पाकिस्तान के भस्मासुर
यह अनुमान ग़लत था कि ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद अल कायदा गुट दुनियाभर में लगातार बिखरता जा रहा है। हक़ीक़त में वक्त के साथ पाकिस्तान में अन्य आतंकी गुट उभरते गए, जिनके निशाने पर लेकिन भारत तो था ही। यहां तक कि बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के निकट सहयोग से ग्वादर बंदरगाह परियोजना बना रहे चीन को स्थानीय नागरिकों का कोपभाजन का शिकार बनना पड़ा । वैसे इस समूचे उप-महाद्वीप में अभी भी दो बड़े सशस्त्र एवं कट्टर इस्लामिक आतंकी गुट सक्रिय हैं, एक है अफगान तालिबान और दूसरा है इसका पश्तून हमबिरादर तहरीक-ए-तालिबान ऑफ पाकिस्तान (टीटीपी)। यह दोनों गुट आईएसआई के निकट सहयोग से शुरू हुए और अब दोनों ही आईएसआई से खफा और खिलाफ हैं। टीटीपी का प्रभावक्षेत्र पाकिस्तानी खैबर पख्तूनवा के कबायली अंचल में अधिक है, हालांकि कुछ संख्या पाकिस्तान के उत्तर बलूचिस्तान इलाके में भी है। सीमांत और उत्तर के जनजातीय इल...









