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विश्लेषण

सोशल मीडिया के अमेरिकी भेड़ियों की दादागिरी

सोशल मीडिया के अमेरिकी भेड़ियों की दादागिरी

EXCLUSIVE NEWS, विश्लेषण
========== 17 दिसंबर को इलोन मस्क महोदय ने mestadone और koo को अपना भविष्य का प्रतिस्पर्धी मानते हुए ट्विटर से बैन कर दिया। लगभग एक माह पहले 21 नवंबर को सोशल मीडिया पर मैंने एक पोस्ट लिखा था, "ट्विटर के घाटे व अनिश्चित भविष्य से दुनिया भर में जर्मनी का Mastodone सोशल मीडिया मंच जबरदस्त लोकप्रिय हो रहा है। ट्विटर और फेसबुक का अहंकार भारत में स्वदेशी Koo तोड़ेगा।" यह अनायास ही नहीं लिखा था।  Koo के अल्गोरिथम और सेवा सुरक्षा के उत्कृष्ट मानकों के कारण ट्विटर और फेसबुक की हालत ख़राब है। यकीं मानिये भारत के देश भक्तों की, राष्ट्रवादियों की एक किक मिलने की देर है ...... बस  यह बैन लगाना इंटरनेट विश्व और सोशल मीडिया पर यह पहली इस तरह की घटना है। ट्विटर के नए मालिक ने संसार भर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ढिंढोरा पीटने वाले इंटरनेट विश्व में एक नया निम्न स्थापित किया है। इस ...
आयुर्वेद और हम

आयुर्वेद और हम

EXCLUSIVE NEWS, विश्लेषण
ह्रदय नारायण दीक्षित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि दुनिया रोग उपचार के लिए आयुर्वेद की प्राचीन पद्धति की ओर लौट रही है। आयुर्वेद भारत का प्राचीन स्वास्थ्य विज्ञान है। बीते सप्ताह गोवा में विश्व आयुर्वेदिक कांग्रेस में अनेक विशेषज्ञों ने आयुर्वेद के सूत्रों पर व्यापक चर्चा की है। सम्मेलन में ‘औषधीय पौधों के संरक्षण की जरूरतें‘ विषय पर एक सत्र हुआ। कहा गया है कि भारत में 900 प्रमुख औषधीय पौधों के 10 प्रतिशत खतरे कि श्रेणी में हैं। पृथ्वी हर 2 साल में एक संभावित औषधि खो रही है। इसके विलुप्त हो जाने की दर सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया के सापेक्ष 100 गुना तेज है। यह चिंता का विषय है। भारत का स्वास्थ्य विज्ञान कम से कम ई०पू० 2500 से 1500 वर्ष प्राचीन है। ऋग्वेद में तमाम उपचारों व औषधियों का उल्लेख है। ऋग्वेद (10-97) में कहते हैं कि औषधियों का ज्ञान तीन युग पहले से है। यहाँ युग शब्द क...
the end of your ambition

the end of your ambition

TOP STORIES, विश्लेषण
आप की महत्वाकांक्षा का अंत गुजरात प्रदेश के विधानसभा चुनाव आप पार्टी के मुखिया श्री अरविन्द केजरीवाल जी को दर्पण दिखाने के लिए पर्याप्त होने चाहिए। उनकी महत्वाकांक्षा देश में मोदी जी के समकक्ष अपना स्थान बनाने की थी। इस चुनाव के पश्चात सम्भवतया उनको अपनी वास्तविक स्थिति का अहसास हो जाना चाहिए। उन्हें इसका भी संज्ञान हो जाना चाहिए कि मोदी जी आज माउंट एवरेस्ट के समान भारतीय राजनीति के सर्वोच्च शिखर पर पहुँच चुके हैं, अतः उनके समकक्ष स्वयं को स्थापित करने की कल्पना करना भी केजरीवाल जी के लिए आज की परिस्थिति में कदापि सम्भव नहंी है। केजरीवाल जी को यह समझना नितान्त आवश्यक है कि दिल्ली के नगर निगम के चुनावों की जीत और पंजाब विधानसभा चुनाव की जीत मात्र ही मोदी जी को हराना कदापि नहीं है, क्योकि पंजाब में सरकार कांग्रेस की थी और वहाँ पर कांग्रेस की छवि आपसी कलह के कारण अत्यधिक धूमिल हो चुकी ...
मोटे अनाज पर जीवित देश के नागरिक हलकान

मोटे अनाज पर जीवित देश के नागरिक हलकान

TOP STORIES, विश्लेषण
देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा मोटे अनाज पर जी रहा है | दुर्भाग्य,मोटे अनाज की खुदरा महंगाई दर घटने का नाम नहीं ले रही है, कहने को कुल मिलाकर खाद्य महंगाई दर में नरमी आई है, परन्तु  खराब मौसम की मार से इन अनाजों  का उत्पादन घटा है, जो इस असंतुलन का बड़ा कारण है।आंकड़े कहते हैं, इस  नवंबर में मोटे अनाज की महंगाई दर अक्टूबर महीने के 12.08 प्रतिशत से बढ़कर नवंबर में 12.96 प्रतिशत हो गई। ऐसा तब हुआ है, जब समग्र महंगाई दर 11 महीनों में पहली बार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 6 प्रतिशत के लक्ष्य के भीतर आ गई। खाद्य महंगाई दर भी 11 महीने के सबसे निचले स्तर 4.67 फीसदी पर आ गई है। गेहूं की खुदरा महंगाई दर अक्टूबर के 17.64 प्रतिशत से बढ़कर नवंबर में 19.67 प्रतिशत प्रतिशत हो गई। साल की शुरुआत में यह महज 5.1 प्रतिशत थी और चालू वित्त वर्ष की शुरुआत में बढ़कर 9.59 प्रतिशत हो गई। उ...
बहुत किया जाना शेष है, हवाई यातायात में  

बहुत किया जाना शेष है, हवाई यातायात में  

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देश में हर वर्ष करीब से 6 प्रतिशत् की दर से हवाई यात्रियों की संख्या में वृद्धि दर्ज हुई है । भारतीय हवाईअड्डों पर भीड़भाड़ बढ़ रही है। अधिकतर बड़े हवाईअड्डे अपनी हैंडलिंग क्षमता से 85प्रतिशत  से 120 प्रतिशत  पर काम कर रहे हैं।  अब देश में चालू हवाई अड्डों की संख्या 140 हो गयी है| वर्ष 2014 में, ऐसे हवाई अड्डों की संख्या 74 थी. केंद्र सरकार ने आगामी पांच वर्षों में 220 हवाई अड्डों के विकास और संचालन का लक्ष्य निर्धारित किया है| ऐसे में बहुत कुछ होना शेष है | सरकारी आंकड़ो के अनुसार देश के  प्रमुख हवाईड्डों में लगभग 83 प्रतिशत  कुल यात्री यातायात है। ये हवाईअड्डे अपनी सैचुरेशन लिमिट के बहुत करीब हैं और इसलिए मंत्रालय का कहना है कि टियर-II और टियर-III शहरों को अधिक संख्या में एविएशन नेटवर्क से जोड़ने की जरूरत है। क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने और आ...
हमारी फौज और गुलामी के प्रतीक

हमारी फौज और गुलामी के प्रतीक

विश्लेषण
*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* भारतीय फौज से गुलामी के प्रतीकों को हटाने के अभियान का तहे-दिल से स्वागत किया जाना चाहिए। दो सौ साल का अंग्रेजी राज तो 1947 में खत्म हो गया लेकिन उसका सांस्कृतिक, भाषिक और शैक्षणिक राज आज भी भारत में काफी हद तक बरकरार है। जो पार्टी याने कांग्रेस दावा करती रही भारत को आजादी दिलाने का, उसने अंग्रेज की दी हुई राजनीतिक आजादी को तो स्वीकार कर लिया, लेकिन उसे जो खुद करना था याने देश के हर क्षेत्र से गुलामी को दूर करना, उसमें उसका योगदान बहुत ही शिथिल रहा। यह काम अब भाजपा सरकार भी कुछ हद तक जरूर कर रही है। उसके नेताओं को यदि उस गुलामी की पूरी समझ हो तो वे इस अमृत महोत्सव वर्ष में ही संपूर्ण पराधीनता मुक्त अभियान की शुरुआत कर सकते हैं। फिलहाल हमारी फौज में पराधीनता के एक प्रतीक को हटाया गया उस समय, जब विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत को समुद्र में छोड़ा गया। उस जहाज पर लगे ह...
यह गांधीवाद नहीं, गोड़सेवाद है

यह गांधीवाद नहीं, गोड़सेवाद है

TOP STORIES, विश्लेषण
डॉ. वेदप्रताप वैदिक मध्यप्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष राज पटेरिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘हत्या’ करने की बात कह दी और अब वे सफाई देते फिर रहे हैं कि उनका हत्या से मतलब था- मोदी को हराना। वे अपने बचाव में कह रहे हैं कि वे गांधीभक्त और लोहियाभक्त हैं। उनके इस निरंकुश बयान ने उन्हें गिरफ्तार तो करवा ही दिया है, नरेंद्र मोदी के प्रति लोगों के सदभाव को भी मजबूत बना दिया है। यदि आज गांधी और लोहिया जिंदा होते तो वे अपना माथा कूट लेते। न सिर्फ भाजपा के नेता पटेरिया की भर्त्सना कर रहे हैं, बल्कि कई कांग्रेसी नेता भी उनकी इस गिरावट की भर्त्सना कर चुके हैं। वे म.प्र. के वरिष्ठ नेता हैं, विधायक और मंत्री भी रह चुके हैं। उनके इस बयान से मोदी के लिए शुभकामनाओं की बयार बहने लगी है और कांग्रेस को गहरा नुकसान हो रहा है। क्या पटेरिया को याद नहीं है कि सोनिया गांधी के जन्मदिन पर मोदी ने उन्हें दी...
तवांग पर खाली-पीली शोर

तवांग पर खाली-पीली शोर

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* समझ में नहीं आता कि तवांग क्षेत्र में हुई भारतीय और चीनी फौजियों की मुठभेड़ पर विपक्ष ने संसद में इतना हंगामा क्यों खड़ा कर दिया। यदि चीनी सैनिक हमारी सीमा में घुस जाते और हमारी जमीन पर कब्जा कर लेते तो यह हमारी चिंता का विषय जरुर होता लेकिन यदि इसमें भी सरकार की लापरवाही या कमजोरी होती तो विपक्ष का हंगामा जायज होता। 9 दिसंबर को घटी इस घटना की खबर ने एक सप्ताह बाद तूल पकड़ा है, यह तथ्य ही यह बताता है कि इसे लेकर संसद की कार्रवाई का बहिष्कार करना ज़रा ज्यादा चतुराई दिखाना है। इन दिनों सरकार को लताड़ने के लिए कांग्रेस और विपक्ष के पास कोई खास मुद्दे नहीं हैं। इसीलिए तवांग के मामले को तूल दिया जा रहा है। विपक्ष का काम सरकार को निरंतर पिन चुभाते रहना है, इसमें कोई बुराई नहीं है लेकिन उसे यह भी सोचना चाहिए कि चीन से पिटने की मनमानी व्याख्या का प्रचार करने से हमारे सैनि...
महिला प्रतिनिधित्व की स्थिति दयनीय क्यों?

महिला प्रतिनिधित्व की स्थिति दयनीय क्यों?

TOP STORIES, विश्लेषण
- ललित गर्ग - आज़ादी का अमृत महोत्सव मना चुके राष्ट्र में विधायी संस्थानों लोकसभा एवं विधानसभाओं में महिला प्रतिनिधियों की संख्या दयनीय है, नगण्य है। 75 वर्षों में लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 10 प्रतिशत तक भी नहीं बढ़ा है जबकि विधानसभाओं में यह स्थिति और भी चिन्तनीय है, वहां 9 प्रतिशत ही महिला प्रतिनिधि है। इस बार हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद यह मुद्दा फिर सुर्खियों में है कि वहां अड़सठ सदस्यीय विधानसभा में सिर्फ एक महिला विधायक होगी। हालांकि इस बार के चुनाव में वहां अलग-अलग दलों की ओर से कुल चौबीस महिला प्रत्याशी थीं। मुख्यधारा की राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व क्यों नहीं बढ़ रहा है, क्यों राजनीतिक दल महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के नाम पर उदासीन है? आखिर क्या वजह है कि जब संसद में बिना बहस के भी कई विधेयक पारित हो जाते हैं, तब भी संसद और विधानसभाओं में महिला...
विपक्ष का एकजुट होना लोकतंत्र के लिए ज़रूरी

विपक्ष का एकजुट होना लोकतंत्र के लिए ज़रूरी

TOP STORIES, विश्लेषण
रजनीश कपूरहाल ही के चुनावों में मिले-जुले परिणाम आए हैं। दिल्ली, गुजरात और हिमाचल में जो नतीजे आए हैं उनका अनुमान लगारहे राजनैतिक पंडितों की भविष्यवाणी काफ़ी हद तक सही साबित हुई। विपक्षी दलों ने जिस तरह कमर कस कर इन चुनावोंमें पहले के मुक़ाबले बेहतर प्रदर्शन किया है, उससे अब यह बात तो स्पष्ट है कि विपक्षी दल 2024 के लोकसभा चुनावों सेपहले 2023 में नौ राज्यों में होने वाले विधान सभा चुनावों को काफ़ी गंभीरता से ले रहे हैं। बिखरा हुआ विपक्ष किसी भीलोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं होता। शायद इसीलिए तमाम क्षेत्रीय दलों के नेता एक दूसरे के साथ बैठकें कर रहे हैं और आगेकी योजना बना रहे हैं।गुजरात में भाजपा ने जीत का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वहाँ प्रधान मंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की कड़ीमेहनत रंग लाई। पर हिमाचल और दिल्ली में शिकस्त के बाद, भाजपा के नेतृत्व को आने वाले चुनावों की तैयारी में ...