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Author: dindiaadmin

केंद्रीय विद्यालय संगठन की मनमानी  का शिकार हुए हजारों अभ्यर्थी

केंद्रीय विद्यालय संगठन की मनमानी का शिकार हुए हजारों अभ्यर्थी

घोटाला
डॉ. राजेन्द्र कृष्ण अग्रवाल, मथुरा. गत दिनों 10 और 12 अप्रैल 2017 को दिल्ली के जे एन यू कैंपस में केंद्रीय विद्यालय संगठन के संगीत शिक्षक-शिक्षिकाओं के हेतु हुए साक्षात्कार में लिखित परीक्षाओं में उत्तीर्ण होने बाद मेरिट के आधार पर जिन अभ्यर्थियों को आमन्त्रित किया गया था, उनके साथ जिस तरीके की बदसलूकी की गयी, उससे संगठन की नीयत पर सवालिया निशान लग गया है। प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद से संगीत प्रभाकर अथवा प्राचीन कला केन्द्र, चंडीगढ से संगीत विशारद के बी.ए. के समकक्ष सर्टिफिकेट कोर्स किए हुए अभ्यर्थियों को केंद्रीय विद्यालय संगठन ने पहले अनुमति देने के बाद और लिखित परीक्षा में भी अनुमति देने के बाद जिस प्रकार परेशान किया, उससे केंद्रीय विद्यालय संगठन की रीति-नीति पर प्रश्न-चिह्न लग गया है। ज्ञातव्य है कि प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद, जिसकी स्थापना सन् 1926 में हुई और प्राचीन कला केंद...
अब नहीं बचेगा एटमी  गुंडा पाकिस्तान

अब नहीं बचेगा एटमी गुंडा पाकिस्तान

EXCLUSIVE NEWS
पाकिस्तान के लिए मुंह छिपाने के लिए जगह नहीं मिल पा रही है। ईरान ने पाकिस्तान को चेतावनी दे दी है कि उसकी सेनाएं पाकिस्तान में घुसकर आतंकी ठिकानों को नष्ट कर देंगी। इरानी सेना के प्रमुख मेजर जनरल मोहम्मद बाकरी ने कहा, ईरान की पाकिस्तान से लगती पूर्वी सीमा आतंकियों की ट्रेनिंग और हथियारबंदी के लिए सुरक्षित ठिकाना बन चुकी है। इन आतंकियों की भर्ती सउदी अरब करवा रहा है। हम ये हालात कत्तई बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम उम्मीद करते हैं कि पाकिस्तान आतंकी ठिकानों को बंद कर देगा। तनातनी का दौर पहले भी धमकी दे चुका है ईरान। पाकिस्तान और ईरान की सेना के बीच हाल के सालों में गोलीबारी की घटनाएं बढ़ी हैं. साल 2014 में जैश अल अदल ने 5 ईरानी बॉर्डर गार्ड्स को अगवा कर लिया था. इसके बाद ईरान ने चेतावनी दी थी कि गार्ड्स को छुड़वान के लिए उसकी सेना पाकिस्तान के भीतर घुसने से भी गुरेज नहीं करेगी। एक स्थानीय सुन...
राष्ट्रवादी पत्रकारिता पर मीडिया स्कैन का सेमिनार

राष्ट्रवादी पत्रकारिता पर मीडिया स्कैन का सेमिनार

राज्य
दिल्ली स्थित भारतीय जन संचार संस्थान में 20 मई को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रीय पत्रकारिता, मीडिया एंड मिथ विषय पर हुए पूरे दिन के सेमिनार में दिल्ली की मीडिया सेमिनार की जगह एक सप्ताह पहले से ही हवन केन्द्रित खबरें लिखती रही। मानों दिल्ली की मीडिया की चिन्ता में सेमिनार का विषय, वक्ता या सेमिनार का उददेश्य शामिल नहीं रह गया था, इसकी जगह यह जरूरी हो गया था कि हवन क्यों और कैसें? अधिक खबरिया संस्थानों में मीडिया रिपोर्टिंग बिना आयोजक से बात किए ही की गई। जिसकी वजह से कथित तौर पर प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों ने भी जमकर तथ्यात्मक भूल की। मसलन यज्ञ दो घंटे का होगा। मीडिया स्कैन साप्ताहिक पत्रिका है। अधिकांश लोगों ने बिना आयोजक से कन्फर्म किए संभावित वक्ताओं के नाम को अंतिम समझ कर रिपोर्टिंग की। कुछ प्रकाशन मीडिया स्कैन द्वारा तय कार्यक्रम की जानकारी साझा किए जाने के बावजूद पुराने संभावित न...
अंधविश्वास, तंत्र- मंत्र,  टोने-टोटके और पुजा पाठ  नही कर्म ही बचाएगा कुर्सी

अंधविश्वास, तंत्र- मंत्र, टोने-टोटके और पुजा पाठ नही कर्म ही बचाएगा कुर्सी

TOP STORIES
जिस तरह से भारतीय समाज में अनेक तरह के अंधविश्वास और कुरूतियां फैली है ठीक वैसे ही राजनेताओं के बीच भी यह गहरे तक समाई है। असल में हम राजनेताओं को जितना सुलझा हुआ और व्यवहारिकता के धरातल पर चलने वाला इंसान मानते है वह उतना ही ईश्वर आश्रित और पंगु व्यवहार का पक्षधर रहा है। हाल ही में अंधविश्वास का एक मामला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मध्यप्रदेश यात्रा को लेकर सामने आया है। दरअसल पीएम मोदी को नमामी देवी नर्मदे यात्रा के समापन अवसर पर मध्यप्रदेश के अमरकंटक पहुंचना था। भारतीय राजनीति में अमरकंटक को लेकर कई तरह की शंका-कुशंका और मान्यताएं हैं। माना जाता है कि जिस भी राजनेता ने नर्मदा नदी को लांघा है, उसे अपनी सत्ता गंवानी पड़ी है। भारतीय राजनीति के इतिहास पर नजर डालें तो पांच बड़ेे नेताओं के ऐसे उदाहरण मौजूद हैं जिन्हे नर्मदा लांघने के बाद सत्ता से हाथ धोना पड़ा था। अमरकंटक जाने के लिए नर्मदा...
गुरू पर भारी चेला

गुरू पर भारी चेला

घोटाला
दिल्ली के पूर्व मंत्री और आम आदमी पार्टी से निष्कासित कपिल मिश्रा के आरोपों का असर है या फिर बढता जन दबाव कि दिल्ली में सत्येंद्र जैन को लेकर ऊहापोह की स्थिति उत्पन्न होने लगी है। हालांकि सत्येंद्र जैन को लेकर अरविंद केजरीवाल ने अब तक कुछ नहीं बोला है। जहां तक आम आदमी पार्टी की बात करें तो उसका अब तक का रिकॉर्ड अपने विधायकों के साथ खड़े रहने का रहा है। जितेन्द्र तोमर हो या अमान्तुल्ला खान, या फिर अलका लाम्बा, पार्टी अपने सभी विधायकों के साथ कदमताल करती नजर आई। मगर सत्येंद्र जैन के मामले में सुगबुगाहट तब महसूस गयी जब मुख्यमंत्री ने दिल्ली सरकार के अस्पतालों में सौ फीसदी दवाओं की उपलब्धता को लेकर मुख्य सचिव को तलब किया। हैरानी इसी बात को लेकर हुई - क्योंकि इसमें न तो स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन और न ही स्वास्थ्य विभाग का कहीं कोई जिक्र आया। कपिल मिश्रा ने पिछले दिनों दिल्ली की राजनीति म...
दिल्ली विधान सभा भंग की ओर?

दिल्ली विधान सभा भंग की ओर?

राज्य
एम.सी.डी. चुनाव में पराजय ,भ्रष्टïाचार के आरोप में करीब पच्चीस विधायकों की सदस्यता रद्द होने के करीब चुनाव आयोग में लटकता तलवार, कई तरह के आरोप -प्रत्यारोप और अनेको कुकुराहट के बीच कपिल मिश्रा का घूस लेने का केजरीवाल पर सीधे आरोप -केजरीवाल सरकार और आप पार्टी को तार -तार कर दिया है। निकटतम सहयोगी द्वारा लगाया गया आरोप विश्वसनीयता एवं साख को नंगा कर दिया है । जिस तरह की समस्याये आज खड़ी हो गई है वह निश्चय ही दिल्ली विधान सभा भंग होने और मध्यवर्तीय चुनाव की ओर अग्रसर हो रही है इतिहास साक्षी है कि भ्रष्टाचार से आरोपित सरकारो के कारण गुजरात एवं बिहार की विधान सभा भंग हो चुकी है। गुजरात में चिमन भाई पटेल की सरकार और बिहार में कांग्रेस की सरकार का पतन विधान सभा भंग के मूल्य के रूप में जनआंदोलनों ने प्राप्त किया था। दिल्ली नगर निगम चुनाव में भाजपा को प्रबल बहुमत आना निश्चय ही नरेन्द्र मोदी की जन...
बदलाव की बयार उत्तर प्रदेश तैयार

बदलाव की बयार उत्तर प्रदेश तैयार

राज्य
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार पूरे एक्शन में दिख रही है। सरकार के तेवर सख्त हैं और लहजा तल्ख। 60 दिन के कार्यकाल के द्वारा उत्तर प्रदेश में एक हवा दिखने लगी है। पर उत्तर प्रदेश में सब ठीक हो गया हो, ऐसा भी नहीं है। कुछ अफसर अब भी जनता के सरोकारों से नहीं जुड़े हैं। कुछ भाजपा कार्यकर्ता दबंगों की तरह काम करते हुये सरकार को बदनाम कर रहे हैं। कुछ गौरक्षा की आड़ मे अपने स्वार्थसिद्ध कर रहे हैं। इनके द्वारा बदनाम हो रही है योगी सरकार। अगर इन पर तुरंत लगाम नहीं लगी तो कानून व्यवस्था के विषय पर सरकार को घिरने में देर नहीं लगेगी। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अपने कार्यकाल के 60 दिन पूरा कर चुकी है। अब सरकार का हनीमून पीरियड खत्म हो चुका है। जो संदेश सरकार को अपने प्रारम्भिक दिनो में देना होता है वह देने में सरकार कामयाब रही। जनता में एक अच्छी नीयत की सरकार का संदेश गया। सरकार बनने के बाद मुस्लिमो...
जिम्मेदार चेहरों पर  कालिख का लगना

जिम्मेदार चेहरों पर कालिख का लगना

घोटाला
आजकल राष्ट्र में थोडे-थोडे अन्तराल के बाद ऐसे-ऐसे घोटाले, काण्ड या भ्रष्टाचार के किस्से उद्घाटित हो रहे हैं कि अन्य सारे समाचार दूसरे नम्बर पर आ जाते हैं। सीबीआई की एक विशेष अदालत ने कोल आबंटन के एक मामले में कोयला मंत्रालय के चमकते चेहरे-पूर्व सचिव एच.सी. गुप्ता, मंत्रालय के तत्कालीन संयुक्त सचिव के. एस. करोपहा, तत्कालीन निदेशक के.सी. समरइया को दोषी ठहराया है, इन जिम्मेदार चेहरों पर कालिख का लगना न केवल चिन्ता का विषय है बल्कि शर्मसार करने वाला है। इन्हीं घोटालों एवं भ्रष्टाचार के कारण दुनियाभर के भ्रष्टाचार पर नजर रखने वाली संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के मुताबिक भारत साल 2016 में 2015 के मुकाबले रैंकिंग में नीचे चला गया है। हमारे देश में भ्रष्टाचार के बहुत कम मामले ही अंत तक पहुंच पाते हैं। जब ऊंची पहुंच वाले लोग आरोपी हों, तब तो इसकी संभावना और भी क्षीण रहती है। इस लिहाज से कोयला ...
शिकंजे में  लालू और चिदंबरम

शिकंजे में लालू और चिदंबरम

घोटाला
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए इस महीने कई मामलों में सरकार द्वारा ताबड़तोड़ छापे मारे गए हैं। इनमें सबसे मुख्य रहे हैं राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के परिवार के 22 ठिकानों पर और चिदंबरम पर छापे। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के गुरुग्राम में राजद के प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके निकटस्थों के 22 ठिकानों पर छापेमारी की गयी। आयकर आयुक्त (मीडिया एंड पब्लिसिटी) और विभाग की प्रवक्ता मीनाक्षी गोस्वामी ने मीडिया से बात करते हुए छापे के ठिकानों के बारे में तलाशी का कार्य पूरा होने के बाद ही विस्तार से कुछ भी बता पाने की बात की। सूत्रों के अनुसार लालू और उनकी बेटी मीसा भारती से जुड़ी 1000 करोड़ रुपए की कथित बेनामी लैंड डील्स के मामले में यह छापेमारी की गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने इस छापे के बाद तुरंत ही कुछ ट्वीट कर डाले, हा...
अल्पसंख्यकवाद  के दुष्परिणाम…

अल्पसंख्यकवाद के दुष्परिणाम…

विश्लेषण
विनोद कुमार सर्वोदय इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं है कि अल्पसंख्यकवाद की राजनीति ने हमारे राष्ट्र को अभी भी दिग्भर्मित किया हुआ है। जबकि यह स्पष्ट होता आ रहा है कि अल्पसंख्यकवाद की अवधारणा अलगाववाद व आतंकवाद की अप्रत्यक्ष पोषक होने से राष्ट्र की अखण्डता व साम्प्रदायिक सौहार्द के लिये एक बड़ ी चुनौती है। सन 1947 में लाखों निर्दोषो और मासूमों की लाशों के ढेर पर हुआ अखंड भारत का विभाजन और पाकिस्तान का निर्माण इसी साम्प्रदायिक कटुता का प्रमाण था और है । आज परिस्थिति वश यह कहना भी गलत नही कि अल्पसंख्यकवाद से देश समाजिक, साम्प्रदायिक व मानसिक स्तर पर भी विभाजित होता जा रहा है। विश्व के किसी भी देश में अल्पसंख्यको को बहुसंख्यकों से अधिक अधिकार प्राप्त नही होते क्योंकि बहुसंख्यकों की उन्नति से ही देश का विकास संभव है न कि अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण अथवा उनके सशक्तिकरण से। अल्पसंख्यकों को सम्म...