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Author: dindiaadmin

Modi’s Israel Visit and Question of Muslims

Modi’s Israel Visit and Question of Muslims

BREAKING NEWS
R K SINHA Prime Minister Narendra Modi’s Israel visit beginning July 4 is important and historic. The visit assumes significance since this visit coincides when India and Israel are celebrating silver jubilee of their bilateral ties. Modi will be first Indian Prime Minister to visit Israel although Modi had visited Tel Aviv earlier as chief minister of Gujrat. Though it was in 1992 when India and Israel established full diplomatic relations, no Indian President or Prime Minister visited Israel till date. In 2003 Aerial Sharon the then Prime Minister of Israel had visited India. He was the first Israeli Prime Minister to visit New Delhi. It was Sharon who entered into bilateral trade and defense relations with India. Credit goes to him. A New Beginning of Ties In fact the ruling...
चुनावी बांड: जेब तुम्हारी, हाथ हमारा

चुनावी बांड: जेब तुम्हारी, हाथ हमारा

घोटाला
डॉ. वेदप्रताप वैदिक अब सरकार और चुनाव आयोग में मुठभेड़ की तैयारी है। 2017 के बजट में वित्तमंत्री ने चुनावी बांड जारी करने की बात कही थी। उसे अब वे अमली जामा पहनानेवाले हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने सरकार को लिखा है कि इन बांडों से चुनावी चंदे की पारदर्शिता खत्म हो जाएगी। इन बांडों के जारी होने पर यह पता ही नहीं लग सकेगा कि किस पार्टी को किसने कितना चंदा दिया है। अभी तो कोई व्यक्ति दो हजार तक और कोई संस्था 20 हजार तक चंदा दे तो उसे अपना नाम बताने की जरुरत नहीं है लेकिन अब लोग करोड़ों रु. के बांड बनवाएंगे और वे चाहे जिस पार्टी को दे सकेंगे। देनेवाले और लेनेवाले के नाम बिल्कुल गोपनीय रखे जाएंगे। चंदादाता को अपनी आडिट रिपोर्ट में भी उसे दिखाने की जरुरत नहीं होगी। चंदा बैंको के जरिए ही दिया जा सकेगा। याने बांड बनाते वक्त बैंक भी डटकर कमीशन कमाएंगे। जो बांड बनवाएगा, उसका नाम बैंक को तो प...
संघ व भाजपा की मजबूतियों को नजरअंदाज करना राजनैतिक व रणनीतिक मूर्खता ही है :

संघ व भाजपा की मजबूतियों को नजरअंदाज करना राजनैतिक व रणनीतिक मूर्खता ही है :

BREAKING NEWS, विश्लेषण
विवेक उमराव सामाजिक यायावर ******* संघ अपने व्यापक व प्रतिबद्ध जमीनी सांगठनिक ढांचे माध्यम से भारत देश के चिंदी-चिंदी कोनों में भी पहुंचता है। संघ आपदाओं में राहत व पुनर्वास के कामों के साथ लोगों के बीच पहुंचता है, लोगों के दुख-दर्द का साथी बनता है। संघ के लोग पूरे वर्ष 24 घंटे अपने प्रचारकों, कार्यवाहों व कार्यकर्ताओं के माध्यम से लोगों के साथ सीधे संपर्क में रहता है। संघ दशकों से प्राथमिक शिक्षा के लिए काम कर रहा है। प्रतिवर्ष सैकड़ों जिलों के हजारों बच्चों की प्राथमिक शिक्षा की परवरिश करता आया है। ये बच्चे बड़े होने पर सड़क में साधारण सी दुकान लगाने से लेकर, गुंडे-मवाली, व्यापारी, सरकारी अधिकारियों, यूनिवर्सटीज में प्रोफेसर व मैसाच्य़ुसेट्स से तकनीक में PhD या पोस्ट डाक्टरेट इत्यादि तक कुछ भी हो सकते हैं। प्रातः कालीन शाखाओं के माध्यम से प्रौढ़ों व सायंकालीन शाखाओं के म...
दूषित सोच से लोकतंत्र का कमजोर होना

दूषित सोच से लोकतंत्र का कमजोर होना

सामाजिक
-ललित गर्ग- पिछले दिनों हमारी संकीर्ण सोच एवं वीआईपी संस्कृति में कुछ विरोधाभासी घटनाओं ने न केवल संस्कृति को बल्कि हमारे लोकतंत्र को भी शर्मसार किया है। एक घटना गुजरात की है जिसमें गुजरात विधानसभा अध्यक्ष के द्वारा गलत जगह पार्किंग करने पर गार्ड द्वारा सही पार्किग लगाने की सलाह देना उसके लिये नौकरी से हाथ धोने का कारण बनी, वही दूसरी दिल्ली के गोल्फ क्लब में नस्ली भेदभाव की घटना जिसमें परम्परागत पोशाक जैनसेम पहनकर आने पर मैनेजर द्वारा उसे बाहर कर देने की घटना भी हमारे लिये चिन्ता का कारण बनी है। शालीन व्यवहार, संस्कृति, परम्पराएं, विरासत, व्यक्ति, विचार, लोकाचरण से लोकजीवन बनता है और लोकजीवन अपनी स्वतंत्र अभिव्यक्ति, मर्यादा एवं संयमित व्यवहार से ही लोकतंत्र को मजबूती देता है, जहां लोक का शासन, लोक द्वारा, लोक के लिए शुद्ध तंत्र का स्वरूप बनता है। लेकिन यहां तो लोकतंत्र को हांकने वाले ल...
अध्यात्म का राजनीति पर प्रभाव जरूरी: कोविंद

अध्यात्म का राजनीति पर प्रभाव जरूरी: कोविंद

Today News
नई दिल्ली, 1 जुलाई 2017 देश के अगले राष्ट्रपति के लिए एनडीए के उम्मीदवार श्री रामनाथ कोविंद ने गच्छाधिपति आचार्य श्रीमद् नित्यानंद सूरीश्वरजी के दीक्षा के 50 वर्ष की संपन्नता पर आयोज्य संयम तप अर्धशताब्दी महोत्सव के लिए अपनी शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि जैन समाज का राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान है। देश के संतुलित विकास के लिए अध्यात्म का राजनीति पर प्रभाव जरूरी है। श्री कोविंद ने सुखी परिवार अभियान के प्रणेता गणि राजेन्द्र विजय के सान्निध्य में जैन समाज के शीर्ष प्रतिनिधिमंडल से चर्चा करते हुए उक्त उद्गार व्यक्त किए। उन्होंने आचार्य नित्यानंदजी के अवदानों की चर्चा करते हुए संस्कृति और सांस्कृतिक धरोहर को जीवंतता प्रदान करने में आचार्यजी के द्वारा किये गये प्रयासों को उल्लेखनीय बताया। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल मंे संसद सदस्य श्री रामसिंह राठवा, अखिल भारतीय संयम तप अर्द्धशता...
जब मैंने पहली बार पांच सौ का नोट देखा

जब मैंने पहली बार पांच सौ का नोट देखा

सामाजिक
हनुमक्का रोज मेरे पिता दुर्गा दास कन्नड़ थियेटर के एक सम्मानित कलाकार जरूर थे, मगर घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। कर्नाटक के बेल्लारी जिले के एक छोटे से कस्बे मरियम्मनहल्ली में मेरा जन्म हुआ था और बचपन से हमें रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती थी। पिताजी को देखकर ही मेरे मन में थियेटर के प्रति झुकाव होता गया और जब एक दिन मैंने घर में कहा कि मैं भी थियेटर जाना चाहती हूं और काम करना चाहती हूं, तो परिवार में कोई इसके लिए राजी नहीं था। मैंने घर में कहा कि इसमें गलत क्या है? आखिर मैं परिवार की विरासत को ही तो आगे बढ़ाना चाहती हूं? मगर वह आज का समय नहीं था। उन दिनों थियेटर की महिला कलाकारों को अच्छी नजरों से नहीं देखा जाता था। उनके चरित्र पर छींटाकशी की जाती थी और यहां तक कहा जाता था कि उनकी शादी नहीं हो सकती। मेरे घर वालों की भी यही चिंता थी। पर मैंने तय कर लि...
ट्रम्प की फिसलपट्‌टी पर जरा संभलकर चलें

ट्रम्प की फिसलपट्‌टी पर जरा संभलकर चलें

BREAKING NEWS, विश्लेषण
डॉ. वेदप्रताप वैदिक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अमेरिका जाने के पहले अंदेशा यह था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प उनसे पता नहीं कैसा व्यवहार करेंगे। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ मोदी की जुगलबंदी ख्यात थी और ट्रम्प इस बात के लिए विख्यात हो गए हैं कि वे ओबामावाद को शीर्षासन कराने पर तुले हुए हैं। ऐसे में हम यह मानकर चल रहे थे कि मोदी की इस अमेरिका-यात्रा के दौरान यदि कोई गड़बड़ न हो तो यही बड़ी उपलब्धि होगी। अमेरिका के साथ सामरिक गठबंधन वाले देशों जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया के नेताओं को ट्रम्प ने जिस तरह आड़े हाथों लिया है, उसे देखते हुए यह उम्मीद नहीं थी कि वे मोदी को गले लगाएंगे। एच1बी वीज़ा और पेरिस जलवायु समझौते को लेकर ट्रम्प ने भारत पर जो तेज़ाब उड़ेला था, उसके संदर्भ में लगा था कि व्हाइट हाउस में कहीं मोदी और ट्रम्प के बीच कोई मुठभेड़ न हो जाए। लेकिन मुठभेड़ की बजाय दोनों नेताओं मे...
“रोजा इफ्तार और साम्प्रदायिक सौहार्द”

“रोजा इफ्तार और साम्प्रदायिक सौहार्द”

सामाजिक
"रोजा इफ्तार" जो केवल मुस्लिम सम्प्रदाय का मज़हबी कार्यक्रम होता है जिसमें पूरे दिन का उपवास (रोजा) रखा जाता है और फिर शाम को भोजन सामग्री ग्रहण करना आरंभ किया जाता है, इसको इफ्तार (रोजा खोलना) कहते है। जब यह कार्यक्रम सामुहिक रुप से विभिन्न नेताओं व अधिकारियों द्वारा बड़े स्तर से आयोजित किया जाता है तो वह "इफ्तार पार्टी" हो जाती है। परंतु इस अवसर पर प्रायः सामूहिक कार्यक्रम करने वालो का मुख्य लक्ष्य राजनैतिक लाभ उठाना होता है। लेकिन क्या कभी मुस्लिम संप्रदाय ने अन्य धर्मानुयाईयों की भावनाओं का सम्मान रखते हुए उनके त्यौहारों आदि पर कभी इसप्रकार की सह्रदयता का परिचय दिया है ? उल्टा अनेक गैर मुस्लिम धार्मिक अवसरों व शोभा यात्राओं पर बाधाये ही उत्पन्न करके साम्प्रदायिक दंगे अवश्य भड़के है । हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी ने पूर्व प्रधानमंत्रियों के समान अपने 3 वर्ष के कार्यकाल में अपने निवास व का...
GST should be simplified for being really good and simple

GST should be simplified for being really good and simple

आर्थिक
Prime Minister at special mid-night Parliamentary session on 30.06.2017 for launch of GST termed full form of GST as Good and Simple Tax. But GST in its present form is full of complications and complexities. Goods and Service Tax-GST is launched to simplify the tax-system. But its rate-structure unfortunately is complex through imposition of cess over maximum GST-rate of 28-percent. Also GST-rates are not in multiples of some common factor. Best would have been to have GST-rates in multiples of six at 6, 12, 18, 30 and thereafter in multiples of 30 like 60, 90, 120 etc. A smaller GST-rate of 3-percent for some very specific commodities and services like on gold jewellery and transport-service could be logical. It is illogical to have five-percent GST on transporation-services where net pr...
मीरा कुमारः दलित का कंबल क्यों ओढ़ा ?

मीरा कुमारः दलित का कंबल क्यों ओढ़ा ?

राष्ट्रीय
डॉ. वेदप्रताप वैदिक राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मीरा कुमार का चिढ़ना स्वाभाविक है। बेंगलूरु में पत्रकारों ने जब उनसे पूछा कि उन्हें पता है कि वे हारनेवाली हैं, फिर भी वे राष्ट्रपति का चुनाव क्यों लड़ रही हैं ? इस पर मीराजी तुनुक गईं और उन्होंने पत्रकारों से पूछा तो क्या मैं बैठ जाऊं ? क्या मैं अपना नाम वापस ले लूं ? मीराजी बिल्कुल न बैठें। जरुर लड़ें। लेकिन वे जो कह रही हैं, उसे करके भी दिखाएं। वे कह रही हैं कि यह उनकी सैद्धांतिक लड़ाई है। भई, आज यह नई बात सुनी हमने ! कौनसी सैद्धांतिक लड़ाई ? आज तक राष्ट्रपति के चुनाव में कौनसी सैद्धांतिक लड़ाई लड़ी गई है ? हां, पार्टीबाजी जरुर होती रही है। वह आज भी हो रही है। विरोध के लिए विरोध हो रहा है। कई विरोधी टूटकर भाजपा से जा मिले हैं। अभी कांग्रेस जिन विरोधियों पर आस लगाए बैठी है, उनमें से भी कई भाजपा के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को चुपचाप वोट देनेवाले ह...