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परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की आशंकाएं से बढ़ी चिन्ताएं

TOP STORIES, विश्लेषण
परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की आशंकाएं से बढ़ी चिन्ताएं-ललित गर्ग- रूस एवं यूक्रेन के बीच लम्बे समय से चल रहा युद्ध भीषणतम तबाही एवं सर्वनाश का कारण बनता दिख रहा है। रूस द्वारा परमाणु हथियारों के इस्तेमाल किये जाने एवं यूक्रेन के द्वारा ‘डर्टी बम’ का इस्तेमाल किये जाने की धमकियां, दुनिया के लिये डर का कारण बन रही है। भयंकर विनाश की आशंकाओं के बीच समूची दुनिया सहमी हुई है। यदि परमाणु हथियारों का उपयोग होता है तो यह मानवता के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ होगा एवं दुनिया को अशांति की ओर अग्रसर करने वाला होगा। इस मसले का हल कूटनीति और आपसी बातचीत से ही निकालने के प्रयास किये जाने की आवश्यकता भारत लगातार व्यक्त करता रहा है। शांति का उजला एवं अहिंसा-सहजीवन की कामना ही भारत का लक्ष्य रहा है। इसीलिये भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार युद्ध विराम की कोशिश करते हुए दोनों ही देशों को दिशा-द...

नये राजनैतिक दल के गठन का प्रश्न: 1

राष्ट्रीय, विश्लेषण
नये राजनैतिक दल के गठन का प्रश्न: 1 -प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकज वर्तमान स्थिति से क्षुब्ध होकर भारतीय संस्कृति और भारतीय समाज से आत्मभाव रखने वाले बहुत से लोग व्यग्र होकर नये राजनैतिक दल के गठन की इच्छा पाल लेते हैं। यह इच्छा स्वयं में बहुत ही महत्वपूर्ण और शुभ है परंतु आवश्यक जानकारी और विवेक के बिना यह केवल कष्ट और निराशा की ओर ले जायेगी। सर्वप्रथम तो यह जानना चाहिये कि यह जो आपमें नये राजनैतिक दल के गठन का उत्साह आ रहा है, वह स्वयं में कितना बड़ा वरदान है। कल्पना कीजिये कि भारत में तानाशाही होती और वह तानाशाह मुसलमानों के साथ मैत्री के कारण हिन्दू धर्म का बढ़-चढ़ कर दमन कर रहा होता। क्योंकि इंग्लैंड या अमेरिका को तो किसी भी राष्ट्रराज्य में तानाशाही के होने से कोई अंतर आज तक नहीं पड़ा है। विश्व के अनेक तानाशाहों से और तानाशाहियों से पश्चिमी यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका के लोगों ...

रहने लायक नहीं रहेगी यह धरा यदि प्रकृति का शोषण इसी रफ्तार से चलता रहा

TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
रहने लायक नहीं रहेगी यह धरा यदि प्रकृति का शोषण इसी रफ्तार से चलता रहा भारतीय हिंदू सनातन संस्कृति हमें यह सिखाती है कि आर्थिक विकास के लिए प्रकृति का दोहन करना चाहिए न कि शोषण। परंतु, आर्थिक विकास की अंधी दौड़ में पूरे विश्व में आज प्रकृति का शोषण किया जा रहा है। प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग कर प्रकृति से अपनी आवश्यक आवश्यकताओं की पूर्ति बहुत ही आसानी से की जा सकती है परंतु दुर्भाग्य से आवश्यकता से अधिक वस्तुओं के उपयोग एवं इन वस्तुओं के संग्रहण के चलते प्राकृतिक संसाधनों के शोषण करने के लिए जैसे मजबूर हो गए हैं। ऐसा कहा जाता है कि जिस गति से विकसित देशों द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का शोषण किया जा रहा है, उसी गति से यदि विकासशील एवं अविकसित देश भी प्राकृतिक संसाधनों का शोषण करने लगे तो इसके लिए केवल एक धरा से काम चलने वाला नहीं है बल्कि शीघ्र ही हमें इस प्रकार की चार धराओं ...

गणेश शंकर विद्यार्थी

विश्लेषण, साहित्य संवाद
26 अक्टूबर 1890 क्रांतिकारी पत्रकारगणेश शंकर विद्यार्थी का जन्म * चंद्रशेखर आजाद और भगतसिंह की भेंट उन्हीं ने कराई थी * वे राष्ट्र और संस्कृति को सर्वोपरि मानते थे --- रमेश शर्मा सार्वजनिक जीवन या पत्रकारिता में ऐसे नाम विरले हैं जिनका व्यक्तित्व व्यापक है और जो विभिन्न विचारों में समन्वय बिठा कर देश सेवा में लगे हों । क्राँतिकारी पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी ऐसे ही व्यक्तित्व के धनी थे । उनके जीवन में और जीवन के बाद भी उन्हें सब अपना मानते हैं । वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अहिसंक आँदोलन में जहाँ स्वयं हिस्सा लेते थे वहीं क्राँतिकारी आँदोलन के बलिदानियों के अज्ञातवास की व्यवस्था करते थे । यह व्यवस्था उनके रुकने से लेकर धन प्रबंध तक होती थी । वे पाँच बार जेल गये । वे राष्ट्र के लिये सामाजिक और साम्प्रदायिक एकता आवश्यक मानते थे और कहते थे कि राष्ट्र का आधार समन्वय और सद्भाव ...
सुरक्षा के साथ मानवता का धर्म निभा रही कांस्टेबल सोनिया  

सुरक्षा के साथ मानवता का धर्म निभा रही कांस्टेबल सोनिया  

विश्लेषण, सामाजिक
सुरक्षा के साथ मानवता का धर्म निभा रही कांस्टेबल सोनिया   फर्ज आखिर फर्ज ही होता है पुलिस की ड्यूटी हो या समाज में फैले तमाम बुराइयों को दूर करने का फर्ज एक पुलिसकर्मी बेहतर ढंग से निभा सकता है। वो भी महिला पुलिसकर्मी। इसका काबिले गौर उदाहरण बनी है सोनिया जोशी जो अभी उत्तराखंड पुलिस में कार्यरत हैं। अपनी ड्यूटी के साथ आम जनता की सेवा के लिए कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी होकर अपना कर्तव्य निभा रही है सोनिया जोशी। महिला सिपाही वर्दी के साथ-साथ समाज में फैली बुराइयों को मिटाने के लिए प्रयास कर रही है। उन्होंने पुलिस में कठिन और प्रतिकूल स्थितियों में न  सिर्फ अपने जीवन को संभाला। बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का विषय बनी। आज वह समाज में अलग-अलग कार्य में सक्रिय हैं। बता दें कि इस मुहिम का झंडा हाथ में लेकर काम आसान नहीं था। ऐसे काम आसान भी नहीं होते सोनिया ने मेहनत और काबिलियत के दम पर स...
Defence मैन्युफैक्चरिंग में Private players लाने का फायदा.

Defence मैन्युफैक्चरिंग में Private players लाने का फायदा.

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Defence मैन्युफैक्चरिंग में Private players लाने का फायदा. 2001 में अटल जी की सरकार ने Defence मैन्युफैक्चरिंग में Private players के लिए 100% contribution के लिए खोल दिया था. कई कंपनिया शुरू हुई.. कई बड़ी कंपनियों ने Defence में हाथ डाला... लेकिन उसके बाद ज्यादा काम नहीं हुआ. 2016 में सरकार ने Defence में 49% FDI (automatic route) allow कर दी....49% से ऊपर भी allowed है अगर कोई नई टेक्नोलॉजी भारत में लाना चाहता हो. 2022 में यह 74% तक बढ़ा दिया गया है. जब यह निर्णय लिए गए, तब विपक्ष ने हल्ला मचाया.. कि मोदी ने अपने दोस्तों को Defence sector बेच दिया  लेकिन Private प्लेयर और FDI आने से होने वाले फायदे किसी ने नहीं देखे.. ना सोचे..... क्यूंकि जब नेताओं को commision का मोटा पैसा मिल रहा हो, तब काहे का प्राइवेट sector और किस बात की FDI. खैर... इन क़दमों से भारत में Defence...
खाद्य पदार्थों के अपव्यय एवं नुक्सान को रोकना आज की आवश्यक आवश्यकता

खाद्य पदार्थों के अपव्यय एवं नुक्सान को रोकना आज की आवश्यक आवश्यकता

राज्य, विश्लेषण, सामाजिक
खाद्य पदार्थों के अपव्यय एवं नुक्सान को रोकना आज की आवश्यक आवश्यकता इस पृथ्वी पर रहने वाले मानवों की भलाई के लिए खाद्य पदार्थों के अपव्यय एवं नुक्सान को रोका जाना आज की आवश्यक आवश्यकता बन गया है। पूरे विश्व में ही आज खाद्य पदार्थों की बर्बादी बड़े स्तर पर हो रही है। इससे नागरिकों की खाद्य सुरक्षा पर भी एक गम्भीर प्रश्न चिन्ह लग गया है। यूनाइटेड नेशन्स के पर्यावरण कार्यक्रम के एक अनुमान के अनुसार पूरे विश्व में 14 प्रतिशत खाद्य पदार्थों का नुक्सान खाद्य पदार्थों को उत्पत्ति स्थल से खुदरा बिक्री स्थल तक पहुंचाने में हो जाता है। इसके अलावा, अन्य 17 प्रतिशत खाद्य पदार्थों का नुक्सान इन्हें खुदरा बिक्री स्थल से उपभोक्ता के स्थल तक पहुंचाने में हो जाता है। खाद्य पदार्थों के इतने बड़े नुक्सान का वातावरण में उत्सर्जित हो रही कुल गैसों में 8 से 10 प्रतिशत तक का योगदान रहता है। आज खाद्य पदार्थों...
जानलेवा बनती अजनबियों से अश्लील वीडियो कॉल्स

जानलेवा बनती अजनबियों से अश्लील वीडियो कॉल्स

TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
जानलेवा बनती अजनबियों से अश्लील वीडियो कॉल्स इस अपराध के पीछे संगठित अपराध समूह ज्यादातर विदेशों में स्थित हैं। उनके लिए यह पैसा कमाने का एक कम जोखिम वाला तरीका है और वे कई पीड़ितों तक आसानी से ऑनलाइन पहुंच सकते हैं। पीड़ित अक्सर पुलिस को इन अपराधों की रिपोर्ट करने से चिंतित होते हैं क्योंकि वे शर्मिंदा होते हैं। जबकि सेक्सटॉर्शनिस्ट पीड़ितों को परेशान करने, शर्मिंदा करने, आघात करने और उन्हें नियंत्रित करने के लिए सभी उपलब्ध साधनों का उपयोग कर सकते हैं, यह उच्च समय है कि दानव को सिर के बल ले जाया जाए और जागरूकता बढ़ाने और सेक्सटॉर्शन की बुराई के सामाजिक कलंक को दूर किया जाए। यह ध्यान देने योग्य है कि इंटरनेट कभी भी 'भूलता और माफ नहीं करता' और इसकी पहुंच और प्रसार बिजली से तेज और विशाल है। प्रभावशाली दिमाग वाली हमारी युवा पीढ़ी को यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया जाना चाहिए कि वे कभी...
भारत में अभी भी गरीबी भारी, कारण जनसंख्या और बेरोजगारी

भारत में अभी भी गरीबी भारी, कारण जनसंख्या और बेरोजगारी

BREAKING NEWS, Current Affaires, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
7 अक्टूबर 2022, (गरीबी उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस) भारत में अभी भी गरीबी भारी, कारण जनसंख्या और बेरोजगारी अधिकांश ग्रामीण गरीब खेतिहर मजदूर (जो आम तौर पर भूमिहीन होते हैं) और स्वरोजगार करने वाले छोटे किसान हैं जिनके पास 2 एकड़ से कम जमीन है। उन्हें साल भर रोजगार भी नहीं मिल पाता है। परिणामस्वरूप, वे एक वर्ष में बड़ी संख्या में दिनों तक बेरोजगार और अल्प-रोजगार में रहते हैं मुद्रास्फीति, विशेष रूप से खाद्य कीमतों में वृद्धि, बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक न्यूनतम उपभोग व्यय की लागत को बढ़ा देती है। इस प्रकार, मुद्रास्फीति कई परिवारों को गरीबी रेखा से नीचे धकेल देती है। भूमि और अन्य संपत्तियों के असमान वितरण के कारण, प्रत्यक्ष गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों का लाभ गैर-गरीबों द्वारा विनियोजित किया गया है। गरीबी की भयावहता की तुलना में इन कार्यक्रमों के लिए आवंटित संसाधनो...
हिजाब : इतना जोर क्यों देते हो?

हिजाब : इतना जोर क्यों देते हो?

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इतना जोर क्यों देते हो? हिंदुस्तान की लड़कियां यदि हिजाब पहनना चाहती हैं, तो उन्हें पहनने दीजिए! हिजाब पहनें या नकाब या बुर्का, कोई एतराज क्यों करे? बस इतना जरूर है कि स्कूल कालेज जाएं तो स्कूल ड्रेस पहनें, फौज में जाएं तो यूनिफॉर्म पहनें और स्पेस में जाएं तो स्पेस सूट? बाकी उनकी मर्जी, बाजार में, घर में, कोर्ट में, हिल स्टेशन पर, ब्याह शादियों में जहां भी हिजाब पहनना चाहें, शौंक से पहनें! किसी को क्या परेशानी है उनकी पोशाक से? वैसे कितनी लड़कियां हैं जो फिल्म इंडस्ट्री में हैं, टीवी में हैं, अस्पतालों और न्यायालयों में हैं, मॉडलिंग में हैं, कोई हिजाब नहीं पहनती? उर्फी जावेद का नाम सुना है कभी? रोजाना नई नई ड्रेस पहनती हैं। इतनी अजीबोगरीब पोशाकें कि बेशर्मी भी गश खा जाए। फिल्म इंडस्ट्री ने मधुबाला, नर्गिस, मीना कुमारी, वहीदा रहमान, जीनत अमान, निगार, मुमताज, सायरा बानो, नसीम बानो जैस...