क्यूं दूर होते जा रहे हैं ‘किताबों’ से
(विश्व पुस्तक तथा कापीराइट दिवस-23 अप्रैल विशेष)
विलियम स्टायरान ने कभी कहा था कि ‘एक अच्छी किताब के कुछ पन्ने आपको बिना पढ़े ही छोड़ देना चाहिए ताकि जब आप दुखी हों तो उसे पढ़ कर आपको सुकुन प्राप्त हो सके’। यह बातें उनके दौर में और आज से 4-5 वर्ष पूर्व तक काफी सटीक था लेकिन आज के दौर में यदि आपने किसी पुस्तक को पढ़ कर छोड़ दिया है तो छूटा ही रह जाता है। क्यूंकि हम किताबों से परहेज करने लगे हैं लेकिन मोबाइल को रिचार्ज और चार्ज करना नहीं भूलते।
कहने का यथार्थ यह कि इन्टरनेट के इस क्रांति युग में किताबों को हम भूलते जा रहे हैं। अब पढ़ना मोबाइल तक सिमटकर रह गया है। आज जहां जायें घर हो या बाहर सभी जगह चौबीसों घंटे हाथ में मोबाइल लिए इन्टरनेट पर चैट करते या वीडियो देखते मिल जाएंगे। उन्हें यदि पुस्तक मेले में कह दिया जाए कि जाओ वहां से घुमकर आ जाओ तो पुस्तक मेले तो नहीं जाएंगे लेकिन वे किसी अच्छे...









