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विश्लेषण

भारत में रिवर क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देगा दुनिया का सबसे लंबा रिवर क्रूज ‘गंगा विलास’: श्री सर्बानंद सोनोवाल

भारत में रिवर क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देगा दुनिया का सबसे लंबा रिवर क्रूज ‘गंगा विलास’: श्री सर्बानंद सोनोवाल

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, विश्लेषण, सामाजिक
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग तथा आयुष मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 13 जनवरी, 2023 को वाराणसी में एमवी गंगा विलास के साथ दुनिया की सबसे लंबे रिवर क्रूज का शुभारंभ भारत के लिए रिवर क्रूज पर्यटन के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक होगा। यह लग्जरी क्रूज भारत और बांग्लादेश के 5 राज्यों में 27 नदी प्रणालियों में 3,200 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करेगा। श्री सोनोवाल ने कहा कि इस सेवा के लॉन्च होने के साथ रिवर क्रूज की विशाल अप्रयुक्त क्षमता के इस्तेमाल की शुरुआत होगी। इस अवसर पर बोलते हुए, श्री सोनोवाल ने कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में, हम उस अपार संपदा की खोज कर रहे हैं, जो हमें समृद्ध नदी प्रणाली प्रदान करती है। अंतर्देशीय जलमार्गों के म...
अंग्रेजी गुड़क रही अब नीचे

अंग्रेजी गुड़क रही अब नीचे

विश्लेषण, साहित्य संवाद
भारत से अंग्रेजों को विदा हुए तो 75 वर्ष हो गए लेकिन भारत के भद्रलोक पर आज भी अंग्रेजी सवार है। देश का राज-काज, संसद का कानून, अदालतों के फैसलों और ऊँची नौकरियों में अंग्रेजी का वर्चस्व बना हुआ है। ज्यों ही इंटरनेट, मोबाइल फोन और वेबसाइट का दौर चला, लोगों को लगा कि अब हिंदी और भारतीय भाषाओं की कब्र खुद कर ही रहेगी। ये सब आधुनिक तकनीकें अमेरिका और यूरोप में से उपजी हैं। वहाँ अंग्रेजी का बोलबाला है। ये तकनीकें भारत में भी तूफान की तरह फैल रही थीं। जो लोग अंग्रेजी नहीं जानते थे लेकिन मोबाइल फोन, इंटरनेट या वेबसाइटों का इस्तेमाल करना चाहते थे, उन्हें मजबूरन अंग्रेजी (कामचलाऊ) सीखनी पड़ती थी लेकिन भारत के भद्रलोक को अब पता चला है कि उल्टे बाँस बरेली पहुंच गए हैं। हिंदी के श्रेष्ठ अखबार ‘भास्कर’ ने जो ताजातरीन सर्वेक्षण छापा है, वह भारतीय भाषा प्रेमियों को गदगदायमान कर रहा है। उसके अनुसार देश क...
भारत के आर्थिक विकास में प्रवासी भारतीय कर रहे हैं महत्वपूर्ण योगदान

भारत के आर्थिक विकास में प्रवासी भारतीय कर रहे हैं महत्वपूर्ण योगदान

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
9 जनवरी 2023 को प्रवासी भारतीय दिवस पर विशेष लेख प्रत्येक वर्ष 9 जनवरी को भारत में प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जाता है। भारत के आर्थिक विकास में प्रवासी भारतीयों के अमूल्य योगदान को इस दिन विशेष रूप से याद किया जाता है। इस वर्ष भी इस शुभ अवसर पर दिनांक 8 जनवरी से 10 जनवरी 2023 तक मध्य प्रदेश के इंदौर नगर में 17वां प्रवासी भारतीय दिवस समारोह आयोजित किया गया है। इस विशेष आयोजन में प्रथम दिन, अर्थात 8 जनवरी 2023 को यूथ प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जाएगा। दूसरे दिन, अर्थात 9 जनवरी 2023 को 17वां प्रवासी भारतीय दिवस कन्वेंशन 2023 का शुभारंभ होगा और तीसरे दिन, अर्थात 10 जनवरी 2023 को 17वें प्रवासी भारतीय दिवस कन्वेंशन का समापन होगा। उक्त कार्यक्रमों में भारत के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी एवं भारत की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू की भी भागीदारी रहेगी। आज पूरे विश्व में 3....
बेरोजगारी दर के बारे में प्रसारित समाचारों का ज़ोरदार खंडन

बेरोजगारी दर के बारे में प्रसारित समाचारों का ज़ोरदार खंडन

TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
दिसंबर, 2022 के दौरान उच्च बेरोजगारी दर से संबंधित समाचार मीडिया के कुछ वर्गों में एक निजी कंपनी द्वारा किए गए सर्वेक्षण के आधार पर प्रकाशित किया गया है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कई निजी कंपनियां/संगठन अपनी स्वयं की पद्धतियों के आधार पर सर्वेक्षण करते हैं जो सामान्य रूप से न तो वैज्ञानिक हैं और न ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत मानदंडों पर आधारित हैं। इसके अलावा, इन कंपनियों/संगठनों द्वारा उपयोग की जाने वाली कार्यप्रणाली सामान्य रूप से बेरोजगारी की अधिक रिपोर्टिंग या रोजगार/बेरोजगारी पर डेटा के संग्रह के लिए उपयोग की जाने वाली परिभाषाओं के कारण उनकी स्वयं की नमूना प्रक्रिया के कारण एक पूर्वाग्रह ग्रसित है। ऐसे सर्वेक्षणों के परिणामों का सावधानी से उपयोग किया जाना चाहिए। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के आधार पर सांख्यिकीय और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) द्व...
नोटबंदीः मोदी को माफी क्यों मिली?

नोटबंदीः मोदी को माफी क्यों मिली?

विश्लेषण
*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* नोटबंदी 2016 के नवंबर माह में लागू हुई थी। उसके खिलाफ जो याचिकाएँ सर्वोच्च न्यायालय में लगी थीं, वे सब रद्द हो गई हैं, क्योंकि पाँच जजों में से चार ने फैसला दिया है कि नोटबंदी घोषित करने में मोदी सरकार ने किसी नियम या कानून का उल्लंघन नहीं किया था। महिला जज बी.वी. नागरत्न ने अपनी असहमति व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार को या तो नोटबंदी की घोषणा संसद से पास करवानी थी या उसके पहले वह अध्यादेश भी जारी करवा सकती थी। किसी भी जज ने असली मुद्दे पर अपनी कोई राय जाहिर नहीं की है। असली मुद्दा क्या है? वह यह है कि क्या नोटबंदी करना ठीक था? उससे देश को फायदा हुआ या नुकसान? इस मुद्दे पर अदालत की चुप्पी आश्चर्यजनक है। नोटबंदी का मूल विचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का था ही नहीं। यह विचार था पुणें की अर्थक्रांति नामक संस्था के अध्यक्ष अनिल बोकील का! उन्होंने पिछले 20 साल से इस वि...
 इतिहास के दो स्वर्णिम व प्रेरणादायक पत्र ॥ 

 इतिहास के दो स्वर्णिम व प्रेरणादायक पत्र ॥ 

विश्लेषण, साहित्य संवाद
भारतीय इतिहास में दो ऐसे पत्र मिलते हैं जिन्हें दो विख्यात महापुरुषों (शिवाजी और गुरु गोविन्द सिंह) ने दो कुख्यात व्यक्तिओं (औरंगज़ेब और जयसिंह) को लिखे थे। इनमे पहिला पत्र "जफरनामा" कहलाता है जिसे श्री गुरु गोविन्द सिंह ने औरंगजेब को भाई दया सिंह के हाथों भेजा था। यह दशम ग्रन्थ में शामिल है जिसमे कुल 130 पद हैं।  दूसरा पत्र छ्त्रपति शिवाजी ने आमेर के राजा जयसिंह को भेजा था जो उसे 3 मार्च 1665 को मिल गया था। इन दोनों पत्रों में यह समानताएं हैं की दोनों फारसी भाषा में शेर के रूप में लिखे गए हैं। दोनों की पृष्टभूमि और विषय एक जैसी है। दोनों में देश और धर्म के प्रति अटूट प्रेम प्रकट किया गया है। शिवाजी पत्र बरसों तक पटना साहेब के गुरुद्वारे के ग्रंथागार में रखा रहा। बाद में उसे "बाबू जगन्नाथ रत्नाकर" ने सन 1909 अप्रैल में काशी में काशी नागरी प्रचारिणी सभा से प्रकाशित किया था। बाद में अ...
यूरोप में ईसाई क्यों घट रहे है?

यूरोप में ईसाई क्यों घट रहे है?

धर्म, विश्लेषण
बलबीर पुंज इंग्लैंड-वेल्स इन दिनों भीषण विरोधाभास से जूझ रहा है। शताब्दियों से इस यूरोपीय देश की शासकीय व्यवस्था के केंद्र में ईसाई मत है, परंतु उनकी नवीनतम जनगणना में ईसाई अनुयायी ही अल्पमत में आ गए है। यह स्थिति तब है, जब 'चर्च ऑफ इंग्लैंड', जिसका संरक्षक ब्रिटिश राजघराना है— उसके कुल 42 में से 26 बिशप-आर्कबिशपों का स्थान ब्रितानी संसद के उच्च सदन 'हाउस ऑफ लार्ड्स' में आरक्षित है। चर्च के प्रधान पादरी 'कैंटरबरी के आर्कबिशप' वरिष्ठता-क्रम में ब्रितानी प्रधानमंत्री से ऊपर हैं। अब एक ऐसा शासन, जिसमें ब्रिटेन की नीति निर्धारण में चर्च की भूमिका है और राजकीय वित्तपोषण से चर्च प्रेरित शिक्षण संस्थानों में दस लाख बच्चे पढ़ते है— वहां ईसाई अल्पसंख्यक कैसे हो गए?  वर्ष 2021 में हुई ब्रितानी जनगणना की रिपोर्ट गत दिनों सार्वजनिक हुई। इसमें अपने मजहब की जानकारी देना स्वैच्छिक था, लगभग छह...
क्या तीर्थाटन और पर्यटन के विषय अलग अलग नहीं हैं ?

क्या तीर्थाटन और पर्यटन के विषय अलग अलग नहीं हैं ?

TOP STORIES, विश्लेषण
विश्वभर से यात्री हमारा पुरातन देखने तीर्थों पर आते हैं या फिर नए आकार बदलते जा रहे तीर्थ ? पुरातन सांस्कृतिक विरासत को बाजार में बदलना , कितना उचित , कितना घातक ; चर्चा होनी चाहिए ! हिन्दू मठ मंदिरों से भारत सरकार को सालाना 3 लाख 65 हजार करोड़ की कमाई होती है ! इसका कितना रिटर्न मंदिरों के रखरखाव में सरकार करती है , ऐसा कोई आंकड़ा हमारे पास नहीं है ! तिरुपति बालाजी जैसे सबसे कमाऊ दक्षिण के तमाम मंदिर सरकार के कब्जे में हैं , बद्री केदार जैसे मंदिर हों या वैष्णोदेवी ; सभी का धार्मिक चढ़ावा सरकारों के खजाने में जाता है ! इस कमाई का सरकारें मनमाना प्रयोग करती आई हैं , आरोप तो यह भी है कि सरकार अन्य धर्मों के धार्मिक स्थलों को दी जाने वाली राशि भी सरकारें इसी मद से खर्च करती आई हैं ! बावजूद इसके सरकारें तीर्थों के विशुद्ध विकास के लिए बहुत कम धन राशि खर्च करती हैं ! ...
जरूरत है, चरित्र शिक्षा की  जिम्मेदार नागरिक होने के लिए।

जरूरत है, चरित्र शिक्षा की  जिम्मेदार नागरिक होने के लिए।

EXCLUSIVE NEWS, राज्य, विश्लेषण, साहित्य संवाद
नैतिकता के बिना शिक्षा बिना दिशासूचक जहाज की तरह है, जो कहीं भटक रहा है। एकाग्रता की शक्ति होना ही काफी नहीं है, बल्कि हमारे पास योग्य उद्देश्य होने चाहिए जिन पर ध्यान केंद्रित किया जा सके। सत्य को जानना ही काफी नहीं है, बल्कि हमें सत्य से प्रेम करना चाहिए और उसके लिए त्याग करना चाहिए। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई कितना शिक्षित या धनवान है, यदि उसके अंतर्निहित चरित्र या व्यक्तित्व में नैतिकता का अभाव है। वास्तव में ऐसे व्यक्तित्व शांतिपूर्ण समाज के लिए खतरा हो सकते हैं। उदाहरण: मुसोलिनी, हिटलर सभी नैतिकता से रहित शिक्षा के उदाहरण हैं जो मानव जाति को उनके विनाश की ओर ले जा रही है। समकालीन समय में यह समान रूप से प्रासंगिक है। -प्रियंका सौरभ “एक बुरा चरित्र एक पंचर टायर की तरह है; जब तक आप इसे बदल नहीं लेते तब तक आप कहीं नहीं जा सकते।"  शिक्षा एक बच्चे के एक पूर्ण वयस्क बनन...
जल-संकट पर भागवत का सीधा संवाद

जल-संकट पर भागवत का सीधा संवाद

EXCLUSIVE NEWS, विश्लेषण
ललित गर्ग-जल प्रदूषण एवं पीने के स्वच्छ जल की निरन्तर घटती मात्रा को लेकर बड़े खतरे खड़े हैं। धरती पर जीवन के लिये जल सबसे जरूरी वस्तु है, जल है तो जीवन है। जल ही किसी भी प्रकार के जीवन और उसके अस्तित्व को संभव बनाता है। जीव मंडल में पारिस्थितिकी संतुलन को यह बनाये रखता है। पीने, नहाने, ऊर्जा उत्पादन, फसलों की सिंचाई, सीवेज के निपटान, उत्पादन प्रक्रिया आदि बहुत उद्देश्यों को पूरा करने के लिये स्वच्छ जल बहुत जरूरी है। जल-संकट के प्रति सचेेत करते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर-संघचालक डॉ. मोहन भागवत ने जल का भंडारण बढ़ाने की बात कहीं। उन्होंने कहा कि जल को जितना बचा सकते हैं बचाएं और जितना बढ़ा सकते हैं बढ़ाएं क्योंकि जल पृथ्वी की संचित संपत्ति है। हम जल को कैसे स्टोर कर सके, इसका उपाय करना चाहिए। भागवत की इस पर्यावरण चिन्ता की परिक्रमा करने के बाद ऐसा लगा कि भारतीय परम्परा का मंचमहाभूत...