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विश्लेषण

ऐसे विवाद, देश हित में नहीं है

ऐसे विवाद, देश हित में नहीं है

EXCLUSIVE NEWS, विश्लेषण
दुर्भाग्य ! अब भी देश राजनीतिक स्वार्थों से परिचालित किया जा रहा है। पंडित और ब्राह्मण के बीच अंतर बताने की विवशता के पीछे ऐसे ही स्वार्थ अपनी भूमिका निभा रहे हैं। सवाल ब्राह्मणों या विद्वानों का नहीं है, सवाल इस बात का है कि जाति-प्रथा ने आदमी और आदमी के बीच दीवार खड़ी की है, और इसे मज़बूत करने की कोशिश हो रही है। जहां से विवाद खड़ा हुआ,वो मुम्बई में संत रविदास जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने जाति-प्रथा की विसंगति पर चोट करते हुए यह बात कही थी। ‘कठौती में गंगा’ का मंत्र सिखाने वाले संत रविदास ने तो मनुष्यता का ही एक संदेश दिया था, जो आज भारत की आवश्यकता है। यानी मनुष्य मात्र की आवश्यकता। मोहन भागवत संत रविदास के इसी संदेश की बात कर रहे थे। यह दुर्भाग्य ही है कि मोहन भागवत की यह बात भी विवादों के घेरे में आ गयी । ब्राह्मणों को यह शिकायत है कि भागवत ने ...
मदनी : इस्लाम जन्मा भारत में ?

मदनी : इस्लाम जन्मा भारत में ?

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
डॉ. वेदप्रताप वैदिक जमीयत उलेमा-ए-हिंद के मुखिया महमूद मदनी के बयान पर इधर हंगामा मचा हुआ है। हमारे टीवी चैनलों पर आजकल यही सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। मदनी के इस कथन का कोई एतिहासिक प्रमाण नहीं है कि ‘‘इस्लाम का जन्म-स्थान अरब देश नहीं, भारत है। पहले नवी का जन्म भारत में ही हुआ है। यह मुसलमानों की मातृभूमि है। इस्लाम को विदेशी मजहब मानना एतिहासिक दृष्टि से गलत है और बिल्कुल निराधार है।’’ ये वाक्य मदनी ने पढ़कर सुनाए थे, जमीयत के 34 वें अधिवेशन में। यों तो मदनी अपने आप में उत्तम वक्ता हैं लेकिन यह समझ में नहीं आया कि ये विवादास्पद वाक्य उन्होंने पढ़कर क्यों सुनाए? हो सकता है कि जैसे हमारे बड़े नेताओं के भाषण उनके अफसर लिखकर दे देते हैं और वे उन्हें श्रोताओं के सामने पढ़ डालते हैं, वैसे ही यह गलती मदनी से भी हो गई है। लेकिन इस गलती के पीछे छिपी भावना को समझने की कोशिश की जाए तो लगेगा क...
कैसे भारत में निवेश का केंद्र बना यूपी

कैसे भारत में निवेश का केंद्र बना यूपी

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आर.के. सिन्हा भगवान राम और कृष्ण की पवित्र जन्मस्थली के रूप में जाना जाने वाला उत्तर प्रदेश अपने बिलकुल नए अवतार में भारत और दुनिया के शीर्ष व्यापारिक घरानों को निवेश करने के लिए आकर्षित कर रहा है। हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 में मुकेश अंबानी से लेकर कुमार मंगलम बिड़ला, टाटा समूह के एन. चंद्रशेखर से लेकर ज्यूरिख एयरपोर्ट एशिया के सीईओ डेनियल बिचर समेत कॉर्पोरेट जगत की कई दिग्गज हस्तियां ना केवल मौजूद थी बल्कि उन्होंने राज्य में कुल मिलाकर 33.50 लाख करोड़ की राशि के निवेश की घोषणा की। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में निवेश प्रस्तावों के लागू होने से 92.50 लाख (9.25 मिलियन) रोजगार के अवसर पैदा होंगे। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2023 में 33.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को प्राप्त करने व...
बिना कुछ कहे योगी जी खुद ही प्रधानमंत्री पद के लिए प्रोजेक्ट हो गए – दिलीप कुमार

बिना कुछ कहे योगी जी खुद ही प्रधानमंत्री पद के लिए प्रोजेक्ट हो गए – दिलीप कुमार

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बिना कुछ कहे योगी जी खुद ही प्रधानमंत्री पद के लिए प्रोजेक्ट हो गए* - दिलीप कुमारयूपी में ग्लोबल इन्वेस्टर समिट हुई है और इस समिट में यूपी सरकार और उद्योगपतियों के बीच 18 हजार 500 MOUS साइन हुए हैं।इस हिसाब से यूपी के अंदर 33 लाख करोड़ रुपए का निवेश आया है।इससे पूरे यूपी के अंदर 92 लाख 50 हजार लोगों को नौकरियां मिलेंगी यानी करीब एक करोड़।हाल फिलहाल में इतना बड़ा इन्वेस्टमेंट किसी और राज्य में नहीं आया है।इंदौर में मध्य प्रदेश में भी इन्वेस्टर मीट हुई थी जहां पर लगभग 17 लाख करोड़ रुपए का इन्वेस्टमेंट आया था।आप सोच सकते हैं कि मुख्यमंत्रियों की रेस में भरोसेमंद चेहरे के रूप में योगी जी कितना आगे निकल चुके हैं।इतना बड़ा निवेश लाकर वो बिना कुछ कहे ही प्रधानमंत्री के योग्य उम्मीदवार साबित हो चुके हैं।इससे ये पता चलता है कि योगी सिर्फ हिंदुत्वावादियों के भरोसेमंद नहीं हैं बल्कि वो देश और विदेश ...
शराब की नहीं दूध की नीति बनाइए, सरकार !

शराब की नहीं दूध की नीति बनाइए, सरकार !

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मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती दूध और ख़ास कर गाय के दूध की पैरवी करते हुए शराब के विरोध में आंदोलन चला रही है। उमा भारती की पार्टी राज्य और केंद्र दोनों जगह सरकार में है। दोनों ही सरकार दूध कर दाम बढ़ा चुकी है और भी बढ़ने के आसार हैं। भाजपा गौवंश सेवा की वकालत करने वाला राजनीतिक दल है, अजीब बात है उसकी सरकारें शराब की नीति बनाती है और ज़ोर-शोर से लागू करती है। देश में दूध उत्पादन [आपरेशन फ़्ल्ड छोड़कर] की आज तक कोई नीति नहीं बनी, सारी सरकारों को शराब से मतलब है दूध और उसकी क़ीमतों को थामने में किसी की रुचि नहीं है।दूध के दामों में लगातार वृद्धि आम लोगों की परेशानी बढ़ाने वाली है। मूल रूप से शाकाहारी भारतीयों के खाने-पीने में दूध की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। छोटे बच्चे से लेकर वृद्धों तक के लिये दूध अपरिहार्य आहार ही है। स्वस्थ से लेकर बीमार तक , लोगों का जीवन बिना दूध के अधूरा...
भाजपा और उसकी रूठी तीन देवियां

भाजपा और उसकी रूठी तीन देवियां

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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को अगले लोकसभा चुनाव तक अध्यक्ष पद का कार्य विस्तार मिल चुका है। अगले लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए नड्डा ने अपने संगठन को पुनर्गठित और चुस्त-दुरुस्त करना शुरू कर दिया है। लोकसभा चुनाव से पूर्व जम्मू-कश्मीर सहित दस प्रदेशों की विधानसभाओं के चुनाव होने हैं। जिनके नतीजों से पता चल जाएगा कि अगले लोकसभा चुनाव में कौन-सी पार्टी केंद्र में सरकार बना सकेगी। फ़िलहाल भाजपा की तीन बड़ी नेता सुश्री उमा भारती, वसुंधरा राजे और मेनका गांधी भाजपा से क़दमताल नहीं कर रही है। इनके चेहरों पर दिखती तुर्शी और मिज़ाज की तुरखी कुछ नया होने के संकेत देते हैं। वैसे चुनाव में जा रहे दस राज्यों से लोकसभा की कुल 121 सीटें आती हैं। ऐसे में जिस पार्टी की भी सरकार इन प्रदेशों में बनेगी, लोकसभा चुनाव में उसी पार्टी का अधिक प्रभाव दिखने कि सम्भावना है । वैसे तो प...
वैलेंटाइन डे एक गम्भीर चुनौती

वैलेंटाइन डे एक गम्भीर चुनौती

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
प्रेम वह है जो जीव में आसक्ति न स्थापित होने दे, प्रेम वह है जो प्राणी मात्र के कल्याण की कामना करें। प्रेम वह है जहां शांति की स्थापना हो, प्रेम वह है जहां मन, बुद्धि, हृदय में सात्विकता हो, प्रेम वह है जहां कोई पर्दा न हो, प्रेम वह है जहां सत्यता को स्वीकारने में कोई संकोच न हो, प्रेम वह है जहाँ कोई ऊंच-नीच, भेद-भाव, छुआछूत आदि का कलंक न हो, प्रेम वह है जहाँ आनन्द हो, और अन्ततः प्रेम वह है जहां मोक्ष की कामना हो। फरवरी माह की सात से चौदह तारीख के बीच मनाये जाने वाले वेलेंटाइन डे से आज कोई भी अनभिज्ञ नहीं है। खासकर इस दिवस के लिए युवा पीढ़ी पूरे साल लालायित और बेसब्र दिखती है। मानों हमने वेलेंटाइन डे को एक परंपरा का रूप देकर इसका निर्वहन करना अपना परम कर्त्तव्य समझ लिया है। आज की युवा पीढ़ी जिस वेलेंटाइन डे को प्रेम दिवस की संज्ञा देकर मना रही है उन्हें वेलेंटाइन डे की हकीकत से रू-ब-रू क...
अदानी वाली टूलकिट और हिंदुस्तानियों की मानिसकता

अदानी वाली टूलकिट और हिंदुस्तानियों की मानिसकता

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अदानी ने 9 हजार 422 करोड़ रुपए की बोली लगाकर इजराइल का 1700 साल पुराना हाइफा बंदरगाह खरीद लिया । इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस मौके पर अदानी के साथ फोटो खिंचवाई... अब तक अंग्रेजों की किश्तियां आकर हिंदुस्तान में माल बेचती थीं अब हमारा अदानी हाइफा पर बंदरगाह खरीद कर अपना माल यानी हिंदुस्तान का माल रूस और एशिया में बेचेगा... हमको इस ऐतिहासिक परिवर्तन और भारत के लिए गौरवान्वित करने वाले पल पर उत्सव मनाना चाहिए था लेकिन ये दुख की बात है कि देश के अंदर गद्दारों और देश के दुश्मनों ने मिलकर ऐसा दुष्चक्र रचा कि अदानी और उनके निवेशकों के 8 लाख करोड़ डूब गए और रवीश कुमा एंड कंपनी विपक्षी पार्टियों समेत इसका जश्न मनाती हुई नजर आ रही हैं । -हिडनबर्ग कंपनी की स्थापना 2017 में हुई थी.. इस कंपनी में सिर्फ 9 कर्मचारी काम करते हैं लेकिन इसने 9 कर्मचारियों ने आखिर ऐसी कौन सी रिपोर्ट तै...
कंधा गौतम अडाणी का है, निशाना मोदी हैं और अंत में हत्या भारत की प्रगति और समृद्धि की करनी है

कंधा गौतम अडाणी का है, निशाना मोदी हैं और अंत में हत्या भारत की प्रगति और समृद्धि की करनी है

राज्य, विश्लेषण
गौतम अदाणी के खिलाफ इस साजिश की शुरुआत अभी हाल के दिनों से नहीं हुई, बल्कि 2016-17 से ही हो गई थी। अदाणी ने 2010 में ऑस्ट्रेलिया का कारमाइकल कोल माइन का प्रोजेक्ट हासिल किया था। 2017 में अचानक से अदाणी के माइन प्रोजेक्ट के खिलाफ क्लाइमेट चेंज के लिए काम करने का दावा करने वाली एक स्वयंसेवी संस्था ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसका नाम 350.org है। इन लोगों ने एक समूह की शुरुआत की, जिसका नाम स्टॉप अदाणी रखा। इस संस्थान को टाइड फाउंडेशन नाम की एक दूसरी संस्था फंड करती है। ये फाउंडेशन दुनिया के जाने-माने फंड मैनेजर जॉर्ज सोरोस से जुड़ी है। जॉर्ज वही शख्स हैं, जिनकी वजह से बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ थाईलैंड बर्बाद हो गया था। जॉर्ज अपने भारत विरोधी बयानों के लिए भी जाने जाते हैं। टाइड फाउंडेशन के पीछे भी कुछ लोग ऐसे हैं, जो गौतम अदाणी को रोकने के लिए कोशिश कर रहे थे। उनका द...
दुबई में नए इस्लाम की पुकार !

दुबई में नए इस्लाम की पुकार !

विश्लेषण
*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* दुबई में कल विश्व बंधुत्व-दिवस मनाया गया। इस मुस्लिम राष्ट्र में पिछले 10-15 साल से मुझे किसी न किसी समारोह में भाग लेने कई बार आना पड़ता है। सात देशों का यह महासंघ ‘संयुक्त अरब अमारात’ कहलाता है। यह सिर्फ सात देशों का महासंघ ही नहीं है, यह कम से कम 100 देशों का मिलन-स्थल है। जैसे हम न्यूयार्क स्थित संयुक्तराष्ट्र संघ के भवन में दर्जनों राष्ट्रों के लोगों से एक साथ मिलते हैं, बिल्कुल वैसे ही दुबई और अबू धाबी वगैरह में सारी दुनिया के विविध लोगों के दर्शन कर सकते हैं। जैसे भारत में आप दर्जनों धर्मों-संप्रदायों, जातियों, रंगों, भाषाओं, वेशभूषाओं और भोजनोंवाले लोगों को एक साथ रहते हुए देखते हैं, बिल्कुल वैसा ही नज्जारा यहां देखने को मिलता है याने दूसरे शब्दों में यह छोटा-मोटा भारत ही है। इस संयुक्त महासंघ की संपन्नता और भव्यता देखने लायक है। कल यहां जो विश्व-बंधुत...