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Author: dindiaadmin

हम झारखण्ड की संस्कृति को देश के  कोने कोने में पहुंचा रहे हैं – अमर दावरी

हम झारखण्ड की संस्कृति को देश के कोने कोने में पहुंचा रहे हैं – अमर दावरी

राज्य
झारखण्ड अब देश की मुख्य धारा में आने को बेचैन है और यहाँ की जनता के ऊँचा उडऩे के सपनों को पंख लगाने के लिए प्रदेश की भाजपा सरकार कमरतोड़ मेहनत कर रही है। राज्य के राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार, पर्यटन,कला, संस्कृति, खेलकूद और युवा कार्य मंत्री प्रदेश के प्रभावशाली मंत्रियों में हैं। स्वाभाव से धीर गंभीर और विनम्र अमर दावरी के पास कई मंत्रालयों का कार्यभार है और मुख्यमंत्री रघुवर दास ने उनकी क्षमताओं को ठीक से पहचाना भी और खासी जिम्मेदारियां भी दी हुई हैं। बोकारो में उनके निवास पर हुई भेंट में उन्होंने अपने विभिन्न मंत्रालयों के कार्यो और किये जा रहे अभिनव प्रयोगों और उनके परिणामो पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रस्तुत है हमारे संपादक अनुज अग्रवाल से हुई उनकी बातचीत के प्रमुख अंश : औधोगिकीकरण हो, पर्यटन हो, खेलकूद हो या निवेश झारखण्ड अभी देश के नक्शे पर प्रमुखता से नहीँ आ पा रहा। क्यों? नह...
जीएसटी को संसद की मंजूरी

जीएसटी को संसद की मंजूरी

TOP STORIES, आर्थिक
संसद ने देश में ऐतिहासिक कर सुधार व्यवस्था जीएसटीÓ को लागू करने का मार्ग प्रशस्त करते हुए वस्तु एवं सेवा कर से जुड़े चार विधेयकों को मंजूरी दे दी। साथ ही सरकार ने आश्वस्त किया कि नयी कर प्रणाली में उपभोक्ताओं और राज्यों के हितों को पूरी तरह से सुरक्षित रखा जाएगा तथा कृषि पर कर नहीं लगाया जाएगा। राज्यसभा ने केंद्रीय माल एवं सेवा कर विधेयक 2017 (सी जीएसटी विधेयक), एकीकृत माल एवं सेवा कर विधेयक 2017 (आई जीएसटी विधेयक), संघ राज्य क्षेत्र माल एवं सेवाकर विधेयक 2017 (यूटी जीएसटी विधेयक) और माल एवं सेवाकर (राज्यों को प्रतिकर) विधेयक 2017 को सम्मिलित चर्चा के बाद लोकसभा को ध्वनिमत से लौटा दिया। इन विधेयकों पर लाये गये विपक्ष के संशोधनों को उच्च सदन ने खारिज कर दिया। धन विधेयक होने के कारण इन चारों विधेयकों पर राज्यसभा में केवल चर्चा करने का अधिकार था। लोकसभा 29 मार्च को इन विधेयकों को मंजूरी दे च...
अज़ान पर फिजूल की बहस

अज़ान पर फिजूल की बहस

धर्म
अज़ान को लेकर हमारे टीवी चैनलों और अखबारों में फिजूल की बयानबाजी हो रही है। यदि सिने-गायक सोनू निगम ने कह दिया कि सुबह-सुबह मस्जिदों से आनेवाली तेज आवाजें उन्हें तंग कर देती हैं और यह जबरिया धार्मिकता ठीक नहीं तो इसमें उन्होंने ऐसा क्या कह दिया कि उन्हें इस्लाम का दुश्मन करार दे दिया जाए और उन्हें गंजा करनेवाले को दस लाख रु. का इनाम देने की घोषणा कर दी जाए। क्या लाउडिस्पीकर पर जोर-जोर से चिल्लाना इस्लाम है? इस्लाम का जन्म हुआ तब कौनसे लाउडस्पीकर चल रहे थे? सच्ची प्रार्थना तो वही है, जो मन ही मन की जाती है। ईश्वर या अल्लाह बहरा नहीं है कि उसे कानफोड़ू आवाज़ में सुनाया जाए। शायद इसीलिए कबीर ने कहा है: कांकर-पाथर जोडि़ के मस्जिद लई चुनाय। ता चढि़ मुल्ला बांग दे, बहरा हुआ खुदाय।। माना कि अज़ान अल्लाह के लिए नहीं, उसके बंदों के लिए होती है याने ज़ोर-ज़ोर से आवाज इसीलिए लगाई जाती है कि सोते ह...
मुस्लिम लॉ बोर्ड ही है सभी मुस्लिम समस्याओं की जड़

मुस्लिम लॉ बोर्ड ही है सभी मुस्लिम समस्याओं की जड़

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अप्रेल 15, 2017 आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की घोषणा में कोई नया पन न होकर, नई बोतल में पुरानी शराब की तरह, केवल पुरानी बातों को ही दोहराया गया है। उसने तीन तलाक को नाजायज ठहराने की बजाए, केवल बे-बजह तलाक लिया जाता है, तो, समाज उसका बहिस्कार करेगा, यह कहा है। वह बे-बजह है कि नहीं, यह तय करने का अधिकार भी फिर उन्हीं मुल्ला-मौलवियों का ही होगा। विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री डा सुरेन्द्र जैन ने आज कहा कि मध्य युगीन परंपराओं में जीने वाले ये वही लोग हैं जो आज भी उस युग की बर्बर परंपराओं को ही अपना धर्म तथा महिलाओं को भोग की वस्तु समझते हैं। अपनी आधी आवादी को ये सामान्य मानव अधिकार भी देने को तैयार नहीं हैं। तलाक देने का अधिकार महिलाओं को भी उतना ही मिले जितना पुरुषों को है, किन्तु, ये उसके लिए तैयार ही नहीं हैं। ऊपर से, हलाला जैसी बर्बर अमानवीय परंपरा को भी उचित...
नियति एवं कर्मों  का फल देने वाला न्याय प्रिय ग्रह

नियति एवं कर्मों का फल देने वाला न्याय प्रिय ग्रह

धर्म, संस्कृति और अध्यात्म
सुरेन्द्र प्रभात खुर्दिया कलर्स टीवी चैनल पर रात 9 बजे ''शनै:-शनै: कर्म फल दाता शनिÓÓ का धरावाहिक-कई सीरियलों में से एक अलग ही प्रकार की अनूठी छाप छोडने वाला टीवी सीरियल हैं। हालांकि उक्त कथा पूर्णतया काल्पनिक कथा यात्रा पर टिकी हुई है। फिर भी उक्त कहानी के माध्यम से नियति एवं कर्मों का फल देने वाला न्याय प्रिय ग्रह और कर्म फल एवं कर्म सन्तुलन का देवता शनि नागरिक समाज में एक जिज्ञासु प्रवृति और आध्यात्मिक दृष्टिकोण के कारण इस सीरियल को दर्शक देखे बिना नहीं रह सकते हैं। वर्तमान में यह अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है कि कैसे नियति को कर्म के माध्यम से बदला जा सकता है। धीरे - धीरे शनि ने क्योंकि शनि, देवों के देव महादेव का सृजन मात्र ही नहीं था, बल्कि यूं कहिए कि कर्म - ज्ञान और चेतना ना केवल ज्ञान प्राप्त करने तक सीमित था और हैं। उसके माध्य से व्यवहारिकता में उतानरने को प्रेरित करने...
बजट और मेरा मत

बजट और मेरा मत

आर्थिक
माननीय अध्यक्ष महोदया, मैं, हमारे वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली के द्वारा वर्ष 2017 और 2018 के लिए प्रस्तुत किए गए केन्द्रीय बजट का पूर्ण रूपेण समर्थन करता हूँ, यह बजट जिसका लक्ष्य किसानों, श्रमिकों, गरीबों, अनुसूचित जातियों और जनजातियों, महिलाओं और समाज के अन्य दबे कुचले वर्गों का कल्याण करना है, वाकई ही सरकार द्वारा बेहद ही स्वागतयोग्य कदम है। बजट में दिए गए प्रस्ताव निस्संदेह ही निर्धनता उन्मूलन की दिशा में और देश को विकास के पथ पर ले जाने के लिए एक अच्छा कदम साबित होंगे। और हमारे युवाओं को शक्ति प्रदान करने के प्रति सरकार ने जो कदम उठाए हैं उससे उन्हें विकास और रोजग़ार के लाभों का दोहन करने में सहायता मिलेगी। जैसा माननीय विîा मंत्री जी का कथन भी है कि बड़ी राशि वाले बैंक नोटों का विमुद्रीकरण एक बहुत ही साहसिक और निर्णयाक फैसला रहा है। ये सभी कठोर उपाय हमारे देश से भ्रष्टाचार, काला धन, ज...
यहां कौन है सुनने वाला स्वच्छाग्रह का सच ?

यहां कौन है सुनने वाला स्वच्छाग्रह का सच ?

EXCLUSIVE NEWS
अरुण तिवारी किसानों का शोषण बंद हो। चंपारण सत्याग्रह, इसी सच का आग्रह था। चंपारण सत्याग्रह के सौ साल पूरे होने पर भी क्या किसानों को शोषण रुका है ? मृत किसानों के नरमुण्डों को तमिलनाडु से लाकर जंतर-मंतर पर जमें किसानों के सत्याग्रह की क्या कोई सुन रहा है? प्रधानमंत्री कार्यालय के समक्ष स्वयं को नग्न कर पुलिस जीप से बाहर निकलने के बावजूद क्या शासन ने उनके सत्याग्रह का सम्मान किया? दुखद है कि प्रधानमंत्री जी ने भी 'स्वच्छाग्रहÓ कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है। स्वच्छाग्रह का सच यह है कि राज्यों ने स्वच्छ भारत अभियान को घर-घर शौचालय तक सीमित मान लिया है। घर-घर शौचालय के लक्ष्य की प्राप्ति को लेकर बेताबी के चलते छत्तीसगढ़ में कहीं बिना शीट, कहीं बिना दीवार, तो कहीं बिना गड्ढे के ही शौचालय बना दिए गये हैं। जहां शौचालय बन भी गये हैं, उनमें से ज्यादातर को ग्रामीण अन्य उपयोग में ला रहे है...
विदेशी सर्वरों से कैसे बनेगा  डिजिटल इंडिया?

विदेशी सर्वरों से कैसे बनेगा डिजिटल इंडिया?

राष्ट्रीय
'डिजिटल इंडिया- कंप्यूटर, मोबाइल, सॉफ्टवेयर तथा इंटरनेट के बहुआयामी प्रयोग से समाज, शासन तथा अर्थव्यवस्था में विकास के अभियान का नाम है. देश में कई इलाकों में मोबाइल नेटवर्क एवं इंटरनेट से वंचित वर्ग को डिजिटल नेटवर्क से जोडऩा मुश्किल है परन्तु डिजिटल इंडिया को स्वदेशी बनाकर इसे सफल बनाया जा सकता है। 'इंडियन डाटा भारतीय सर्वर्स अभियान से बढ़ाएं रोजगार भारत में व्यापार कर रही इंटरनेट कंपनियों ने अधिकांश सर्वर यूरोप और अमेरिका में लगा रखे हैं. मेक इन इंडिया के तहत यदि इंडियन डाटा भारत के सर्वरों में रखने का कानून बन जाए तो राष्ट्रीय सुरक्षा बेहतर तरीके से सुनिश्चित हो सकेगी। अमेरिका में ट्रंप की नई वीजा नीति के फलस्वरूप अनेक आईटी प्रोफेशनल्स भारत लौट रहे हैं. सर्वर भारत में लगने के नियम का पालन होने से देशी उद्योगों के विकास के साथ प्रति सर्वर औसतन हज़ार लोगों को रोजगार भी मिल सकेगा। सर...
अरविन्द केजरीवाल – सपनों का मर जाना

अरविन्द केजरीवाल – सपनों का मर जाना

राज्य
नवम्बर 2013 था, हम लोग पुरी की तरफ निकल रहे थे. मध्यप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और छत्तीसगढ़ के चुनाव हो चुके थे और AAP की संभावित जीत के चर्चे साहिबाबाद लोकल स्टेशन पर भी थे. हम लोगों को साहिबाबाद से लोकल पकड़ कर निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन जाना था. तो जैसा मेरी आदत है, लोगों के विचार सुनती रही. साहिबाबाद स्टेशन पर कई युवा ऐसे थे, जिनकी आँखों में एक अजीब सा सपना था. वे सभी ऐसे लोग थे, जिन्होनें AAP के लिए निस्वार्थ भाव से कार्य किया था. बहुत बातें कर रहे थे. हम लोग जब निजामुद्दीन पहुंचे तब तक AAP के अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद हो चुकी थी. ट्रेन में हमारे सामने की सीट पर एक लड़का था. वह समय एक परिवर्तन का समय था और इन्टरनेट के समय में चर्चा केवल और केवल अरविन्द और मोदी के करिश्मे पर टिक जाती थी. वह लड़का इंजीनियर था और उसने बहुत ही जल्दी अपने दिल की बात करनी शुरू कर दी. उसने कहा "madam, It is clear tha...
जनता की याददाश्त बहुत कमजोर होती है

जनता की याददाश्त बहुत कमजोर होती है

EXCLUSIVE NEWS
जनता की याददाश्त बहुत कमजोर होती है. लोग भूल गए हैं कांग्रेस के जमाने की लूट खसोट को...लोग भूल गए हैं उस सरकार को जो हिंदुओं के दमन के लिए देश में साम्प्रदायिक हिंसा विधेयक लाने वाली थी... फिर भी 1997 से 2004 की वह वाजपेयी जी की सरकार याद है, जिसने अल्पमत में होते हुए भी, ममता माया जयललिता की ड्रामेबाज़ी के बीच 5 साल देश को सही दिशा में चलाया था. संसद में बहुमत ना होने पर भी दोनों सदनों की संयुक्त बैठक करके POTA जैसा कड़ा कानून पास कराया था. जिसने पूरी दुनिया को ठेंगा दिखाते हुए परमाणु परीक्षण किया और सारे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को कुशलता से झेला. जब हमने पाकिस्तान से कारगिल में युद्ध लड़ा और जीता और संसद पर हमले का जवाब सीमा पर सेना को चढ़ा कर आपरेशन पराक्रम के रूप में दिया जिससे सालभर तक पाकिस्तान की चड्ढी गीली रही... वह सरकार भी परफेक्ट नहीं थी...सिर्फ बहुमत ही आधा अधूरा नहीं था, इच्छा ...