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अतीक के अतीत होने पर भविष्य की राजनीति

अतीक के अतीत होने पर भविष्य की राजनीति

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
यूपी में नो दंगा, नो कर्फ्यू यहां सब चंगा !!मृत्युंजय दीक्षितउत्तर प्रदेश का कुख्यात माफिया अतीक अहमद अपने पीछे अपराध की दिल दहलाने वाली कहानियां, करोड़ों की संपत्ति और बिखरा साम्राज्य छोड़कर अतीत हो चुका है किन्तु प्रदेश का दुर्भाग्य है कि उसके राजनैतिक हमदर्द आज भी जीवित हैं और एक खतरनाक माफिया की मौत पर अपनी राजनीति चमकाने के लिए उसे शहीद और मासूम बता रहे हैं ।माफिया अतीक अहमद के समर्थन में बिहार की राजधानी पटना में अलविदा की नमाज के बाद नारेबाजी हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ नारे लगाये गये और बदला लेने की बात तक कही गई। अतीक के नाम पर बिहार में मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति अपनी सारी सीमाओं को लांघ रही है क्योंकि नारेबाजी के समय वहां की पुलिस घटनास्थल पर झांकने तक नहीं पहुंची । बिहार में नारेबाजी के पीछे सबसे बड़ी ताकत मुख्यमंत्री और उप म...
भारतीय संस्कारों को अपनाकर भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक हर क्षेत्र में हो रहे हैं सफल

भारतीय संस्कारों को अपनाकर भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक हर क्षेत्र में हो रहे हैं सफल

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, संस्कृति और अध्यात्म
अमेरिकी जनगणना ब्यूरो (यूएस सेंसस ब्यूरो) द्वारा अमेरिका में निवास कर रहे विभिन्न देशों के मूल के अमेरिकी नागरिकों की औसत आय एवं अन्य कई मानदंडो पर जारी की गई जानकारी के अनुसार अमेरिका में भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों की वार्षिक औसत आय 119,858 अमेरिकी डॉलर है, जो अमेरिका में निवासरत समस्त अन्य देशों के मूल के अमेरिकी नागरिकों की औसत आय में सबसे अधिक है। दूसरे क्रमांक पर ताईवान मूल के अमेरिकी नागरिक आते हैं जिनकी वार्षिक औसत आय 95,736 अमेरिकी डॉलर आंकी गई है। इसी प्रकार चीनी मूल के अमेरिकी नागरिकों की वार्षिक औसत आय 81,497 डॉलर, जापानी मूल के अमेरिकी नागरिकों की वार्षिक औसत आय 80,036 एवं अमेरिकी मूल के गोरे नागरिकों की वार्षिक औसत आय 65,902 आंकी गई है। इसी प्रकार, गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे अमेरिकी मूल के नागरिकों की संख्या अमेरिका की कुल जनसंख्या का 13 प्रतिशत है, एशिया के स...
हिन्दू समाज के अस्तित्व की रक्षा एवं उसकी प्रगति के लिए जाति व्यवस्था को समाप्त करना जरूरी

हिन्दू समाज के अस्तित्व की रक्षा एवं उसकी प्रगति के लिए जाति व्यवस्था को समाप्त करना जरूरी

विश्लेषण, सामाजिक
डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर की 132 वीं जयंती सामाजिक पुर्ननिर्माण पर उनका दृष्टिकोण प्रो. सुनील गोयल (लेखक प्रख्यात समाज वैज्ञानिक एवं स्तंभकार है तथा वर्तमान में प्राध्यापक एवं अधिष्ठाता, समाज विज्ञान एवं प्रबंधन अध्ययनशाला के बतौर डॉ. बी. आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय, डॉ. अम्बेडकर नगर (महू), जिला इन्दौर, मध्यप्रदेश, भारत में पदस्थ है.) सारांश आम्बेडकर की सामाजिक संरचना का प्रारूप एक न्यायपूर्ण सामाजिक व्यवस्था जो व्यक्ति को स्वतंत्रता और आत्म विकास का पर्याप्त अवसर प्रदान कर सकें और जो सामाजिक समानता एवं भातृत्व के सिद्धांत की स्थापना करती हो, पर आधारित है। वे ऐसी अर्थव्यवस्था के पक्षधर नहीं थे जिसमें व्यक्ति का व्यवसाय उसकी योग्यता के आधार पर न होकर जन्म पर निश्चित होता हो, एक समूह दूसरे समूह का परम्परात्मक आधार पर आर्थिक शोषण करता हो और जो श्रम स्वातंत्...
पुस्तक संस्कृति की जीवंतता से उन्नत जीवन संभव

पुस्तक संस्कृति की जीवंतता से उन्नत जीवन संभव

TOP STORIES, विश्लेषण, साहित्य संवाद
-ललित गर्ग- हर साल 23 अप्रैल को दुनियाभर में पुस्तक पढ़ने की प्रेरणा देने एवं पुस्तक संकृति को जीवंत बनाये रखने के लिये विश्व पुस्तक दिवस के रूप में मनाया जाता है, इसे कॉपीराइट डे भी कहा जाता है। इस दिवस को किताबें पढ़ने, प्रकाशन और कॉपीराइट के लाभ को पहचानने और बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। इस दिन कई विश्वप्रसिद्ध लेखकांे का जन्मदिवस या पुण्यतिथि होती है। विलियम शेक्सपियर, मिगुएल डे सर्वेंट्स और जोसेप प्लाया का इसी दिन निधन हुआ था, जबकि मैनुएल मेजिया वल्लेजो और मौरिस ड्रून इसी दिन पैदा हुए थे। यूनेस्कों ने 23 अप्रैल 1995 को इस दिवस को मनाने की शुरुआत की थी। पैरिस में यूनेस्को की एक आमसभा में फैसला लिया गया था कि दुनियाभर के लेखकों का सम्मान करने, उनको श्रद्धांजली देने और किताबों के प्रति रुचि जागृत करने के लिए इस दिवस को मनाया जाएगा।पुस्तकों को ज्ञान का बाग भी कहा जाता है। यदि कोई...
युगांडा से सूडान संकट तक:बदलती भारतीय विदेश नीति

युगांडा से सूडान संकट तक:बदलती भारतीय विदेश नीति

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, समाचार
आर.के. सिन्हा सूडान में सेना और अर्धसैनिक बल के बीच चल रहे भीषण गृहयुद्ध के चलते वहां हालात तो बद से बदतर होते चले जा रहे हैं। ऐसे में वहां फंसे हजारों भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाने को लेकर सारा देश चिंतित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सूडान में फंसे भारतीयों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकासी के लिए विदेश मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देश दे दिए हैं । मतलब यह कि अब सरकार एक्शन मोड में आ गई है। यह बदले हुए मजबूत भारत का नया चेहरा है। अब जहां पर भी भारतवंशी या भारतीय संकट में होते हैं, तो भारत सरकार पहले की तरह हाथ पर हाथ धर कर नहीं बैठती। आपको याद ही होगा कि रूस-यूक्रेन जंग के कारण हजारों भारतीय मेडिकल छात्र-छात्राएं यूक्रेन में फंस गए थे। उन्हें भारत सरकार तत्काल सुरक्षित स्वेदश लेकर आई। भारत के हजारों विद्यार्थी यूक्रेन में थे। वे वहां पर मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग औ...
सोशल मीडिया के खतरों से कैसे बचें ?

सोशल मीडिया के खतरों से कैसे बचें ?

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
विनीत नारायणजब देश में सोशल मीडिया का इतना प्रचलन नही था तब जीवन ज्यादा सुखमय था। तकनीकी की उन्नति ने हमारेजीवन को जटिल और तानवग्रस्त बना दिया है। आज हर व्यक्ति चाहे वो फुटपाथ पर सब्जी बेचता हो या मुंबई केकॉर्पोरेट मुख्यालय में बैठकर अरबों रूपये के कारोबारी निर्णय लेता हो, चौबीस घंटे मोबाइल फ़ोन और सोशलमीडिया के मकड़जाल में उलझा रहता है। जिसका बेहद ख़राब असर हमारे शरीर, दिमाग और सामाजिक संबंधोंपर पड़ रहा है।नई तकनीकी के आगमन से समाज में उथल पुथल का होना कोई नई बात नही है। सामंती युग से जब विश्वऔद्योगिक क्रांति की और बड़ा तब भी समाज में भरी उथल पुथल हुई थी। पुरानी पीढ़ी के लोग जीवन में आए इसअचानक बदलाव से बहुत विचलित हो गए थे। गाँव से शहरों की और पलायन करना पड़ा, कारखाने खुले औरशहरों की गन्दी बस्तियों में मजदूर नारकीय जीवन जीने पर विवश हो गये। ये सिलसिला आज तक रुका नही है।भारत जैसे देश में...
आंबेडकरवाद ने कभी नहीं खोया अपना स्वरूप

आंबेडकरवाद ने कभी नहीं खोया अपना स्वरूप

TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
प्रो. सुनील गोयल रूढ़िवादी, शोषित, अमानवीय, अवैज्ञानिक, अन्याय एवं असमान सामाजिक व्यवस्था से दुखी मानवों की इसी जन्म में आंदोलन द्वारा मुक्ती प्रदान कर, समता–स्वतंत्र–बंधुत्व एवं न्याय के आदर्श समाज में मानव और मानव (स्त्री पुरुष समानता भी) के बीच सही सम्बन्ध स्थापित करने वाली नयी क्रांतिकारी मानवतावादी विचारधारा को अम्बेडकरवाद कहते है।जाति-वर्ग, छूत-अछूत, ऊँच-नीच, स्त्री-पुरुष, शैक्षिक व्यवस्था, रंगभेद की व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाकर एक न्याययुक्त, समानतायुक्त, भेद-भाव मुक्त, वैज्ञानिक, तर्कसंगत एवं मानवतावादी सामाजिक व्यवस्था बनाने वाले तत्वज्ञान को अम्बेडकरवाद कहते है।जिससे मानव को इसी जन्म में रूढ़िवादी जंजीरो से मुक्त किया जा सके। व्यक्ति विकास के अंतिम लक्ष्य को प्राप्त करने की दृष्टी से समता-स्वतंत्रता-बंधुत्व और न्यायिक् इन लोकतंत्र निष्ठ मानवीय मूल्यों को आधारभूत ...
यदि लैंगिकता के आधार पर स्त्री-पुरुष का निर्धारण नहीं होगा तो कितनी अव्यवस्था फैल जाएगी

यदि लैंगिकता के आधार पर स्त्री-पुरुष का निर्धारण नहीं होगा तो कितनी अव्यवस्था फैल जाएगी

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
इसका शायद अनुमान भी यह टिप्पणी करने वाले जजों को नहीं है।कल कोई पुरुष कहेगा कि● मैं ऐसा मानता हूंँ कि मैं स्त्री हूँ और मेट्रो ट्रेन में महिला डिब्बे में सवार हो जाएगा, तो उसे किस कानून के तहत रोकेंगे?● किसी ने कहा कि वह तो स्वयं स्त्री मानता है... कोर्ट उसे इस आधार पर छोड़ देगी कि 'यह स्त्री है', दूसरी स्त्री का बलात्कार नहीं कर सकती?● यदि कोई पति-पत्नी तलाक के लिए अदालत पहुंचे, पत्नी भरण-पोषण मांगा और पति ने कह दिया कि'मैं तो स्वयं को स्त्री मानता हूँ।' तो क्या होगा?चूंकि स्वयं सुप्रीमकोर्ट कह चुका है कि लैंगिकता के आधार पर स्त्री-पुरुष का निर्धारण नहीं हो सकता, तो भला उस महिला को खुद को महिला मानने वाले पति से भरण-पोषण कैसे दिलाएगा?● यदि कोई पुरुष कहेगा कि 'मैं स्वयं को गर्भवती स्त्री मानता हूँ, इसलिए मुझे मातृत्व अवकाश दो, तो क्या उसे मातृत्व अवकाश मिल जाएगा?जज साहब ये SSC की रीजनिंग ...
साभार…ज्योतिरादित्य_सिंधिया

साभार…ज्योतिरादित्य_सिंधिया

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साभार...#ज्योतिरादित्य_सिंधिया_ने_राहुल_गन्दगी_की_सजा_के_बाद_उसे_काग्रेस_में_मिल_रही_विशेष_तवज्जो_पर हमला करते हुए कहा "पार्टी न्याय पालिका पर दबाव डालने और प्रासंगिक बने रहने की हर संभव कोशिश कर रही है सिंधिया ने काग्रेस पर हमला करते हुए कहा पार्टी एक पिछड़े वर्ग के पूरे समुदाय को चोर कहती है सैनिक की वीरता के प्रमाण मांगती है ये तक बयान दिया काग्रेस ने कि हमारे जवानों की चीन द्वारा पिटाई की गई है ऐसी पार्टी की एक विचार धारा बची है और वो है देशद्रोह व देश के विरुद्ध कार्य करने की विचारधारा कुछ लोग काग्रेस में "प्रथम श्रेणी के नागरिक" हैं जिस लिए काँगी नेता अलग कानून की मांग कर रहे हैं"...?पवन खेड़ा जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी के स्वर्गीय पिता के लिए अपमानजनक शब्द बोलने में आगे रहता है,मोदी को कह रहा है कि हम मोदी को दोस्ताना सलाह देंगे कि जिस व्यक्ति को राहुल गन्दगी और काग्रेस ने इतना...
माफियाँ अतीक अहमद और अशरफ की हत्या सिस्टम पर भी खड़ा करती है कई सवाल ?

माफियाँ अतीक अहमद और अशरफ की हत्या सिस्टम पर भी खड़ा करती है कई सवाल ?

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
माफियाँ अतीक अहमद और अशरफ की हत्या सिस्टम पर भी खड़ा करती है कई सवाल ? डॉ. अजय कुमार मिश्राउत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पुरे देश में माफियाँ अतीक अहमद और अशरफ की हत्या जबरजस्त चर्चा का विषय बना हुआ है | इन दोनों की हत्या में शामिल तीनों हत्यारों की पुलिस रिमांड मिल चुकी है और अब आगे उनसे पूछ-ताछ करके चार्जशीट दायर की जाएगी | अतीक अहमद के अब कई कारनामे भी सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग में चल रहें है | उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ भी कार्यवाही के मूड में सरकार दिख भी रही है | कई मीडिया समूह ने अतीक की चार दशकों से अधिक समय की यात्रा का मानों सजीव प्रसारण ही कर दिया हो, जबकि किसी समय अनेकों मीडिया हाउस अतीक अहमद के खिलाफ खबर छापने से भी बचते रहे | एक व्यक्ति जिसके आगे बड़े से बड़े लोग घुटने टेकने पर विवश हुए | एक दो नहीं बल्कि अनेकों आरोप और विवाद से इतने अधिक लोग पीड़ित रहे है की चार दशक से अधिक समय व...