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महायुद्ध – महासंकट के महापरिणाम

महायुद्ध – महासंकट के महापरिणाम

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  अंततः अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वीकार कर ही लिया कि कोरोना महामारी नहीं वरन उनके देश पर चीन का आक्रमण है। उनके देश पर ही नहीं वरन पूरी दुनिया पर। बिना हथियार चलाए चीन ने एक वायरस के माध्यम से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है और पूरी दुनिया मौत के साए में नपुंसक सी अपनी बर्बादी का यह ख़ौफ़नाक दृश्य 24 घंटे देख रही है। मजेदार बात यह कि जिस लेब में यह वायरस पैदा किया गया उसकी फंडिंग अमेरिका से हो रही थी। शांति पूर्ण ढंग से वायरोलॉजी के उपयोग के लिए संयुक्त प्रयासों से चल रही इस लेब का इतना खतरनाक उपयोग कोई शायद ही सोच पाया हो। क्या विडंबना है कि जिस विश्व स्वास्थ्य संगठन को दुनिया के बड़े देश चीन की कठपुतली मां चुके हैं उसी के निर्देशों पर ही दुनिया के देश कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। क्या इस संस्था के माध्यम से चीन दुनिया को अपने इशारों पर चला रहा है और बर्बा...
प्रकृति से लड़े तो बेमौत मारे जाओगे

प्रकृति से लड़े तो बेमौत मारे जाओगे

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आज पूरे विश्वभर में, घर-घर में, गली में, गाँव में, शहरों में चर्चा का विषय तो एक ही है कि कोरोना जैसी महामारी से निपटा कैसे जाये, कोरोना वायरस, यानि कोविड-19, एक इतना छोटा सा जन्तु जो नंगी आंखों से तो छोड़ दीजिए, सामान्य माइक्रोस्कोप से भी दिख नहीं सकता। इसको देखने के लिए भी इलेक्ट्रोन माइक्रोस्कोप की जरूरत होती है। अब इस छोटे से पिद्दीनुमा वायरस ने पूरे विश्व को तबाह करके रख दिया है। किसी भी मनुष्य के ही नहीं समस्त जीव-जन्तु के शरीर में हजारों लाखों की संख्या में बैक्टीरियानुमा जीव-जन्तु हमेशा विद्यमान ही रहते हैं । इन्हीं कारणों से समस्त प्राणियों में जीवन की प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती रहती है। इनमें कुछ ऐसे अर्ध विकसित जीव होते हैं, जिन्हें वायरस कहते हैं जो हानिकारक प्रभाव पैदा करते हैं। इन हानिकर प्रभावों को रोकने के लिए और ऐसे वायरस को शरीर से खत्म करने के लिए चिकित्सा विज्ञान ने बह...
सऊदी अरब पहले तुर्की का गुलाम था यानी ऑटोमन साम्राज्य का हिस्सा था

सऊदी अरब पहले तुर्की का गुलाम था यानी ऑटोमन साम्राज्य का हिस्सा था

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सऊदी अरब पहले तुर्की का गुलाम था यानी ऑटोमन साम्राज्य का हिस्सा था। लेकिन सऊदी के कबीलों को यह नहीं पसंद था कि तुर्की का खलीफा उस पर राज करें क्योंकि अरबी मुस्लिम अपने आप को श्रेष्ठ समझते थे और तुर्क अपने आप को श्रेष्ठ समझते थे। तुर्की के खलीफा ने इस्तांबुल से अम्मान फिर अम्मान से दमास्कस यानी दमिश्क़ फिर दमास्कस से होते हुए सऊदी अरब के विशाल रेगिस्तान को पार करके मक्का और मदीना तक रेलवे लाइन बिछाई थी जिसे हेजाज रेलवे कहते हैं मैंने इसके बारे में पहले भी विस्तार से लिखा हुआ है तुर्की का खलीफा सऊदी अरब के लोगों से एक गुलाम की तरह व्यवहार करता था और उसका कमांडर जब चाहे तब अरबों को मार डालता था उसी समय अंग्रेज तुर्की के खलीफा का पतन करना चाहते थे अंग्रेजों को यह बहुत अच्छा मौका मिला और उन्होंने कैप्टन लॉरेंस को इस गुप्त ऑपरेशन पर लगा दिया । लॉरेंस पहले भी इजिप्ट लीबिया सीरिया इत्याद...
चीन द्वारा 10 दिन में अस्पताल खड़ा करना क्रूरता, बर्बरता व धूर्तता पूर्ण सामाजिक-धोखा

चीन द्वारा 10 दिन में अस्पताल खड़ा करना क्रूरता, बर्बरता व धूर्तता पूर्ण सामाजिक-धोखा

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  चीन में प्रतिदिन कई-कई हजार लाशें क्रेमेशन सेंटर्स (शवदाह गृहों) में लाद-लाद कर पहुंचाई जा रहीं थीं। लेकिन चीन दुनिया के सामने फर्जी दावा ठोंक रहा था कि पूरे कोरोना-काल में केवल कुछ हजार ही मौतें हुईं हैं। (जितनी कुल मौतें चीन ने बताई, उतनी तो लाशें हर रोज क्रेमेशन सेटर्स पहुंच रहीं थीं)। चीन ने दुनिया को धोखे में रखा, दुनिया के अनेक देशों ने कोरोना को हल्के में लिया, गंभीरता से नहीं लिया, जिसके कारण देशों को भारी व अकल्पनीय क्षतियां उठानी पड़ीं। चीन में लाखों लोग बीमार थे। डाक्टरों के पास साधारण मास्क तक नहीं थे। मरीजों के लिए बिस्तर तक नहीं थे। अस्पताल कोरोना मरीजों को भर्ती नहीं कर रहे थे। लोग अपने माता-पिता, रिश्तेदारों व मित्रों को अपनी आंखों के सामने तड़प-तड़प कर मरता देख रहे थे। लाखों लोग छोटे-छोटे माचिस के डब्बेनुमा घरों में कोरोना संक्रमित लोगों के साथ रहने को ब...
बिना तेल के खाने से मोटापा हमेशा रहेगा दूर

बिना तेल के खाने से मोटापा हमेशा रहेगा दूर

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  हार्ट अटैक मुख्य रूप से धमनियों में वसा के जमने के कारण होता है, जो न सिर्फ खून के प्रवाह को रोकता है, बल्कि मांसपेशियों को भी कमजोर कर देता है। कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर दो महत्वपूर्ण कारक हैं, जो धमनियों को ब्लॉक करके खून के प्रवाह में रुकावट का काम करते हैं। इससे हार्ट अटैक की स्थिति बनती है। इन दोनों कारकों को एक प्रकार से माफिया कहा जा सकता है क्योंकि विश्वस्तर पर हर साल हार्ट अटैक से करोड़ों लोगों की मौत हो जाती है। बावजूद इसके, कई हृदय रोग विशेषज्ञ कोलेस्ट्रॉल स्तर 180 एमजी/1 से अधिक और ट्राइग्लिसराइड्स स्तर 160एमजी/डी1 से अधिक की अनुमति देते हैं। मोटापा और हृदय रोगों में संबंध सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि मोटापा किस प्रकार हृदय रोगों को बढ़ावा देता है। शरीर कैलोरी की मदद से ऊर्जा उत्पन्न करता है। हम जो कुछ भी खाते हैं वह ग्लूकोस के रूप में मांसपेशियों तक प...
मरकज से मुरादाबाद- तक कौन भटका रहे हैं मुसलमानों को

मरकज से मुरादाबाद- तक कौन भटका रहे हैं मुसलमानों को

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  दिल्ली में तलबीगी मरकज में हजारों की संख्या में कोरोना संक्रमितों के साथ छिपकर देश को कोरोना वायरस के जाल में फंसाने वाले ये तथाकथित खुदा के बंदे बाज नहीं आ रहे हैं। जब तबलीगियों पर थोड़ा सा शिकंजा कसने लगा तो उनके हमदर्द मुम्बई में लॉकडाउन तोड़ने लगे। बांद्रा और थाणे में हजारों की संख्या में बिला वजह इकट्ठे होकर पुलिस और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने लगे और मुरादाबाद से लेकर इंदौर तथा बिहार के मोतिहारी और औरंगाबाद में पुलिस और डाक्टरों की टीम पर पथराव करने लगे। जरा इनकी हिम्मत तो देखें। अब कोई यह तो न कहे कि सरकार इन्हें दोयम दर्जे का नागरिक-मानती समझती है। ये तो सरकार और बहुसंख्यकों के सिर पर चढ़कर खुलेआम पेशाब कर रहे हैं। डाक्टरों से मारपीट, महिला नर्सों से अश्लीलता और सफाई कर्मचारियों पर थूकना आम्बत है। इनकी महिलायें छतों से ईंटे बरसा कर पुलिस पर हमला कर रही हैं। उत्तर प्रदेश ...
इस्लामिक देश बनाने के लिए तबलीगी जमात का भारत सरकार पर वार

इस्लामिक देश बनाने के लिए तबलीगी जमात का भारत सरकार पर वार

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दिल्ली के भीड़भाड़ भरे निजामउद्दीन इलाके में तबलीगी जमात के मुख्यालय से निकाले गए हजारों लोगों में इंडोनेशिया, मलेशिया बंगला देश आदि देशों के नागरिकों का होना भारतीय समाज की आंखें खोलने वाली घटना है. जमात ने तो भारत की पीठ पर वार किया है. वह तो भारत को इस तरह का घाव देना चाह रहा था ताकि भारत कभी उबर ही न सके. अब इस आशंका को तो ठोस आधार मिल चुका है कि तबलीगी जमात के विदेशी कार्यकर्ता भारत को कोरोना वायरस से भयंकर रूप से संक्रमित करना चाह रहे थे. यानी वे भारत की एक बड़ी आबादी को कोरोना का शिकार बनाकर यहां पर इस्लामिक देश बनाने का सपना देख रहे थे. मोटा-मोटी तबलीगी जमात का लक्ष्य तो भारत के मुसलमानों को कट्टरपंथी बनाने और गैर-मुसलमानों को इस्लाम से जोड़ना ही है. यह तो कहने की बातें हैं कि तबलीगी जमात के लोग मुसलमानों को बेहतर मुसलमान बनाने के मार्ग पर लेकर जाते हैं. राजधानी की तबलीगी जमा...
सड़कों पे दौड़ते बदहवास लोग

सड़कों पे दौड़ते बदहवास लोग

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1894 में स्पैनिश फ्लू से भारत में लगभग 2 करोड़ लोग मारे थे जबकि उस वक्त भारत की आबादी 20 करोड़ थी। कोरोना का असर कब तक, कितना घातक और किस किस इलाके में होगा उसका अभी कोई आँकलन नहीं है। कारण यह है कि जब से चीन में कोरोना फैला है तब से दुनिया भर से लगभग 15 लाख लोग भारत आ चुके हैं और ये पूरे भारत में फैल गए हैं। इनमें से कितने लोग कोरोना के पॉजिटिव हैं कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता। क्योंकि कोरोना के परीक्षण करने की बहुत सीमित सुविधाएँ देश में उपलब्ध हैं। ऐसे में विभिन्न देशों के अलग अलग विशेषज्ञों द्वारा भारत में कोरोना के सम्भावित असर पर अनेकों तरह की भविष्यवाणियाँ की जा रही हैं। जो झकझोरने और आतंकित करने वाली हैं। इन सब विशेषज्ञों का मानना है कि भारत बहुसंख्यक गरीब आबादी जिसके लिए सामाजिक दूरी बना कर रहना असम्भव है, अगर वो इस बीमारी की चपेट में आ गई तो इस भयावक स्तिथि पर काबू पाना दुष्कर हो...
सब याद रखा जाएगा…

सब याद रखा जाएगा…

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अलकायदा ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला कर जब तीन हज़ार से ज़्यादा लोगों को मारा तो उसकी विचारधारा से हमदर्दी रखने वालों ने पूरी दुनिया मे इसका जश्न मनाया था। उन्हें लगा कि पहली बार किसी ने अमेरिका को मज़ा चखाया है। उसके बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान से लेकर इराक में जो तबाही मचाई वो सबके सामने है। उसने पूरी दुनिया में ढूंढ-ढूंढकर जिस तरह अलकायदा के आतंकियों का सफाया किया वो सबने देखा। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की घटना ने अमेरिका ज़ुल्म करने का लाइसेंस दे दिया। उसने रासायनिक हथियारों की झूठी बात बोलकर इराक पर भी हमला कर दिया। जो लोग ट्रेड सेंटर की घटना पर जश्न मना रहे थे वही बाद में अमेरिका की इन ज़्यादतियों पर छाती कूटने लगे। गुजरात में फरवरी 2002 के आखिर में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने 50 से अधिक कारसेवकों को ज़िंदा जला दिया। एक तरीके से उनका जो मिशन था उसमें वो कामयाब हुए। उसके बाद अगले कुछ दिनों...
Weaponization of Corona Virus?

Weaponization of Corona Virus?

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1. Weaponization of  germs causing infectious disease has a long history. Mongols used the plague-infested cadavers as a weapon against European armies in the year 1346, during the Siege of Caffa, Crimea.  For Europeans, germs conferred them the conquest of the Americas as local inhabitants did not have immunity against the new disease . 2. Let us focus on the post-Second World War  Era of Pax-Americana, that too after the discovery of the DNA as the life-molecular cluster  by Watson and Crick(1953) . 3. The US built largest laboratory of biological weapons at Fort Detrick, Maryland, 50 miles Northwest of Washington D.C. The Convention on the Prohibition of the Development, Production and Stockpiling of Bacteriological and Toxin Weapons and on their Destruction was the first multil...