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Amritpal Singh in legal trouble

Amritpal Singh in legal trouble

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कानूनी शिकंजे में अमृतपाल सिंह -ः ललित गर्ग :- वारिस पंजाब दे संगठन के प्रमुख और खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह को पुलिस ने मोगा जिले से गिरफ्तार कर लिया है जो 18 मार्च से फरार चल रहे थे। गिरफ्तारी के बाद पंजाब पुलिस उन्हें बठिंडा के एयरफोर्स स्टेशन लेकर गई, जहां से उन्हें असम के डिबरूगढ़ जेल भेज दिया गया है। खालिस्तान की मांग का समर्थन करने वाले अमृतपाल सिंह के गिरफ्तार होने के बाद अब अलग-अलग प्रतिक्रयाएं आ रही हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पूरे घटनाक्रम पर कहा कि पिछले कुछ दिनों से पंजाब के अमन-शांति को बर्बाद करने की कोशिश की जा रही थी। अगर चाहते तो उस दिन ही सभी को पकड़ लिया जाता लेकिन पंजाब सरकार कोई खून-खराबा नहीं चाहती थी। उन्होंने कहा, पंजाब में पिछले कुछ महीनों से कानून-व्यवस्था और अमन-शांति को तोड़ने की कोशिश हो रही थी, जैसे ही हमें इसकी जानकारी मिली हमने एक्शन ...
क्या यूपी से होगा इन 65 कुख्यात अपराधियों का सफाया ? 

क्या यूपी से होगा इन 65 कुख्यात अपराधियों का सफाया ? 

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नोएडा। यूपी से हो सकता है 65 कुख्यात अपराधियों का सफाया,  नोएडा के 7 गैंगस्टर योगी सरकार की हिटलिस्ट में शामिलसुंदर भाटी पर हैं अतीक अहमद के हत्यारों को पिस्टल दिलाने के आरोप पिछले दिनों उत्तर प्रदेश में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ का खात्मा हो चुका है. बताया जा रहा है कि अतीक-अशरफ की मौत के बाद अब योगी आदित्यनाथ सरकार ने पूरे राज्य में माफियाओं के खिलाफ बड़ा अभियान चलाने की ठान ली है. सूत्रों के अनुसार सरकार अब चुन- चुनकर माफियाओं का सफाया करेगी. ऐसे में एक ओर खबर आयी है जिसमें बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने 65 गैंगस्टर्स की लिस्ट तैयार की है. इन पर लगाम लगाने के लिए पुलिस अफसरों को स्पेशल टास्क सौंपा जाएगा. मेरठ जोन के सबसे ज्यादा 16 गैंगस्टर इस हिटलिस्ट में हैं. अगर पुलिस जोन के हिसाब से बात करें तो बरेली और कानपुर जोन से केवल एक-एक अपराधी शामिल किया गया है. पु...
पराली के उपलों का दाह-संस्कार में अनूठा प्रयोग(नवाचार)

पराली के उपलों का दाह-संस्कार में अनूठा प्रयोग(नवाचार)

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वायु प्रदूषण आज भारत की ही नहीं अपितु संपूर्ण विश्व की एक बहुत बड़ी व ज्वलंत समस्या है। बढ़ती जनसंख्या, औधौगिक धंधों के फलने-फूलने, बढ़ते हरित ग्रह प्रभाव, बदलती जलवायु परिस्थितियों, शहरीकरण के कारण निरंतर हो रहे कंक्रीट के जंगलों का विकास, बढ़ते ट्रैफिक, पेड़-पौधों की अंधाधुंध कटाई, धरती के सीमित संसाधनों का असीमित तरीकों से दोहन(खनन, पहाड़ों की कटाई, टनल आदि का निर्माण) के बीच धरती का संपूर्ण पारिस्थितिकीय तंत्र गड़बड़ा गया है। इसी बीच पर्यावरण को बचाने के लिए नित नये अनुसंधान, प्रयोगों, नवाचारों, नई पहल आदि में भी लगातार इजाफा भी हो रहा है। पिछले दिनों पंजाब के पटियाला में प्रदूषण को लेकर एक नई पहल की गई है। जानकारी देना चाहूंगा कि पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने पेड़ों की अंधाधुंध कटाई रोकने व इसे कम करने के उद्देश्य से क्षेत्र में पिछले दिनों एक नई पहल की है। बोर्ड ने मोहाली की एक निज...
कश्मीर रहा है सनातन हिंदू संस्कृति का गढ़

कश्मीर रहा है सनातन हिंदू संस्कृति का गढ़

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अतिप्राचीन भारत में कैलाश पर्वत के आसपास भगवान शिव के गणों की सत्ता थी। उक्त इलाके में ही दक्ष राजा का भी साम्राज्य था। ऐसा माना जाता है कि कश्यप ऋषि कश्मीर के पहले राजा थे। कश्मीर को उन्होंने अपने सपनों का राज्य बनाया था और कश्यप ऋषि के नाम पर ही कश्यप सागर (कैस्पियन सागर) और कश्मीर का प्राचीन नाम पड़ा था। शोधकर्ताओं के अनुसार कैस्पियन सागर से लेकर कश्मीर तक ऋषि कश्यप के कुल के लोगों का राज फैला हुआ था। कश्यप की एक पत्नी कद्रू के गर्भ से नागों की उत्पत्ति हुई जिनमें प्रमुख 8 नाग थे- अनंत (शेष), वासुकि, तक्षक, कर्कोटक, पद्म, महापद्म, शंख और कुलिक। इन्हीं से नागवंश की स्थापना हुई। आज भी कश्मीर में इन नागों के नाम पर ही कई स्थानों के नाम हैं। कश्मीर का अनंतनाग नागवंशियों की राजधानी हुआ करता था। हाल में अखनूर से प्राप्त हड़प्पा कालीन अवशेषों तथा मौर्य, कुषाण और गुप्त काल की कलाकृतियों से जम्...
योगी जी का राजधर्म

योगी जी का राजधर्म

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क्षत्रिय-वृत्ति के प्रति, जो तत्परता युद्ध में एक सेनापति दिखाता है, वही तत्परता निर्णय लेते समय एक राजा में दिखलाई पड़े; तो समझिए राजधर्म का सम्यक निर्वहन हो रहा है। वेदव्यास संन्यासी थे। वह जानते थे कि कृष्ण एक क्षत्रिय योद्धा हैं और युद्ध में हिंसा होती ही है। तिस पर भी वो यह कहना नहीं चूकते कि " वासुदेव तुम धर्म के विषय में सब जानते हो। " ऐसा इसलिए, क्योंकि कलुष निरसन के लिए क्षात्र-वृत्ति की आवश्यकता और प्रयोजनीयता ऋषिवर समझते थे। जब कपिलवस्तु को कोशल सेना ने घेर लिया था, तब तथागत की आज्ञा पाकर कई भिक्षुओं ने, जो शाक्य थे, मातृभूमि रक्षार्थ युद्ध में भाग लिया था। किसी के प्रश्न का उत्तर देते हुए महात्मा बुद्ध ने कहा था "अनुचित का प्रतिकार न करना भी एक प्रकार की हिंसा होती है। जब बात मातृभूमि की आए, तब दायित्व और बढ़ जाता है। " भारत में कई संत संन्यासी हथियार उठाते रहे हैं। क...
श्री अमित शाह ने आज उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी में कौशाम्बी महोत्सव-2023 का शुभारंभ किया

श्री अमित शाह ने आज उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी में कौशाम्बी महोत्सव-2023 का शुभारंभ किया

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी में कौशाम्बी महोत्सव-2023 का शुभारंभ और 613 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास किया केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी में कौशाम्बी महोत्सव-2023 का शुभारंभ और विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास किया। इनमें लोक निर्माण विभाग की 405 करोड़ रुपये लागत की 70 योजनाओं और युवा कल्याण,खेल,नगर विकास व व्यावसायिक शिक्षा विभाग समेत 12 विभागों की 51 करोड़ रुपये लागत की 24 परियोजनाओं का लोकार्पण शामिल है।साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना फेज-3 की 151 करोड़ रुपये लागत की 19 योजनाओं और स्वास्थ्य एवं नगर विकास विभाग की 6 करोड़ रुपये की 4 योजनाओं का शिलान्यास भी किया गया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री ...
पवार का पंच

पवार का पंच

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राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी शरद पवार ने एक सच्ची बात कहकर विपक्ष के होश उड़ा दिए हैं !हालांकि सकते में पड़ी कांग्रेस के प्रवक्ता यह कहते हुए झेंप मिटा रहे हैं कि शरद के बयान से विपक्षी एकजुटता पर कोई असर नहीं पड़ता !परंतु कांग्रेस जानती है कि पहले ममता , फिर केजरीवाल , फिर केसीआर और फिर अखिलेश के कांग्रेस से कन्नी काट लेने के बाद अब शरद पवार जैसे आधुनिक चाणक्य की इस झन्नाटेदार चपत का मतलब क्या है ? शरद बाबू ने न केवल अडानी अंबानी को देश की तरक्की में सहयोगी बताया , अपितु इस बात पर भी अफसोस जताया कि अपनी युवावस्था में वे भी टाटा बिड़ला जैसे उद्यमियों पर तौहामत लगाते थे !बाद में उनकी समझ आया कि उद्योगपतियों का देश की तरक्की में कितना बड़ा योगदान है , और वे कितने गलत थे !उन्होंने कहा कि अडानी ने अनेक प्रोजेक्ट्स और पावर सैक्टर के माध्यम से देश की प्रगति यात्रा को बहुत आगे बढ़ाया है ! शरद...
क्यों झूठ बोल रहे हैं केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ?

क्यों झूठ बोल रहे हैं केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ?

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अनुज अग्रवाल , अध्यक्ष, मौलिक भारतबेमौसम आँधी , तूफ़ान , बर्फ़बारी और बरसात से सब्ज़ी, फलों, गेहूं व तिलहन आदि की फसल का देश के आधे से ज़्यादा जिलो में दस से पचास प्रतिशत तक नुक़सान हुआ है।औसत रूप से बीस प्रतिशत तक रबी की फ़सलों की कम पैदावार होने का आँकलन स्वतंत्र समीक्षक व कृषि विशेषज्ञ कर रहे हैं।लगभग हर प्रभावित ज़िले से दो - चार किसानों के आत्महत्या अथवा सदमे से मौत के समाचार आ रहे हैं किंतु केंद्रीय कृषि मंत्रालय व खाद्य सचिव झूठ पर झूठ बोल रहे हैं व देश के किसानों व जनता को धोखा दे रहे हैं। वे नहीं बता पा रहे हैं कि - 1) किसी राज्य में अगर ज़्यादा पैदावार भी जाती है तो क्या उसका फ़ायदा किस तरह उन राज्यो के किसानों को होगा जिनकी फसल बर्बाद हो गई है ? 2) मंत्रालय यह क्यों नहीं बता रहा है कि बेमौसम बरसात व बर्फ़बारी से फ़सलों की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित हुई है। बिना गुण...
आसान नहीं  है कर्नाटक की राजनीति को समझना

आसान नहीं  है कर्नाटक की राजनीति को समझना

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उमेश चतुर्वेदी टीवी चैनलों के दौर इस में बौद्धिकों की नजर में हर विधानसभा चुनाव सेमीफाइनल बन गया है। विधानसभा चुनाव की तारीखें घोषित होते ही विशेषकर राजधानी केंद्रित बौद्धिक घोषित करने लगते हैं कि आने वाले चुनावों पर इस चुनाव विशेष के नतीजों का बड़ा असर होगा। कर्नाटक विधानसभा चुनाव को लेकर भी ऐसी ही स्थापित धारणाएं लगातार प्रसारित हो रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी के उभार के बाद ऐसी धारणाएं कई बार ध्वस्त हुई हैं। फिर भी इन्हीं धारणाओं के इर्द-गिर्द कर्नाटक के संभावित नतीजों का आकलन किया जा रहा है। अतीत के अनुभवकर्नाटक के अतीत के अनुभव भी इन स्थापित धारणाओं को खारिज करते रहे हैं।याद कीजिए 1999 के विधानसभा चुनाव को। तब जनता दल के जेएच पटेल मुख्यमंत्री थे। आम धारणा थी कि येदियुरप्पा की अगुआई में दक्षिण के इस राज्य में अपने दम पर कमल खिल जाएगा। लेकिन कमल खिलने के पहले ही मुरझा गया। वजह ...
विलुप्ति के कग़ार पर पुरातन अन्न भंडारण पद्धति-कोठ्यार !

विलुप्ति के कग़ार पर पुरातन अन्न भंडारण पद्धति-कोठ्यार !

आर्थिक, राज्य
भारत एक कृषि प्रधान और अनाज के मामले में आत्मनिर्भर देश है। अनाज भंडारण आज भी हमारे देश में एक विकट समस्या ही है और भंडारण की समुचित व्यवस्था न होने के कारण बहुत सा अनाज खराब हो जाता है। अन्न को वैसे भी भारतीय संस्कृति में ब्रह्म का दर्जा दिया गया है। आइए हम जानते हैं कि प्राचीन समय में हमारे यहाँ के किसान किस प्रकार से बुआई-कटाई से ले कर अनाज के भण्डारण तक की समुचित व्यवस्था करते थे, जिसे आज भी अपनाये जाने की आवश्यकता है, ताकि अनाज को खराब या बर्बाद होने से बचाया जा सके।प्राचीन समय से ही हमारी कृषि, पशुपालन के साथ ही हमारे देश की अनाज भंडारण व्यवस्था बहुत ही विकसित और उन्नत थी।सिंधु घाटी सभ्यता में अन्न भंडार हड़प्पा और मोहनजोदड़ो के शहरों में पाए गए थे। वास्तव में, सच तो यह है कि मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की खुदाई से पता चला कि साढ़े चार हजार साल पहले सिंधु घाटी की सभ्यता में गेहूं की खे...