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Author: dindiaadmin

मत छोड़ो पाक का झंडा फहराने वालों को

मत छोड़ो पाक का झंडा फहराने वालों को

BREAKING NEWS
आर.के.सिन्हा इंग्लैंड के ओवल में भारत-पाकिस्तान के बीच खेले गए आईसीसी चैपियंस ट्रॉफी के खिताबी मुकाबले में पाकिस्तान ने भारत को मात दी। ठीक है, जब दो टीमें भिड़ेगी तो एक के हिस्से में विजय और दूसरे को मिलेगी पराजय। पर पाकिस्तान की जीत का जश्न भारत में मनाया जाए, यह बात गले नीचे नहीं उतरती। पर यही हुआ। मध्यप्रदेश के बुरहानपुर में पुलिस ने 15 लोगों को गिरफ्तार किया है। ये लोग पाकिस्तान के नारे लगाकर, पटाखे छोड़कर पाकिस्तान के फाइनल में जीतने का जश्न मना रहे थे। इससे मिलता –जुलता मामला रुड़की में भी सामने आया है। पाकिस्तान की जीत पर रुड़की में एक मोहल्ले में कुछ लोगों ने आतिशबाजी कर लोगों की भावनाएं भड़काने एवं माहौल खराब करने का प्रयास किया। कश्मीर के विभिन्न इलाक़ों में जो कुछ भी हुआ वह तो सारा देश जान गया है। इन शर्मनाक देशद्रोही घटनाओं को दुहराने की ज़रूरत तक नहीं है।...
काश, मेरे मुल्क में भी शांति होती – मुजून अलमेलहन, यूएन की गुडविल अंबेसडर

काश, मेरे मुल्क में भी शांति होती – मुजून अलमेलहन, यूएन की गुडविल अंबेसडर

विश्लेषण
मुजून सीरिया के शहर डारा में पली-पढ़ीं। पापा स्कूल टीचर थे। उन्होंने अपने चारों बच्चों (दो बेटे और दो बेटियों) की पढ़ाई को सबसे ज्यादा तवज्जो दी। सब कुछ ठीक चल रहा था कि अचानक देश में गृह युद्ध छिड़ गया। सरकार और कट्टर इस्लामी ताकतें एक-दूसरे पर हमले करने लगीं। देखते-देखते डारा शहर तबाही के कगार पर पहुंच गया। स्कूल और सरकारी इमारतों पर बम बरसने लगे। तमाम लोग मारे गए। हर पल खौफ में बीत रहा था। हजारों लोग घर छोड़कर चले गए। तब मजबूरन मुजून के परिवार ने सीरिया छोड़कर जाॅर्डन में शरण लेने का फैसला किया। यह वाकया फरवरी, 2013 का है। मम्मी-पापा ने जरूरी सामान बांधा और चल पड़े जाॅर्डन की ओर। बच्चे भी सदमे में थे। पूरे रास्ते सब शांत रहे। किसी ने किसी से कुछ नहीं कहा। मन में एक ही बात थी कि किसी तरह सुरक्षित जाॅर्डन पहुंच जाएं। वह आधी रात का वक्त था, जब वे सब जाॅर्डन की सीमा में दाखिल हुए, तो उन्हें जा...
कैलाश मानसरोवर यात्रा को लौटाने वाले चीन की वस्तुओं का करें बहिस्कार : विहिप

कैलाश मानसरोवर यात्रा को लौटाने वाले चीन की वस्तुओं का करें बहिस्कार : विहिप

BREAKING NEWS
नई दिल्ली। जून 27, 2017. कैलाश मानसरोवर यात्रा को चीन द्वारा रोके जाने पर विश्व हिन्दू परिषद ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उसका कहना है कि नाथू ला बोर्डर से जाने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा को चीन द्वारा रोके जाने से सभी स्तब्ध थे. अभी तक लगता था कि इसके पीछे शायद प्राकृतिक विपदा ही मुख्य कारण रही होगी. परन्तु चीनी अधिकारियों द्वारा किए गए पत्र व्यवहार तथा जारी बयानों से अब यह स्पष्ट हो गया है कि इस महत्वपूर्ण यात्रा के रोकने का एक मात्र कारण क्षेत्रीय विस्तार की अमिट भूख व दादागिरी ही है. विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री डा सुरेन्द्र जैन ने चीन की इस दादागिरी की कठोर शब्दों में भर्त्सना करते हुए जहां देश की जनता से चीनी वस्तुओं के बहिस्कार की अपील की है वहीँ भारत सरकार से जमीन के भूखे चीन के साथ इस मामले को गंभीरता से उठाने को भी कहा है. उन्होंने कहा कि तिब्बत पर अबैध कब...
Modified delimitation needed in Delhi before any next elections

Modified delimitation needed in Delhi before any next elections

राज्य
Delimitation in Delhi should be streamlined by having two exclusive constituencies for trans-Yamuna areas with simplified names as East-Delhi and Yamuna-Vihaar with river Yamuna as boundary to separate rest of the five seats on other side of the river which could have easy names as New-Delhi, Old-Delhi, South-Delhi, North-Delhi and West-Delhi eliminating confused nomenclature like North-East Delhi or North-West Delhi. All the seven Lok Sabha constituencies may comprise of ten assembly-seats even though twenty trans-Yamuna assembly-seats may have slightly less representation of voters. Major roads or rail-lines should be dividing boundaries between different constituencies. Such slight modifications can be done through an ordinance before forthcoming Lok Sabha polls. There is a pecu...
पढ़ाई के लिए छोड़ना पड़ा घर 16 फ्रैक्चर, 8 सर्जरी के बाद भी आईएएस बनीं

पढ़ाई के लिए छोड़ना पड़ा घर 16 फ्रैक्चर, 8 सर्जरी के बाद भी आईएएस बनीं

सामाजिक
उम्मुल खेर, सिविल सेवा आईएएस 2017 में चयनित राजस्थान के पाली मारवाड़ में जन्मी उम्मुल की मां बहुत बीमार रहती थीं। पापा उन्हें छोड़कर दिल्ली आ गए। मां ने कुछ दिन तो अकेले संघर्ष किया, पर सेहत ज्यादा बिगड़ी, तो बेटी को पापा के पास दिल्ली भेज दिया। तब उम्मूल पांच साल की थी। दिल्ली आकर पता चला कि पापा ने दूसरी शादी कर ली है। वह अपनी नई बीवी के साथ एक झुग्गी में रहते हैं। नई मां का व्यवहार शुरू से अच्छा नहीं रहा। पापा निजामुद्दीन स्टेशन के पास पटरी पर दुकान लगाते थे। मुश्किल से गुजारा चल पाता था। उम्मुल के आने के बाद खर्च बढ़ गया। यह बात नई मां को बिल्कुल अच्छी नहीं लगी। पापा ने झुग्गी के करीब एक स्कूल में उनका दाखिला करा दिया। बरसात के दिनों में घर टपकने लगता, तो पूरी रात जागकर गुजारनी पड़ती। आस-पास गंदगी का अंबार होता था। मां की बड़ी याद आती थी। बाद में पता चला मां नहीं रहीं। उम्मुल का पढ़ाई मे...
कस्बे की लड़की से नदिया एक्सप्रेस तक – झूलन गोस्वामी, महिला क्रिकेटर

कस्बे की लड़की से नदिया एक्सप्रेस तक – झूलन गोस्वामी, महिला क्रिकेटर

राष्ट्रीय
झूलन गोस्वामी, महिला क्रिकेटर वह अपने इलाके की सबसे लंबी लड़की थीं। सड़क पर चलतीं, तो लोग पीछे मुड़कर जरूर देखते। पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के छोटे से कस्बे चकदा में पली-बढ़ीं झूलन को बचपन में क्रिकेट का बुखार कुछ यंू चढ़ा कि बस वह जुनून बन गया। एयर इंडिया में नौकरी करने वाले पिता को क्रिकेट में खास दिलचस्पी नहीं थी। हालांकि उन्होंने बेटी को कभी खेलने से नहीं रोका। मगर मां को उनका गली में लड़कों के संग गेंदबाजी करना बिल्कुल पसंद न था। बचपन में वह पड़ोस के लड़कों के साथ सड़क पर क्रिकेट खेला करती थीं उन दिनों वह बेहद धीमी गेंदबाजी करती थीं लिहाजा लड़के उनकी गंेद पर आसानी से चैके-छक्के जड़ देते थे। कई बार उनका मजाक भी बनाया जाता था। टीम के लड़के उन्हें चिढ़ाते हुए कहते-झुलन, तुम तो रहने ही दो। तुम गेंद फेंकोगी, तो हमारी टीम हार जाएगी। एक दिन यह बात उनके दिल को लग गई। फैसला किया कि अब मैं तेज गेंदबाज बन...
भाषा का महत्व

भाषा का महत्व

संस्कृति और अध्यात्म
इतिहास के प्रकांड पंडित डॉ. रघुबीर प्राय: फ्रांस जाया करते थे। वे सदा फ्रांस के राजवंश के एक परिवार के यहाँ ठहरा करते थे। उस परिवार में एक ग्यारह साल की सुंदर लड़की भी थी। वह भी डॉ. रघुबीर की खूब सेवा करती थी। अंकल-अंकल बोला करती थी। एक बार डॉ. रघुबीर को भारत से एक लिफाफा प्राप्त हुआ। बच्ची को उत्सुकता हुई। देखें तो भारत की भाषा की लिपि कैसी है। उसने कहा अंकल लिफाफा खोलकर पत्र दिखाएँ। डॉ. रघुबीर ने टालना चाहा। पर बच्ची जिद पर अड़ गई। डॉ. रघुबीर को पत्र दिखाना पड़ा। पत्र देखते ही बच्ची का मुँह लटक गया अरे यह तो अँगरेजी में लिखा हुआ है। आपके देश की कोई भाषा नहीं है? डॉ. रघुबीर से कुछ कहते नहीं बना। बच्ची उदास होकर चली गई। माँ को सारी बात बताई। दोपहर में हमेशा की तरह सबने साथ साथ खाना तो खाया, पर पहले दिनों की तरह उत्साह चहक महक नहीं थी। गृहस्वामिनी बोली डॉ. रघुबीर, आगे से आप किसी और जग...
कोविंद गढ़ सकेंगे पद के नये मानक

कोविंद गढ़ सकेंगे पद के नये मानक

विश्लेषण
ललित गर्ग- इन दिनों की कुछ घटनाएं पूरे राष्ट्र के मानस पटल पर छाई रही हैं। जिनमेें बिहार के राज्यपाल श्री रामनाथ कोविंद की जिस तरह से नरेन्द्र मोदी ने एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में घोषणा की, वह आश्चर्यकारी एवं अद्भुत घटना है। राजनीतिक गलियारों में अब जबकि राष्ट्रपति पद के पक्ष एवं विपक्ष के उम्मीदवार की घोषणा हो चुकी है, कोविंद की जीत सुनिश्चित मानी जा रही है, क्योंकि सत्तारूढ़ दल भाजपा और उसके समर्थकों के पास इतना संख्या बल है कि वह अपने उम्मीदवार को आसानी से जिता सकते हैं। इसलिये देश के 14वें राष्ट्रपति के रूप में कोविंदजी के प्रति संभावनाएं व्यक्त की जा सकती है कि वे राष्ट्रपति के रूप में नये मानक एवं पद की नयी परिभाषा गढ़ेंगे। यह तो तय था कि प्रधानमंत्री मोदी जिसे चाहेंगे, वही देश का अगला राष्ट्रपति बनेगा, लेकिन देश का राष्ट्रपति सर्वसम्मति से बने, यह एक आदर्श स्थिति है और...
भारत को अमेरिका बनाने के संकल्प का सत्य

भारत को अमेरिका बनाने के संकल्प का सत्य

सामाजिक
ललित गर्ग- अमेरिका के वर्जीनिया में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को अमेरिका बनाकर दिखाने का संकल्प व्यक्त किया है। 66 साल के मोदी ने अपनी इसी जिन्दगी में ऐसा करने का विश्वास व्यक्त करना कहीं अतिश्योक्ति तो नहीं है? लेकिन बड़े सपने हमें वहां तक नही ंतो उसके आसपास तो पहुंचा ही देते हैं, इसलिये मोदी के इस संकल्प को सकारात्मक नजरिये से ही देखा जाना देश के हित में है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के चुनाव में जीत के बाद भाजपा मुख्यालय, दिल्ली में नये भारत को निर्मित करने का संकल्प लिया था। इन सुनहरे सपनों के बीच का यथार्थ बड़ा डरावना एवं बेचैनियों भरा है। देश की युवापीढ़ी बेचैन है, परेशान है, आकांक्षी है और उसके सपने लगातार टूट रहे हैं। देश का व्यापार धराशायी है, आमजनता अब शंका करने लगी है। इन हालातों में नया भारत बनाना या उसे अमेरिका बनाकर दिखाना एक बड़ी चुन...
उन्मादी भीड़ों की हिंसा

उन्मादी भीड़ों की हिंसा

BREAKING NEWS, राष्ट्रीय
आर.के.सिन्हा हरियाणा के बल्लभगढ़ रेलवे स्टेशन पर हुए बालक जुनैद के कत्ल पर जंतर-मंतर और देश के दूसरे कुछ भागों में कई प्रदर्शन हुए ! होना भी चाहिए था। फैज अहमद फैज और कबीर की रचनाएं पढ़ी गईं। वासे तो यह बहुत अच्छी बात है। पर अब एक सवाल भी पूछने का मन कर रहा है। जो जुनैद के कत्ल पर स्यापा कर रहे है, वे तब कहां थे जब राजधानी के जनकपुरी इलाके में डा. पंकज नारंग को बर्बरता से मार डाला गया था? हत्या की घटनाओं और हत्यारों के रंग में फर्क क्यों? कहा गया था कि डा.नारंग की हत्या सांप्रदायिक नहीं है। बताने वाले वही सेक्युलरवादी बिरादरी के मेंबर थे,जो जुनैद की हत्या पर आंसू बहा रहे है। ज़िन्दगी बचाने वाले डॉक्टर की सरेआम हत्या कर दी जाती है, पर खामोश रहते है सब 'सद्बुद्धिजीवी'।और छदम सेक्युलरवादी तब भी चुप रहे जब कश्मीर में हाल ही में पुलिस अधिकारी मोहम्मद अय्यूब पंडित की पीट-पीटकर हत्या की गई।...