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विटामिन की कमी से ग्रस्त हैं स्वस्थ दिखने वाले शहरी लोग

विटामिन की कमी से ग्रस्त हैं स्वस्थ दिखने वाले शहरी लोग

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एक नए अध्ययन से पता चला है कि भारत में स्वस्थ दिखने वाले अधिकतर शहरी लोग विटामिन की कमी से ग्रस्त हैं। हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय पोषण संस्थान के वैज्ञानिक 30-70 वर्ष के लोगों में विटामिन के स्तर का अध्ययन करने के बाद इस नतीजे पर पहुंचे हैं। इस अध्ययन में 270 प्रतिभागी (147 पुरुष और 123 महिलाएं) शामिल थे। शोधकर्ताओं ने रक्त के नमूनों की मदद से विटामिन के विभिन्न रूपों (ए, बी1, बी2, बी6, बी12, फोलेट और डी) तथा होमोसिस्टीन की मात्रा का मूल्यांकन किया है। शरीर में कोशिकीय एवं आणविक कार्यों, ऊतकों की वृद्धि और रखरखाव के लिए आवश्यक विटामिन एक प्रकार के सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं। इस अध्ययन में आधे लोग विटामिन बी2 और 46 प्रतिशत लोग विटामिन बी6 की कमी से ग्रस्त पाए गए हैं। ये परिणाम महत्वपूर्ण हैं, जो विटामिन बी2 की कमी को गंभीरता से लेने का संकेत करते हैं। हालांकि, लोग विटामिन की कमी को आमत...
आचरण से वामपंथी और भाषणो में लोकतांत्रिक

आचरण से वामपंथी और भाषणो में लोकतांत्रिक

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आपको लगता है कि ममता बनर्जी के शासन संभालने के बाद बंगाल में वामपंथी शासन समाप्त हो गया था? यही बात अखिलेश शासन काल के लिये सोच कर देखिये, क्या वह एक लोकतांत्रिक दल होने के नाते समाजवादी विचारधारा पर काम कर रहा था? यही बात मध्य प्रदेश और राजस्थान की नई सरकार के बारे में विचार कर के देखें, क्या वो गांधी जी या शास्त्री जी वाली कांग्रेस की किसी भी विचारधारा से मेल खाते हुए शासन कर रहे हैं? कर्नाटक सरकार का शासन लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करते हुए शासन चला रहा है?  इन सब पर विचार करें तो यही आभास होता है कि लोकतांत्रिक दल होने के बाद भी इनकी कार्यशैली में वामपंथ ने तेजी से पैर पसार लिये हैं। लोकतंत्र का विलाप करने वाले अक्सर ‘जनता का, जनता के लिये, जनता के द्वारा’ का नारा लगाते हैं, क्या पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, राजस्थान, मध्यप्रदेश की सत्ता के निर्णयों में इस सद्वाक्य का कोई भी आभास लगता ...
पाकिस्तान में अत्याचारों से जूझता हिन्दू…

पाकिस्तान में अत्याचारों से जूझता हिन्दू…

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यह कैसी विडंबना है कि बांग्लादेशी व म्याँमार के मुसलमानों के लिये सेक्युलर व मानवाधिकारवादी सहित देश-विदेश का मुस्लिम समाज एकजुट होकर उनके पक्ष में खड़ा रहता है। किन्तु उन प्रताड़ित पाकिस्तानी, बंग्लादेशी व कश्मीरी हिंदुओं ने क्या अपराध किया है कि जो हम हिन्दू भी उनके पक्ष में कोई आंदोलन या प्रदर्शन करने से घबराते हैं ? परिणामतः आज भी पाकिस्तान में मुस्लिम अत्याचारों से स्वाभिमानी हिन्दू अपने धर्म की रक्षार्थ अकेले ही जूझ रहें है।समाचार पत्रों से ज्ञात हुआ है कि पाकिस्तानी समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचारों के अनुसार दक्षिण सिंध के 'हाफिज सलमान' नाम के एक गाँव में 20 मार्च 2019 को रीना व रवीना नाम की दो सगी हिन्दू बहनों को अगवा करके उनको मुसलमान बनाया गया। तत्पश्चात मुस्लिम गुंडों से उन काफ़िर लड़कियों का निकाह करवाया गया। इस प्रकार जिहादियों का अपने सदियों पुराने अत्याचारी इस्लामी जनून की जक...
पित्रोदा मांगते सुबूत, खुश होगा पाक

पित्रोदा मांगते सुबूत, खुश होगा पाक

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अब कांग्रेस के वैज्ञानिक दिमाग के नाम से सुविख्यात सैम पित्रोदा ने भी भारतीय वायु सेना से पाकिस्तान में आतंकियों के ठिकानों को तबाह करने के सुबूत मांगे हैं। कभी राजीव गांधी के खासमखास करीबी रहे पित्रोदा आजकल राहुल गांधी के भी मुख्य सलाहकार बने हुए हैं। अमेरिका में लंबे समय से बसे हुए पित्रोदा अब देखना चाहते हैं, भारतीय वायुसेना के हमले में 300 से अधिक आतंकियों के मारे जाने के ठोस साक्ष्य।पित्रोदा ने कहा कि “पाकिस्तान से आए कुछ लोग” यदि आतंकी वारदात अंजाम देते हैं तो उसकी सजा पूरे पाकिस्तान को क्यों  दी जा रही है? कितने भोले बन रहे हैं पित्रोदा जी। क्या उन्हें पता नहीं कि पाकिस्तान सेना और  सरकार ही पालती है आतंकियों को?  पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और तानाशाह परवेज मुशर्रफ ने एक साक्षात्कार के दौरान यह खुले तौर पर माना भी था कि उनके कार्यकाल में भारत पर जैश-ए-मोहम्मद से आतंकी हमले करवाया...
2019 में भाजपा ही क्यों ?

2019 में भाजपा ही क्यों ?

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आप भी क्यों या क्यों नहीं के कुछ कारण बताएँ तो अवश्य ही आँखों के आगे छाया धुँधलका छँटेगा और तरक़्क़ी की राहें रौशन होंगीं | मैं न तो भाजपा का सदस्य हूँ, न कार्यकर्त्ता, फिर भी एक बार पुनः भाजपा की सरकार बनते देखना चाहता हूँ | आख़िर क्यों :- 1. भाजपा इकलौती ऐसी पार्टी है जिसकी नीति और नीयत स्पष्ट है | अतिशय तुष्टिकरण के कारण बाक़ी सभी पार्टियाँ संशयग्रस्त रहती हैं और आर-पार वाले निर्णय के वक्त में भी वोट की चिंता में 'गिरगिट' बनी नज़र आती है | 2. भाजपा के अलावा किसी और दल के पास साहसिक निर्णय लेने वाला राष्ट्रवादी नेतृत्व नहीं है |पहली बार किसी सरकार ने दूसरे देश की सीमा में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक करने की हिम्मत दिखाई | 3. कर्मठता, ईमानदारी, कर्तव्यपरायणता, वक्तृत्व-कौशल, अंतरराष्ट्रीय प्रभाव एवं सूझ-बूझ , निष्कलंकता, पार्टी व कार्यकर्त्ताओं को अनुशासित रखने की क्षमता- ऐसी तमाम कसौटि...
Driving a Dangerous Feat on Indian Roads

Driving a Dangerous Feat on Indian Roads

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If you drive safely on roads of Indian cities it is a feat for you. A newspaper report says that in Delhi one out of ten road accidents happen in night due to headlight glare that almost blinds driver coming from the opposite direction. The Motor Vehicle Act prohibits use of headlight at night in city driving. But who cares for the driving rules and for that matter the law of the land. There is far more dangerous driving in day time in Delhi. At a Global Conclave of the IISSM on safety and security held in Delhi in November last one of the topics discussed was ‘Defensive Driving’ by a panel which included distinguished road safety experts. There is a tendency to unfasten the seat belt as you slow down your car before bringing it to a halt. One expert suggested that this practice is not go...
है अंधेरी रात, पर दीवा जलाना कब मनाना है

है अंधेरी रात, पर दीवा जलाना कब मनाना है

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करोङों हिंदुस्तानियों की तरह नाना ने भी सूखे का संत्रास देखा; आत्महत्या कर चुके किसानों के परिवार वालों के दर्द भरे साक्षात्कार सुने। मैने भी सुने। मेरी हमदर्दी कलम तक सीमित रही, किंतु नाना ने कहा कि टेलीविजन पर देखे दृश्यों से उनका दम घुटने लगा; उनकी नींद उङ गई। उन्होने सोचा - ''जो किसान कभी राजा थे, उनके पास आज न अपने मवेशी के लिए चारा-पानी है और न अपने लिए। मैं जो कर सकता हूं; वह करूं।''  जो मुट्ठी भर धन नाना के पास था, उसे लिया और मकरन्द के कहने पर 15-15 हजार रुपये करके 250 विधवाओं में बांट आये। लेकिन नाना इससे संतुष्ट नहीं हुए; सोचा कि यह उपाय नहीं है। असली उपाय है कि पानी के खो गये स्त्रोत को ढूंढ निकालो और उसे जिंदा कर दो। लोगों को साथ जोङकर खुद श्रम करो; पसीना बहाओ। महसूस करो कि कैसे कोई किसान तपती धूप और सख्त मिट्टी से जूझकर हमारे लिए अन्न पैदा करता है। नाना ने इसके लिए 'नाम फाउण...
New discovery paves way for ‘silicon of the future’

New discovery paves way for ‘silicon of the future’

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Just imagine taking two extremely ultra-thin materials with different properties and placing one on top of the other, and obtaining a new a material with hybrid properties. This is what an international group of researchers have done with two atomic level semiconductor materials and have got a new material whose properties are not only hybrid but also tunable. The materials are nothing but crystalline sheets of atoms – measuring one millionth of a human hair in thickness. Scientists call such atomic materials two-dimensional (2D). The two atomic layers are held together not by any physical or chemical reaction but due to a force known as ‘van der Waals interaction’. The materials used in the study are monolayers of molybdenum diselenide and tungsten disulfide. Since the two layer...
क्या गंगा को सिर्फ चुनावी वाहन मानने वालों को अपना प्रतिनिधि चुनें?

क्या गंगा को सिर्फ चुनावी वाहन मानने वालों को अपना प्रतिनिधि चुनें?

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2014 के लोकसभा चुनाव को याद कीजिए। ’’मैं आया नहीं हूं। मां गंगा ने बुलाया है।’’ मोदी जी का यह वाक्य याद कीजिए। कहना न होगा कि गंगा के सहारे चुनावी नौका पार करना, 2014 के प्रधानमंत्री पद के दावेदार श्री मोदी का एजेण्डा था। 2019 में अब यह राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने की अपील करने वाली प्रियंका गांधी का एजेण्डा है। प्रियंका ने लोगों को लिखे खुले खत में कहा है, ’’गंगाजी उत्तर प्रदेश का सहारा है और मैं भी गंगा जी के सहारे हूं।’’ मोदी जी ने पांच साल तक गंगा के हितों की जमकर अनदेखी की। गंगा की अविरलता-निर्मलता के अनशन करते हुए स्वामी सानंद की मौत हो गई। कुछ पता नहीं कि संत गोपालदास कहां और कैसे लापता हो गए ? स्वामी आत्मबोधानन्द, आज भी संघर्ष कर रहे हैं। मातृ सदन के स्वामी शिवानंद सरस्वती जी अपेक्षा कर रहे हैं कि गंगा संबंधी मांगों पर निर्णस करे। निर्णय करना तो दूर, मोदी जी ने इनसे बात करना ...
नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली चली हज को

नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली चली हज को

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पाठकों को याद होगा कि जब चंद्रशेखर जी प्रधानमंत्री थे, तो हमारे देश का सोना इंग्लैंड के पास गिरवी रखकर, तेल और गैस के बिल का भुगतान किया गया था। दूसरे शब्दों में यह कहा जाऐ कि विकासशील देशों की इकॉनोमी और महगाई दर पैट्रोल और गैस की इंटरनेशनल कीमतों से जुड़ी रहती है। उदाहरण के तौर पर हमारे देश का करीब आधा जीडीपी क्रूड आयल और गैस के आयात में चले जाता है। स्पष्ट शब्दों में कहा जाए, तो आयल और गैस के आयात के बदले में हर साल ‘मिडिल ईस्ट’ के देशों को करीब दस लाख करोड़ रूपये की भारी भरकम रकम भारत अदा करता है। पिछले पांच साल में मोदी सरकार ने करीब 50 लाख करोड़ रूपये इस मद में खर्च किये हैं। अब प्रश्न ये पैदा होता है कि क्या ये पैसा बचाया जा सकता था? क्या हमारे देश में तेल और गैस के भंडार पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं थे? तो इसका उत्तर है कि हमारे देश में तेल और गैस के भंडार पर्याप्त मात्रा से भी ज्...