन की पुस्तक के अध्यायों का अध्ययन। इस शब्द का एक और अर्थ भी निकला गया है स्वा$ध्याय। यहां ध्याय का अर्थ है ध्यान लगाना, सोचना अथवा विचार करना। इस अर्थ के अनुसार स्वाध्याय स्वयं अपनेविषय में वियार करना एंव मनन करना है। साधारण रूप से स्वाध्याय का तात्पर्य वेदों, शास्त्रों एवं दर्शन के अध्ययन से किया जाता है। कुछ विद्वान इसका अर्थ स्वयं प्राप्त आध्यात्मिक शिक्षा से लेते हैं। स्मृतियों में स्वाध्याय का अर्थ वेदों को कंठस्थ करना है ताकि मौखिक रूप से उनका सही पाठ किया जा सके। तैंत्तिरीय उपनिषद् के मं़त्र संख्या 1.9.1 के अनुसार सत्य को जानना, आत्मनियंत्रण, तप आंतरिक शंाति एवं यज्ञ करना ही स्वाध्याय है। यह मंत्र शिक्षा देता है- ...

दूध का धुला कौन?

राष्ट्रीय
दूध का धुला कौन? पंकज कुमार झा पनी बात शुरू करूं इससे पहले यह स्पष्ट कह देना चाहता हूं कि अपने लिए न तो चेलमेश्वर समूह कोई भगवान हैं, और न ही दीपक मिश्रा को ही कोई क्लीन चिट देने का अपना कोई इरादा है। सच कहें तो इस लेख का आशय चार जजों द्वारा उठाये गए मूल प्रकरण पर बात करने से है भी नहीं। हम तो इस अप्रत्याशित घटना के बाद फेसबुक पर छा गए समर्थन-विरोध और उसके तरीके के प्रति बात करना चाह रहे हैं। हर मुद्दे की तरह इस मामले में भी प्रेस वार्ता होने के पांच मिनट के भीतर-भीतर भाई लोगों ने जिस तरह अपना-अपना पक्ष तय कर अपनी सारी शब्द क्षमताओं को झोंक दिया, वह हंसाता तो है ही लेकिन, उससे ज्यादा सिहरन पैदा करता है कि हम आखिर कैसे समाज का हिस्सा हैं। हर विषय को व्यक्ति विशेष के पक्ष या विरोध का मामला बना देना, और अपने-अपने काल्पनिक पक्ष के लिए 'मर मिटनाÓ एक ऐसी विडंबना ...

Storm in Supreme Court

राष्ट्रीय
सर्वोच्च न्यायालय में तूफान तस्वीर का दूसरा पक्ष विनीत नारायण सर्वोच्च न्यायालय के इतिहास में पहली बार 4 वरिष्ठतम् न्यायाधीशों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश की कार्य प्रणाली पर संवाददाता सम्मेलन कर न्यायपालिका में हलचल मचा दी। उनका मुख्य आरोप है कि राजनैतिक रूप से संवेदनशील मामलों में उनकी वरिष्ठता को नजरअंदाज कर, मनचाहे तरीके से केसों का आवंटन किया जा रहा है। इस अभूतपूर्व घटना पर देश की न्याय व्यवस्था से जुड़े लोग, राजनैतिक दल और मीडिया अलग-अलग खेमों में बटे हैं। भारत सरकार ने तो इसे न्यायपालिका का अंदरूनी मामला बताकर पल्ला झाड़ लिया। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस पर टिप्पणी की है। उधर सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता इस पर खुली बहस की मांग कर रहे है। जबकि उक्त चार न्यायाधीशों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश पर महाअभियोग चलाने की मांग की है। जाहिर है कि बिना तिल क...

Judiciary in India

Today News
न्यायिक व्यवस्था दरकता विश्वास क पुरानी प्रचलित कहानी है। दो महिलाएं एक राजा के दरबार में आती हैं। उनके साथ एक छोटा बच्चा होता है। दोनों इस बात पर झगड़ रही हैं कि बच्चे की माँ कौन है? काफी देर तक दोनों अपने तर्क देती रहीं और झगड़ा बढ़ता गया। जब काफी समय बीत गया तो राजा ने सेनापति को बुलाया और कहा कि बच्चे के दो टुकड़े कर दो और दोनों के बीच में बाँट दो। तब उनमे से एक महिला जोर से चिल्लाई कि 'ऐसा मत करो। बच्चे को दूसरी महिला को ही दे दो। कम से कम मेरा बच्चा जिदा तो रहेगाÓ। तुरंत न्याय हो गया और साथ ही साथ इस बात का फैसला भी कि बच्चे पर हक किसका होना चाहिए ? अब इस केस को भारत की वर्तमान न्याय व्यवस्था के अनुरूप देखते हैं। पहले ये केस सेशन कोर्ट में चलेगा। दोनों पीडि़त पक्ष एक-एक वकील करेंगे। कागजात जमा होंगे। शपथ पत्र लिए जाएंगे। इसके बाद महीनों के अंतर पर तारीखे पड़े...

Budget 2018

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जितेन्द्र तिवारी मोदी सरकार का अंतिम पूर्णकालिक बजट एक फरवरी को वित्त मंत्री अरुण जेटली पेश करेंगे। अगले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर माना जा रहा था कि यह बजट लोकलुभावन हो सकता है। लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी ने टीवी इंटरव्यू में कह दिया कि लोगों को मुफ्त की चीजें नहीं बल्कि ईमानदार शासन पसंद है। ऐसे में अब कयास लग रहा है कि आखिर कैसा होगा यह बजट? 1 फरवरी 2018 को जब वित्त मंत्री अरुण जेटली लोकसभा में बजट भाषण पढ़ रहे होंगे तो यह उनके मौजूदा कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट होगा। 2019 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले वोट ऑन अकाउंट बजट पेश किया जाएगा। आखिरी पूर्ण बजट होने से साथ साथ यह देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद पेश हो रहा पहला आम बजट भी होगा। ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि इस साल का बजट किस तरह पिछले किसी भी बजट से अलग होगा? दो और सवाल हैं, जीएसटी के बाद कि...
Indo-Asean

Indo-Asean

Today News
चीन को औकात बताई आसियान सम्मेलन में आगामी 25 जनवरी को राजधानी में आयोजित होने वाले भारत-आसियान शिखर सम्मलेन की मेजबानी करके भारत दो बड़े हित साधना चाहेगा। पहला, भारत-आसियान देशों के आपसी और व्यापारिक संबंधों को नई बुलंदियों पर लेकर जाना। दूसरा, इस क्षेत्र में चीन के असर को कम करना। भारत-आसियान सम्मेलन का एक मकसद चीन को उसकी औकात बताना भी है। ये सम्मेलन ऐसे वक्त पर हो रहा है जब दक्षिण चीन सागर में चीन आक्रामक रवैया अपनाए हुए है और उत्तर कोरिया ने पिछले कुछ महीनों के कई मिसाइल परीक्षण किए हैं। नई दिल्ली में इन मुद्दों पर बात हो सकती है। दरअसल चीन अपने महत्वाकांक्षी प्रॉजेक्टवन वेल्ट वन रोड के जरिए पूरी दुनिया में दबदबा बढ़ाना चाहता है। इसके अलावा दक्षिण चीन सागर के इलाके में उसका कई पड़ोसी देशों से विवाद है। भारत अब तैयार है आसियान देशों को चीन के दबाव से मुक्ति दिलव...