दक्षिण में है अलग तरह का राष्ट्रवाद
एक तरफ जहां उत्तर भारत में सर्जिकल अटैक और पाकिस्तान के अंदर घुस कर प्रहार करना राष्ट्रवाद की भावना को बलवती कर रहा है वहीं दूसरी तरफ दक्षिण के राज्यों में यह विषय चुनावी विमर्श का विषय नहीं बन पा रहा है। उत्तर भारत की राजनीति भावनात्मक रूप से चलती है तो दक्षिण के राज्यों की राजनीति विशुद्ध व्यक्तिगत स्वार्थों पर। दक्षिण के राज्यों में यह भावना पायी जाती है कि उत्तर भारतीय लोग उनका राजनीतिक अतिक्रमण करते रहते हैं। चूंकि भारत के प्रधानमंत्री अधिकतर उत्तर भारत से ही रहे हैं इसलिए उनकी इस बात को नकारा भी नहीं जा सकता है। वर्तमान में गुजरात से आने वाले प्रधानमंत्री मोदी भी बनारस से जीत कर लोकसभा में पहुंचे हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द भी उत्तर प्रदेश से आते हैं। ऐसे में दक्षिण के राज्यों में भाजपा और कांग्रेस के मुद्दे उत्तर भारत के चुनावी मुद्दों से अलग हैं। दक्षिण में अभी भी क्षे...









