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आत्महत्या की घटनाओं का बढ़ना बदनुमा दाग

आत्महत्या की घटनाओं का बढ़ना बदनुमा दाग

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विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस- 10 सितंबर, 2022आत्महत्या की घटनाओं का बढ़ना बदनुमा दाग  ललित गर्ग बढ़ती आत्महत्या की घटनाएं एक ऐसा बदनुमा दाग है जो हमारे तमाम विकास एवं शिक्षित होने के दावों को खोखला करता है। आत्महत्या शब्द जीवन से पलायन का डरावना सत्य है जो दिल को दहलाता है, डराता है, खौफ पैदा करता है, दर्द देता है। इसका दंश वे झेलते हैं जिनका कोई अपना आत्महत्या कर चला जाता है, उनके प्रियजन, रिश्तेदार एवं मित्र तो दुःखी होते ही हैं, सम्पूर्ण मानवता भी आहत एवं शर्मसार होती है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में भारत में 1.39 लाख लोगों ने आत्महत्या की, जिनमें से लगभग 45 फीसदी लोग तनाव, अवसाद, बायपोलर डिसऑर्डर, सिजोफ्रेनिया जैसी समस्याओं का सामना कर रहे थे। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि आत्महत्या के प्रमुख कारणों में तनाव, हिंसा, अवसाद, निराशा, नकारात्मकता सहित अन्य मानसिक समस्याएं, गंभीर रोगों के च...
रामलीला में हुई राहुललीला

रामलीला में हुई राहुललीला

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रामलीला में हुई राहुललीला डॉ वेदप्रताप वैदिक रामलीला मैदान की रैली में कांग्रेस ने काफी लोग जुटा लिये। हरयाणा से भूपेंद्र हूडा और राजस्थान से अशोक गहलोत ने जो अपना जोर लगाया, उसने कांग्रेसियों में उत्साह भर दिया लेकिन यह कहना मुश्किल है कि इस रैली ने कांग्रेस पार्टी को कोई नई दिशा दिखाई है। इस रैली में कांग्रेस का कोई नया नेता उभरकर सामने नहीं आया। कई कांग्रेसी मुख्यमंत्री और प्रादेशिक नेता मंच पर दिखाई दिए लेकिन उनकी हैसियत वही रही, जो पिछले 50 साल से थी। सारे अनुभवी, योग्य और उम्रदराज़ नेता ऐसे लग रहे थे, जैसे किसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के मेनेजर या बाबू हों। पिछले दिनों कांग्रेस के पुनर्जन्म की जो हवा बह रही थी, वह उस मंच से नदारद थी। राहुल गांधी इस पार्टी के अध्यक्ष रहें या न रहें, बनें या न बनें, असली मालिक तो वही हैं, यह इस रैली ने सिद्ध कर दिया है। रामलीला मैदान में हुई यह रा...
गुलाम नबी हुए आजाद

गुलाम नबी हुए आजाद

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*गुलाम नबी हुए आजाद* अतीत में राजनीति का अर्थ मात्र देश सेवा हुआ करता था, परन्तु वर्तमान समय में राजनीति का अर्थ अधिकांशतया स्वहित ही प्रमुख होता जा रहा है। किसी भी नेता का एक पार्टी से दूसरी पार्टी में आना-जाना अब एक साधारण बात हो गई है, क्योंकि राजनीति अब जनसेवा के स्थान पर व्यवसाय बन चुकी है और जिस पार्टी का व्यवसाय अच्छा चल रहा होता है, अधिकांश नेता उसी पार्टी में लाभ प्राप्त करने हेतु आतुर रहते हैं। इसके इतर जब कोई नेता 51 वर्षो की दीर्घ अवधि तक सेवा करने के पश्चात, मूल पार्टी को छोड़कर चला जाता है तो, निःसन्देह यह आश्चर्य का विषय है। देश की सबसे पुरानी कांग्रेस पार्टी, अपनी स्थापना से लेकर आज तक के कार्यकाल में सर्वाधिक निम्न स्तर पर आ चुकी है और वर्तमान में कोई भी ऐसा नेता दृष्टिगत नहीं हो रहा है जो कांग्रेस के डूबते जहाज को बचा सके। सोनिया जी अपनी उम्र और गिरते स्थास्थ्य कारणों ...
अपने भ्रष्टाचार पर नहीं मोदी पर गरजती  हैं भ्रष्ट नेताओं की फ़ौज

अपने भ्रष्टाचार पर नहीं मोदी पर गरजती हैं भ्रष्ट नेताओं की फ़ौज

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अपने भ्रष्टाचार पर नहीं मोदी पर गरजती  हैं भ्रष्ट नेताओं की फ़ौज भ्रष्टाचारी नेता  पकड़े जाने पर ही वह तीन राग अलापने लगता है | पहला यह वे झुकेंगे नहीं , दूसरा यह कि भाजपा उनकी सरकार गिराना चाहती है और तीसरा यह कि लोकतंत्र की हत्या की जा रही है | राहुल गांधी  ,सोनिया गांधी , बंगाल के भ्रष्टाचारी नेता , महाराष्ट्र के नवाब मलिक , संजय राउत , शरद पवार , दिल्ली में आप  सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन ,संजय सिंह , मनीष सिसोदिया और खुद मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल , बिहार के  लालू यादव का कुनबा और अब हेमंत सोरन सब के सब भ्रष्टाचार के मामलों में आर्थिक जांच और सुरक्षा एजेंसियों के  रडार पर आते ही यही राग अलापने लगे हैं | भाजपा और मोदी को कोसने का सिलसिला चालू हो जाता है और यह साबित करने की कोशिश होती हैं कि उन पर कार्यवाही करना संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ जाना है | मोदी के खिलाफ विष वमन...
भ्रष्टाचार के ट्विन टावर का ध्वस्त होना व्यर्थ ना जाये

भ्रष्टाचार के ट्विन टावर का ध्वस्त होना व्यर्थ ना जाये

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भ्रष्टाचार के ट्विन टावर का ध्वस्त होना व्यर्थ ना जाये-ललित गर्ग-हमारा भ्रष्ट चरित्र देश के समक्ष गंभीर समस्या बन चुका है। आजादी का अमृत महोत्सव मनाने तक की हमारी आजादी की यात्रा में पहली बार नोएडा में सन्नाटे के बीच हुए जोरदार धमाके के बीच साहसिक तरीके से ट्विन टावर रूपी भ्रष्टता के किले को ध्वस्त किया गया। इससे उठे धूल के गुबार के बीच भ्रष्टाचार की नींव पर बने अवैध ट्विन टावर को जमींदोज कर दिया गया। 3700 किलो विस्फोटक की मदद से यह इमारतें कुछ ही सैकेंड में ध्वस्त हो गईं। इस विस्फोट से उठे गुबार से ऐसी भ्रष्टता की ऊंचे किले गढ़ने वालों को कड़ा सबक मिला है। हजारों करोड़ की इस इमारत को जमींदोज करने का लक्ष्य भी यही है कि राजनीति से लेकर प्रशासन तक, समाजसेवियों से लेकर धर्मगुरुओं तक, व्यापारियों से लेकर उद्योगपतियों तक, डाक्टरों से लेकर इंजीनियर, वकील, सीए, न्यायाधिपति तक, स्कूलों से लेकर अस्पत...
अपराध और ड्रग्स के बीच संबंध हज़ारों है।

अपराध और ड्रग्स के बीच संबंध हज़ारों है।

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अपराध और ड्रग्स के बीच संबंध हज़ारों है। नशीली दवाओं के दुरुपयोग के प्रमुख कारण है- साथियों द्वारा स्वीकार किया जाना, आर्थिक तनाव बढ़ना, सांस्कृतिक मूल्यों में परिवर्तन, न्यूरोटिक आनंद और अप्रभावी पुलिसिंग। तभी तो हाल ही में सुशांत राजपूत के बाद भारत की सोशल मीडिया स्टार सोनाली फोगाट को असमय मौत का शिकार होना पड़ा। चाहे कारण कुछ भी रहे हो, ड्रग ने ही जान ली दोनों की। भारत में नशीली दवाओं के दुरुपयोग के मामले और संख्या आये दिन बढ़ती जा रही है। नशीली दवाओं का दुरुपयोग हमारे स्वास्थ्य, सुरक्षा, शांति और विकास को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। ड्रग्स से  दुर्घटनाओं, घरेलू हिंसा की घटनाओं, चिकित्सा समस्याओं और मृत्यु का उच्च जोखिम होने के साथ-साथ आर्थिक क्षमता बर्बाद हो जाती है। नशीली दवाओं पर निर्भरता, कम आत्मसम्मान, निराशा के कारण आपराधिक कार्रवाई और यहां तक कि आत्महत्या की प्रवृत्...
आकर्षण का केंद्र बना 12वाँ राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव

आकर्षण का केंद्र बना 12वाँ राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव

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आकर्षण का केंद्र बना 12वाँ राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव नई दिल्ली, 25 अगस्त (इंडिया साइंस वायर): विज्ञान प्रसार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा भारत के 12वें राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव-2022 का आयोजन भोपाल में किया जा रहा है। विज्ञान फिल्मों के इस मेले में देशभर से प्राप्त चुनिंदा 71 विज्ञान फिल्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है। विज्ञान संचार परिचर्चाएं, मास्टर क्लासेज, विज्ञान फिल्म निर्माण पर कार्यशाला, विज्ञान कवि सम्मेलन, और मध्य प्रदेश के सांस्कृतिक एवं संगीत कार्यक्रमों को लेकर लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। 22 अगस्त को मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के विज्ञान भवन के प्रो. जगदीशचंद्र बसु सभागार में महान भारतीय वैज्ञानिक पी.सी.रे पर केंद्रित डॉक्यूमेंट्री के प्रदर्शन के साथ पाँच दिनों तक चलने वाले विज्ञान फिल्मोत्सव की शुरुआत ह...
बिहार में पुलिस दमन मानों प्रजातंत्र न हो सज़ातंत्र हो

बिहार में पुलिस दमन मानों प्रजातंत्र न हो सज़ातंत्र हो

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बिहार में पुलिस दमन मानों प्रजातंत्र न हो सज़ातंत्र हो  - ललित गर्ग - बिहार में फिर जंगलराज शुरु हो गया है। नई सरकार बनते ही पुलिस बर्बरता देखने को मिल रही है। लीडरशीप भ्रष्ट हो तो पुलिस-प्रशासन कैसे ईमानदार एवं अनुशासित होगा? कल ही छोटे परदे पर तब यह देख कर मन को गहरा असन्तोष हुआ जब एक एडीएम तिरंगा लिए गिरे पड़े एक बेरोजगार युवक को रोजगार की मांग करने पर बेरहमी से पीट रहे थे। देश की सेवक, जनता की रक्षक, अपराधियों को सजा दिलाने वाली, कानून व्यवस्था को बनाये रखने वाली पुलिस की इस तरह की बर्बर, क्रूर एवं खौफनाक छवि कोई नयी बात नहीं है। यह खाकी एवं खादी की मिलीभगत का परिणाम है, इसी खाकी के बल पर खादी वाले घौंसपट्टी जमाते हैं और इसी खादी के बल पर खाकी वाले आपराधिक कृत्यों, घालमेल, आर्थिक अनियमितताओं, कमजोरों पर अत्याचार, दमन, लाठीचार्ज और जमीन से लेकर हर तरह के सौदों में हेरफेर को अंजाम देते...
कांग्रेस मुक्त भारत का सपना साकार करते राहुल गांधी

कांग्रेस मुक्त भारत का सपना साकार करते राहुल गांधी

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कांग्रेस मुक्त भारत का सपना साकार करते राहुल गांधी आर.के. सिन्हा          कांग्रेस से देश को यह उम्मीद थी कि यूपीए सरकार के सन 2014 में सत्ता से मुक्त होने के बाद वह अब एक सशक्त विपक्ष की भूमिका को सही तरह से निभायेगी । वह केन्द्र में एनडीए सरकार के कामकाज पर पैनी नजर रखते हुए उसकी कमियों पर उसे घेरेगी भी और उपलब्धियों पर कभी-कभार उसकी पीठ भी थपथपा देगी। यही तो लोकतंत्र है। पर यह हो न सका। राहुल गांधी ने कांग्रेस को एक नकारा और थकी हुई पार्टी बनाकर रख दिया है। कांग्रेस में गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा जैसे पुराने नेता आलाकमान के फैसलों से निराश हैं।  गुलाम नबी आजाद और आनन्द शर्मा के चुनाव समितियों के अध्यक्ष पदों से दिए गए इस्तीफों ने यह दर्शा दिया है कि पार्टी में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। दशकों से पार्टी की सेवा करने वाले आजाद और शर्मा जैसे नेताओं को भी अब कांग्रेस में घुटन ...
सोनाली फोगाट का मर्डर या हार्ट अटैक देश में राजनीतिक हत्याओं का दौर नया नहीं है?

सोनाली फोगाट का मर्डर या हार्ट अटैक देश में राजनीतिक हत्याओं का दौर नया नहीं है?

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सोनाली फोगाट का मर्डर या हार्ट अटैक देश में राजनीतिक हत्याओं का दौर नया नहीं है? (अब्राहम लिंकन, जॉन एफ कैनेडी, इंदिरा गांधी और बेनजीर भुट्टो की जीवन ज्योति उनके राजनीतिक जीवन के चरम पर बुझा दी गई। आजादी के बाद से राजनीतिक हत्याओं का दौर भारत के राजनीतिक जीवन को भी लहूलुहान करता आया है। भारत को आजादी मिले छह महीने भी नहीं हुए थे कि महात्मा गांधी की हत्या ने दुनिया को हिला दिया। वर्ष 1953 में कश्मीर की शेष भारत के साथ एकता का आंदोलन करने वाले डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की श्रीनगर की जेल में रहस्यमय मृत्यु हो गई थी। वंशवादिता में राजनीति का कमान मिलना वंशपरंपरा के अधीन रहता है तो दूसरी ओर संपर्कवादिता के जरिए किसी बडे राजनेता के संपर्क में आने से राजनीतिक कमान प्राप्त करने की अभिलाषा पूर्ण हो जाती है। कहावत है कि "राजनीति एक गंदा खेल है"। )   - सत्यवान 'सौरभ' हरियाणा की बीजेपी न...