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श्रीनिवास रामानुजन की जयंती पर…(२२ दिसंबर )

श्रीनिवास रामानुजन की जयंती पर…(२२ दिसंबर )

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यह बड़ी अजीब सी बात है कि साहित्यिक होते हुए भी मैं किसी कवि या लेखक की जीवनगाथा पढ़ कर उतना द्रवित कभी न हो सका जितना श्रीनिवास रामानुजन के बारे में पढ़ते हुए होता रहा। रामानुजन का छोटा सा जीवन शीत की कुहेलिका में डूबे किसी दिव्य सरोवर सा है जो क्षण-क्षण अपना रूप खोलता है । उसमें अनिर्वच काव्यात्मकता,करुणा, ताप, आह और आनंद है। उस सरोवर में उतरना तो हम जैसे मनुष्यों के लिए असंभव ही है--उसकी दिव्यता को छू भर लेना ही हमारे लिए परमाद्भुत रत्न को पाने जैसा है । उनके जन्म की कहानी, बचपन की विस्मयकारी प्रज्ञा, बहुत छोटी उम्र में उनके द्वारा पूछे गए गूढ़ प्रश्न और धीरे-धीरे गणित में धंसते हुए कुछ विलक्षण सोचना या करना, यह सब अपवादात्मक या प्रतीयमान ही है । रामानुजन की दिव्यता का आभास यों तो छोटी आयु से ही होने लगता है तथापि उनकी अपूर्व प्रतिभा का प्राकट्य तेरह-चौदह वर्ष की उम्र में होता ह...
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री की चिट्ठी के क्या हैं मायने? क्या देश में फिर लगने वाली हैं बड़ी पाबंदियां?

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री की चिट्ठी के क्या हैं मायने? क्या देश में फिर लगने वाली हैं बड़ी पाबंदियां?

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आशीष तिवारी Corona Update: कोविड कंट्रोल करने वाली कमेटी से जुड़े एक वरिष्ठ सदस्य कहते हैं कि ऐसी किसी भी चिट्ठी को आज के हालात के मद्देनजर राजनीति से नहीं देखना चाहिए। उनका कहना है कि चूंकि यह चिट्ठी कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा के लिए लिखी गई है, तो उसका राजनीतिकरण होना स्वाभाविक है। (Corona Update) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया (Mansukh Mandaviya) ने राहुल गांधी को लिखी चिट्ठी में भारत जोड़ो यात्रा को स्थगित करने की अपील की है। इस यात्रा को स्थगित करने के पीछे की सबसे बड़ी वजह मनसुख मंडाविया ने कोविड के हालातों में पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी की बात कही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री की इस चिट्ठी के बाद चर्चा इस बात की हो रही है कि क्या केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के पास इस बात के इनपुट पहुंच चुके हैं कि आने वाले दिनों में एक बार फिर से कोविड के हालात भयावह हो सकते हैं। हाला...
राहुल गांधी की अंग्रेजी-भक्ति ?

राहुल गांधी की अंग्रेजी-भक्ति ?

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*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* राजस्थान में राहुल गांधी ने अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई की जमकर वकालत कर दी। राहुल ने कहा कि भाजपा अंग्रेजी की पढ़ाई का इसलिए विरोध करती है कि वह देश के गरीबों, किसानों, मजदूरों और ग्रामीणों के बच्चों का भला नहीं चाहती है। भाजपा के नेता अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में क्यों पढ़ाते हैं? राहुल ने जो आरोप भाजपा के नेताओं पर लगाया, वह ज्यादातर सही ही है लेकिन राहुल जरा खुद बताए कि वह खुद और उसकी बहन क्या हिंदी माध्यम की पाठशाला में पढ़े हैं? देश के सारे नेता या भद्रलोक के लोग अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में इसीलिए भेजते हैं कि भारत दिमागी तौर पर अभी भी गुलाम है। उसकी सभी ऊँची नौकरियां अंग्रेजी माध्यम से मिलती हैं। उसके कानून अंग्रेजी में बनते हैं। उसकी सरकारें और अदालतें अंग्रेजी में चलती हैं। भाजपा ने अपनी नई शिक्षा नीति में प्राथमिक शिक्...
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों में आत्महत्या के बढ़ते मामले।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों में आत्महत्या के बढ़ते मामले।

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जब तक देश की परीक्षा संस्कृति से इस कुत्सित व्यवस्था को समाप्त नहीं किया जाता है, तब तक छात्रों में आत्महत्या की दर को रोकने के मामले में कोई प्रत्यक्ष परिवर्तन नहीं देखा जाएगा। सरकार को इस मुद्दे पर संज्ञान लेना चाहिए, अगर वास्तव में हम सोचते है कि "आज के बच्चे कल के भविष्य हैं। जबरन करियर विकल्प देने से कई छात्र बहुत अधिक मात्रा में दबाव के आगे झुक जाते हैं, खासकर उनके परिवार और शिक्षकों से उनके करियर विकल्पों और पढ़ाई के मामले में। शैक्षिक संस्थानों से समर्थन की कमी के चलते बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों से निपटने के लिए सुसज्जित नहीं है और मार्गदर्शन और परामर्श के लिए केंद्रों और प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी है। प्रारंभिक पाठ्यक्रमों और तृतीयक शिक्षा की अत्यधिक लागत छात्रों पर बोझ के रूप में कार्य करती है और उन पर जबरदस्त दबाव डालती है। -प्रियंका सौरभ नेशन...
इस देश में ‘राज्यपाल’ कैसे हों ?

इस देश में ‘राज्यपाल’ कैसे हों ?

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केंद्र सरकार के इशारों  पर चलती “राज्यपाल” नामक संस्था हमेशा विवादों में रही है | कभी उसकी राज्य सरकार के साथ पटरी नहीं बैठती तो कभी वो समाज के मुद्दों पर केंद्र से भी दो-दो हाथ करने से गुरेज नहीं करते | इन दिनों  अब महाराष्ट्र के राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी की देश के गृहमंत्री अमित शाह को लिखी एक चिट्ठी चर्चा में है। इस चिट्ठी में उन्होंने गृहमंत्री से ‘मार्गदर्शन’ मांगा है। आरिफ मोहम्मद खान,जगदीप धनखड़, अपने राज्य की सरकार से टकरा चुके हैं | मेघालय,  और अरुणाचल के राजभवनों की दस्तान भी जग जाहिर है | वैसे पश्चिम बंगाल, केरल, मेघालय आदि के राज्यपाल इतर कारणों से भी चर्चा में रहे हैं। केंद्रशासित राज्यों के लेफ्टिनेंट गवर्नर भी चुनी हुई सरकारों के निर्णयों में बाधा डालने के लिए आलोचना के शिकार होते रहे हैं। जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और अधिकांश राज्यों में भी का...
सर्वाइकल कैंसर” से मौत और भारत

सर्वाइकल कैंसर” से मौत और भारत

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सरकार  भले ही  कुछ भी कहे, देश स्वास्थ्य के इस गंभीर मामले में काफी पीछे है | मेरे सामने एक रिपोर्ट है, जो भारत में सर्वाइकल कैंसर की दशा, गंभीरता  और सरकारी प्रयास को दर्शाती है | इस रिपोर्ट के आंकड़े साफ-साफ कहते हैं की एशिया में सर्वाइकल कैंसर के सबसे अधिक मरीज भारत में हैं| यह अध्ययन प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका  “लांसेट” का है | ‘लांसेट’ का यह ताजा अध्ययन है और इस अध्ययन  के अनुसार, इस बीमारी से होने वाली 40 प्रतिशत मौतों में से 23 प्रतिशत भारत में और 17 प्रतिशत चीन में होती हैं| बीते वर्ष 2020 में दुनियाभर में इस कैंसर के छह लाख से अधिक मामले सामने आये थे और 3.41 लाख से अधिक मौतें हुई थीं| इनमें से 21 प्रतिशत मामले भारत में ही आये थे| एशिया में यह आंकड़ा 58 प्रतिशत से अधिक का है| इस रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि महिलाओं में सबसे अधिक होने वाले कैंसर के प्रकारों में सर्वाइकल क...
सेना के साथ पूरा देश भी लड़े धूर्त चीन से

सेना के साथ पूरा देश भी लड़े धूर्त चीन से

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आर.के. सिन्हा भारत के जाबांज सैनिकों ने पिछली 9 दिसंबर को चीन के गले में अंगूठा डाल दिया था। बात-बात पर धौंस जमाने वाले चीन को गलवान के बाद भारत ने तवांग में उसकी कायदे से अपनी औकात समझा दी। भारतीय सैनिकों ने चीनियों की कसकर भरपूर धुनाई की। लेकिन तवांग में चीन ने जो कुछ देखा वो तो महज एक झांकी है। जरूरत पड़ी तो भारत कसकर चीन को कसने के लिये तैयार है। पर यह कहना होगा कि भारत और चीन के बीच की जंग दुनिया की सबसे कठिन जंग होगी। दोनों देशों ने आपस में समझौता कर रखा है कि बंदूक़ तो बंदूक़ कोई तलवार तक नहीं निकालेगा म्यान से। हाँ गदा युद्ध हो सकता है। मल्ल युद्ध हो सकता है। 1967 में में नाथूला की जंग में चीन के चार सौ से अधिक सैनिक मारे गए थे तब से चीन बंदूकबाज़ी से डरता है और भारत तो हमेशा से उदारमना है ही। गौतम बुद्ध और गांधी का देश भारत तो किसी से खुद तो पंगा लेता ही नहीं है। दूसरी तरफ़ मै...
राजनीति में अपराधीकरण – कोई भी दल गंभीर नहीं 

राजनीति में अपराधीकरण – कोई भी दल गंभीर नहीं 

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हाल ही में सम्पन्न विधान सभा और दिल्ली नगर निगम चुनाव के बाद एक बार फिर यह साफ हुआ है कि राजनीति में अपराधीकरण खत्म करने को लेकर कोई भी राजनीतिक  पार्टी गंभीर नहीं है।गुजरात में चुनाव पूर्व पकड़ी गई नकदी और नशीले पदार्थों की खेप और चुनाव पश्चात् छन-छन कर आ रही खबरें यही प्रमाणित कर रही है कि “अपराध और चुनाव के बीच गंभीर रिश्ता है और उसके निवारण में न तो  बड़े राजनीतिक दल सोच रहे हैं और न    वैकल्पिक राजनीति देने की बात करने वाले नये दल ही |” सार्वजनिक रूप से राजनीतिक दल  और उनके नेता चाहे कितने भी दावे करें कि वे राजनीति को स्वच्छ बनाने के लिए काम करेंगे, लेकिन मौका मिलते ही वे भी इस बात का वे खयाल रखना भी जरूरी नहीं समझते कि अपराध के आरोपी या आपराधिक पृष्ठभूमि वाले किसी व्यक्ति को उम्मीदवार बनाने से कौन-सी परंपरा मजबूत होगी? बाकी खबरे भी जल्दी सामने आयेंगी अभी तो दिल्ली नगर नि...
अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की क्षमता कैसे हो साकार

अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की क्षमता कैसे हो साकार

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भारत में अंतरिक्ष के लिये निजी क्षेत्र की भूमिका को सीमित रखा गया है। सिर्फ कम महत्त्वपूर्ण कार्यों के लिये ही निजी क्षेत्र की सेवाएँ ली जाती रहीं हैं। उपकरणों को बनाना और जोड़ना तथा परीक्षण  जैसे महत्त्वपूर्ण कार्य अभी भी इसरो ही करता है।   यह ध्यान देने योग्य है कि विश्व का सबसे बड़ा अंतरिक्ष क्षेत्र का संस्थान नासा भी निजी क्षेत्र की सहायता लेता रहा है। मौजूदा समय में भारत में नवीन अंतरिक्ष से संबंधित 20 से अधिक स्टार्ट-अप मौज़ूद हैं। इन उद्यमों का दृष्टिकोण पारंपरिक विक्रेता/आपूर्तिकर्त्ता मॉडल से भिन्न है। ये स्टार्ट-अप सीधे व्यापार से जुड़कर या सीधे उपभोक्ता से जुड़कर व्यापार की संभावनाएँ तलाश रहे हैं। -डॉ सत्यवान सौरभ सभ्यता की शुरुआत से ही मानव अंतरिक्ष की रोमांचक कल्पनाएँ करता रहा है। इन रोमांचक कल्पनाओं में अंतरिक्ष कभी अध्यात्म का विषय बना तो कभी कविताओं और दंत-कथाओं का। ...
आखिर सीमा पर चीन के नवीनतम दुराचार का कारण क्या

आखिर सीमा पर चीन के नवीनतम दुराचार का कारण क्या

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बलबीर पुंज सीमा पर कुटिल चीन के हालिया दुस्साहस का कारण क्या है? डोकलाम (2017) और गलवान (2020-21) प्रकरण के बाद अरुणाचल प्रदेश के तवांग स्थित 17,000 फीट ऊंची यांग्त्से चोटी पर 9 दिसंबर को चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) सैनिकों ने भारतीय चौकी को हटाने के लिए जबरन भीतर घुसने का प्रयास क्यों किया? 13 दिसंबर को संसद में दिए वक्तव्य में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने बताया, "चीन ने यांगत्से क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर यथास्थिति को 'एकतरफा' ढंग से बदलने की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेना ने 'दृढ़ता से' कार्रवाई कर उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।" 15-16 जून 2020 की हिंसक गलवान झड़प के बाद भारतीय सेना पहले से अधिक चौकस और प्रतिकार हेतु तत्पर है। तवांग घटनाक्रम इसका प्रमाण है, जिसमें बकौल मीडिया रिपोर्ट, भारतीय जवानों ने न केवल चीनी सैनिकों की घुसपैठ को विफल किया, अपितु अपने बाह...