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अधिकांश खराब नीतियां केवल अच्छी नीतियां होती हैं जिन्हें बहुत दूर ले जाया जाता है। – डॉ थॉमस सोवेल

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अर्थशास्त्र का एक बड़ा ही बेसिक सा नियम है : क्रमागत उपयोगिता ह्रास नियम (law of diminishing marginal utility). सरल शब्दों में इसे समझाया गया कि जब आप दुकान पर एक समोसा खाते हैं तो बहुत संतुष्टि मिलती है, पर जब आप और एक के बाद दूसरा, तीसरा, चौथा समोसा खाने लगते हैं तो चौथे समोसे से उतनी संतुष्टि नहीं मिलती. और अगर आपने बारह या बीस समोसे खाने की शर्त लगा रखी हो तो आपको उसके बाद समोसे से चिढ़ हो जायेगी. यह सिर्फ अर्थशास्त्र का नियम नहीं है, यह जीवन का सामान्य नियम है. आप अच्छी से अच्छी चीज को उस सीमा पर ले जाकर छोड़ सकते हैं जहां वह एक बुरी चीज बन जाए. और वामपंथी इस नियम का भरपूर प्रयोग करते हैं. उन्होंने जितने भी हथकंडे अपनाए हैं, वे सभी अपने आप में बुरी चीजें नहीं हैं. कोई नहीं कह सकता कि स्त्रियों को समान अधिकार नहीं मिलने चाहिए, उनकी स्थिति में सुधार की गुंजाइश नहीं है... कोई नही...
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में पीएम किसान सम्मान

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में पीएम किसान सम्मान

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में पीएम किसान सम्मान सम्मेलन 2022 का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने रसायन और उर्वरक मंत्रालय के तहत 600 प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्रों (पीएमकेएसके) का भी शुभारंभ किया। इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री भारतीय जन उर्वरक परियोजना- एक राष्ट्र एक उर्वरक का भी शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) के तहत 16,000 करोड़ रुपये की 12वीं किस्त भी जारी की। प्रधानमंत्री ने कृषि स्टार्टअप कॉन्क्लेव और प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री ने उर्वरक पर एक ई-पत्रिका 'इंडियन एज' का भी विमोचन किया। श्री मोदी ने स्टार्टअप प्रदर्शनी की थीम पवेलिय...
उत्सर्जन वृद्धि पर अंकुश लगाने हेतु भारत के सराहनीय प्रयास   

उत्सर्जन वृद्धि पर अंकुश लगाने हेतु भारत के सराहनीय प्रयास   

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उत्सर्जन वृद्धि पर अंकुश लगाने हेतु भारत के सराहनीय प्रयास    कई अनुसंधान प्रतिवेदनों के माध्यम से अब यह सिद्ध किया जा चुका है कि वर्तमान में  अनियमित हो रहे मानसून के पीछे जलवायु परिवर्तन का योगदान हो सकता है। कुछ ही  घंटों में पूरे महीने की सीमा से भी अधिक बारिश का होना, शहरों में बाढ़ की स्थिति निर्मित होना, शहरों में भूकम्प के झटके एवं साथ में सुनामी का आना, आदि प्राकृतिक  आपदाओं जैसी घटनाओं के बार-बार घटित होने के पीछे भी जलवायु परिवर्तन एक मुख्य कारण हो सकता है। एक अनुसंधान प्रतिवेदन के अनुसार, यदि वातावरण में 4 डिग्री सेल्सियस से तापमान बढ़ जाय तो भारत के तटीय किनारों के आसपास रह रहे लगभग 5.5 करोड़ लोगों के घर समुद्र में समा जाएंगे। साथ ही, चीन के शांघाई, शांटोयु, भारत के कोलकाता, मुंबई, वियतनाम के हनोई एवं बांग्लादेश के खुलना शहरों की इतन...
भारत की आर्थिक उपलब्धियों को कमतर क्यों आंका जा रहा है

भारत की आर्थिक उपलब्धियों को कमतर क्यों आंका जा रहा है

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भारत की आर्थिक उपलब्धियों को कमतर क्यों आंका जा रहा है   ऐसा कहा जाता है कि अर्थशास्त्र एक जटिल विषय है। जिस प्रकार शरीर की विभिन्न नसें, एक दूसरे से जुड़ी होकर पूरे शरीर में फैली होती हैं और एक दूसरे को प्रभावित करती रहती हैं, उसी प्रकार अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलू (रुपए की कीमत, ब्याज दरें, मुद्रा स्फीति, बेरोजगारी, आर्थिक असमानता, वित्त की व्यवस्था, विदेशी ऋण, विदेशी निवेश, वित्तीय घाटा, व्यापार घाटा, सकल घरेलू उत्पाद, विदेशी व्यापार, आदि) भी आपस में जुड़े होते हैं और पूरी अर्थव्यवस्था एवं एक दूसरे को प्रभावित करते रहते हैं। विषय की इस जटिलता के चलते अक्सर कई व्यक्ति अर्थव्यवस्था सम्बंधी अपनी राय प्रकट करने में गलती कर जाते हैं। जैसे, केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले आम बजट पर विपक्षी नेताओं द्वारा अक्सर यह टिप्पणी की जाती है कि इस बजट में तो आं...
आर्थिक असमानता एवं संघ की चिन्ता के मायने

आर्थिक असमानता एवं संघ की चिन्ता के मायने

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आर्थिक असमानता एवं संघ की चिन्ता के मायने- ललित गर्ग -राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश की समस्याओं पर निरन्तर नजर रखता रहा है। गरीबी, महंगाई, अभाव, शिक्षा, चिकित्सा, सेवा और बेरोजगारी आदि क्षेत्रों में उसकी दखल से देश में व्यापक सकारात्मक बदलाव होते हुए देखे गये हैं। संघ की दृष्टि में आजादी के 75 साल बाद भी गरीबी, महंगाई और बेरोजगारी अगर देश के प्रमुख मुद्दे बन कर छाए रहें, तो यह चिंता की बात होनी ही चाहिए। इस चिन्ता को महसूस करते हुए स्वदेशी जागरण मंच के एक कार्यक्रम में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने संघ का आर्थिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए भारतीय जनता पार्टी के सरकार के दौरान इन समस्याओं के बरकरार रहने पर चिन्ता जताई। दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि 23 करोड़ लोग आज भी गरीबी रेखा से नीचे हैं। देश के बड़े हिस्से को आज भी साफ पानी और दो समय के भोजन के लिए संघर्ष करना पड़ता है। निश्चित ही हो...
दुुनिया के नवाचार में भारत की छलांगं एक बड़ी उपलब्धि

दुुनिया के नवाचार में भारत की छलांगं एक बड़ी उपलब्धि

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दुुनिया के नवाचार में भारत की छलांगं एक बड़ी उपलब्धि- ललित गर्ग -भारत दुनिया में नवाचार की दृष्टि से उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रहा है। संभवतः आजादी के बाद यह पहला अवसर है कि भारत के विकास की दृष्टि से नवाचार (इनोवेशन) के जितने सफल एवं सार्थक प्रयोग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हो रहे हैं, उतने पूर्व में नहीं हुए हैं। उससे दुनिया में भारत की छवि बदली है एवं प्रतिष्ठा बढ़ी है। दुनिया में तरक्की व प्रगति का बुनियादी आधार नवाचार ही होता है। इस क्षेत्र से भारत के लिए सुखद और गर्व करने योग्य खबर है कि हमनेे एक बड़ी छलांग लगाई है। एक साल पहले के 46वें स्थान के मुकाबले अब हम 40वें स्थान पर आ गए हैं। सात साल में भारत इनोवेशन का निर्धारण करने वाली ग्लोबल इंडेक्स में 81वें स्थान से उछलकर 40वें पायदान पर पहुंच गया है। शीर्ष स्तर पर एक साल में छह स्थान की एवं सात साल में 41 स्थान की छलांग...
भारत, दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक तथा उपभोक्ता और दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी निर्यातक के रूप में उभर कर सामने आया

भारत, दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक तथा उपभोक्ता और दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी निर्यातक के रूप में उभर कर सामने आया

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भारत, दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक तथा उपभोक्ता और दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी निर्यातक के रूप में उभर कर सामने आया देश में चीनी सत्र (अक्टूबर-सितंबर) 2021-22 के दौरान 5000 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) से अधिक गन्ने का उत्पादन हुआ है, जिसमें से लगभग 3574 एलएमटी गन्ने को चीनी मिलों ने संवर्धित कर करीब 394 लाख मीट्रिक टन चीनी (सुक्रोज) का उत्पादन किया है। इसमें से एथनॉल तैयार करने के लिए 35 लाख मीट्रिक टन चीनी का इस्तेमाल किया गया और चीनी मिलों द्वारा 359 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन किया गया। साथ ही, भारत अब दुनिया का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक तथा उपभोक्ता और दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी निर्यातक के रूप में उभर कर सामने आया है। यह सत्र भारतीय चीनी उद्योग के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ है। गन्ना उत्पादन, चीनी उत्पादन, चीनी निर्यात, गन्ना खरीद, गन्ना बकाया भुगतान और एथनॉल उत्...
अडानी भारत के चमकते सितारे

अडानी भारत के चमकते सितारे

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*अडानी भारत के चमकते सितारे* अतीत काल में भारत एक समृद्ध राष्ट्र हुआ करता था, जिस कारण उसे सोने की चिड़िया के नाम से सम्बोधित किया जाता था। समय-समय पर विदेशी आक्रान्ताओं की लूट के कारण भारत को अत्यधिक क्षति उठानी पड़ी और वह गरीब राष्ट्र के रूप में परिवर्तित हो गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत ने तीव्र गति से प्रगति की, इसी कारण वह विश्व में सर्वाधिक प्रगतिशील राष्ट्र बन चुका है। आज भारत के लिए गर्व का विषय है कि उसका एक सपूत अल्पकाल में विश्व के सर्वाधिक सम्पन्न व्यक्तियों में 153 अरब डॉलर की सम्पत्ति के साथ द्वितीय पायदान पर पहुँच गया है। अडानी की वर्तमान आय 3 अरब डॉलर प्रतिदिन है, इसी प्रगति के आधार पर वो वर्ष 2022 की समाप्ति से पूर्व ही वह विश्व के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क, जिनकी की कुल सम्पत्ति 253 अरब डॉलर है, को पछाड़ कर सम्पन्नता के प्रथम पायदान पर पहुँच कर सम्पूर्ण विश्व ...
भारत में अधोसंरचना विकसित कर आर्थिक विकास को दिए जा रहे हैं पंख

भारत में अधोसंरचना विकसित कर आर्थिक विकास को दिए जा रहे हैं पंख

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भारत में अधोसंरचना विकसित कर आर्थिक विकास को दिए जा रहे हैं पंख किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को गति देने में उस देश की आधारिक संरचना के विकसित होने का बहुत प्रभाव पड़ता है। कच्चे माल एवं निर्मित वस्तुओं को देश के एक कोने से दूसरे कोने  तक पहुंचाने एवं वस्तुओं एवं सेवाओं का निर्यात करने के उद्देश्य से इन्हें विनिर्माण इकाई से देश के बंदरगाह तक ले जाने हेतु आधारिक संरचना का विकसित होना बहुत जरूरी है। भारत में भी हाल ही के समय में इस ओर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। देश में न केवल सड़क मार्ग का मजबूत तंत्र खड़ा कर लिया गया है अपितु अब देश में रेल्वे एवं बंदरगाहों का भी एक तरह से कायाकल्प किया जा रहा है। केंद्र सरकार भारत के विभिन्न रेल्वे स्टेशनों के विकास के लिए माडल स्टेशन योजना, मार्डन स्टेशन योजना के साथ आदर्श स्टेशन योजना चला रही है। इन योजनाओं के अंतर्गत देश के कई छोट...
भारत 10 प्रतिशत आर्थिक विकास दर हासिल करने की ओर अग्रसर

भारत 10 प्रतिशत आर्थिक विकास दर हासिल करने की ओर अग्रसर

आर्थिक
भारत 10 प्रतिशत आर्थिक विकास दर हासिल करने की ओर अग्रसर पारम्परिक रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था में सबसे अधिक योगदान सेवा क्षेत्र का रहता आया है एवं रोजगार के सबसे अधिक नए अवसर भी सेवा क्षेत्र में ही निर्मित होते रहे हैं। इस दृष्टि से  कोरोना महामारी के बाद अभी हाल ही में बहुत अच्छी खबर आई है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में सेवा क्षेत्र एक बार पुनः मजबूत आधार के रूप में उभर कर सामने आया है। कोरोना महामारी के खंडकाल में सेवा क्षेत्र ही सबसे अधिक बुरे तौर पर प्रभावित हुआ था एवं इसी क्षेत्र में ही रोजगार के सबसे अधिक अवसर प्रभावित हुए थे। परंतु, अब सेवा क्षेत्र में तेजी से हुए सुधार की वजह से देश का परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी पीएमआई अगस्त 2022 में 57.2 अंकों पर पहुंच गया है, जो जुलाई 2022 में 55.5 अंकों के स्तर पर था। आर्थिक गतिविधियों, विशेष रूप से सेवा क्षेत्र में हुए सुधार के चलते ...