गजब का अजब वीआईपी कल्चर
सरकारी गाड़ियों से लालबत्ती और हूटर उतारने से वीआईपी कल्चर ख़त्म नहीं होता बल्कि स्वयं को देश सा सर्वेसर्वा मानने की मानसिकता हटाने से वीआईपी कल्चर ख़त्म होगा /पीएम सीएम मंत्री राज्यपाल राष्ट्रपति सांसद विधायक ये अपने को भाषणों में तो जनसेवक कहते हैं लेकिन व्यवहार और बर्ताव में तो खुद को खुदा ही मानते हैं / कोई कहता है कि उसने बचपन में चाय बेचीं तो कोई कहता है कि उसने दैनिक मजदूरी करी तो कोई कहता है कि उसने एक नेता की रसोई में चाय बनाई तो कोई कहता है उसने जयप्रकाश आंदोलन में जेल की रोटी खायी तो कोई कहता है कि मिटटी के घर में बड़ा हुआ और पेड़ की छांव में पढ़ा लेकिन यह उसका अतीत हुआ लेकिन अब जब बीसियों सालों से पक्ष विपक्ष में रहकर या संवैधानिक पदों का लाभ लेकर लाखों करोड़ों रुपियों चल अचल संपत्ति मालिक बना हुआ है तो उसने अपने खुद के पैसे से अपने समाज और देश के लिए क्या किया ?कितने गरीबों दलितों श...









