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ये घोषणाएं और संकल्प जुमलों के पहाड़ हैं

ये घोषणाएं और संकल्प जुमलों के पहाड़ हैं

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चुनाव के तीन दिन पहले संकल्प-पत्र और सप्ताह भर पहले घोषणा-पत्र जारी करने का अर्थ क्या है? देश की दो प्रमुख पार्टियों भाजपा और कांग्रेस ने यही किया है। दूसरी छोटी-मोटी प्रांतीय पार्टियों ने भी कोई आदर्श उदाहरण उपस्थित नहीं किया है। इन पार्टियों के नेताओं से पूछिए कि आपके 50-50 पृष्ठों के इन घोषणा-पत्रों को कौन पढ़ेगा? क्या देश के 70-80 करोड़ मतदाता उसे पढ़कर मतदान करेंगे? इन दलों के नेता और कार्यकर्ता भी उन्हें पढ़ेंगे, इसमें संदेह है। चुनाव अभियान तो पिछले डेढ़-दो माह से चला हुआ है। उसमें जनहित के कौनसे मुद्दों पर सार्थक बहस हो रही है, यह सबको पता है। फिर भी इन संकल्प-पत्रों और घोषणा-पत्रों का महत्व है। जो भी पार्टी जीतती है, उसकी खिंचाई उसके विरोधी घोषणा-पत्रों के आधार पर करते हैं। उसका कुछ न कुछ असर भी जरुर दिखाई पड़ता है। 2019 के जो चुनाव-पूर्व सर्वेक्षण छपे हैं, उनके आधार पर यह कहना...
महिला और युवा रचेंगे मौजूदा चुनाव का इतिहास

महिला और युवा रचेंगे मौजूदा चुनाव का इतिहास

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लोकतंत्र के जिस मॉडल को हमने स्वीकार किया है, वह पश्चिम से आयातित है। ब्रिटेन या अमेरिका जैसे देशों से हमने राजनीतिक व्यवस्था को संभालने के लिए उनके लोकतंत्र को तो अपना लिया, लेकिन पहले ही दिन से हमने बड़ी हिम्मत दिखाई। भारतीय संविधान ने 21 साल की उम्र पूरी कर चुके हर वयस्क नागरिक को मतदान का अधिकार दिया, जो पागल या दिवालिया न हो। इसके लिए न तो जाति को आधार बनाया गया, न ही रंग को और न ही लिंग को। 1947 में जब भारत आजाद हुआ तो न तो उसके पास आर्थिक संसाधन थे न ही साक्षर नागरिकों का समूह। आजादी के समय भारत की कुल अर्थव्यवस्था करीब दो लाख करोड़ की थी, जबकि साक्षरता दर महज बारह फीसद। शायद यही वजह थी कि पूरी दुनिया ने मान लिया था कि भारतीय लोकतंत्र कुछ ही वर्षों में चरमराकर ढह जाएगा। लेकिन आजादी के आंदोलन के दौरान रचे गए मूल्यों का असर था या फिर भारतीय संस्कृति में पारिवारिकता का समन्वय बोध, यहां...
चुनावी चंदा  न्यायालय की मार,पार्टियां बेक़रार

चुनावी चंदा न्यायालय की मार,पार्टियां बेक़रार

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भारत में होने वाले हर चुनाव की तरह इस चुनाव में भी धन की आवक एक बड़ा प्रश्न बनकर उभर रहा है। उच्चतम न्यायालय ने भी इस विषय में हस्तक्षेप किया है। एक याचिका पर विचार करते हुये न्यायालय का कहना है कि चुनावी बॉन्ड के जरिये हासिल किए गए चुनावी चंदे का हिसाब अब सीलबंद लिफाफे में निर्वाचन आयोग को सौंपा जाएगा। चुनावी चंदे में पारदर्शिता का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। राजनीति में शुद्धता की चाहने वाले लोगों के लिए गत वर्ष की दो खबर और उनका संयोजन भी एक चौकाने वाला समीकरण प्रस्तुत करता है। पहली खबर के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा उच्चतम न्यायालय में दिये गए शपथ पत्र के अनुसार देश में कुल 1765 सांसद एवं विधायक हैं जिनके ऊपर विभिन्न अदालतों में 3045 आपराधिक मामले दर्ज़ हैं। यदि इसका औसत निकाला जाता है तो यह प्रत्येक पर दो मुक़दमे का बैठता है। दूसरी खबर में 1976 के बाद से राजनैतिक दलों को मिलने वाले विदेशी ...
मुस्लिम वृद्धि दर बनाम अल्पसंख्यक हिन्दू

मुस्लिम वृद्धि दर बनाम अल्पसंख्यक हिन्दू

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भारत में एक सेकुलर जमात है जो सेकुलर के नाम पर सिर्फ अल्पसंख्यकों का तुष्टीकरण करती है। अल्पसंख्यकों को वोट बैंक मानकर राष्ट्रवाद की भावना पर प्रहार करती है। इस जमात को न तो भारत की एकता और अखंडता से कोई मतलब होता है और न ही नागरिकों को मिलने वाले अधिकारों से। यह जमात अल्पसंख्यकों की राजनीति तो करती है किन्तु अल्पसंख्यक शब्द को ठीक से पारिभाषित करने की मांग नहीं करती। जिन प्रदेशों में हिन्दू अल्पसंख्यक हैं उनके लिए यह जमात किसी अधिकार की मांग नहीं करती। यह जमात बांग्लादेशी घुसपैठियों के मानवाधिकार हनन पर तो आवाज़ बुलंद करती है किन्तु हिन्दू अल्पसंख्यक इनके मानवाधिकार के दायरे से पीछे छूट जाते हैं। और शिकायत सिर्फ इस जमात से ही क्यों की जाये। पांच साल सत्ता में रही राष्ट्रवादी सरकार ने भी हिन्दू अल्पसंख्यक विषय पर खामोशी रखी। हालांकि, चालीस साल से रह रहे बांग्लादेशियों पर सरकार द्वारा निशान...
राष्ट्रवाद की आंधी से हिन्दुत्व के तूफान तक

राष्ट्रवाद की आंधी से हिन्दुत्व के तूफान तक

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अमित त्यागी 2019 का चुनाव और उसके परिणाम एक रोचक अंत का इशारा कर रहे हैं। एक ओर माया मुलायम ने एक साथ एक मंच पर आकर अपने अपने समर्थकों को एक साथ आने का संकेत दे दिया है तो दूसरी तरफ शिवपाल यादव और प्रवीण तोगडिय़ा के दल कुछ खास करते नहीं दिख रहे हैं। कांग्रेस महागठबंधन के साथ नहीं है फिर भी वह आंतरिक रूप से गठबंधन के साथ ही है। भाजपा को हराने के लिए सभी दल अंदर ही अंदर एक दूसरे का सहयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही यह चुनाव लगातार बड़बोले नेताओं के बयानों के आधार पर मीडिया की सुर्खियां बन रहा है। आज़म खान ने जयाप्रदा पर खाकी रंग का हमला किया तो उनके बेटे ने अनारकली कहकर खुद को बयान बहादुर साबित किया। इससे बौखलाए अमर सिंह ने आज़म खान पर ताबड़तोड़ जुबानी हमले किये। दोनों ही तरफ से गरिमा को तार तार किया गया। इसी क्रम में मायावती के द्वारा मुलायम सिंह के सामने गेस्ट हाउस कांड याद करके पहले उन...
नरेंद्र मोदी का भला ही कर रहे हैं राहुल गांधी

नरेंद्र मोदी का भला ही कर रहे हैं राहुल गांधी

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देश में आम चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। सभी सियासी पार्टियां अपने-अपने हिसाब से चुनाव प्रचार में लगी हैं। लेकिन इस बार चुनाव प्रचार की धार पूरी तरह बदली-बदली नजऱ आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी नीत सत्तारूढ़ गठबंधन की पार्टियां जहां पांच साल में किए गए विकास के नाम पर और अगले पांच साल के लिए तय किए गए लक्ष्यों के आधार पर जनता से वोट मांग रही हैं, वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां जाति और धर्म के नाम पर वोट की जुगाड़ में लगी हैं। चुनाव जीतने की होड़ में इस बार जो शब्द बाण चलाए जा रहे हैं, उनमें तर्क, तथ्यपरकता और मर्यादा तक का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। चुनाव आयोग ने हालांकि कुछ सख्ती दिखाई है, लेकिन किसी को नीचा दिखाने के लिए व्यक्तिगत संयम का निर्माण आयोग किसी भी स्तर पर नहीं कर सकता। जिस तरह हांडी के चावल पक गए हैं या न...
राजनीति एक व्यवसाय

राजनीति एक व्यवसाय

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आज राजनीति सेवा का पर्याय नहीं, एक व्यवसाय बन गयी है। राजनीति ने पूरी तरह से व्यवसायीकरण का रूप ले लिया है। आज राजनीति जगत में अपराधी भ्रष्टाचारी शिरोमणि ही आसन जमाये दिखते हैं। कहीं कोई भुला भटका साफ सुथरी छवि का व्यक्ति नजर भी आता है तो गहराई में जाने पर हम पाते हैं कि वह भी इनकी गिरफ्त में है। लेकिन व्यक्ति सत्य के मार्ग से क्यों भटक जाता है, यदि हम इसके मूल को खोजने का प्रयास करें तो निष्कर्ष निकलेगा कि जीवन में सबसे घातक अहम को पालना और उसका पोषण करना है। उच्य से उच्य पदों पर आसीन व्यक्ति जब अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरी करना चाहता है तो अपने सिद्धांतों और आदर्शों को एक किनारे रख देता है। धर्म, राजनीति, साहित्य सभी क्षेत्रों के शिखर पुरुष यश की भूख की चपेट में है। आज के नेता हो या धर्मात्मा सबका हाल एक ही है। मौका मिले तो वे अपनी आगे आने वाली छह पीढिय़ों के लिए भी सम्पत्ति इक_ी कर ले। ...
पाक में क्यों बलूचिस्तान हो गया पंजाबी विरोधी

पाक में क्यों बलूचिस्तान हो गया पंजाबी विरोधी

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पाकिस्तान में विगत दिनों अशांत बलूचिस्तान सूबे में अज्ञात बंदूकधारियों ने एक राजमार्ग पर एक बस से यात्रियों को जबर्दस्ती उतार कर उनमें से 14 की गोली मार कर हत्या कर दी। सेना जैसी वर्दी पहने बंदूकधारियों ने कराची और ग्वादर के बीच चलने वाली पांच से छह बसों को रोका, यात्रियों के पहचान पत्रों की जांच की और फिर अपना खूनी खेल चालू कर दिया। हालांकि पाकिस्तान सरकार का कहना है कि वो नृशंस हत्याकांड की जांच कर रही है। दोषियों को तुरंत पकड़ लिया जाएगा। ये सब रस्मे-वादों की बातें हैं। पर हकीकत सचमुच में बड़ी भायवह है। सरहद के उस पार से छन-छनकर आ रही जानकारी से पता चला है कि मारे गए सभी अभागे बस यात्री मूलत:  पंजाबी मुसलमान थे। हत्यारों ने बस को रोककर मुसाफिरों से उनके पहचान पत्र मांगे। उन्होंने गैर-पंजाबियों को छोड़ दिया, पर पंजाबियों को निर्ममता पूर्वक मार डाला। पाकिस्तान सरकार पंजाबियों के इस कत्लेआ...
प्रियंका के गुनहगारों को माफ कर कांग्रेस ने गुनाह किया

प्रियंका के गुनहगारों को माफ कर कांग्रेस ने गुनाह किया

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श्रीमती प्रियंका चतुर्वेदी अब कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता नहीं रहेंगी।  अब वे शिवसेना का वह चेहरा हैं, जो अब तक टीवी चैनलों की डिबेट में कांग्रेस पर लगने वाले आरोपों से अपनी पार्टी का बचाव करती रही हैं। उन्होंने कांग्रेस से अपनी उपेक्षा और बदतमीजी करने वालों को माफ़ करने के लिए पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया। पार्टी के नेताओं की सही-गलत हर तरह की बयानबाजी पर कांग्रेस का बचाव करने वाली प्रियंका चतुर्वेदी इस समय खुद कांग्रेस में अकेली पड़ गई थी। नेताओं द्वारा दूसरी पार्टियों की महिलाओं पर तो लांछन लगाने की घटनाएं चुनावी माहौल में आप खूब देख रहे होंगे, लेकिन प्रियंका चतुर्वेदी से तो कांग्रेस के ही नेताओं ने बदतमीजी की और उन्हें माफी भी मिल गई। हैरानी तो इस बात की है कि माफी देने वाला शख्स कोई और है। नाम है ज्योतिरादित्य सिंधिया। जैसा नाम, वैसा काम। भले ही अब देश में लोकतंत्र हो, पर ज...
इस्लाम बनाम ईसाई

इस्लाम बनाम ईसाई

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जुम्मे की नमाज़ पढ़ी जा रही थी और न्यूज़ीलैंड में एक ईसाई आतंकवादी ने मस्जिदों को निशाना बनाया। बात लगभग एक महीने पहले की है। उसके बाद इंग्लैंड के बर्मिंघम इलाके की कुछ मस्जिदों पर कुछ लोगों ने हथौड़े चला दिए। बयान आया कि मुसलमान जनता डर कर जी रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2016-17 में कुल 80,393 हेट क्राइम, यानी घृणाजन्य अपराध के मामले सामने आए जो कि 2015-16 में 62,518 थे। न्यूज़ीलैंड के ईसाई आतंकी ने साफ शब्दों में लिखा था, ''मुस्लिम शरणार्थी हमारी भूमि पर अतिक्रमण कर रहे हैं। यह भूमि श्वेतों की है।’’ उसने यह चिंता जताई थी कि बाहर से आए मुस्लिम अधिक प्रजनन करके पश्चिमी देशों की धार्मिक जनसांख्यिकी को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं और पश्चिमी देशों की संस्कृति व शांति भंग कर रहे हैं। उसने इस्लामी आतंक द्वारा यूरोप में मची तबाही का भी जि़क्र किया था। जब मार्च में यह हमला हुआ और 50 लो...