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बुजुर्ग हमारे वजूद है न कि बोझ

बुजुर्ग हमारे वजूद है न कि बोझ

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बुजुर्ग हमारे वजूद है न कि बोझ (बदलते परिवेश में एकल परिवार बुजुर्गों को घर  की  दहलीज से दूर कर रहें है. बच्चों को दादी- नानी  की  कहानी की बजाय पबजी अच्छा लगने लगा है, बुजुर्ग अपने बच्चों से बातों को तरस गए है. वो  घर के किसी कोने में अकेलेपन का शिकार हो रहें है. ऐसे में इनकी मानसिक-आर्थिक-सामाजिक समस्याएं बढ़ती जा रही है. महँगाई  के आगे पेंशन कम होती जा रही है. आयुष्मान योजना में बुजुर्गों को शामिल कर उनके स्वास्थ्य देखभाल के साथ बुजर्गों के लिए अलग से योजनाएं लाने की सख्त जरूरत है.) हमारे देश में बुजुर्ग तेजी से बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन उनके लिए उपलब्ध संसाधन कम होते जा रहें  हैं। ऐसे में हम सबकी जिम्मेवारी बनती है कि उन्हें  एक तरफ रखने के बजाय उनकी  शारीरिक और मानसिक देखभाल करने के लिए समुदायों के जीवन में एकीकृत किया जाना चाहिए, जहां वे सामाजिक परिस्थितियों को सुधारने में पर...
दुनिया बुरे लोगों की हिंसा से नहीं, बल्कि अच्छे लोगों की चुप्पी से पीड़ित है।

दुनिया बुरे लोगों की हिंसा से नहीं, बल्कि अच्छे लोगों की चुप्पी से पीड़ित है।

विश्लेषण
दुनिया बुरे लोगों की हिंसा से नहीं, बल्कि अच्छे लोगों की चुप्पी से पीड़ित है। नैतिक दुविधा की यह स्थिति एक अधिक महत्वपूर्ण भावना में भी बदल सकती है। यह तब होता है जब कोई व्यक्ति अंतःकरण की आवाज का पालन न करके नैतिक रूप से गलत कार्य करने से डरता है। आत्म-मूल्य और सिद्धांतों के अनुसार कार्य करना भी अक्सर कठिन हो जाता है। लोग अंतत: किसी भौतिकवादी मांग या लालच के लिए अपनी अंतरात्मा की आवाज को ठुकरा देते हैं और इसके विपरीत व्यवहार करते हैं। सांसारिक आवश्यकता और इच्छा के कारण यह क्रिया अंतःकरण और मानव स्वभाव की आवाज को क्षीण करने लगती है।  फिर भी, करुणा, सहानुभूति, ईमानदारी और सत्यनिष्ठा जैसे मूल्य हमें सही निर्णय लेने में सहायता करते हैं। कार्य करना या न करना एक चुनौती है और उपरोक्त मूल्य एक बेहतर मार्गदर्शन कर सकते हैं। -प्रियंका सौरभ नैतिकता मानवता का सबसे बड़ा गुण है और हमें केवल पश...
सफलता के लिए जरूरी है टाइम मैनेजमेंट

सफलता के लिए जरूरी है टाइम मैनेजमेंट

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                                                                                                                                                 सफलता के लिए जरूरी है टाइम मैनेजमेंट                                                                                       Personality Development: सफलता हासिल करने के लिए टाइम मैनेजमेंट सीखना बहुत जरूरी है एक बार अगर आप टाइम मैनेजमेंट सीख जाएंगे तो आपको नई चीजें सीखने में आसानी होगी. टाइम मैनेजमेंट सीखने के लिए आपको लाइफ में बस तीन आदतें अपनानी हैं. आइएआइए जानते हैं कौन सी आदतें आपका टाइम मैनेजमेंट बनाने में मददगार हैं. Tips for Time Management: लाइफ में हर कोई सफल होना चाहता है, लेकिन कई बार कड़ी मेहनत करने के बाद भी सफलता हाथ नहीं लगती है. इनके पीछे एक कारणटाइम मैनेजमेंट भी है. कई लोग जीवन में बहुत कुछ करना चाहते हैं लेकिन टाइम नहीं मिलने के...
सद्भाव के लिए आवश्यक संवाद

सद्भाव के लिए आवश्यक संवाद

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ह्रदय नारायण दीक्षित हिन्दू मुस्लिम सह अस्तित्व की समस्या पुरानी है। गांधी जी ने इस समस्या पर हार मान ली थी। साम्प्रदायिक दुराग्रह के कारण भारत विभाजन हुआ। विभाजन की त्रासदी के घाव पुराने होकर भी ताजे हैं। सम्प्रति उनका आरोप है कि हाल के दिनों में समुदाय में भय की भावना बढ़ी है। कहा गया है कि कुछ समय से देश में हुई चिंतनीय घटनाओं ने देश का तापमान बढ़ा दिया है। इसी बीच गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भगवत व भारतीय इमाम परिषद् के अध्यक्ष डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी से मुलाकात हुई। इलियासी इस भेंट से संतुष्ट व प्रसन्न रहे। संघ प्रमुख एक मदरसे में भी गए। उनका स्वागत वंदे मातरम् से हुआ। भागवत दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट-जनरल जमीरुद्दीन शाह, शाहिद सिद्दीकी, स...
मोहन भागवत को राष्ट्रपिता कहने का इस्लामिक एजेंडा

मोहन भागवत को राष्ट्रपिता कहने का इस्लामिक एजेंडा

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राष्ट्र-चिंतन* *मोहन भागवत को राष्ट्रपिता कहने का इस्लामिक एजेंडा* *आचार्य श्री विष्णुगुप्त* ==================== सरकारी सड़क के गोल चक्कर को घेर कर बैठने वाले और इमामों का संगठन चलाने वाले ऑल इंडिया इमाम ऑगनाइजेशन के अध्यक्ष इमाम उमर अहमद इलियासी वर्तमान में बहुत ही चर्चित है, उनकी चर्चा सिर्फ राजनीति में ही नहीं है बल्कि मुस्लिम पंथ में भी खूब हो रही है। चर्चा होनी भी स्वाभिवक है। आखिर उनके दर पर मोहन भागवत जो पहुंच गये, उमर इलियासी भी मोहन भागवत को राष्ट्रपति करार जो दिया।खासकर मुस्लिम राजनीति भी उबल पड़ी। मुस्लिम राजनीति में उनकी चर्चा कुछ ज्यादा ही हो रही है। अधिकतर मुस्लिम राजनीति के सहचर उन्हें खलनायक और भस्मासुर की उपाधि दे रहे हैं, उन्हें इस्लाम का सत्यानाशी करार दे रहे हैं, कुछ मुस्लिम संगठन तो उन्हें अपशब्द भी कह रहें हैं और न लिखने योग्य गालियां भी बक रहे हैं। जहां तक इमामों ...
आधुनिक सतही और भ्रमित युवा: कारण और समाधान

आधुनिक सतही और भ्रमित युवा: कारण और समाधान

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आधुनिक सतही और भ्रमित युवा: कारण और समाधान भारत में 15 से 35 वर्ष की आयु के युवा एक मूल्यवान संसाधन हैं जो ज्ञान, कौशल और विकास की पहचान हैं और अक्सर कई आंतरिक और बाहरी कारकों से प्रभावित होते हैं जो उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्रभावित करते हैं। अवधि शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और व्यवहारिक परिवर्तनों के साथ-साथ सामाजिक संबंधों और संबंधों के बदलते रूप की विशेषता है। युवावस्था एक स्वस्थ और उत्पादक वयस्कता स्थापित करने और जीवन में बाद में स्वास्थ्य समस्याओं की संभावना को कम करने का एक अवसर है। अधिकांश युवा लोगों को स्वस्थ माना जाता है, लेकिन डब्ल्यूएचओ के अनुसार, अनुमानित 2.6 मिलियन युवा 10 से 24 वर्ष की आयु के बीच हर साल मर जाते हैं, और इससे भी अधिक संख्या में बीमारियों या "दुर्व्यवहार" से पीड़ित होते हैं जो वे विकसित करते हैं। होने की क्षमता को सीमित करता है। सभी समय से पहले होने वाली मौतों ...
क्या बैकफुट पर हैं रुस-चीन या हिला हुआ है नाटो और अमेरिका ?

क्या बैकफुट पर हैं रुस-चीन या हिला हुआ है नाटो और अमेरिका ?

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क्या बैकफुट पर हैं रुस-चीन या हिला हुआ है नाटो और अमेरिका ? - अनुज अग्रवाल रुस के राष्ट्रपति पुतिन द्वारा फिर से यूक्रेन के ख़िलाफ़ किसी भी हद तक जाने (परमाणु हमले की धमकी देने) के बाद से पूरा यूरोप डरा व घबराया हुआ है तो नाटो व अमेरिका हिले हुए हैं। यूक्रेन में अपने क़ब्ज़े वाले साठ हज़ार किलोमीटर के क्षेत्र में से नौ हज़ार किलोमीटर के क्षेत्र को किसी गोपनीय रणनीति के तहत छोड़ देने के रुस के फ़ैसले के बाद प्रॉपगंडा वार में महारथी अमेरिका व नाटो ने इतनी ज़्यादा अफ़वाह फैलायीं कि पुतिन परेशान हो गए व ख़तरनाक रूप से आक्रामक होने की रणनीति अपनाने पर मजबूर हो गए। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाईडेन की इस आक्रामक व उकसाने वाली रणनीति की पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प ने कड़ी आलोचना करते हुए इसे मूर्खतापूर्ण कहा है किंतु बाईडेन बाज़ नहीं आ रहे। अब अगली अफ़वाह पुतिन के साथ दीवार की तरह खड़े चीनी राष्ट्...
लड़कियों को लड़कों से कमतर आंकना समाज की भूल है।

लड़कियों को लड़कों से कमतर आंकना समाज की भूल है।

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लड़कियों को लड़कों से कमतर आंकना समाज की भूल है। हमेशा देश में 10वीं और 12वीं कक्षा के रिजल्ट में लड़कियां ही पहले पायदान पर रहती हैं। चाहे आईएएस बनने की होड़ हो, विमान या लड़ाकू जहाज उड़ाने की या फिर मैट्रो चलाने की, लड़कियां हर क्षेत्र में अपनी सफलता के झंडे गाड़ रही हैं।  कौन कहता है कि लड़कियां बोझ है? आज की  लड़की अपना बोझ तो क्या, परिवार का बोझ भी अपने कंधों पर उठाने की हिम्मत रखती है। बेटों की तरह वह भी पूरी निष्ठा के साथ जिम्मेदारियां संभाल रही है। देश की बेटियां अब सिर्फ सिलाई- कढ़ाई या ब्यूटी पार्लर तक ही सीमित नहीं रह गई है बल्कि वह तो दुश्मनों के छक्के छुड़ाने के लिए तैयार हैं। -प्रियंका सौरभ आज की लड़कियां तमाम बंधनों को तोड़कर आसमान छू रही हैं और समाज के लिए आदर्श बनी हुई हैं। अमूमन समाज में लड़कियों को लड़कों से कमतर आंका जाता है। शारीरिक सामर्थ्य ही नहीं अन्य कामों म...
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने कल सांकेतिक भाषा दिवस मनाया

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने कल सांकेतिक भाषा दिवस मनाया

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सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने कल सांकेतिक भाषा दिवस मनाया भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के तत्वावधान में भारतीय सांकेतिक भाषा अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र (आईएसएलआरटीसी), नई दिल्ली 23 सितंबर, 2022 सांकेतिक भाषा दिवस-2022 मना रहा है। यह कार्यक्रम सी.डी. देशमुख ऑडिटोरियम, इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी), नई दिल्ली मे आयोजित हुआ । जब से संयुक्त राष्ट्र ने 23 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस घोषित किया है, तब से आईएसएलआरटीसी हर साल 23 सितंबर को इसे मनाता है। इस वर्ष गृह मंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय कार्यान्वयन समिति (एनआईसी) ने अन्य बातों के साथ-साथ सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग) द्वारा 23 सितंबर, 2022 को आयोजित और मनाए जाने वाले 'सांकेतिक भाषा दिवस' ​​कार्यक्रम को 'आजादी का अमृत ...
विदेशी भूमि पर षड्यंत्र

विदेशी भूमि पर षड्यंत्र

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विदेशी भूमि पर षड्यंत्र जैसा कि मैं पहले भी कई बार लिख चुका हूं कि पूरा विश्व इस समय भारत की ओर शंका की निगाहों से देख रहा है. विकसित देशों को यह अच्छे से समझ आ गया है कि जिस स्पीड से भारत तरक्की कर रहा है बहुत जल्द वह उन सबको पीछे छोड़ देगा. अपनी इस तरक्की का 2040 तक का जो अनुमान था उसको भारत 2030 तक ही पूरा करता हुआ नजर आ रहा है. भारत पहले ही विश्व की पांचवी अर्थव्यवस्था बन चुका है और जल्द ही जर्मनी को पीछे छोड़कर विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था बनने वाला है इन सब बातों से सशंकित होकर इन विकसित देशों ने भारत के अंदर वही 100 साल पुराना हथकंडा अपनाना शुरू कर दिया है. बांटो और राज करो? जी हां इस समय भारत के अंदर बहुत बड़े पैमाने पर शांति दूतों को आर्थिक सहायता दी जा रही है और भारत में गृह युद्ध के आसार बनाए जा रहे हैं.  इस बारे में विकसित देशों का एजेंडा यह है कि भारत में बड़े पैमाने पर...