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अमेरिका यात्रा : नई शुरुआत का भरोसा

अमेरिका यात्रा : नई शुरुआत का भरोसा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका से मिली “टी शर्ट’ की ट्विटर पर तस्वीर साझा की है और लिखा, 'भविष्य एआई का है, चाहे वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हो या अमेरिका-भारत।' प्रधानमंत्री मोदी ने आगे लिखा कि जब हम एक साथ मिलकर काम करते हैं तो हमारे राष्ट्र मजबूत होते हैं। साथ ही पूरी दुनिया को फायदा पहुंचता है। उनकी अमेरिका की इस राजकीय यात्रा को भी इस मायने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि इससे उद्योग व व्यापारिक रिश्तों को नये आयाम मिले हैं। दोनों देशों को एक-दूसरे की जरूरत का पता इस बात से चलता है कि पिछले एक दशक में दोनों देशों का व्यापार दुगना और चीन से ज्यादा हो गया है। जो न केवल दोनों देशों बल्कि वैश्विक आर्थिकी के भी अनुकूल है। दरअसल, अमेरिकी मदद से दोस्त से दानव बन अमेरिका को चुनौती दे रहे चीन का विकल्प अमेरिका भारत के रूप में देखता है। यही वजह है कि कुछ मतभेदों के बावजूद अमेरिका भ...
अमृतकाल में भारतीय आर्थिक दर्शन के सहारे आगे बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था

अमृतकाल में भारतीय आर्थिक दर्शन के सहारे आगे बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था

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श्री एंगस मेडिसन दुनिया के जाने माने ब्रिटिश अर्थशास्त्री इतिहासकार रहे हैं। आपने विश्व के कई देशों के आर्थिक इतिहास पर गहरा अनुसंधान कार्य किया है। भारत के संदर्भ में आपका कहना है कि एक ईस्वी के पूर्व से लेकर 1700 ईस्वी तक भारत पूरे विश्व में सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित था। प्राचीन भारत में अतुलनीय आर्थिक प्रगति, भारतीय आर्थिक दर्शन के अनुसार चलायी जा रही आर्थिक नीतियों के चलते ही सम्भव हो सकी थी। भारत में पिछले 9 वर्षों के दौरान भारतीय आर्थिक दर्शन के सहारे किए गए कई आर्थिक निर्णयों के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था का इंजन पुनः अब तेज गति से पटरी पर दौड़ने लगा है। लगभग समस्त अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान भी लगातार बता रहे हैं कि आगे आने वाले समय में भारत में आर्थिक विकास की दर पूरे विश्व में सबसे अधिक रहने वाली है एवं आर्थिक क्षेत्र में केवल वर्तमान दशक ही नहीं बल्कि वर्तमा...
छोटी छोटी बचतों से अर्थव्यवस्था को मिलता है बल

छोटी छोटी बचतों से अर्थव्यवस्था को मिलता है बल

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यह सनातनी संस्कार ही हैं जो भारत के नागरिकों को छोटी छोटी बचतें करना सिखाते हैं। भारतीय परम्पराओं के अनुसार हमारे बुजुर्ग हममें बचत की प्रवृत्ति बचपन में ही यह कहकर विकसित करते हैं कि भविष्य में आड़े अथवा बुरे वक्त के दौर में, पुराने समय में की गई बचत का बहुत बड़ा सहारा मिलता है। भारतीय परिवारों में तो गृहणियां घर खर्च के लिए उन्हें प्रदान की गई राशि में से भी बहुत छोटी राशि की बचतें करने का गणित जानती हैं एवं वक्त आने पर अपने परिवार के सदस्यों को उक्त बचत की राशि सौंप कर संतोष का भाव जागृत करती हैं। आजकल के आर्थिक दौर में केवल धन का अर्जन करना ही काफी नहीं है बल्कि अर्जित किए गए इस धन का कुछ भाग, बचत के रूप में सही स्थान पर सुरक्षित निवेश करना भी जरूरी है। यदि कमाए गए धन को बचत के रूप में निवेश नहीं किया जाता है तो उस राशि का बाजार में मूल्य, मुद्रा स्फीति के चलते, कम होते होते भव...
भारत में नागरिक विमानन के क्षेत्र में हो रही है चंहुमुखी प्रगति

भारत में नागरिक विमानन के क्षेत्र में हो रही है चंहुमुखी प्रगति

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प्राचीन भारत का इतिहास गवाही दे रहा है कि लगभग 500 वर्ष पूर्व भी भारत का सकल घरेलू उत्पाद में वैश्विक स्तर पर लगभग 25 प्रतिशत का योगदान था एवं विदेशी व्यापार में भी भारत विश्व में प्रथम स्थान पर था। परंतु, अरब आक्रांताओं एवं ब्रिटेन के शासन काल में भारत की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई एवं राजनैतिक स्वतंत्रता प्राप्त करते समय तक यह रसातल तक पहुंच चुकी थी। वर्ष 1947 के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था ने पुनः सम्भलना शुरू किया एवं वर्ष 2014 के बाद से तो भारत ने आर्थिक विकास के मामले में तेज रफ्तार पकड़ ली है। भारत में प्राचीन काल में अधिकतर व्यापार समुद्रीय मार्ग के माध्यम से होता रहा है। 1000 वर्ष पूर्व भी भारत का समुद्री मार्ग विकसित अवस्था में था एवं यह दक्षिणी अफ्रीका एवं यूरोप के देशों के साथ जुड़ा हुआ था। साथ ही, लगभग 500 वर्ष पूर्व भारत में जी.टी. रोड का निर्माण हो चुका था, अतः देश ...
यूपीआई लेनदेन पर शुल्क का ब्रेन गेम

यूपीआई लेनदेन पर शुल्क का ब्रेन गेम

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यह सलाह दी जाती है कि "मदर थेरेसा" न बनें और अपने बैंक के साथ-साथ अपने यूपीआई भुगतान प्रणाली का बुद्धिमानी से उपयोग करें। हमेशा ध्यान रखें कि राजस्व विभाग आपसे अधिक से अधिक धन वसूलने का इच्छुक है, क्योंकि इसके लिए उन्हें भुगतान किया जाता है और आपकी दया या सहानुभूति आपको परेशानी में डाल सकती है। अत्यधिक यूपीआई  का उपयोग करने से नकद छूट/छूट/प्रोत्साहन प्राप्त करने का आपका लालच आपको परेशानी में डाल सकता है, जिसकी कीमत आपको भविष्य में बहुत अधिक चुकानी पड़ेगी। -डॉ सत्यवान सौरभ एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई )एक ऐसी तकनीक है जो विभिन्न बैंक खातों को एक ही मोबाइल ऐप (किसी भी भाग लेने वाले बैंक के) में समेकित करती है - तत्काल रीयल-टाइम भुगतान प्रणाली प्रदान करती है; उपयोगकर्ताओं को दूसरे पक्ष को अपने बैंक खाते का विवरण प्रकट किए बिना कई बैंक खातों में धन हस्तांतरित करने की अनुमति देती है। यह...
रेपो दर में वृद्धि को रोकना, भारतीय रिजर्व बैंक का साहसिक निर्णय

रेपो दर में वृद्धि को रोकना, भारतीय रिजर्व बैंक का साहसिक निर्णय

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पिछले एक वर्ष से भी अधिक समय से पूरे विश्व में लगभग सभी देश लगातार बढ़ती मुद्रा स्फीति की दर को नियंत्रित करने के उद्देश्य से ब्याज दरों में वृद्धि करते जा रहे हैं। अभी हाल ही में अमेरिका ने यूएस फेड दर में 25 आधार अंकों की एवं ब्रिटेन ने केंद्रीय ब्याज दर में 50 आधार अंको की वृद्धि की है। यही स्थिति लगभग सभी विकसित देशों की है। इन देशों में हालांकि ब्याज दरों में लगातार वृद्धि करने से मुद्रा स्फीति पूर्णतः नियंत्रण में आती दिखाई नहीं दे रही है, हां कुछ देशों में मुद्रा स्फीति में कुछ कमी जरूर आई है। सामान्यतः विश्व के कई देश, विशेष रूप से विकसित देश, यदि ब्याज दरों में वृद्धि करते हैं तो अन्य देशों को अपनी मुद्रा के बाजार मूल्य को बचाने के उद्देश्य से ब्याज दरों में वृद्धि करना एक मजबूरी बन जाता है। परंतु, दिनांक 06 अप्रेल 2023 को सम्पन्न हुई भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की ब...
बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ता तनाव और वित्तीय बाजार में अनिश्चितता

बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ता तनाव और वित्तीय बाजार में अनिश्चितता

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भारत के सरकारी अर्थ शास्त्रियों के अनुमान विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक के अनुमानों से मेल नहीं खा रहे हैं। इन बैंकों के नए अनुमान इस बात को रेखांकित करते हैं कि 2023-24 में भारतीय अर्थव्यवस्था में मंदी आएगी। बहुपक्षीय एजेंसियों के अनुमान भी इस दायरे के इर्दगिर्द ही हैं। बहरहाल, उभरते वैश्विक और घरेलू वृहद आर्थिक हालात को देखते हुए ये अनुमान दबाव में आ सकते हैं और वास्तविक वृद्धि आर्थिक समीक्षा में उल्लिखित दायरे के निचले स्तर के आसपास रह सकती है। विश्व बैंक के अनुमानों के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत होगी जबकि एडीबी का अनुमान है कि यह दर 6.4 प्रतिशत रहेगी। ये अनुमान जनवरी में आर्थिक समीक्षा में पेश किए गए आंकड़ों के करीब हैं। उसमें कहा गया था कि वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहेगी जो वास्तव में 6 से 6.8 प्रतिशत के बीच रह सकती है। विश्व बैंक का अनुमान है कि 202...
विलुप्ति के कग़ार पर पुरातन अन्न भंडारण पद्धति-कोठ्यार !

विलुप्ति के कग़ार पर पुरातन अन्न भंडारण पद्धति-कोठ्यार !

आर्थिक, राज्य
भारत एक कृषि प्रधान और अनाज के मामले में आत्मनिर्भर देश है। अनाज भंडारण आज भी हमारे देश में एक विकट समस्या ही है और भंडारण की समुचित व्यवस्था न होने के कारण बहुत सा अनाज खराब हो जाता है। अन्न को वैसे भी भारतीय संस्कृति में ब्रह्म का दर्जा दिया गया है। आइए हम जानते हैं कि प्राचीन समय में हमारे यहाँ के किसान किस प्रकार से बुआई-कटाई से ले कर अनाज के भण्डारण तक की समुचित व्यवस्था करते थे, जिसे आज भी अपनाये जाने की आवश्यकता है, ताकि अनाज को खराब या बर्बाद होने से बचाया जा सके।प्राचीन समय से ही हमारी कृषि, पशुपालन के साथ ही हमारे देश की अनाज भंडारण व्यवस्था बहुत ही विकसित और उन्नत थी।सिंधु घाटी सभ्यता में अन्न भंडार हड़प्पा और मोहनजोदड़ो के शहरों में पाए गए थे। वास्तव में, सच तो यह है कि मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की खुदाई से पता चला कि साढ़े चार हजार साल पहले सिंधु घाटी की सभ्यता में गेहूं की खे...
वैश्विक बैंकिंग : त्रासदी या प्रहसन

वैश्विक बैंकिंग : त्रासदी या प्रहसन

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अँतत: बीती 27 मार्च को फर्स्ट सिटिजन बैंक (एफसीबी) ने सिलिकन वैली बैंक (एसवीबी) का अधिग्रहण कर ही लिया। जिसके लिए उसे अमेरिकी फेडरल डिपॉजिट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (एफडीआईसी) से वित्तीय सहायता मिली थी। मे एक मित्र ने पूछा है कि एसवीबी का पतन क्यों हुआ? इसका एक संक्षिप्त उत्तर तो यह है कि बीते कई वर्षों के दौरान अमेरिका में नियामकीय मामलों में खतरे के निशान धुंधले पड़े हैं। जैसे जुलाई 2010 का डॉड-फ्रैंक वॉल स्ट्रीट सुधार और उपभोक्ता संरक्षण कानून को मई 2018 में इकनॉमिक ग्रोथ, रेग्युलेटरी रिलीफ ऐंड कज्यूमर प्रोटेक्शन ऐक्ट पारित करके काफी नरम कर दिया गया। वैसे एसवीबी का पतन लीमन ब्रदर्स की तरह नहीं हुआ, बल्कि एसवीबी के पास लंबी परिपक्वता सीमा वाले बॉन्ड का भारी भरकम भंडार और अल्पावधि की उधारी वाले लोन पोर्टफोलियो थे। एसवीबी की व्यक्तिगत जमा में करीब 90 प्रतिशत एफडीआईसी की 2,50,000 डॉलर की ब...
Lower Investment, Employment and Productivity? 

Lower Investment, Employment and Productivity? 

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Siyavar Ramchandra Ki Jai. How India can reduce scratching impact from Lower Investment, Employment and Productivity?  The economic crisis has resulted in large scale job losses and a marked decline in the rate of new job creation in most parts of the India, giving rise to a substantial reduction in employment rates and a sharp increase in unemployment. It’s scary. The pandemic, coupled with trade disruptions and Russia’s war on Ukraine, and now the Bank Run caused lasting harm to Asia-Pacific economies, damaging growth, productivity, and investment. And, slowly and emotionally but realistically – it has already hit Indian Economy. Specifically, it will leave very deep and long-lasting scars which, without swift and bold policy action, could restrict Indian growth well into the...