ऐसे विवाद, देश हित में नहीं है
दुर्भाग्य ! अब भी देश राजनीतिक स्वार्थों से परिचालित किया जा रहा है। पंडित और ब्राह्मण के बीच अंतर बताने की विवशता के पीछे ऐसे ही स्वार्थ अपनी भूमिका निभा रहे हैं। सवाल ब्राह्मणों या विद्वानों का नहीं है, सवाल इस बात का है कि जाति-प्रथा ने आदमी और आदमी के बीच दीवार खड़ी की है, और इसे मज़बूत करने की कोशिश हो रही है। जहां से विवाद खड़ा हुआ,वो मुम्बई में संत रविदास जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने जाति-प्रथा की विसंगति पर चोट करते हुए यह बात कही थी।
‘कठौती में गंगा’ का मंत्र सिखाने वाले संत रविदास ने तो मनुष्यता का ही एक संदेश दिया था, जो आज भारत की आवश्यकता है। यानी मनुष्य मात्र की आवश्यकता। मोहन भागवत संत रविदास के इसी संदेश की बात कर रहे थे। यह दुर्भाग्य ही है कि मोहन भागवत की यह बात भी विवादों के घेरे में आ गयी । ब्राह्मणों को यह शिकायत है कि भागवत ने ...









