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वीर सावरकर कौन थे

वीर सावरकर कौन थे

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वीर सावरकर कौन थे..? जिन्हें आज कांग्रेसी और वामपंथी कोस रहे हैं! *ये 25 बातें पढ़कर आपका सीना गर्व से चौड़ा हो उठेगा। इसको पढ़े बिना आज़ादी का ज्ञान अधूरा है!* *आइए जानते हैं एक ऐसे महान क्रांतिकारी के बारे में जिनका नाम इतिहास के पन्नों से मिटा दिया गया। जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के द्वारा इतनी यातनाएं झेली की उसके बारे में कल्पना करके ही इस देश के करोड़ों भारत माँ के कायर पुत्रों में सिहरन पैदा हो जायेगी।* *जिनका नाम लेने मात्र से आज भी हमारे देश के राजनेता भयभीत होते हैं क्योंकि उन्होंने माँ भारती की निस्वार्थ सेवा की थी। वो थे हमारे परम वीर सावरकर।* 1. वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी देशभक्त थे जिन्होंने 1901 में ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया की मृत्यु पर नासिक में शोक सभा का विरोध किया और कहा कि वो हमारे शत्रु देश की रानी थी, हम शोक क्यूँ करें? क्या किसी भारतीय महापुरुष के नि...
Department of Science and Technology join hands to develop electric vehicle (EV) batteries that are suited to India

Department of Science and Technology join hands to develop electric vehicle (EV) batteries that are suited to India

प्रेस विज्ञप्ति, राष्ट्रीय
Centre for Science and Environment (CSE) CSE and Department of Science and Technologyjoin hands to develop electric vehicle (EV) batteriesthat are suited to India Plan a white paper on designing locally appropriate EV batteries that aresafe, durable and well performing within the constraints ofIndia’s hot and humid tropical climate Create a forum of stakeholders to build a knowledge networkto support this initiative New Delhi, November 22, 2022: Centre for Science and Environment (CSE) and the Department of Science and Technology (DST) of the Government of India have collaborated to create a platform that will support the development of new electric vehicle (EV) batteries to suit Indian requirements. A white paper will be prepared on a roadmap for the development of ...
ईरान में हिजाब पर जन-आक्रोश

ईरान में हिजाब पर जन-आक्रोश

TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* ईरान में हिजाब के मामले ने जबर्दस्त तूल पकड़ लिया है। पिछले दो माह में 400 लोग मारे गए हैं, जिनमें 58 बच्चे भी हैं। ईरान के गांव-गांव और शहर-शहर में आजकल वैसे ही हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं, जैसे कि अब से लगभग 50 साल पहले शंहशाहे-ईरान के खिलाफ होते थे। इसके कारण तो कई हैं लेकिन यह मामला इसलिए भड़क उठा है कि 16 सितंबर को एक मासा अमीनी नामक युवती की जेल में मौत हो गई। उसे कुछ दिन पहले गिरफ्तार कर लिया गया था और जेल में उसकी बुरी तरह से पिटाई हुई थी। उसका दोष सिर्फ इतना था कि उसने हिजाब नहीं पहन रखा था। हिजाब नहीं पहनने के कारण पहले भी कई ईरानी स्त्रियों को बेइज्जती और सजा भुगतनी पड़ी है। कई युवतियों ने तो टीवी चैनलों पर माफी मांग कर अपनी जान बचाई है। यह जन-आक्रोश तीव्रतर रूप धारण करता जा रहा है। अब लोग न तो आयतुल्लाहों के फरमानों को मान रहे हैं और न ही राष्ट्रपति इब्र...
Dragon on Rampage

Dragon on Rampage

राष्ट्रीय
By Balbir Punj_ November 20 is one of the blackest days in Independent India’s chequered history. On this fateful day in 1962, China declared a unilateral cease-fire, bringing - one month one day long war against India - to an abrupt end. The war had left India bruised and humiliated India badly. Since then, relations between the two Asian neighbours range between outright animosity and uneasy peace. The armed forces of the two countries since have had several eye-ball to eye -ball confrontations, skirmishes and localised clashes. A distant possibility of breaking of sudden large-scale hostilities looms large on the Indo-China border all the time. None knows what would be China’s next move. It’s difficult to fathom its intentions because the country defies all known matrix. China is...
भारतीय संविधान भारतीय जीवन दर्शन का ग्रंथ है

भारतीय संविधान भारतीय जीवन दर्शन का ग्रंथ है

राष्ट्रीय, समाचार
डॉ. सौरभ मालवीयकिसी भी देश के लिए एक विधान की आवश्यकता होती है। देश के विधान को संविधान कहा जाता है। यह अधिनियमों का संग्रह है। भारत के संविधान को विश्व का सबसे लम्बा लिखित विधान होने का गौरव प्राप्त है। भारतीय संविधान हमारे देश की आत्मा है। इसका देश से वही संबंध है, जो आत्मा का शरीर से होता है। संविधान दिवस का इतिहासभारत का संविधान 26 नवम्बर 1949 को बनकर पूर्ण हुआ था। चूंकि डॉ. भीमराव आम्बेडकर संविधान सभा के प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे, इसलिए भारत सरकार द्वारा उनकी 125वीं जयंती वर्ष के रूप में 26 नवम्बर 2015 को प्रथम बार संविधान दिवस संपूर्ण देश में मनाया गया। उसके पश्चात 26 नवम्बर को प्रत्येक वर्ष संविधान दिवस मनाया जाने लगा। इससे पूर्व इसे राष्ट्रीय विधि दिवस के रूप में मनाया जाता था। संविधान सभा द्वारा देश के संविधान को 2 वर्ष 11 माह 18 दिन में पूर्ण किया गया था। इस पर 114 दिन तक च...
पर्यावरण को बचाने के लिए पंचामृत मंत्र

पर्यावरण को बचाने के लिए पंचामृत मंत्र

TOP STORIES, राष्ट्रीय
भारत ने अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं पर मजबूत प्रगति की है और बढ़ती महत्वाकांक्षा और कम कार्बन वाले भविष्य की रूपरेखा तैयार करने में एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हितधारक बना हुआ है। भविष्य में ग्रीनहाउस गैस के शमन में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है और साथ ही अत्यधिक गर्मी, सूखे और बाढ़ के कारण पहले से ही लाखों लोगों के साथ बड़े पैमाने पर जलवायु अनुकूलन की आवश्यकता है। देश के अधिकांश बुनियादी ढांचे का अभी भी निर्माण किया जा रहा है और भविष्य की ऊर्जा आपूर्ति अभी भी स्थापित की जानी है, भारत के पास शेष विकासशील दुनिया के लिए कम कार्बन विकास प्रतिमान स्थापित करने का अवसर है। -डॉ सत्यवान सौरभ शुद्ध-शून्य उत्सर्जन वातावरण से ग्रीनहाउस गैस अवशोषण द्वारा वातावरण में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को संतुलित करने की विधि है। शून्य कार्बन उत्सर्जन में, देश कार्बन उत्सर्जन को सीमित करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। ...
आईआईएसएसएम (IISSM) द्वारा आयोजित दो दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय कॉन्क्लेव का समापन

आईआईएसएसएम (IISSM) द्वारा आयोजित दो दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय कॉन्क्लेव का समापन

राष्ट्रीय
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्योरिटी एंड सेफ्टी मैनेजमेंट (आईआईएसएसएम) के दो दिवसीय 32वां अन्तरराष्ट्रीय कॉन्क्लेव का आज समापन हो गया। यह कॉन्क्लेव होटल क्राउन प्लाजा, ओखला फेज 1, नई दिल्ली के साथ ही वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर भी आयोजित किया गया। जिसमें पूरे विश्व के हजारों सुरक्षा विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस बार कॉन्क्लेव का थीम “राष्ट्र निर्माण में सुरक्षा, सुरक्षा और हानि निवारण की भूमिका” रखा गया था। आईआईएसएसएम वार्षिक ग्लोबल कॉन्क्लेव, दूसरे दिन, 19 नवंबर 2022 की शुरुआत श्री जेसन एल ब्राउन, राष्ट्रीय निदेशक, थेल्स, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के मुख्य भाषण के साथ हुई। यह कॉन्क्लेव के भौतिक स्थल क्राउन प्लाजा, ओखला में लाइव स्ट्रीमिंग के साथ ऑनलाइन आयोजित किया गया था। श्री जेसन एल ब्राउन ने वैश्विक परिदृश्य के साथ क...
सच्चे राष्ट्रनायक है सावरकर – ह्रदय नारायण दीक्षित

सच्चे राष्ट्रनायक है सावरकर – ह्रदय नारायण दीक्षित

TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
भारत अखण्ड सम्प्रभुता और राष्ट्रीयता है। हम भारत के लोग प्राचीन राष्ट्र हैं। भारत खण्डों को जोड़ कर नहीं बना लेकिन कांग्रेस के नेता राहुल गाँधी को संभवतः भारत टूटा फूटा दिखाई पड़ता है। इसीलिए वे भारत जोड़ने की अपील के साथ पद यात्रा पर हैं। उन्होंने राष्ट्रवादी विचार के महानायक विनायक दामोदर सावरकर पर अभद्र टिप्पणी की है। सावरकर को अंग्रेजी सत्ता का पेंशनर बताया है। कहा है कि ”उन्होंने अंग्रेजी सत्ता की मदद की। जेल से अपनी रिहाई कि लिए माफी मांगी थी।” राहुल गाँधी का वक्तव्य क्रांतिकारी सावरकर पर घटिया आरोप है। राहुल नहीं जानते कि स्वातंत्र्यवीर सावरकर स्मारक समिति के मंत्री पंडित बाखले ने सावरकर जन्म तिथि अवसर पर तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी को पत्र लिखा था। श्रीमती गाँधी ने मई 1980 के पत्र में बाखले को उत्तर दिया, ‘‘मुझे आपका पत्र मिला। सावरकर ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध अति सा...
भारत के लिए जी-20: ग्लोबल साउथ का नेतृत्व संभालने का अवसर

भारत के लिए जी-20: ग्लोबल साउथ का नेतृत्व संभालने का अवसर

BREAKING NEWS, CURRENT ISSUE, EXCLUSIVE NEWS, राष्ट्रीय
भारत के लिए जी-20 की अध्यक्षता ग्लोबल साउथ का नेतृत्व संभालने का अवसर है। संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय संगठनों में सुधार पर वैश्विक सहमति बनाना, कोविड के बाद के युग के लिए एक नई विश्व व्यवस्था की ओर पहला कदम था। जलवायु परिवर्तन, कोविड-19 महामारी और यूक्रेन में युद्ध जैसी चुनौतियों का सामना कर रही दुनिया में जी20 की प्रासंगिकता बढ़ी है। भारत की अध्यक्षता समावेशी, महत्वाकांक्षी, निर्णायक और कार्रवाई-उन्मुख होगी, जैसा कि भारत की जी-20 अध्यक्षता थीम "एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य" द्वारा दर्शाया गया है। -प्रियंका सौरभ सदस्य वर्तमान में विश्व सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 80%, वैश्विक व्यापार का 75% और वैश्विक जनसंख्या का 60% हिस्सा हैं। प्रेसीडेंसी, इससे पहले और बाद में (ट्रोइका) प्रेसीडेंसी रखने वाले देशों द्वारा सहायता प्राप्त, प्रत्येक वर्ष के शिखर सम्मेलन के एजेंडे को निर्धारित क...
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी

खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी

TOP STORIES, राष्ट्रीय
19 नवंबर पर विशेष-खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थीमृत्युंजय दीक्षितभारतीय स्वाधीनता का इतिहास वीर गाथाओं से भरा पड़ा है और आज जब देश स्वाधीनता का अमृत महोत्सव मना रहा है तब इन वीर गाथाओं का स्मरण करना किसी पुण्य कार्य को करने की अनुभूति कराता है। महारानी लक्ष्मीबाई की वीरगाथा को दोहराना ऐसा ही एक पुण्य कार्य लगता है ।महारानी लक्ष्मीबाई का जन्म महाराष्ट्र से काशी आकर रहने वाले मोरोपंत तांबे के घर 19 नवंबर सन 1834 को हुआ था। मणि कर्णिका नाम वाली लक्ष्मीबाई को तब प्यार से मनु कहा जाता था। जब मनु 4 वर्ष की थी तब उसकी मां भागीरथी बाई का काशी में ही देहांत हो गय।अब मनु के पिता को मनु के पालन- पोषण के लिए कोई सहारा न दिखाई दिया। तब बाजीराव पेशवा ने उन्हें अपने पास बिठूर बुलवा लिया। यहां पर मनु के पिता उसको अपने साथ पेशवा बाजीराव द्वितीय के दरबार में ले जाने लगे। मनु स्वभाव से बहुत चंचल ...