Shadow

विश्लेषण

वैज्ञानिकों ने बनाया फूलों को सुखाने के लिए नया सोलर ड्रायर

वैज्ञानिकों ने बनाया फूलों को सुखाने के लिए नया सोलर ड्रायर

addtop, BREAKING NEWS, विश्लेषण
भारत से निर्यात होने वाले फूल उत्पादों में 70 प्रतिशत हिस्सेदारी सूखे फूलों और पौधों के अलग-अलग भागों की होती है। लेकिन सूखे फूल उत्पादों के वैश्विक बाजार में भारत की भागीदारी सिर्फ पांच प्रतिशत है। भारतीय शोधकर्ताओं ने अब एक सोलर ड्रायर विकसित किया है जो गुलाब और गेंदे जैसे अधिक मूल्यवान फूलों के सौन्दर्य और गुणों को नुकसान पहुंचाए बिना सुखाने में उपयोगी हो सकता है। इस सोलर ड्रायर को विकसित करने वाले शोधकर्ताओं में शामिल नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ पी.के. शर्मा ने इंडिया साइंस वायर को बताया कि “सोलर ड्रायर और सीधे धूप में सुखाए गए फूलों के रंग, रूप और आकार का मूल्यांकन करने पर हमने पाया कि बाहरी वातावरण की अपेक्षा सोलर ड्रायर में तापमान स्थिर रहता है। इसमें सुखाने की दर 65 से 70 प्रतिशत तक अधिक पायी गई है। बाहरी तापमान में उतार-चढ़ाव होता रहता और दोपहर ...
New injectable hydrogel may improve stem cell uptake

New injectable hydrogel may improve stem cell uptake

addtop, BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
The use of stem cells in regenerative medicine remains a challenging task because of problems associated with the survival of transplanted cells. Stem cells, when transplanted on a wound site, release chemicals called paracrine factors which stimulate other cells in the vicinity to initiate tissue regrowth.  A group of Indian scientists has developed an injectable hydrogel that can help transplanted stem cells survive longer. Researchers from the Mohali-based Institute of NanoScience and Technology have devised a method to encapsulate adult stem cells called Mesenchymal Stem Cells (MSC) in an injectable hydrogel. In preliminary studies, it has been found that the hydrogel exhibits cell viability and can support long-term survival of stem cells. The injectable hydrogel has been derive...
सूरत हादसे के सबक

सूरत हादसे के सबक

addtop, EXCLUSIVE NEWS, विश्लेषण
सूरत में हुए हादसे के बहाने जानिए सीरत अपनी 21 बच्चे हमेशा के लिए सो गए फिर भी हम नहीं जागेंगे, हैं ना...   कुछ विषय ऐसे होते हैं जिनपर लिखना खुद की आत्मा पर कुफ्र तोडऩे जैसा है, सूरत की बिल्डिंग में आग...21 बच्चों की मौत...आग और घुटन से घबराए बच्चों को इससे भयावह वीडियो आज तक नहीं देखा....इससे ज्यादा छलनी मन और आत्मा आज तक नहीं हुई....फिर भी लिखूंगी...क्योंकि हम सब गलत हैं, सारे कुएं में भांग पड़ी हुई है। हमने किताबी ज्ञान में ठूंस दिया बच्चों को नहीं सिखा पाए लाइफ स्किल। नहीं सिखा पाए डर पर काबू रख शांत मन से काम करना।" मम्मा डर लग रहा है...एग्जाम के लिए सब याद किया था लेकिन एग्जाम हॉल में जाकर भूल गया...कुछ याद ही नहीं आ रहा था। पांव नम थे...हाथों में पसीना था...आप दो मिनिट उसे दुलारते हैं...बहलाने की नाकाम कोशिश करते हैं फिर पढ़ लो- पढ़ लो- पढ़ लो की रट लगाते हैं। सुबह...
‘डायलॉग इंडिया’ की अंतर्राष्ट्रीय उड़ान : ‘डायलॉग इंडिया’ ने दुबई में रचा इतिहास   

‘डायलॉग इंडिया’ की अंतर्राष्ट्रीय उड़ान : ‘डायलॉग इंडिया’ ने दुबई में रचा इतिहास  

addtop, Today News, TOP STORIES, विश्लेषण
'डायलॉग इंडिया’ ने गत 2 मई को दुबई में इतिहास रच दिया। दस साल पहले दिल्ली से शुरू हुई भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों की रैंकिंग और ग्रेडिंग की यात्रा का इस बार पड़ाव बना संयुक्त अरब अमीरात का प्रमुख देश दुबई। इस अवसर पर आयोजित 'पांचवे डायलॉग इंडिया अकेडिया कॉंकलेव-2019’ में भारत और संयुक्त अरब अमीरात के सौ से अधिक शिक्षाविदों, उच्च शिक्षा संस्थानों के प्रमुुखों, मीडिया दिग्गजों, निवेशकों और भारत में विश्वस्तर की शिक्षा ग्रहण करने के इच्छुक विद्यार्थियों ने एक साथ बैठकर खुला संवाद किया और शिक्षा जगत के समक्ष मौजूदा चुनौतियों तथा उनके संभावित व्यावहारिक समाधान पर भी मंथन किया। साथ ही यह भी गहन चिंतन किया कि भारतीय उच्च शिक्षा संस्थान किस प्रकार उद्योग जगत की तेज गति से बदलती जरूरतों तथा प्रशिक्षित मानव संसाधन के बीच एक सेतू की भूमिका निभा सकते हैं। इस अवसर पर दुबई के करीब एक दर्जन निवेशकों ने ...
वामपंथी विचारधारा का अवसान

वामपंथी विचारधारा का अवसान

addtop, Today News, TOP STORIES, विश्लेषण
2019 के चुनाव परिणाम सिर्फ मोदी की सत्ता में वापसी मात्र नहीं है बल्कि वामपंथियों के उस चक्रव्यूह पर भी करारी चोट है जो भारत को सनातन संस्कृति से दूर करने का षड्यंत्र रचते रहे हैं। इसके साथ ही खान मार्केट और लुटियन की राजनीति करने वाले उस बौद्धिक अय्याश वर्ग को भी सदमा पहुंचा है जो सिर्फ नकारात्मकता को उभारता है। उसे हर चीज़ में खोट दिखाई देती है। कभी उसे भारत में असहिष्णुता दिखाई देती है तो कभी भारत तेरे टुकड़े होंगे कहने वालों में देशभक्ति। कभी उसे रामायण और महाभारत जैसे धार्मिक ग्रंथ हिंसात्मक दिखते हैं तो कभी सनातनी परम्पराएं ढकोसला। कुल मिलाकर हर वह चीज़ जो भारत को अखंड बनाने की तरफ जोड़ती दिखती है वह इस खेमे के निशाने पर आ जाती है। इस खेमे की बौद्धिक उपज सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं हैं बल्कि पूरे देश में विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुयी हैं। कांग्रेस के रूप में इस वामपंथी विचारधारा को ...
विपक्ष क्यों हारा? मोदी क्यों जीते?

विपक्ष क्यों हारा? मोदी क्यों जीते?

addtop, BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
विपक्ष के किसी नेता को इतनी बुरी हार का अंदाजा नहीं था। सभी को लगता था कि मोदी आर्थिक मोर्चे पर और रोजगार के मामले में जिस तरह जन आकांक्षाओं पर खरे नहीं उतरे, तो आम जनता में अंदर ही अंदर एक आक्रोश पनप रहा है, जो विपक्ष के फायदे में जाएगा। मोदी के आलोचक राजनैतिक विश्लेषक मानते थे कि मोदी की 170 से ज्यादा सीटें नहीं आएंगी। हालांकि वे ये भी कहते थे कि मोदी लहर, जो ऊपर से दिखाई दे रही है, अगर वह वास्तविक है, तो मोदी 300 से ज्यादा सीटें ले जाएंगे। उनके मन में प्रश्न है कि मोदी क्यों जीते? कुछ नेताओं ने ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। जबकि ज्यादातर लोग ऐसा मानते हैं कि इस आरोप में कोई दम नहीं है। दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं। पर यह भी सही है कि दुनिया के ज्यादतर देश ईवीएम से चुनाव नहीं करवाते। इसलिए विपक्षी दलों की मांग है कि पुरानी व्यवस्था के अनुरूप मत पत्रों से ही मतदान होना चाहि...
बदलो या नकार के लिए तैयार रहो

बदलो या नकार के लिए तैयार रहो

addtop, EXCLUSIVE NEWS, विश्लेषण
सत्रहवीं लोकसभा चुनावों का विपक्ष को संकेत सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव नतीजों के बाद भारतीय राजनीति की अपनी-अपनी तरह से व्याख्या की जा रही है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस के उभरने की संभावना अब और क्षीण हो गई है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि राष्ट्रीय जनता दल, समाजवादी पार्टी, जनता दल सेक्युलर और इंडियन नेशनल लोकदल जैसे पारिवारिक प्राइवेट लिमिटेड पार्टियों के दिन बीत रहे हैं। यह भी माना जा रहा है कि भारतीय राजनीतिक क्षितिज से वामपंथ की विदाई हो चुकी है। जब भी किसी खास विचारधारा और राजनीतिक दल की चुनावों में जीत होती है तो उसके बरक्स हारने वाली पार्टियों की ऐसी ही व्याख्याएं होती हैं। ऐसे विश्लेषणों का फौरी राजनीतिक संदर्भों का ज्यादा प्रभाव होता है। ऐसी व्याख्याएं करने वाले राजनीतिक पंडित भूल जाते हैं कि लोकतांत्रिक समाज में राजनीति सतत प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण होता है ...
कांग्रेस को अपनी हार नहीं, बीजेपी की जीत की समीक्षा करनी चाहिए

कांग्रेस को अपनी हार नहीं, बीजेपी की जीत की समीक्षा करनी चाहिए

addtop, BREAKING NEWS, विश्लेषण
2019 के लोकसभा नतीजे कांग्रेस के लिए बहुत बुरी खबर लेकर आए। और जैसा कि अपेक्षित था, देश की सबसे पुरानी पार्टी में भूचाल आ गया। एक बार फिर हार की समीक्षा के लिए कमेटी का गठन हो चुका है। पार्टी में इस्तीफों की बाढ़ आ गई है। खबर है कि खुद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस्तीफा देने पर अड़े हैं। लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता से लेकर आम कार्यकर्ता तक राहुल गांधी और उनके नेतृत्व में अपना विश्वास जता रहे हैं। यह अच्छी बात है कि ऐसे कठिन दौर में भी किसी संगठन का अपने नेतृत्व पर भरोसा कायम रहे। लेकिन ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि लगातार मिलने वाली असफलताओं के बावजूद उस संगठन के बड़े नेता से लेकर आम कार्यकर्ता तक अपने नेता के साथ मजबूती से खड़े हों। सभी लोग राहुल को यह समझाने में लगे हैं कि उन्होंने चुनावों में बहुत मेहनत की और चुनावों में पार्टी की हार क्यों हुई उसकी समीक्षा की जाएगी वे मन छोटा ना करें ...
वीर सावरकर का विरोध करने वाले कायर है.

वीर सावरकर का विरोध करने वाले कायर है.

addtop, TOP STORIES, विश्लेषण, समाचार
कांग्रेस और वामपंथी सहित सभी सेकुलरिस्ट पार्टियां विनायक दामोदर सावरकर का मूल्यांकन काफी संकुचित दायरे में करती है. वो सिर्फ वीर ही नहीं थे बल्कि वो महान क्रान्तिकारी, चिन्तक, लेखक और कवि भी थे. कांग्रेस जब अंग्रेजों का सेफ्टी वल्व बनकर ब्रिटिश सरकार के प्रति निष्ठा की शपथ लिया करती थी. जब भारत के स्वतंत्रता संग्राम में गांधी और नेहरू का  नामोनिशान नहीं था. जब कम्यूनिस्ट पार्टी, हिंदुस्तान ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में कहीं पैदा नहीं हई थी. उस वक्त, सावरकर भारत के सैकड़ो क्रांतिकारियों का फ्रेंड, गाईड और फिलोसोफर थे. सावरकर ब्रिटिश शासन के विरुद्ध क्रांति की आग फैला रहे थे, अभिनव भारत नामक गुप्त क्रांतिकारी दल की पहुंच और सक्रियता को बढा रहे थे. युवकों को क्रांति के लिए तैयार कर रहे थे. दूसरों की तरह वो भी पढ़ाई करने इंग्लैंड पहुंचे लेकिन वो ऐशोआराम की जिंदगी बसर कर बैरिस्टर नहीं बनना चाहत...
मोदी मंत्रिमंडल के मायने

मोदी मंत्रिमंडल के मायने

addtop, Today News, विश्लेषण
नियति और कर्मो ने नरेंद्र मोदी को दूसरी बार भारत सरकार की कमान दी है। जिस प्रकार पिछले पांच बर्षों में मोदी मंत्रिमंडल बना व काम किया उसमें अनेक जगह समझौतों, मजबूरियों व असफल प्रयोगों से मोदी जी दो चार हुए। पुरानी भाजपा के धुरंधरों व संघ के चाबुकों के बीच काम करना उनकी मजबूरी थी। उस पर "लुटियंस ज़ोन के गैंग" का दबाब भी। किंतू इन सब चुनोतियाँ के बीच भी अथक कार्यों, ईमानदार छवि और साहसिक फैसलों और संघ के दर्शन के साथ देश व दुनिया की सभी राजनीतिक विचारधाराओ व नीतियों के समावेश से बनाई गई " मोदीत्व" की विचारधारा को राष्ट्र के पटल पर स्थापित कर दिया। अपनी शर्तों, सोच व शैली में काम करने वाले मोदी असीम धैर्य रखते हैं और समय मिलते ही दुश्मन और पथ भटके टीम के सदस्यो को हाशिए पर पटक देते हैं या अपने रंग में रंग लेते हैं। मोदी सरकार का नया मंत्रिमंडल वास्तव में  "गवर्मेंट ऑफ इंडिया इनकॉरपोरेट" के स...