मणिपुर का लोकतान्त्रिक उत्तर दिल्ली से जुड़ता पूर्वोत्तर
मणिपुर में पिछले 15 सालों से कांग्रेस के ओकराम इबोबी मुख्यमंत्री थे। लगातार इतने सालों से मुख्यमंत्री रहने के कारण उनके विरोध में एक सत्ता विरोधी लहर तो उनके पिछले कार्यकालों के दौरान भी साफ तौर पर थी किन्तु किसी मजबूत विकल्प न होने के कारण सत्ता का बदलाव मुश्किल था। असम की जीत के बाद भाजपा की मजबूती मणिपुर में भी बढ़ी। वहां पैदा हुये आत्मविश्वास ने इस बार मणिपुर में भाजपा को एक विकल्प के रूप में खुद ब खुद पेश कर दिया। गोवा और मणिपुर में हालांकि भाजपा दूसरे नंबर पर थी किन्तु भाजपा के शीर्ष रणनीतिकारों के बेहतर रणनीतिक कौशल के कारण मणिपुर में भाजपा सरकार बनाने में कामयाब रही। मणिपुर पर अमित त्यागी का एक लेख।
भारत में लोकतन्त्र मजबूत होता दिखने लगा है। जनता जागरूक होने लगी है। इसकी वजह यह है कि जनता अब उन विषयों पर जागरूक होने लगी है जो राष्ट्रनिर्माण से सरोकार रखते हैं। जिनसे देश की आंतर...









