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वर्ष 2023 आर्थिक दृष्टि से भारत के लिए एक सुनहरा वर्ष साबित होगा

वर्ष 2023 आर्थिक दृष्टि से भारत के लिए एक सुनहरा वर्ष साबित होगा

TOP STORIES, आर्थिक, राष्ट्रीय
अब तो वैश्विक स्तर पर विभिन्न वित्तीय संस्थानों जैसे विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मॉनेटरी फंड, यूरोपीयन यूनियन, एशियाई विकास बैंक, आदि ने वर्ष 2023 में भारत को पूरे विश्व में सबसे तेज गति से आर्थिक प्रगति करने वाला देश बने रहने की सम्भावना पूर्व में ही व्यक्त कर दी है और यह पूर्वानुमान विश्व के लगभग समस्त विकसित देशों के आर्थिक संकटों में घिरे रहने के बीच लगाया गया है। हालांकि इस बीच, हाल ही के समय में, चीन एवं कुछ अन्य देशों में कोरोना महामारी का प्रकोप फिर से बढ़ता दिखाई दे रहा है तथा यूक्रेन एवं रूस के बीच युद्ध समाप्त होने के आसार दिखाई नहीं दे रहे हैं परंतु फिर भी इन समस्त विपरीत परिस्थितियों के बीच भारत किस प्रकार पूरे विश्व में एक चमकते सितारे के रूप में दिखाई दे रहा है। दरअसल, यह सब भारत सरकार द्वारा समय समय पर लिए गए कई आर्थिक निर्णयों के चलते सम्भव होता दिखाई दे रहा है। पूरे...
विकसित देशों की नागरिकता ले रहे कुछ भारतीय, देश की आर्थिक प्रगति को ही दर्शा रहे हैं

विकसित देशों की नागरिकता ले रहे कुछ भारतीय, देश की आर्थिक प्रगति को ही दर्शा रहे हैं

आर्थिक
केंद्र सरकार ने दिनांक 9 दिसम्बर 2022 को भारतीय संसद को सूचित किया कि वर्ष 2011 से 31 अक्टोबर 2022 तक 16 लाख भारतीयों ने अन्य देशों, विशेष रूप से विकसित देशों, की नागरिकता प्राप्त कर ली है। इसकी वर्षवार जानकारी भी प्रदान की गई है - वर्ष 2011 में 122,819 भारतीयों ने अन्य देशों की नागरिकता प्राप्त की थी, इसी प्रकार वर्ष 2012 में 120,923 भारतीय; वर्ष 2013 में 131,405 भारतीय; वर्ष 2014 में 129,328 भारतीय; वर्ष 2015 में 131,489 भारतीय; वर्ष 2016 में 141,603 भारतीय; वर्ष 2017 में 133,049 भारतीय; वर्ष 2018 में 134,561 भारतीय; वर्ष 2019 में 144,017 भारतीय; वर्ष 2020 में 85,256 भारतीय; वर्ष 2021 में 163,370 भारतीय एवं वर्ष 2022 में (31 अक्टोबर तक) 183,741 भारतीयों ने अन्य देशों की नागरिकता प्राप्त की। वर्ष 2011 से यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है केवल वर्ष 2020 को छोड़कर, क्योंकि इस वर्ष कोरोना मह...
वर्षांत समीक्षा -2022: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय

वर्षांत समीक्षा -2022: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय

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बजट आवंटन में अभूतपूर्व वृद्धि कृषि और परिवार कल्याण मंत्रालय के लिए 2022-23 में बजट आवंटन बढ़ाकर 1,24,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। रिकॉर्ड खाद्यान्न और बागवानी उत्पादन खाद्यान्न उत्पादन जनवरी 2022 के 308.65 मिलियन टन से बढ़कर दिसम्‍बर 2022 में 315.72 मिलियन टन (चौथे अग्रिम अनुमानों के अनुसार) हो गया है जो अब तक का सर्वाधिक खाद्यान्न उत्पादन है। तीसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार, बागवानी उत्पादन 2020-21 के दौरान 331.05 मिलियन एमटी था जिसे 2021-22 के दौरान बढ़ाकर 342.33 मिलियन एमटी तक पहुंचा दिया गया। यह भारतीय बागवानी के लिए अब तक का सर्वाधिक उत्पादन है। उत्पादन लागत का डेढ़ गुना एमएसपी तय करना सरकार ने 2018-19 से अखिल भारतीय भारतीय औसत उत्पादन लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत लाभ के साथ सभी अनिवार्य खरीफ, रबी और अन्य वाणिज्यिक फसलों के लिए न्‍यूनतम समर्थन ...
रोजगार : आंकड़ों और हकीकत में भारी अंतर

रोजगार : आंकड़ों और हकीकत में भारी अंतर

BREAKING NEWS, आर्थिक
राकेश  दुबे  अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन अर्थात आइएलओ ने दो रिपोर्टें जारी की हैं, जिनमें कोविड  दुष्काल के बाद वैश्विक रोजगार की स्थितियों के बारे में चर्चा की गई है। दरअसल, कोविड दुष्काल  के चलते बहुत सारे लोगों का रोजगार छिन गया और परिस्थितियां काफी खराब होती चली गर्इं। दुष्काल का प्रभाव कम होने के बाद कुछ लोग तो वापस रोजगार से जुड़ गए, मगर अब भी बहुत सारे लोगों को उनका खोया रोजगार नहीं मिल पाया है।भारत की बात करें, सरकारी पक्ष और आंकड़ों में बेहद अंतर है | भारत में न्यूनतम वेतन 2006 के 4,398 रुपए से बढ़ कर 2021 में 17,017 रुपए प्रतिमाह हो गया। यह सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय का आंकड़ा है। जब इसमें मुद्रास्फीति आंकी गई तो वास्तविक वेतन वृद्धि 2006 के 9.3 प्रतिशत से गिरकर 2021 में  – 0.2 प्रतिशत पर आ गई। इस तरह वेतन और महंगाई में बढ़ोतरी का औ...
भारतीय बन रहे हैं अमेरिकी अर्थव्यवस्था के शिल्पकार

भारतीय बन रहे हैं अमेरिकी अर्थव्यवस्था के शिल्पकार

TOP STORIES, आर्थिक, राष्ट्रीय
भारतीय बन रहे हैं अमेरिकी अर्थव्यवस्था के शिल्पकार भारतीय मूल के नागरिकों का अमेरिका में आगमन विभिन स्तरों पर हुआ है। वर्ष 1890 तक भारतीय मूल के कुछ नागरिकों का कृषि श्रमिकों के रूप में अमेरिका में आगमन हुआ था। लगभग इसी खंडकाल में विशेष रूप से पंजाब से कुछ सिक्ख लोगों के जत्थे भी कनाडा एवं अमेरिका की ओर रवाना हुए थे। उस समय पर भारतीय मूल के नागरिकों ने अमेरिका में बहुत कठिनाईयों का सामना किया था क्योंकि अमेरिकी मूल के नागरिक भारतीय एवं अन्य एशियाई देशों जैसे चीन, जापान, फिलिपीन आदि के नागरिकों के लिए विभिन्न प्रकार की समस्याएं खड़ी कर रहे थे। एशियन मूल के नागरिक बहुत ही कम वेतन पर अधिक से अधिक मेहनत करते हुए कृषि क्षेत्र में भी काम करने को तैयार रहते थे, इससे अमेरिकी मूल के नागरिकों को आभास हुआ कि ये एशियन मूल के नागरिक उनके रोजगारों पर कब्जा कर लेंगे। इन कारणों के चलते उस समय पर इन ...
आनुवंशिक फसलों की व्यावसायिक खेती ?

आनुवंशिक फसलों की व्यावसायिक खेती ?

EXCLUSIVE NEWS, आर्थिक
आनुवंशिक फसलों की व्यावसायिक खेती ?* कृषि प्रधान देश कहा  जाने वाला  भारत आज भी दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य तेल का आयातक है। देश में आनुवंशिक फसलों की व्यावसायिक खेती की अनुमति को लेकर पिछले दो दशक से विभिन्न मंचों पर बहस जारी है। एक –दो मुकदमे भी देश के सर्वोच्च न्यायालय में लम्बित हैं |देश के अधिकांश पर्यावरणविद और कृषि विशेषज्ञ आनुवंशिक परिवर्तित खेती में फायदा कम, नुकसान अधिक मानते आए हैं। फिर भी  सरकार ने इसके उत्पादन की मौन स्वीकृति दे दी । इसे विकसित करने वाले संस्थान ने प्रयोग के लिए बीज भी उपलब्ध करा दिया । विवाद होने के बाद भी यह खयाल नहीं रखा गया कि उत्पादन संबंधी प्रयोग खुले में करने के बजाय ग्रीन हाउस में किया जाए। देश में पिछले बीस वर्षों से जीएम सरसों के पर्यावरण पर पड़ने वाले कुप्रभाव को लेकर विरोध हो रहा है। सन 2002 में भारत में इसके बीज की  भारतीय...
राष्ट्र के विकास की धुरी है किसान

राष्ट्र के विकास की धुरी है किसान

BREAKING NEWS, आर्थिक
या सृष्टि के सौंदर्यीकरण का सूत्रधार है किसान डॉ. शंकर सुवन सिंहभारत एक कृषि प्रधान देश है। भारत की आधी से ज्यादा आबादी खेती पर निर्भर रहती है।किसान अनाज उगाकर अपना जीवन यापन करता है और लोग इसी अनाज को खाकरजीवित रहते हैं। जब किसान अनाज उगाता है तब वह लोगों के थाली में आता है। खेतीसम्बन्धी कार्य को करने वाला व्यक्ति किसान कहलाता है। किसान को कृषक या खेतिहर केनामों से भी पुकारा जाता है। खाद्यान्न के उत्पादन से लेकर विपणन तक की व्यवस्थाकिसानों के जिम्मे होती है। किसान खेत का मालिक हो सकता है। कृषि भूमि के मालिकद्वारा काम पर रखा गया मजदूर भी किसान हो सकता है। श्रम के बिना किसान या श्रमिकहोना असंभव है। अतएव किसान और श्रमिक एक दूसरे के पूरक हैं। कृषक शब्द श्रम से बनाहै। श्रम का मतलब मेहनत होता है। मेहनत दो प्रकार की होती है शारीरिक मेहनत औरमानसिक मेहनत। शारीरिक मेहनत करके आजीविका चलान...
बढ़ता तापमान,घटती कृषि – परिणाम ?

बढ़ता तापमान,घटती कृषि – परिणाम ?

BREAKING NEWS, आर्थिक
भारत की सरकार ने संसद में माना है कि  देश में वर्ष 2001 से 2011 के बीच भूमिहर किसानों की संख्या कम होने के बाद भी कृषि श्रमिकों की संख्या बढ़ी है। आंकड़ा साफ कहता है भारत में किसानों की संख्या घट रही है और कृषि श्रमिकों की नहीं, उनका जेंडर बदल रहा है | सही मायने में  विश्व भर में खेतिहर श्रमिकों के लिए तापमान वृद्धि घातक होती जा  रही है । सब जानते हैं कि लगातार बढ़ते तापमान में कृषि श्रमिकों को लगातार धूप में काम करना होता है, और इस कारण उनका स्वास्थ्य प्रभावित होता है। तापमान वृद्धि पर पिछले 20 वर्षों से किये जा रहे अध्ययन के अनुसार पृथ्वी का तापमान वर्ष 1990 के बाद  से हरेक दशक में औसतन 0.26 डिग्री सेल्सियस बढ़ रहा है। लांसेट प्लेनेटरी हेल्थ नामक जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में भारत समेत विश्व के 43 देशों में 750 स्थानों से प्राप्त जलवायु के आंकड़ों का और मृत्यु दर का विश्लेषण किया गया...
औद्योगिक नीति की नये सिरे से समीक्षा जरूरी

औद्योगिक नीति की नये सिरे से समीक्षा जरूरी

EXCLUSIVE NEWS, आर्थिक
सरकार भले ही खुश हो ले, सत्तारूढ़ दल जश्न मनाकर कुछ भी कहने-सुनने लगे, उनके पास कारण है | कारण जुलाई-सितंबर की दूसरी तिमाही में देश की जीडीपी दर 6.3 प्रतिशत रहना है | आत्ममुग्ध लोगों को ज्यादा नहीं थोड़े पीछे यानि पिछले वर्ष के आंकड़े देख लेना चाहिए | पिछले वर्ष यह वृद्धि ८.४ प्रतिशत थी |इसके बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।  हालांकि, यह विकास दर मौद्रिक नीति समिति के अनुमानों से मेल खाती है, लेकिन यह पिछले वर्ष इसी अवधि में सामने आई 8.4 की वृद्धि से कम है, यह पत्थर पर  लिखी इबारत है । कह सकते हैं कि पिछले वर्ष में वृद्धि उस समय दर्ज की गई जब अर्थव्यवस्था कोरोना दुष्काल के संकट से तेजी से उबर रही थी। अब यह गति अपने मूल स्वरूप में लौट रही है। यद्यपि राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय यानी एनएसओ की हालिया घोषित विकास दर चालू वित्त वर्ष की पहली ...
भारतीय अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण को गति देने में भारतीय नागरिकों के कर्तव्य

भारतीय अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण को गति देने में भारतीय नागरिकों के कर्तव्य

आर्थिक
अभी हाल ही में अमेरिका के निवेश के सम्बंध में सलाह देने वाले एक प्रतिष्ठित संस्थान मोर्गन स्टैनली ने अपने एक अनुसंधान प्रतिवेदन में यह बताया है कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक विकास की दृष्टि से अगला दशक भारत का होने जा रहा है। इस सम्बंध में उक्त प्रतिवेदन में कई कारण गिनाए गए हैं। जैसे, भारत में वर्तमान में 50 लाख परिवारों की आय 35000 अमेरिकी डॉलर से अधिक है। आगे आने वाले 10 वर्षों में यह संख्या 5 गुना बढ़कर 250 लाख परिवार होने जा रही है। इससे भारत में विभिन्न वस्तुओं का उपभोग द्रुत गति से बढ़ने जा रहा है। वर्तमान में भारत में प्रति व्यक्ति आय 2278 अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ष है जो 10 वर्षों के दौरान दुगनी से भी अधिक होकर 5242 अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ष हो जाएगी।    वर्तमान के सेवा क्षेत्र के निर्यात में वैश्विक स्तर पर भारत की हिस्सेदारी 3.7 प्रतिशत से बढ़कर 4.2 प्रतिशत पर पहुंच गई ...