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अब आगे की सोचें

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  लॉकडाउन से सबने ये समझ लिया है कि कोरोना के साथ कैसे जीना है। धीरे धीरे कई राज्य लॉकडाउन में ढील देते जा रहे हैं। प्रवासी मजदूरों की घर लौटने की भीड़ देश के हर महानगर व अन्य नगरों में व शराब की दुकानों के बाहर लगी लम्बी लाइनें इस बात का प्रमाण है कि लोगों के धैर्य का बांध अब टूट चुका है। बहुत से लोग मानते हैं कि लॉकडाउन के चलते कोरोना से नहीं मरे तो भूख और बेरोजगारी से लाखों लोग अवश्य मर जाएँगे। इसलिए जो भी हो इस कैद से बाहर निकला जाए और चुनौती का सामना किया जाए। जिनके पास घर बैठे खाने की सुविधा है और जिनका लॉकडाउन से कोई आर्थिक नुकसान नहीं हो रहा उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि लॉकडाउन कितने दिन अभी और चले। उधर देश भर से तमाम सूचनाएँ आ रही हैं कि जिस तरह का आतंक कोरोना को लेकर खड़ा हुआ या किया गया वैसी बात नहीं है। पारम्परिक पद्धतियों जैसे होमियोपैथी और आयुर्वेद ने बह...
क्या समाप्त होने वाला है मोदी युग?

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  कोरोना संकट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चक्रव्यूह में फंसा दिया है। वे आज के अभिमन्यु बनते जा रहे हैं। यह भी सत्य है कि वे विपरीत परिस्थितियों में भी बड़े साहस से डटे हुए हैं और लगभग चक्रवर्ती सम्राट की तरह ही भारत की सत्ता का संचालन कर रहे हैं और वैश्विक स्तर पर भी प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं। मगर परिस्थिति दिन व दिन जटिल होती जा रही हैं। हर बदलते दिन के साथ उन पर आरोप लगते जा रहे हैं व उनके कई निर्णयों के उल्टा असर पड़ने से देश की जनता में असंतोष बढ़ता जा रहा है। एनडीए सरकार के सन 2019 में वापसी के बाद कश्मीर, अयोधया व तीन तलाक आदि के मुद्दों पर जीत के साथ वे लोकप्रियता के शिखर पर पहुंच गए थे और इसीलिए कोरोना संकट के समय उनके सम्पूर्ण लॉक डॉउन के निर्णय का पूरे देश ने एक स्वर में साथ दिया बिना किसी चर्चा व गहराई में गए बिना। मगर लॉक डॉउन के चौथे चरण तक आते आते चीजें बिखरने लगी...
कोरोना वैक्सीन और भारत के प्रयास

कोरोना वैक्सीन और भारत के प्रयास

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पूरी दुनिया कोरोना वायरस संकट से इस वक्त जूझ रही और अब तक इसके वैक्सीन का पता नहीं चल पाया। कोविद-19 मामलों की पुष्टि के मामले लगातार दुनिया भर में बढ़ रहे हैं, वैज्ञानिक महामारी को धीमा करने और बीमारी के नुकसान को कम करने के लिए टीके और उपचार विकसित करने के प्रयासों के साथ आगे बढ़ रहे हैं। वायरस आसानी से फैलता है और दुनिया की अधिकांश आबादी अभी भी इसके प्रति संवेदनशील है। एक टीका, वायरस से लड़ने के लिए लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करके कुछ सुरक्षा प्रदान करेगा ताकि वे बीमार न हों। इससे लॉकडाउन को अधिक सुरक्षित रूप से उठाया जा सकता है। दुनिया एक अभूतपूर्व और अकल्पनीय गंभीर संकट से निपट रही है। इसलिए, टीका विकास की गति महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन में वैज्ञानिकों द्वारा प्रदान किए गए नए कोरोनावायरस के जीनोम अनुक्रमण से पता चलता है कि यह एक ही आनुवंशिक सामग्री का 79 प्...
किसानों के लिए एक लाख करोड़ का पैकेज

किसानों के लिए एक लाख करोड़ का पैकेज

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  हमारे देष में एक बहुत ही पुरानी कहावत प्रचलित है। “उत्तम खेती मध्यम बान, निकृष्ठ चाकरी भीख निदान।” कहने का अर्थ यह है कि सबसे अच्छा कार्य या बेहतर पेशा तो खेती ही है और दूसरे दर्ज पर व्यापार है। नौकरी को तो कहा गया है कि वह तो निकृष्ठ है, जो भीख मांगने के समान है। लेकिन, 70 वर्षों में विदेशों की नकल करके हमारे कर्णधारों ने देश की स्थिति को बदल दिया है। अब तो निकृष्ठ नौकरी को ही सबसे बढ़िया पेशा माना जा रहा है, और उसके ही बाद व्यापार भी है। सबसे निकृष्ठ आज अन्नदाताओं का कार्य कृषि बन गया है। यह स्थिति जो सत्तर सालों में उल्टी हो गयी है उसको वापस पटरी पर लाने के लिए ही “आत्मनिर्भर भारत योजना” के तहत प्रधानमंत्री मोदी जी ने किसानों, पशुपालकों और मछली पालकों के लिए एक लाख करोड़ रूपये का पैकेज कल घोषित किया। वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सितामरण जी ने अपने प्रेस कांफ्रेस में कल इसकी विस्...
महामारी के बीच तूफानी ख़तरे

महामारी के बीच तूफानी ख़तरे

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देश अभी कोरोना वायरस से लड़ ही रहा है कि एक और नई चुनौती सामने आकर खड़ी हो गई है, यह है चक्रवात अम्फान। ऐसे में इन दोहरी चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए एनडीआरएफ की टीमों ने अपनी कमर कस ली है। चक्रवाती तूफान 'अम्फान' सुपर साइक्लोन में बदल गया है. जानकारी के मुताबिक यह चक्रवात भीषण तबाही मचा सकता है. भारतीय मौसम विभाग ने बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवाती तूफान अम्फान की तेज रफ्तार को देखते हुए पश्चिम बंगाल, ओडिशा समेत कई राज्यों में अलर्ट जारी किया है.चक्रवात अम्फान अब बंगाल और ओडिशा तट की ओर तेजी से बढ़ रहा है. चक्रवात की वर्तमान गति 160 किमी/घंटा है. वर्तमान में, यह दीघा से करीब 1000 किलोमीटर दूर है. आइये जाने चक्रवातों के बारे में,भारत मौसम विज्ञान विभाग ने हाल ही में भविष्य के उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के 169 नामों की सूची जारी की है जो बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में उभरेंगे। दुनिया भर मे...
तब्लीगियों और मजदूरों को लेकर राजनीति होती रही, पर सरकार का इकबाल कहीं दिखा ही नहीं, अब कोरोना झेलिए!

तब्लीगियों और मजदूरों को लेकर राजनीति होती रही, पर सरकार का इकबाल कहीं दिखा ही नहीं, अब कोरोना झेलिए!

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  आज कोरोना संक्रमण के एक्टिव केस की संख्या 58,802 है और अब तक कुल 3,163 लोगों की दुखद मृत्यु हो चुकी है। अब तक संक्रमण के कुल 1,01,139 मामले कन्फर्म हो चुके हैं। एक्टिव केस के मामले में भारत अभी दुनिया में 7वें स्थान पर आ चुका है। अब भारत से आगे केवल अमेरिका, रूस, ब्राज़ील, फ्रांस, इटली और पेरू हैं। इन देशों में भी फ्रांस और इटली ने अपने यहाँ स्थिति पर काबू पा लिया है और वहाँ हालात बेहतर हुए हैं। अमेरिका में जो होना है, हो चुका है। रूस, ब्राज़ील और पेरू इन तीनों देशों को मिलाकर भी 38 करोड़ की ही आबादी है, यानी अकेले भारत की आबादी इन तीनों देशों को मिलाकर भी चार गुना ज़्यादा है। यानी दुनिया में कोरोना का अगला कहर भारत में ही बरपने वाला है। फिर भी ऐसा लगता है कि अब किसी भी सरकार के पास कोरोना से निपटने की कोई ठोस नीति नहीं है। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के नाम पर सरकारें क्र...
चुनौती को अवसर में बदलें पूर्वी राज्य

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आर.के.सिन्हा कोरोना वायरस के बहाने देश दीन-हीन प्रवासी मजदूरों की दर्दनाक हालात से रू ब रू हो गया है। कोराना वायरस की चेन को ध्वस्त करने के लिए शुरू किए गए देशव्यापी लॉकडाउन के बाद पैदा हुए हालातों से समझ आ गया कि हमारे यहां बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, उडीसा, छतीसगढ़ और असम आदि राज्यों के मजदूरों को लेकर कई राज्य सरकारों और नौकरशाही का रवैया कितना निर्ममतापूर्ण रहा है। गुजरात में भूखे-प्यासे प्रवासी मजदूरों पर लाठियां बरसाई जाती हैं। पंजाब, महाराष्ट्र और तमिलनाडू में भी इन्हें इंसान तक नहीं समझा गया। अब कहीं जाकर इन्हें घर भेजने की व्यवस्था शुरू हुई है। यह पहले भी हो सकती थी । इसके कार्यान्वयन में देरी ने सशक्त मजदूरों का दयनीय और मजबूर दृश्य देश के सामने प्रस्तुत किया है जिससे बचा जा एकता था । इसके लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की लचर आपदा प्रबंधन, लापरवाह कार्य यो...
मौतों के दौर में सोनिया की सियासत

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अफसोस कि जब देश को कोरोना वायरस के संक्रमण की राष्ट्रीय आपदा और उससे पैदा हुई समस्याओं से एक साथ मिलकर लड़ना चाहिए था, तब भी हमारे देश में ओछी राजनीति हो रहीहै। लगता है कि मौतों और लाशों की खबरें देख सुनकर भी कुछ नेताओं में मनुष्यता अबतक जागी नहीं है। उनके दिल तो अभी भी पत्थर के समान कठोर हैं। उन्हें तो सस्ती सियासत हीकरनी है। चाहे देश और जनता जाये चूल्हें में उनकी अपनी रोटी सिंकना जरूरी है, चिता की आग हो या दंगों की आगजनी। उन्हें कहाँ कोई फर्क पड़ता है। अब जरा देख लें कि देश की सबसे पुरानी और बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस लॉकडाउन के कारण फंसे रहे मजदूरों को उनके अपने गृह राज्यों में रेल से भेजने के प्रश्न पर अकारण राजनीतिकरने लगीं। कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी विगत 4 मई को कहने लगी कि कांग्रेस पार्टी प्रवासी मजदूरों का रेल किराया देने के लिए तैयार है। बाकायदा लिखित बयान जारी कर झूठेआरो...
कब तक रहेगा वर्क फ्रॉम होम

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अब यह कमोबेश सबको समझ आ गया होगा कि वैश्विक महामारी कोविड-19 के साथ हमें रहना सीखना ही होगा। इस बात को इस तरह से भी समझा जा सकता है कि जब तक इस भयानक महामारी की कोई वैक्सीन ईजाद नहीं होती तब तक तो बचाव के अलावा कोई दूसरा कोई रास्ता नहीं है। इसलिए जरूरी है कि फैक्ट्रियां, दफ्तर आदि भी खुलें । देश में विगत मार्च महीने के तीसरे हफ्ते से ही लॉकडाउन के हालात बने हुए हैं। ये अनिश्चितकाल के लिए तो नहीं रहेंगे। केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग और लघु उद्योग मंत्री नितिन गडकरी ने भी तो अब यह कहा कि सरकार सोशल डिस्टैंसिंग का पालन करते हुए सार्वजनिक परिवहनों के संचालन के लिए दिशा-निर्देश तैयार कर रही है। उन्होंने कहा, 'पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी जल्द ही शुरू हो सकता है।' गडकरी जी ने जो कहा उसके संकेतों से साफ है कि सरकार अब जिंदगी दुबारा से पहले की तरह बहाल करने की तरफ बढ़ रही है। वह ऑरेंज और ग्रीन जोनों...
क्या शराब और तम्बाकू से कोरोना वायरस रोकथाम खतरे में पड़ जायेगी?

क्या शराब और तम्बाकू से कोरोना वायरस रोकथाम खतरे में पड़ जायेगी?

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विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, तम्बाकू और शराब दोनों से कोरोना वायरस रोग होने पर गंभीर परिणाम होने का खतरा बढ़ता है और मृत्यु तक हो सकती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, तम्बाकू और शराब दोनों के सेवन की, कोई भी सुरक्षित सीमा नहीं है – यानि कि, हर रूप में और हर मात्रा में, यह हानिकारक हैं. जब देश कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहा था और तालाबंदी हो गयी थी, तब शराब कंपनियां सरकार पर यह दबाव बनाने का प्रयास कर रही थीं कि शराब को ‘अति-आवश्यक श्रेणी’ में लाया जाए क्योंकि खाद्य सामग्री की तरह शराब ही अति-आवश्यक है. कोरोना वायरस महामारी में शायद पृथ्वी पर हर इंसान को यह समझ में आ गया है कि भोजन कितना आवश्यक है परन्तु शराब और तम्बाकू, न केवल, गैर ज़रूरी हैं बल्कि कोरोना वायरस रोग का खतरा भी बढ़ाते हैं. शराब और कोरोना वायरस रोग विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, कोरोना वायरस महामारी के दौरान शर...