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नफरती सोच एवं हेट स्पीच पर न्यायालय की सख्ती

नफरती सोच एवं हेट स्पीच पर न्यायालय की सख्ती

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
 ललित गर्ग  राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक ताने-बाने को ध्वस्त कर रहे जहरीले भाषणों की समस्या दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। संकीर्णता एवं साम्प्रदायिकता का उन्माद एवं ‘हेट स्पीच’ के कारण न केवल विकास बाधित हो रहा है बल्कि देश की एकता एवं अखण्डता भी खण्ड-खण्ड होने के कगार पर पहुंच गयी है। अब तो ऐसा भी महसूस होने लगा है कि देश की दंड व्यवस्था के तहत जहां ‘हेट स्पीच’ को नये सिरे से परिभाषित करने की आवश्यकता है वहीं इस समस्या से निपटने के लिए ‘हेट स्पीच’ को अलग अपराध की श्रेणी में रखने के लिए कानून में संशोधन का भी वक्त आ गया है? राजनेताओं एवं तथाकथित धर्मगुरुओं के नफरती, उन्मादी, द्वेषमूलक और भड़काऊ भाषणों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने एक बार फिर कड़ी टिप्पणी की है। एक मामले पर दो दिनों तक चली सुनवाई में अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा कि ऐसे नफरती भाषणों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई ...
बड़ी पुरानी युद्ध नीति है कि युद्ध जीतने के लिए, पहले हमला करदो

बड़ी पुरानी युद्ध नीति है कि युद्ध जीतने के लिए, पहले हमला करदो

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बड़ी पुरानी युद्ध नीति है कि युद्ध जीतने के लिए, पहले हमला करदो और इससे पहले कि सामनेवाला सम्भले दूसरा हमला और लगातार पहल अपने हाथ में रखो।विरोधी दल जो स्वयं आकंठ भ्रष्टाचार की दल दल में डूबे हुऐ हैं, यही े्््करना चाह रहे हैं। अड़ानी के मामले में और तो कुछ मिला नहीं, बस शेयर मंदी होने पर चिल्लाहट मचाये हुऐ हैं और जो बेईमानियाँ खुद की हैं, इससे पहले कि आरोप इन पर आये, मोदीजी को आरोपित कर रहे हैं।भारत में १९४७ से २००७ तक के वर्षों में कुल बैंक क़र्ज़ा १६ बिलियन का था। जब सोनिया की सरपस्ती में मन मोहन सिंह की हुकूमत आयी तो २०१४ तक( मोदीजी के समय आने से पहले तक) केवल ७ वर्ष में बढ़ कर ५२ लाख करोड़ हो गया। ६० वर्ष में १८ लाख करोड़ और केवल ८ वर्ष में ३४ लाख करोड़ बढ़ गया। सोनिया का हुक्म होता था और चिदंबरम वित्त मंत्री जी का फ़ोन पर हुक्म जाता था और लोन बढ़ जाता था। मेहुल चौकसी, ललित मोदी और नी...
राहुल गांधी को गुस्सा क्यों आता है?

राहुल गांधी को गुस्सा क्यों आता है?

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-बलबीर पुंज एक हालिया प्रेसवार्ता में पत्रकार के एक प्रश्न पर कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी ने अपना आपा खो दिया। आपराधिक मानहानि मामले में अदालत से दो वर्षीय सज़ा मिलते ही अपनी सांसदी निरस्त होने और इसपर जारी राजनीति को लेकर राहुल से, वर्षों से कांग्रेस कवर कर रहे टीवी-पत्रकार ने प्रश्न किया— "मोदी-उपनाम पर उनकी टिप्पणी को भाजपा 'ओबीसी का अपमान' बता रही है।" इसपर झुंझलाकर राहुल ने कह दिया, "...आप... बीजेपी का सिंबल सीने पर लगा लीजिए, तब मैं आपको उसी के अनुसार जवाब दूंगा। पत्रकार होने का ढोंग मत कीजिए।" इसके बाद थोड़ा ठहरकर राहुल ने कहा, "हवा निकल गई"। सार्वजनिक रूप से राहुल द्वारा इस प्रकार का अशोभनीय व्यवहार, कोई पहला मामला नहीं है। सुधी पाठकों को स्मरण होगा कि कैसे सितंबर 2013 में राहुल ने कांग्रेसी प्रेसवार्ता में अचानक पहुंचकर अपनी ही सरकार द्वारा पारित एक अध्यादेश को बतौर ...
बच्चों को बेचने वाला संवेदनहीन समाज

बच्चों को बेचने वाला संवेदनहीन समाज

विश्लेषण, सामाजिक, साहित्य संवाद
ललित गर्ग झारखण्ड में एक बच्चे को जन्म देने के तुरंत बाद कथित रूप से साढ़े चार लाख में बेच दिए जाने की शर्मनाक घटना ने संवेदनहीन होते समाज की त्रासदी को उजागर किया है। जहां इस घटना को मां की संवेदनहीनता और क्रूरता के रूप में देखा जा सकता है, वहीं आजादी के अमृत काल में भी मानव-तस्करी की घिनौनी मानसिकता के पांव पसारने की विकृति को सरकार की नाकामी माना सकता है। सरकार को बच्चों से जुड़े कानूनों पर पुनर्विचार करना चाहिए एवं बच्चों के प्रति घटने वाली ऐसी संवेदनहीनता की घटनाओं पर रोक लगाने की व्यवस्था की जानी चाहिए।झारखण्ड के चतरा में जिस बच्चे को साढ़े चार लाख रुपये में बेचे जाने की खबर आई, उसमें मां के हाथ में एक लाख रुपए आए। बाकी के साढ़े तीन लाख रुपये बिचौलियों या दलालों के हाथ लगे। चूंकि इसकी सूचना पुलिस तक पहुंच गई और समय रहते सक्रियता भी दिखी, इसलिए बच्चे को बरामद कर लिया गया और कई आरो...
जान के दुश्मन बनते आवारा कुत्ते

जान के दुश्मन बनते आवारा कुत्ते

TOP STORIES, राज्य, विश्लेषण, सामाजिक
भारत के मीडिया में लगातार ‘आवारा कुत्तों का खतरा’ सुर्खियों में रहता है। पिछले पांच वर्षों से, 300 से अधिक लोग - ज्यादातर गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चे - कुत्तों द्वारा मारे गए हैं। 2017 के एक अध्ययन से पता चला है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेघर कुत्ते भी वन्यजीवों के लिए विनाशकारी हो सकते हैं। इसके बावजूद इन खबरों के प्रति समाज बेसुध बना रहता है। कभी-कभार यह जड़ता कुछ भयावह घटनाओं के साथ टूट जाती है। राज्यों, केंद्र, न्यायपालिका, नगर पालिका और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा इस संकट की स्वीकृति के बावजूद यह समस्या बढ़ती ही जा रही है। -प्रियंका सौरभ कुत्तों का मानव के विकास क्रम के साथ साहचर्य का एक अनूठा संबंध रहा है। यह उनके कल्याण के लिए जिम्मेदार होने की नैतिक दुविधा इंसान के सामने पैदा करता है, लेकिन इसके अपने खतरे भी हैं क्योंकि कुत्तों का विकास भेड़िये और उसकी प्रवृत्ति से जुड़ा ...
वर्तमान में महिलाओं की स्थिति व भूमिका

वर्तमान में महिलाओं की स्थिति व भूमिका

EXCLUSIVE NEWS, विश्लेषण, सामाजिक
नवरात्रि भारत भूमि पर मनाये जाने वाले प्रमुख त्यौहारों में से एक है. इसमें नौ दिन तक माँ दुर्गा के नौ अलग अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। दुर्गा का अर्थ ही है दुखों को दूर करने वाली शक्ति यानि सकारात्मक ऊर्जा। सनातन परम्पराओं में नारी को शक्ति का अवतार कहा गया है, ऐसा इसलिए भी है क्योंकि नारी जिस भी रूप में आपके जीवन में है वह सुख, प्रेम और ममत्व की संवाहक ही होती है. पौराणिक मान्यताओं में नारी के सम्बन्ध में यह विदित है कि "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता" अर्थात जहाँ नारी का सम्मान होता है वहां देवता निवास करते हैं. दुनिया की किसी अन्य सभ्यता और संस्कृति में नारी के प्रति सम्मान और श्रद्धा का यह भाव देखने को नहीं मिलता है. वर्तमान समय में जहाँ एक ओर हमारा समाज देवी के आराधन के माध्यम से नारीत्व को पूजता है वहीं दूसरी ओर दिन प्रतिदिन महिलाओं और बच्चियों के प्रति हिंसा और उत्प...
यह गांधी परिवार गाथा

यह गांधी परिवार गाथा

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
दिल्ली के राजघाट से प्रियंका गांधी का भाषण सुनने योग्य है। उनके भाषण में दो बातें आज स्पष्ट सुनाई दी- *पहला 'मेरा*' और दूसरा *'तुम्हारा'*। उन्होंने मेरा किसको कहा? 'मेरा भाई', 'मेरा परिवार' और जब देश की बात आई, प्रधानमंत्री की बात आई, तब उन्होंने कहा- 'आपका प्रधानमंत्री', 'आपका देश', 'आपकी लड़ाई', 'आपकी मीडिया', 'आपकी आवाज'। खून को भुनाकर सत्ता प्राप्त करना कांग्रेश की सबसे सुविधाजनक राजनीति रही है। प्रियंका गांधी के आज का भाषण भी पिता के खून से ही शुरू हुआ। तिरंगा की तरफ इशारा करके उन्होंने कहा इस तिरंगे में राहुल के पिता का खून है। इस धरती में राहुल के पिता का खून है। राहुल अपने पिता के जनाजे के पीछे पैदल चले थे। इसलिए इस देश में राहुल का अपमान नहीं होना चाहिए। क्या विचित्र माँग है कांग्रेस की! राजीव गांधी की हत्या हो गई, सबसे पहला प्रश्न तो यह है कि जिस देश का पूर्व प्रधानमंत्री ...
चाय बागान के दुश्मन कीटों के विरुद्ध नया जैविक अस्त्र

चाय बागान के दुश्मन कीटों के विरुद्ध नया जैविक अस्त्र

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
चाय बागानों में कीटों का प्रकोप एक बड़ी चुनौती है, जिसके कारण बड़े पैमाने पर नुकसान उठाना पड़ता है। कीटनाशकोंके छिड़काव से कीटों के प्रकोप को कुछ हद नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन रसायनों के संपर्क में आने से चाय की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। महामारी के दौरान लॉकडाउन के कारण कई चाय बागानों में कीटनाशकों का समय पर उपयोगनहीं किया जा सका, जिसके कारण प्रमुख चाय कंपनियों को कीटों के प्रकोप सेलगभग 20 से 25 प्रतिशत फसल का नुकसान उठाना पड़ा था।असम के जोरहाट में स्थित टोकलाई चाय अनुसंधान संस्थान के शोधकर्ताओं ने चाय बागानों को नुकसान पहुँचाने वाले उन कीटों के खिलाफ जैविक प्रहार की रणनीति तैयार की है, जो चाय की सबसे अच्छी मानी जाने वाली टहनियों को खाने के लिएजाना जाते हैं। चाय पर दुनिया के सबसे पुराने शोध केंद्रों में शुमार टोकलाई चाय अनुसंधान संस्थान ने हाल ही में संस्थान के प्रायोगिक उद्यानो...
नेहरू पर कुछ और

नेहरू पर कुछ और

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लेखाधिकारी प्रधानमंत्री : *एकबार जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद से स्पष्टीकरण माँगा कि आप को हर माह मनोरंजन भत्ता मिलता है तो उसकी बची राशि राजकोष को लौटाया?” (प्रधानमन्त्री के विशेषाधिकारी एमओ मथाई की पुस्तक “माई डेज विद नेहरू”, पृष्ठ 338) नेहरू को शायद याद नहीं रहा कि भारत के प्रथम राष्ट्रपति केवल आधा वेतन लेते थे। विशाल भवन के केवल तीन कमरों का ही उपयोग करते थे।* तुलना में गौर करें एक मिलती-जुलती घटना पर। *वित मंत्री के रुप में मोरारजी देसाई ने जवाहरलाल नेहरु से पूछा था कि “आपने अपनी किताबों पर ब्रिटिश प्रकाशकों द्वारा प्रदत्त रायलटी की राशि लन्दन के बैंक में जमा क्यों करा दी?” मोरारजी देसाई ने प्रधान मंत्री को आगाह किया कि इससे विदेशी मुद्रा कानून का उल्लंघन होता है जिसके अंजाम में कारागार और जुर्माना हो सकता है। तिलमिलाये नेहरु लन्दन से दिल्ली अपना बैंक खाता ले आये।...
इंदिरा के खेल

इंदिरा के खेल

TOP STORIES, विश्लेषण
1973 में इंदिरा गाँधी ने न्यायमूर्ति A.N. रे को भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में बैठा दिया वो भी तब जब उनसे वरिष्ठ न्यायधीशों की लिस्ट जैसे न्यायमूर्ति JM शेलात, KS हेगड़े और AN ग्रोवर सामने थी अंततः हुआ यह कि नाराज़गी के रूप में इन तीनों न्यायधीशों ने इस्तीफा दे दिया इसके बाद कांग्रेस ने पार्लियामेंट में जवाब दिया, 'यह सरकार का काम है कि किसे मुख्य न्यायधीश रखें और किसको नहीं और हम उसी को बिठाएंगे जो हमारी विचारधारा के पास हो.' और आज वही लोग न्यायाधीशों की आज़ादी की बात करते हैं? 1975 में न्यायाधीश जगमोहन सिंहा को एक फैसला सुनाना था फैसला था राजनारायण बनाम इंदिरा गांधी के चुनावी भ्रष्टाचार के मामले का उनको फ़ोन आता है जिसमें कहा जाता है, 'अगर तुमने इंदिरा गाँधी के ख़िलाफ़ फैसला सुनाया, तो अपनी पत्नी से कह देना इस साल करवा चौथ का व्रत न रखे जिसका न्यायमूर्ति सिंहा ने आराम से जवाब...