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Parliament approves Resolution to repeal Article 370; paves way to truly integrate J&K with Indian Union

Parliament approves Resolution to repeal Article 370; paves way to truly integrate J&K with Indian Union

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Union Minister for Home Affairs, Shri Amit Shah, introduced two bills and two resolutions regarding Jammu & Kashmir (J&K) in Lok Sabha today. These are as follows: Constitution (Application to Jammu & Kashmir) Order, 2019 {Ref. Article 370(1) of Constitution of India} – issued by President of India to supersede the 1954 order related to Article 370. Resolution for Repeal of Article 370 of the Constitution of India {Ref. Article 370 (3)} Jammu & Kashmir (Reorganisation) Bill, 2019 {Ref. Article 3 of Constitution of India} Jammu & Kashmir Reservation (2nd Amendment) Bill, 2019 {Home Minister withdrew the Bill from both Houses as the provisions of this act would become applicable to J&K once article 370 gets repealed and the laws of Union of India becom...
A Kashmir Policy, At Last!

A Kashmir Policy, At Last!

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Kashmir has been a part of me since 1972 but it’s only over the last quarter century that I have tried to delve deeper to study it, particularly to find out about our Kashmir policy. In 2001 when I opted to go back to Kashmir valley as corps commander, I had the opportunity to interact with the political hierarchy in J&K which came as part of my duties. Before broaching the subject with Mufti Mohammad Sayeed sahab, who was then the chief minister, I thought it prudent to check within the Army’s senior leadership. Unfortunately, I got no clear answer on the government’s policy either on that for achieving short term goals or for bringing about a desired end state in Kashmir. Later when Shri LK Advani visited Nadimarg village in South Kashmir valley, where terrorists had carried out a ...
Revocation of Article 370: Doom for Separatists

Revocation of Article 370: Doom for Separatists

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Future generation of India will remember August 5, 2019 as a milestone in Indian history. Article 370 of the Indian Constitution giving special status to the state of Jammu & Kashmir has been revoked. It spells dooms day for the separatists in the Kashmir valley. The state has been bifurcated into two Union Territories- Jammu & Kashmir with a legislature and Ladakh without a legislature.  Contrary to the general opinion that the step taken by Prime Minister Narendra Modi and Home Minister Amit Shah to end the special status of the state was done in hurry, the government decision was well planned and executed after five years of the Centre’s study of the situation in the state. I am not privy to any information in this regard but as a political commentator I have my own views on ho...
वेतन विधेयक, 2019 लोकसभा में पारित

वेतन विधेयक, 2019 लोकसभा में पारित

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लोकसभा में आज वेतन विधेयक, 2019 पारित हो गया। विधेयक पर विचार करने और पारित करने के लिए चर्चा की शुरुआत करते हुए केन्‍द्रीय श्रम और रोजगार राज्‍यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक विधेयक है, जिसका उद्देश्य पुराने और अप्रचलित श्रम कानूनों को विश्वसनीय और भरोसेमंद कानूनों में तब्दील करना है, जो वक्त की जरूरत है। इस समय 17 मौजूदा श्रम कानून 50 से ज्यादा वर्ष पुराने हैं और इनमें से कुछ तो स्वतंत्रता से पहले के दौर के हैं। वेतन विधेयक में शामिल किए गए चार अधिनियमों में से वेतन भुगतान अधिनियम, 1936 तो स्वतंत्रता से पहले का है और न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 भी 71 साल पुराना है। इसके अलावा बोनस भुगतान विधेयक, 2965 और समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 भी इसमें शामिल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में ट्रेड यूनियनों, नियोक्ताओं और राज्य सरकारों के...
तीन तलाक़ विधेयक 2019 संसद में पारित

तीन तलाक़ विधेयक 2019 संसद में पारित

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श्री अमित शाह ने कहा कि तीन तलाक़ विधेयक 2019 पारित होने से मुस्लिम महिलाओं के लिए असीम संभावनाओं के द्वार खुलेंगे जिससे वे न्यू इंडिया के निर्माण में प्रभावी भूमिका अदा कर सकेंगी। उनका कहना था कि यह विधेयक मुस्लिम महिलाओं की गरिमा को सुनिश्चित करने और उसे अक्षुण्‍ण रखने के लिए उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम है। श्री शाह ने कहा कि श्री नरेंद्र मोदी की सरकार महिला सशक्तीकरण और महिला अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित है और तीन तलाक़ पर बैन इसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्‍होंने आगे कहा कि यह बिल मुस्लिम महिलाओं के जीवन में आशा और सम्मान का एक नया युग लाएगा। श्री अमित शाह ने ट्रिपल तलाक बिल के पारित होने पर देश भर की मुस्लिम बहनों को तीन तलाक के अभिशाप से छुटकारा मिलने पर बधाई दी तथा संसद में बिल के समर्थन पर सभी सदस्‍यों का आभार जताया। श्री शाह ने यह भी कहा कि भारतीय लोकत...
ट्रिपल तलक  आस्था नही, अधिकारों की लड़ाई है ।

ट्रिपल तलक आस्था नही, अधिकारों की लड़ाई है ।

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ट्रिपल तलाक पर रोक लगाने का बिल लोकसभा से तीसरी बार पारित होने के बाद  एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में ही इसे असंवैधानिक करार दे दिया था लेकिन इसे एक कानून का रूप लेने के लिए अभी और कितना इंतज़ार करना होगा यह तो समय ही बताएगा। क्योंकि बीजेपी सरकार भले ही अकेले अपने दम पर  इस बिल को लोकसभा में  82 के मुकाबले 303 वोटों से पास कराने में आसानी से सफल हो गई हो लेकिन इस बिल के प्रति विपक्षी दलों के रवैये को देखते हुए इसे राज्यसभा से  पास कराना ही उसके लिए असली चुनौती है। यह वाकई में समझ से परे है कि कांग्रेस समेत समूचा विपक्ष अपनी गलतियों से कुछ भी सीखने को तैयार क्यों नहीं है। अपनी वोटबैंक की राजनीति की एकतरफा सोच में  विपक्षी दल इतने अंधे हो गए हैं कि  यह भी नहीं देख पा रहे कि उनके इस रवैये से उनका दोहरा आचरण ही देश के सामने आ रहा है। क्योंकि जो विपक्षी दल राम मंदिर औ...
भारतीय शोधकर्ताओं ने विकसित किया जहरीले रसायनों का डेटाबेस

भारतीय शोधकर्ताओं ने विकसित किया जहरीले रसायनों का डेटाबेस

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पर्यावरण या फिर दैनिक जीवन से जुड़े उत्पादों के जरिये हर दिन हमारा संपर्क ऐसे रसायनों से होता है, जो सेहत के लिए हानिकारक होते हैं। इस तरह के रसायन उपभोक्ता उत्पादों से लेकर कीटनाशकों, सौंदर्य प्रसाधनों, दवाओं, बिजली की फिटिंग से जुड़े सामान, प्लास्टिक उत्पादों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों समेत विभिन्न चीजों में पाए जाते हैं।  भारतीय शोधकर्ताओं ने ऐसे रसायन का एक विस्तृत डेटाबेस तैयार किया है, जो मानव शरीर में हार्मोन की कार्यप्रणाली को प्रभावित करते हैं, जिससे शारीरिक विकास, चयापचय, प्रजनन, प्रतिरक्षा और व्यवहार पर विपरीत असर पड़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने ऐसे रसायनों को स्वास्थ्य से जुड़ा प्रमुख उभरता खतरा बताया है। इस खतरे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हार्मोन्स के तंत्र को प्रभावित करने वाले ये रसायन पर्यावरण में मौजूद जहरीले रसायनों का सिर्फ एक उप-समूह है।...
“महामहिम जी की गंगा”

“महामहिम जी की गंगा”

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महामहिम जी ने संसद में अपने अभिभाषण में कहा कि सरकार ने 2022 तक गंगा को अविरल और निर्मल बनाने का लक्ष्य रखा है। गंगा के साथ ही सरकार यमुना, नर्मदा, कावेरी और गोदावरी सहित अन्य नदियों अरबी सरकार इसी तर्ज पर काम करेगी।  इस बात ने हमें देश की इन नदियों के भविष्य के लिए चिंता में डाल दिया है। गंगा से जुड़े पर तमाम मुद्दों पर लंबे आंदोलनों, सरकारी आश्वासनों, स्थानीय अदालतों से लेकर उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक और साथ में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के आदेशों की कतार हमारे सामने हैं।   फिर भी गंगा अपने उद्गम से लेकर गंगासागर में मिलने तक हैरान और परेशान है। गंगा अपनी दोनों मुख्य धाराओं के उद्गम के पास ही बांध परियोजनाओं में बांध दी गईं है। अलकनंदा गंगा को विष्णुप्रयाग बांध और भागीरथी गंगा को मनेरी भाली से लेकर बड़े विशालकाय टिहरी बांध ने बांध रखा है। गंगा व उसकी सहायक नदियां लगभ...
‘जगत गुरू’ भारत को अब सारे विश्व की एक लोकतांत्रिक व्यवस्था बनानी है!

‘जगत गुरू’ भारत को अब सारे विश्व की एक लोकतांत्रिक व्यवस्था बनानी है!

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लोकमात्य बाल गंगाधर तिलक एक समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी, गणितज्ञ, खगोलशास्त्री, पत्रकार और भारतीय इतिहास के विद्वान थे। तिलक का जन्म 23 जुलाई, 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरि में हुआ था। तिलक के पिता श्री गंगाधर रामचंद्र तिलक संस्कृत के विद्वान और प्रसिद्ध शिक्षक थे। तिलक एक प्रतिभाशाली छात्र थे। वह अपने कोर्स की किताबों से ही संतुष्ट नहीं होते थे। गणित उनका प्रिय विषय था। वह क्रेम्बिज मैथेमेटिक जनरल में प्रकाशित कठिन गणित को भी हल कर लेते थे। उन्होंने बी.ए. करने के बाद एल.एल.बी. की डिग्री भी प्राप्त कर ली। वह भारतीय युवाओं की उस पहली पीढ़ी से थे, जिन्होंने आधुनिक काॅलेज एजुकेशन प्राप्त की थी। तिलक को जीवन के सबसे जरूरी समय में माता-पिता का सानिध्य नहीं मिल पाया था। केवल दस वर्ष की अवस्था में ही तिलक की माँ उन्हें छोड़कर चल बसीं और कुछ ही वर्षों के बाद पिता का भी देहांत हो गया। तिलक को...
धरती माता को वीटो पाॅवर की कैद तथा परमाणु शस्त्रों की होड़ से   मुक्त कराने के लिये ‘आजाद’  जैसे क्रान्तिकारी जज्बे की  जरूरत है!

धरती माता को वीटो पाॅवर की कैद तथा परमाणु शस्त्रों की होड़ से  मुक्त कराने के लिये ‘आजाद’  जैसे क्रान्तिकारी जज्बे की  जरूरत है!

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  अंग्रेजी उपनिवेशवाद के युग में भारत सहित विश्व के लगभग 54 देशों में अंग्रेजी राज के प्रति नफरत और आक्रोश फैला हुआ था। उपनिवेशवाद में यूरोपीय देशों ने पूँजी के द्वारा ‘सर्वोच्च लाभ’ प्राप्त किया है। उपनिवेशवाद का पूरे यूरोप का मुख्य केन्द्र इंग्लैण्ड रहा है। उपनिवेशवाद का तात्पर्य है आर्थिक दृष्टि से विकसित देशों के द्वारा अविकसित देशों का शोषण। पिछड़े देशों की सारी आर्थिक व्यवस्था उनपर निर्भर रहती है। अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ की अन्यायपूर्ण विचारधारा के कारण अंग्रेज के गुलाम 54 देशों के मूल निवासी गरीबी, बीमारी, अशिक्षा तथा गुलामी से भरा अपमानजनक जीवन जी रहे थे। विश्व के इन देशों की प्राकृतिक सम्पदाओं का दोहन करके तथा मानव संसाधन का शोषण करके अंग्रेज अपने देश इंग्लैण्ड को समृद्ध कर रहे थे।  इस कालखण्ड में गुलाम भारत में अंग्रेजांे के प्रति आक्रोश चरम सीमा पर था। स्वाध...