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स्त्री अत्याचारों से जुड़ी चिन्ताओं की टंकार

स्त्री अत्याचारों से जुड़ी चिन्ताओं की टंकार

TOP STORIES, विश्लेषण, साहित्य संवाद
- ललित गर्ग - इनदिनों स्त्रियों के घरेलू जीवन में उन पर अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं। विशेषतः कोरोना महामारी के लॉकडाउन के दौरान एवं उसके बाद महिलाओं पर हिंसा, मारपीट एवं प्रताड़ना की घटनाएं बढ़ी हैं। ऐसी ही पीलीभीत की एक घटना ने रोंगटे खड़े कर दिये। खाने में बाल निकलने के बाद पत्नी को पीलीभीत के युवक जहीरुद्दीन ने जिस बेरहमी, बर्बरता एवं क्रूरता से मारा, जमीन पर गिरा दिया, घर में रखी बाल काटने वाली मशीन (ट्रिमर) को पत्नी के सिर पर चला दिया, इन दुभाग्यपूर्ण एवं शर्मसार करने वाली नृशंसता की घटना की जितनी निन्दा की जाये, कम है। स्त्री को समानता का अधिकार देने और उसके स्त्रीत्व के प्रति आदर भाव रखने के मामले में आज भी पुरुषवादी सोच किस कदर समाज में हावी है,क इसकी पीलीभीत की यह ताजा घटना निन्दनीय एवं क्रूरतम निष्पत्ति है। दुभाग्यपूर्ण पहलू यह है कि जब एक स्त्री पर यह अनाचार हो रहा था तो दूसरी...
महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी में बाधाएं

महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी में बाधाएं

BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS, विश्लेषण
मौजूदा पितृसत्तात्मक मानदंड सार्वजनिक या बाजार सेवाओं को लेने में एक महत्वपूर्ण बाधा उत्पन्न करते हैं। चाइल्डकैअर और लचीले काम के मुद्दे को संबोधित करने से सकारात्मक सामाजिक मानदंडों को शुरू करने में मदद मिल सकती है जो अवैतनिक देखभाल और घरेलू काम के बोझ के पुनर्वितरण को प्रोत्साहित करते हैं। महिलाओं के कुशल लेकिन अवैतनिक कार्यों का एक बड़ा स्पेक्ट्रम अर्थव्यवस्था में सीधे योगदान देता है। फिर भी, 'काम' के लिए जिम्मेदार नहीं होने के कारण इसका अवमूल्यन महिलाओं की स्थिति को कमजोर करता है, जिससे उनकी भेद्यता बढ़ जाती है। सार्वजनिक सेवाओं में अवसर की समानता सुनिश्चित करके लैंगिक समानता को बढ़ावा देने में सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका है। हालाँकि, इन समाधानों का एक सीमित प्रभाव होगा जब तक कि प्रत्येक व्यक्ति के व्यवहार परिवर्तन को लक्षित न किया जाए। -प्रियंका सौरभ जबकि शिक्षा और पोषण में लैंग...
फीफा कप को किसने जोड़ा मजहब से

फीफा कप को किसने जोड़ा मजहब से

विश्लेषण, समाचार
आर.के. सिन्हा कतर में चल रहे फीफा विश्व कप में लगातार उलटफेर हो रहे हैं। यह ही एक ऐसा खेल है जिसमें अच्छी क्वालिटी के खेलों का रोमांच बढ़ता है जब नतीजे अप्रत्याशित आते हैं। कमजोर समझी जाने वाली टीमें भी बड़ी शक्तिशाली टीमों को परास्त कर देती हैं। पर चालू फीफा कप को इसलिए भी याद रखा जाएगा कि लगातार इस विश्व कप की इस्लामीकरण करने की कोशिश ही होती रही। यह जब आरंभ हुआ तो इस बात को जरूरत से ज्यादा महिमामंडित किया गया कि इसका आयोजन एक इस्लामिक देश कर रहा है। फिर नॉकआउट राउंड में स्पेन को हराने के बाद पहली बार क्वार्टर-फाइनल में पहुंची मोरक्को टीम के खिलाड़ियों ने फिलिस्तीनी झंडे के साथ जीत का जश्न मनाया। मैच में मोरक्को ने स्पेन को पेनल्टी शूटआउट में 3-0 से हराया था। मोरक्को की स्पेन पर जीत पर हमारे यहां भी बहुत से लोग इस तरह से खुश हो रहे थे मानो कि उनका मुल्क मोरक्को ही हो, पर यहाँ फि...
आप की राजनीति में बढ़ता अपराध का साया

आप की राजनीति में बढ़ता अपराध का साया

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राज्य, विश्लेषण
ललित गर्ग- हाल ही में सम्पन्न दिल्ली नगर निगम चुनावों में जीते पार्षदों के संदर्भ में ‘एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफार्म्स’ यानी एडीआर और ‘दिल्ली इलेक्शन वाच’ ने एक चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी कर यह बताया गया है कि दो सौ अड़तालीस विजेताओं में से बयालीस यानी सत्रह प्रतिशत निर्वाचित पार्षद ऐसे हैं, जिन पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके अलावा, उन्नीस पार्षद गंभीर आपराधिक मामलों के आरोपी हैं। इससे पूर्व दिल्ली में फरवरी, 2020 में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद भी एडीआर ने अपने विश्लेषण में चुने गए कम से कम आधे विधायकों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज पाए थे। इसमें मुख्य रूप से आम आदमी पार्टी के विधायक थे। अब प्रश्न है कि दिल्ली नगर निगम के चुनावों में भी आप पार्टी ने उम्मीदवार बनाने के लिए स्वच्छ छवि के व्यक्ति को तरजीह देने की जरूरत क्यों नहीं समझी? दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति तो यह है कि साफ-सुथरी...
भारत में इलाज मंहगा क्यों है?*

भारत में इलाज मंहगा क्यों है?*

TOP STORIES, विश्लेषण
डॉ. वेदप्रताप वैदिक इस बार राज्यसभा में ऐसे दो निजी विधेयक पेश किए गए हैं, जो पता नहीं कानून बन पाएंगे या नहीं लेकिन उन पर यदि खुलकर बहस हो गई तो वह भी देश के लिए बहुत लाभदायक सिद्ध होगी। पहला विधेयक, सबके लिए समान निजी कानून बनाने के बारे में है और दूसरा है, इलाज में लूट-पाट रोकने के लिए। निजी कानून याने शादी-ब्याह, तलाक, दहेज, उत्तराधिकार संबंधी कानून। इस बारे में मेरी विनम्र राय है कि सारे भारतीय लोगों को एक ही तरह का निजी कानून मानने में ज्यादा फायदा है। हजारों वर्ष पुराने हिंदू कानून, ईसाई और यहूदी कानून और इस्लामी कानूनों से चिपके रहने की बजाय नई परिस्थितियों के मुताबिक आधुनिक कानून मानने के कारण बहुत-सी परेशानियों से भारत के लोगों को मुक्त होने का मौका सहज ही मिल जाएगा। इसी तरह से अपने देश में लोगों को समुचित इलाज और इंसाफ पाने में बहुत दिक्कत होती है। अस्पताल और अदालत लोगों को ...
चुनावी भाषणों में हिंसा बन्द हो

चुनावी भाषणों में हिंसा बन्द हो

TOP STORIES, विश्लेषण
-विनीत नारायणपिछले कुछ वर्षों से देश के एक प्रमुख राजनैतिक दल के बड़े नेताओं द्वारा चुनावी सभाओं में बहुत हिंसक व अपमान जनक भाषा का प्रयोग किया जा रहा है। इससे न सिर्फ राजनीति में कड़वाहट पैदा हो रही है बल्कि समाज में भी वैमन्स्य पैदा हो रहा है। जब से आजादी मिली है सैकड़ों चुनाव हो चुके है पर ऐसी भाषा का प्रयोग अपने विरोधी दलों के प्रति किसी बड़े नेता ने कभी नहीं किया। एक प्रथा थी कि चुनावी जन सभाओं में सभी नेता सत्तारूढ़ दल की नीतियों की आलोचना करते थे और जनता के सामने अपनी श्रेष्ठ छवि प्रस्तुत करते थे। सत्तारूढ़ दल के नेता अपनी उपलब्धियां गिनाते थे और भविष्य के लिये चुनावी वायदे करते थे। पर इस पूरे आदान प्रदान में भाषा की गरिमा बनी रहती थी। प्रायः अपने विपक्षी नेता के ऊपर व्यक्तिगत टीका-टिप्पणी करने से बचा जाता था। इतना ही नही बल्कि एक दूसरे का इतना ख्याल रखा जाता था कि अपने विपक्षी दल के राष...
कौन नहीं देता अपना वोट अथवा क्यों नहीं दॅंडित किये जायें लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग न लेने वाले?

कौन नहीं देता अपना वोट अथवा क्यों नहीं दॅंडित किये जायें लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग न लेने वाले?

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
आर.के. सिन्हा अब चुनाव आयोग को यह गॅंभीरता से विचार करना होगा कि कैसे सभी मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने को लेकर गंभीर या बाध्य हों। वे मतदान करना अपना दायित्व समझें। हाल ही में दिल्ली नगर निगम चुनाव संपन्न हो गए। चुनाव प्रचार से लेकर चुनाव नतीजे सही से आ गये। कहीं कोई गड़बड़ नहीं हुई। पर निराशा इस कारण से अवश्य हुई कि इस बार दिल्ली में मतदान 47 फीसद के आसपास ही रहा। मतलब आधे से अधिक मतदाताओं ने अपना वोट डालने की आवश्यकता ही नहीं समझी। मतदान भी रविवार के दिन ही हुआ था। इसलिए उम्मीद तो यह थी कि दिल्ली वाले मतदान के लिए भारी सॅंख्या में निकलेंगे। उस दिन मौसम भी  खुशगवार था। फिर भी मतदान बेहद खराब रहा। बड़ी तादाद में मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवार के हक में वोट देने नहीं आए। वे जिन नेताओं और सियासी दलों को नापसंद करते हैं, उन्हें चाहे तो खारिज कर सकते थे। उन्हों...
और पृथ्वी पर जल संकट के आसार

और पृथ्वी पर जल संकट के आसार

TOP STORIES, विश्लेषण
पृथ्वी पर तापमान वृद्धि और जलवायु परिवर्तन का प्रभाव हरेक जगह पड़ रहा है, परन्तु इससे सबसे अधिक प्रभावित जल संसाधन हो रहे हैं। तापमान बढ़ने के कारण वर्षा असमान हो रही है, पृथ्वी के सतह पर जल संसाधनों का वाष्पीकरण अधिक हो रहा है, पूरी दुनिया के ग्लेशियर पहले से अधिक तेजी से पिघल रहे हैं, सूखे का क्षेत्र और अवधि बढ़ती जा रही है, नदियों में पानी के बहाव में तेजी से अंतर आ रहा है और इन सबके कारण भूजल की उपलब्द्धता प्रभावित हो रही है। यह  सरे निष्कर्ष  संयुक्त राष्ट्र के वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल आर्गेनाईजेशन ने हाल में जल संसाधनों की स्थिति पर पहली वार्षिक रिपोर्ट में प्रकाशित किये हैं । इसी  रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 में दुनिया के सभी क्षेत्रों ने पानी से सम्बंधित चरम आपदाओं– बाढ़ और सूखे का सामना किया है और दुनिया की एक बड़ी आबादी मृदु पानी की कमी से जूझ रही है।यूँ तो  दुनिया के अन...
जरूरी बात, जिसे हर सांसद समझे*

जरूरी बात, जिसे हर सांसद समझे*

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
चलती संसद का मूड बदलने के लिए, ताजा चुनावी नतीजे काफी है | गुजरात हिमाचल विधानसभा के साथ दिल्ली [एम् सी डी]  के नतीजों से  जो संकेत निकला है, वह सत्र में महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण जैसे विषय की धार को और तेज़ करेगा | यह तो सर्वविदित है कि विपक्ष कतिपय राजनीतिक घटनाओं से उत्साहित एवं आक्रामक है अभी तक तो दोनों पक्ष चुनाव और उसके नतीजों के इंतजार में व्यस्त थे । अब बुलन्द हौसलों  के साथ २९ दिसम्बर तक चलने वाले इस सत्र में  हर दिन विपक्ष, ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को कठघरे में खड़ा करने की जहां कोशिश करेगा , वहीँ  सत्तापक्ष से इन विषयों पर उठे प्रश्नों का उत्तर देने के जनअपेक्षा  और बढ़ गई है | वस्तुत: विपक्ष को संसद में यह आभास कराना चाहिए कि उसका उद्देश्य अपने सवालों के जवाब पाना है, न कि हंगामा कर सदन की कार्यवाही ठप करना। सत्तापक्ष को इसके लिए भी तत्प...
दिल्ली भाजपा का विधानसभा में वनवास व नगर निगम में हार! क्यों?

दिल्ली भाजपा का विधानसभा में वनवास व नगर निगम में हार! क्यों?

TOP STORIES, विश्लेषण
भाजपा की दिल्ली में दुर्गति व 1998 से विधानसभा में अल्पमत में क्यों? 2022 निगम चुनावों में बुरी हार क्यों? विवेचन करके कारण  बताने का प्रयास कर रहा हूँ। मुख्य कारक व कारण: *1.लचर निष्प्रभावी प्रदेश अध्यक्ष व केंद्रीय प्रभारी व घोर गुटबाज़ी।* *2.रिश्वतखोर,काली कमाई करने वाले निगम पार्षद।* *3.हार्डकोर काडर का असम्मान,उनके कार्य न किया जाना।* *4.हार्डकोर काडर के आजीविका की न सोचना।* ************************************** *क्या आपने सोचा है कि जिस भाजपा का नगर निगम में पिछले 22 वर्षों से प्रचंड बहुमत के साथ कब्जा था,वो पिछले 26 वर्षों से राज्य में सरकार क्यों नहीं बना पा रही है?* अमित शाह जैसा चाणक्य,मोदी जैसा करिश्माई नेतृत्व,303 सांसद, तमाम केंद्रीय मंत्री व तकरीबन 40% से ज्यादा मत मिलने के बाद भी क्रमशः 3 और 8 विधायक क्यों? और करेला नीम पर आज  चढ़ा जब निगम चुना...