Shadow

Author: dindiaadmin

Fact Behind Mob Violence

Fact Behind Mob Violence

विश्लेषण
R K SINHA There were series of protest demonstrations at Jantar Mantar in Delhi and in many other places in the country including Mumbai, Kolkata and Bangluru against lynching of Junaid, a juvenile at Ballabhgarh Station in Harayana on eve of Eid. It was timely and justified. The protestors read out couplets of Kabir and Faiz Ahmed Faiz. It was good. I am tempted to raise a questions. Where were these protestors when Dr Pankaj Narang was brutally murdered in Janakpuri area of Delhi. Why this difference in incidents of murder and in complexion of killers. It was said that murder of Dr Narang did not have nay communal overtone. This reminder was by the same class of so called secular forces who are shedding tears over murder of Junaid. A man who saved life of others is killed...
Delhi High Court verdict on illegal constructions should be strictly enforceable on religious places also

Delhi High Court verdict on illegal constructions should be strictly enforceable on religious places also

BREAKING NEWS
It refers to welcome verdict by Delhi High Court on 29.06.2017 asking all the civic bodies to ensure immediate removal of all the unauthorized constructions and strict enforcement of master-plan. The said court-order should be specially and strictly enforced for all religious institutions of any faith or religion where it is observed that most religious institutions take it as some privileged right to break the law through massive illegal construction also encroaching footpaths and roads. In last some years, it has been observed that almost all the mosques in the city have undergone massive construction without any permission encroaching roads and footpaths with authorities being a mute spectator. Any religious institution may it be temple, mosque or Gurudwara, must be dealt with strictly ...
Delay in execution dilutes death-sentence to life-sentence: Reforms necessary

Delay in execution dilutes death-sentence to life-sentence: Reforms necessary

सामाजिक
It refers to decision of Delhi High Court on 29.06.2017 diluting death-sentence of some Sonu Sardar to life-sentence despite President, State-Governor both rejecting his mercy-petitions and even Supreme Court rejecting review of death-sentence earlier endorsed by the Apex Court. Relief was granted because of late decision on mercy-petition. Strict-most measures must be taken like to decide mercy-petitions in a time-bound period of say one month followed by time-bound execution of say one week after rejection of mercy-petition. There must not be any provision to approach courts after rejection of mercy-petitions. Cases attracting death-penalty must be disposed of fast crossing all legal-channels till Supreme Court say within say three years. Fast execution will relieve from unbear...
जीएसटी युग में प्रवेश

जीएसटी युग में प्रवेश

आर्थिक
सोनाली मिश्रा से जैसे 30 जून का दिन नजदीक आ रहा है वैसे वैसे जीएसटी पर बहस और तेज होती जा रही है। जीएसटी अर्थात गुड्स एंड सर्विस टैक्स बिल (वस्तु एवं सेवा कर विधेयक) एक बहु चर्चित विधेयक है, जो 1 जुलाई 2017 से प्रभावी हो जाएगा। इसमें पूरे देश में एक समान मूल्य वर्धित कर लगाने का प्रावधान है। जीएसटी एक अप्रत्यक्ष कर है। सरल शब्दों में कहा जाए तो यह देश की अखंडता को मजबूत करने वाला कर है। यह एक देश और एक कर अर्थात समान कर को व्यञ्चत करता है। उत्पादों पर विभिन्न प्रकार के करों से छुटकारा मिलेगा। हर उत्पाद पर हर राज्य में कई प्रकार के कर लगाए जाते हैं, और यही संभवतया राज्यों में वस्तुओं के मूल्यों में अंतरों का सबसे बड़ा कारण है। जीएसटी एक ऐसी औषधि के रूप में सामने आ रहा है, जो भारत की कर रूपी बीमारी का सही इलाज करेगी। जीएसटी संशोधन भारत के संविधान का 122 वां संशोधन है। जीएसटी को कर सुधार क...
राजस्थान के धरतीपुत्रों के आगे झुकी सरकार

राजस्थान के धरतीपुत्रों के आगे झुकी सरकार

राज्य
रामस्वरूप रावतसरे सानों के कर्जे माफ करने, फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ाने समेत कई मांगों को लेकर देश भर में शुरु हुआ किसान आंदोलन धीरे-धीरे राजस्थान को भी चपेट में ले रहा था। राजस्थान में भी इन मांगों को लेकर धरने-प्रदर्शन और महापड़ाव शुरु हो गए हैं। दो दिन से कई जिलों में किसानों व किसान संगठनों ने महापड़ाव शुरु कर दिए थे । जयपुर में भी संभागीय स्तर का महापड़ाव चलाया गया । किसानों ने रात को कैण्डल मार्च निकाला था और धरना दिया। भारतीय किसान संघ जयपुर प्रांत के युवा प्रमुख गजानंद कुमावत ने बताया कि महापड़ाव में सैकड़ों किसानों ने हिस्सा लिया और कैण्डल मार्च निकालकर सरकार का ध्यान आकृष्ट किया किया था। किसान संगठनों ने चेताया कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को तेज किया जाएगा। उधर किसानों के बढ़ते आंदोलन व नाराजगी को देखते हुए राजस्थान सरकार की सांसें ऊपर नीचे हो रही...
एनडीटीवी पर सीबीआई का छापा

एनडीटीवी पर सीबीआई का छापा

Today News
जिस दिन एनडीटीवी पर सीबीआई का छापा पड़ा, उसके अगले दिन एक टीवी चैनल पर बहस के दौरान भाजपा के प्रवक्ता का दावा था कि सीबीआई स्वायत्त है। जो करती है, अपने विवेक से करती है। मैं भी उस पैनल पर था, मैं इस बात से सहमत नहीं हूं। सीबीआई कभी स्वायत्त नही रही या उसे रहने नहीं दिया गया। 1971 में श्रीमती इंदिरा गांधी ने इसे अपने अधीन ले लिया था, तब से हर सरकार इसका इस्तेमाल करती आई है। रही बात एनडीटीवी के मालिक के यहां छापे की तो मुझे ये कहने में कोई संकोच नहीं कि डा. प्रणय रॉय एक अच्छे इंसान हैं। मेरा उनका 1986 से साथ है, जब वे दूरदर्शन पर 'वल्र्ड दिस वीकÓ एंकर करते थे और मैं 'सच की परछाईÓ। तब देश में निजी चैनल नहीं थे। जैसा मैंने उस शो में बेबाकी से कहा कि 1989 में कालचक्र वीडियो मैग्जीऩ के माध्यम से देश में पहली बार स्वतंत्र हिंदी टीवी पत्रकारिता की स्थापना करने के बावजूद, आज मेरा टीवी चैनल नहीं...
भाजपा के लिए कश्मीर में अब सरकार से बाहर आने का वक्त आ चुका है!

भाजपा के लिए कश्मीर में अब सरकार से बाहर आने का वक्त आ चुका है!

राष्ट्रीय
मेरी समझ से कश्मीर में अब भाजपा को पीडीपी से संबंध तोड़ लेना चाहिए। एक प्रयोग किया था, फेल हो गया। इसे मानने में कोई हर्ज नहीं है। यह ईगो का सवाल नहीं है। मेरे हिसाब से केंद्र और महबूबा की सरकार में तालमेल नहीं बैठ पा रहा है, जिससे मोदी सरकार हुर्रियत के नेता गिलानी, यासिन मलिक, मीर वाइज आदि के प्रति आर्थिक नाकेबंदी के अलावा कोई और कठोर कदम नहीं उठा पा रही है। जिस तरह आज नमाजियों की भीड़ ने कश्मीरी पुलिस के डीसीपी अय्यूब पंडित को पीट-पीट कर मारा है वह दर्दनाक है। और जिस तरह अय्यूब का परिवार यह कह रहा है कि वह सेना का जवान नहीं था, वह काफिर नहीं था कि उसकी हत्या कर दी, वह भी डरावना है। क्या सेना के जवान और काफिर यानी जो इस्लाम में विलीव नहीं करते, उनकी हत्या करेंगे कश्मीरी? आज घर को घर के चिराग से आग लगी है! जीवे-जीवे पाकिस्तान का नारा लगाते-लगाते कश्मीर का एक बड़ा समूह मानसिक ...
पाक में से रास्ता दिलवाए चीन

पाक में से रास्ता दिलवाए चीन

विश्लेषण
दक्षिण एशिया में जो भूमिका भारत को अदा करनी चाहिए, वह अब चीन करने लगा है। पाकिस्तान तो पिछले कई दशकों से उसका पक्का दोस्त है ही, अब वह भूटान में अपना राजदूतावास खोलने की तैयारी में है और उधर वह पाकिस्तान और अफगानिस्तान के मनमुटाव को खत्म करने पर कमर कसे हुआ है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी पाकिस्तान के बाद अब अफगानिस्तान में हैं। यदि चीन की मध्यस्थता के कारण इन दोनों पड़ौसी देशों में सद्भाव कायम हो जाए तो क्या कहने ? दोनों पड़ौसी हैं और दोनों सुन्नी मुस्लिम देश हैं लेकिन दोनों के बीच तनाव इतना बढ़ जाता है कि पिछले 70 साल में तीन बार युद्ध होते-होते बच गया है। दोनों देशों के बीच लगभग सवा सौ साल पुरानी डूरेंड सीमा-रेखा खिंची हुई है लेकिन अफगानिस्तान उसे नहीं मानता। दोनों तरफ के पठान कबीलों के लिए वह रेखा-मुक्त सीमांत है। पाकिस्तान यह मानता है कि अफगानिस्तान उसका पिछवाड़ा है। फिर भी वह भारत...
योगी सरकार के सौ 100 दिन  चुस्त योगी, सुस्त प्रशासन

योगी सरकार के सौ 100 दिन चुस्त योगी, सुस्त प्रशासन

राज्य
त्तर प्रदेश सरकार अपने 100 दिन का कार्यकाल पूरा कर चुकी है। मुख्यमंत्री नीतिगत स्तर पर कामयाब दिखते हैं। योगी आदित्यनाथ की सरकार से सख्त सरकार की अपेक्षा की जा रही थी किन्तु इस मामले में वह पिछड़ती दिख रही है। योगी जी के कड़े तेवरों के बावजूद प्रशासनिक ढांचा अभी भी लचर है। खनन, भ्रष्टाचार और अपराध जैसे विषयों पर सरकार की आलोचना हो रही है। क्या समय रहते मुख्यमंत्री इन अफसरों पर लगाम लगा पायेंगे या भगवाधारी एवं फायरब्रांड योगी जी इनके सामने हथियार डाल देंगे। योगी जी का इतिहास देखते हुये तो वह रण छोडने वाले नहीं दिखते हैं। उत्तर प्रदेश के ग्राउंड जीरो से विशेष संवाददाता अमित त्यागी अपना मूल्यांकन पेश कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश एक पटरी से उतरा हुआ प्रदेश था इसमे कोई दो राय नहीं है। उत्तर प्रदेश को व्यवस्थित करने में थोड़ा समय लगेगा यह भी ठीक बात है। उत्तर प्रदेश में अभी बजट पास नहीं हुआ है इसल...
राष्ट्रपति चुनाव: भाजपा के दांव से सब चित्त

राष्ट्रपति चुनाव: भाजपा के दांव से सब चित्त

TOP STORIES, राष्ट्रीय
भारत के राष्ट्रपति का चुनाव हिंदुस्तान के भविष्य की रूपरेखा का खाका खींच रहा है। जातियों और वर्णो में बंटे हिन्दू समाज को एकजुट करने की ओर क्या यह अगला कदम है ? एनडीए ने रामनाथ कोविन्द को मैदान में उतारा है तो विपक्ष ने मीरा कुमार को। दोनों ही दलित है। दोनों ही एक बड़े समय से सक्रिय राजनीति में कार्यरत रहे हैं। वोटों के हिसाब से एनडीए उम्मीदवार का जीतना तय है। तो क्या मीरा कुमार को उम्मीदवार बनाकर विपक्ष ने एक बड़ी भूल की है या यह 2019 की तैयारी के लिए 17 राजनैतिक दलों के विपक्ष के द्वारा दिखाई गयी एकजुटता है। राष्ट्रपति चुनावों की राजनीति का विश्लेषण करता अमित त्यागी का एक आलेख। रतीय गणतन्त्र के गौरव का प्रतीक है 'राष्ट्रपतिÓ। ब्रिटेन की संवैधानिक व्यवस्था में जो पद राजपरिवार का है, वही भारतीय संवैधानिक व्यवस्था में राष्ट्रपति का है। वह राज्य का प्रधान है किन्तु शासन का प्रधान नहीं है। व...