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आज डिजिटल तकनीक का युग है।

आज डिजिटल तकनीक का युग है।

राष्ट्रीय, समाचार
आज डिजिटल तकनीक का युग है। इंटरनेट, सोशल नेटवर्किंग साइट्स फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर, इंस्टाग्राम का युग है। यही कारण है कि आज हम पत्रों से संवाद करना लगभग लगभग भूल चुके हैं। आज की युवा पीढ़ी डाकघर में मिलने वाले अंतर्देशीय पत्र, पोस्टकार्ड आदि के बारे में जानती ही नहीं होगी। आज सब टेक्स्ट मैसेज लिखते हैं, व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम का जमकर प्रयोग करते हैं लेकिन पत्र लिखने में जो भावनाएं मौजूद थीं, जिस भाषा का हम पत्रों में इस्तेमाल करते थे, आज वह भाषा, भावनाएं दोनों ही नदारद हो गई हैं। आज पत्र-पत्रिकाओं के संपादकों को कोई विरले ही चिट्ठी लिखता होगा।वैसे भी आज के इंटरनेट, आधुनिक युग में किसी संपादक के पास इतना समय नहीं होता है कि वह पाठकों, लेखकों की एक एक चिट्ठियाँ खोलकर पढ़ें और बाद में उन्हें अपने अखबार में प्रकाशित करें। पहले संपादकों द्वारा पाठकों, लेखकों की चिट्ठियों को ...
13 मार्च 1940 क्रांतिकारी ऊधमसिंह ने लंदन जाकर की थी जनरल डायर की हत्या

13 मार्च 1940 क्रांतिकारी ऊधमसिंह ने लंदन जाकर की थी जनरल डायर की हत्या

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, समाचार
--रमेश शर्मा भारतीय स्वाधीनता संग्राम में अधिकाँश क्राँतिकारियों का बलिदान सत्ता प्राप्ति के लिये नहीं अपितु इस राष्ट्र के स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया । क्राँतिकारी ऊधमसिंह वे संकल्पवान बलिदानी हैं जिन्होंने जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला लंदन जाकर लिया और जनरल डायर को लंदन में गोली मारी । यह घटना 13 मार्च 1940 की है । हालांकि कुछ लोग कहते हैं कि वह जनरल डायर दूसरा था । और उसकी मौत 1927 मे हो गई थी । पर यह सच नहीं लगता । चूंकि क्राँतिकारी ऊधम सिंह ने वर्षों लंदन में रहकर डायर का पीछा किया था ।क्राँतिकारी उधम सिंह का जन्म 26 दिसम्बर 1899 को पंजाब के संगरूर जिले अंतर्गत सुनम गाँव में हुआ था | उनके जन्म के दो वर्ष बाद ही माँ का निधन हो गया था और पिताजी सरदार तेजपाल सिंह का निधन 8 साल बाद 1907 हो गया ।माता पिता की मृत्यु के बाद उन्हें अमृतसर के खालसा अनाथालय भेज दिया गया ।...
1 मार्च 1689 सम्भाजी महाराज का बलिदान

1 मार्च 1689 सम्भाजी महाराज का बलिदान

धर्म, समाचार, साहित्य संवाद
औरंगजेब द्वारा कठोर यातनाएँ, जुबान काटी, चीरा लगाकर नमक भरा रमेश शर्मा पिछले दो हजार वर्षों में संसार का स्वरूप बदल गया है । बदलाव केवल शासन करने के तरीके या राजनैतिक सीमाओं में ही नहीं हुआ अपितु परंपरा, संस्कृति, जीवनशैली और सामाजिक स्वरूप में भी हुआ है । किंतु भारत इसमें अपवाद है । असंख्य आघात सहने के बाद भी यदि भारतीय संस्कृति और परंपराएँ दिख रहीं हैं तो इसके पीछे ऐसे बलिदानी हैं जिन्होंने कठोरतम प्रताड़ना सहकर भी अपने स्वत्व की रक्षा की है । झुकना या रंग बदलना स्वीकार नहीं किया । ऐसे ही बलिदानी हैं सम्भाजी महाराज जिन्हें धर्म बदलने के लिये 38 दिनों तक कठोरतम यातनाएँ दीं गईं जिव्हा काटी गई, शरीर में चीरे लगाकर नमक भरा गया पर वे अपने स्वत्व पर अडिग रहे ।सम्भाजी महाराज छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र थे। उन्हें धोखे से बंदी बनाकर इतनी क्रूरतम प्रताड़ना दी गयी जिसकी कल्पना तक नहीं की...
उदयपुर में बने देश का पहला आर्कियोलॉजिकल मास्टर प्लान

उदयपुर में बने देश का पहला आर्कियोलॉजिकल मास्टर प्लान

राज्य, समाचार, सामाजिक
विजयमनोहरतिवारी होली के दिन मध्यप्रदेश में विदिशा जिले के उदयपुर में नंदी की एक दर्शनीय प्राचीन प्रतिमा मिट्‌टी और मलबे से बाहर आई। क्रिकेट खेलते हुए कुछ बच्चों की दृष्टि में आने के बाद उसे बाहर निकाला गया। वह स्पष्ट रूप से परमार राजाओं के समय के किसी शिव मंदिर का हिस्सा होगा, जिसे खंडित किए जाने के निशान साफ देखे जा सकते हैं। वह भूकंप में तबाह नहीं हुआ। वह हमलावरों के निशान हैं, जिससे उदयपुर लगातार घायल होकर भी बचा रह गया। कुछ ही घंटों में शासन ने जानकारी मिलते ही उदयपुर के बारह खंभा स्मारक के पास नंदी की प्रतिमा को सुरक्षित निकाल लिया। प्रश्न यह है कि उदयपुर जैसे प्राचीन नगरों का अब क्या किया जाए, जो सदियों की समृद्ध विरासत को अपने भीतर संजोए हुए हैं और यदाकदा नई मूर्तियों, शिलालेखों और मंदिरों के अवशेष सामने आते रहते हैं? क्या इन्हें ऐसे ही लावारिस पड़े रहने दिया जाए या इन्हें नए...
इतिहास को दोहराते राहुल गांधी

इतिहास को दोहराते राहुल गांधी

BREAKING NEWS, TOP STORIES, समाचार, सामाजिक
इतिहास को दोहराते राहुल गांधी-बलबीर पुंज कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी द्वारा ब्रिटेन में दिए बयानों का कुल निचोड़ यह है— "भारत में लोकतंत्र समाप्त है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के लोग भारतीय सत्ता-अधिष्ठान पर काबिज है। चुनाव आयोग से लेकर मीडिया, न्यायालय दवाब में है। देश में लोकतंत्र को बचाने हेतु अमेरिका और यूरोप को हस्तक्षेप करना होगा।" वास्तव में, इन वक्तव्यों में निहित चिंतन ही भारत की त्रासदी और उसके शताब्दियों तक आक्रांताओं के अधीन परतंत्र रहने का बड़ा कारण है। वर्ष 1707 में मुगलिया आक्रांता औरंगजेब के देहांत के बाद भारत में इस्लामी हुकूमत क्षीण होने लगी थी। तब कालांतर में शाह वलीउल्लाह ने अफगान शासक अब्दाली (दुर्रानी) को भारत पर आक्रमण हेतु बुलावा भेजा, क्योंकि वह छत्रपति शिवाजी द्वारा प्रतिपादित 'हिंदवी स्वराज्य' को समाप्त करके भारत में पुन: इस्लामी राज स्थापित ...
रकारी बजट पर ‘रेवड़ी कल्चर’ का साया खतरनाक

रकारी बजट पर ‘रेवड़ी कल्चर’ का साया खतरनाक

BREAKING NEWS, TOP STORIES, आर्थिक, समाचार
-ललित गर्ग- सरकारों के बजट भी अब मतदाताओं को लुभाने के लिए मुफ्त उपहार बांटने, तोहफों, लुभावनी घोषणाएं एवं योजनाओं की बरसात करने का माध्यम बनते जा रहे हैं। बजट में भी ‘रेवड़ी कल्चर’ का स्पष्ट प्रचलन लगातार बढ़ रहा है, खासकर तब जब उन राज्यों में चुनाव नजदीक हों। ‘फ्रीबीज’ या मुफ्त उपहार न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में वोट बटोरने का हथियार हैं। यह एक राजनीतिक विसंगति एवं विडम्बना है जिसे कल्याणकारी योजना का नाम देकर सत्ताधारी पार्टी राजनीतिक लाभ की रोटियां सेंकती है।  यह तय करना कोई मुश्किल काम नहीं है कि कौनसी कल्याणकारी योजना है और कौनसी मुफ्तखोरी यानी ‘रेवड़ी कल्चर’ की, परंतु राजनीतिक मजबूरी इसे चुनौतीपूर्ण बना देती है। भारत जैसे विकासशील देश की विभिन्न राज्यों की सरकारें सरकारी बजट के माध्यम से आम-जनता को प्रभावित करने का हरसंभव प्रयास करती है। छत्तीसगढ़ सरकार का बजट इसका ...
अडानी-श्रीलंकाः मोदी की चुप्पी?

अडानी-श्रीलंकाः मोदी की चुप्पी?

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक गौतम अडानी और हिंडनबर्ग रिपोर्ट के मामले पर नए रहस्योद्घाटन लगभग रोज़ ही हो रहे हैं। इस बार का संसद का सत्र भी इसी मामले का शिकार होनेवाला है, क्योंकि विपक्ष के पास इसके अलावा कोई बड़ा मुद्दा है ही नहीं। वैसे एक मुहावरे में कहा भी गया है कि ‘भागते भूत की लंगोटी ही काफी।’ अब अंग्रेजी के ‘हिंदू’ अखबार में श्रीलंका के विदेश मंत्री अली साबरी की एक भेंटवार्ता छपी है। उसमें साबरी ने दावा किया है कि श्रीलंका की सरकार के साथ अडानी के कोलंबो बंदरगाह और विद्युत परियोजना के जो सौदे हुए हैं, वे ऐसे ही हैं, जैसे कि दो सरकारों के बीच होते हैं। यह कथन बहुत मायने रखता है। पता नहीं, यह बोलते हुए साबरी को इस बात का ध्यान रहा या नहीं कि अडानी और हमारी सरकार के संबंधों को लेकर यहां बड़ा बावेला उठ खड़ा हुआ है। साबरी ने श्रीलंका के इस भयंकर संकट के समय भारत द्वारा दी गई प्रचुर सहायता के ...
मोहन भागवत और राहुल गांधी

मोहन भागवत और राहुल गांधी

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक देश के अखबारों में छपे दो भाषणों पर आपका ध्यान जाए तो आपको आनंद और दुख एक साथ होंगे। आनंद देनेवाला भाषण तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक के मुखिया मोहन भागवत का है और दूसरा दुखद भाषण राहुल गांधी का है। भागवत ने कहा है कि अंग्रेजों के आने के पहले भारत में 70 प्रतिशत लोग शिक्षित थे जबकि इंगलैंड में उस समय सिर्फ 17 प्रतिशत अंग्रेज शिक्षित थे। अंग्रेजों ने, खासकर लाॅर्ड मैकाले ने जो शिक्षा पद्धति भारत में चलाई, उसके कारण भारत में शिक्षितों की संख्या घटती गई। आज भारत के साक्षरों की संख्या सिर्फ 77 प्रतिशत है जबकि चीन, जापान, श्रीलंका, ईरान जैसे देशों में वह संख्या 90 से 99 प्रतिशत है। भारत के ये लोग शिक्षित नहीं माने जा सकते हैं। इन्होंने कोई विशारद या शास्त्री या एम.ए.-बी.ए. पास नहीं किया है। ये केवल साक्षर हैं याने सिर्फ अक्षरों और अंकों को जानते-पहचानते हैं। इतनी बड़ी संख्या भी...
भारत में फैल रहा एच3एन2 इन्फ्लूएंजा, क्या है संक्रमण से बचने के उपाय?

भारत में फैल रहा एच3एन2 इन्फ्लूएंजा, क्या है संक्रमण से बचने के उपाय?

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एच3एन2 इन्फ्लूएंजा तब फैलता है जब संक्रमित व्यक्ति दूसरे से बात करता है, खांसता है या छींकता है By Dayanidhi मौसम में अचानक आ रहे बदलाव और अत्यधिक ठंड से गर्म तापमान में बदलाव के कारण लोगों में फ्लू के लक्षण अधिक दिखाई दे रहे हैं। जहां मौसम में तेजी से बदलाव हो रहा है, वहीं एक नया वायरस एच3एन2 पूरे भारत में फैल रहा है। एच3एन2 वायरस चिंता का कारण बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि एच3एन2 इन्फ्लूएंजा अत्यधिक संक्रामक है। क्या है एच 3 एन 2 इन्फ्लुएंजा? सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक 2009 के एच1एन1 महामारी वायरस से मैट्रिक्स (एम) जीन के साथ इन्फ्लुएंजा ए एच3एन2 वेरिएंट वायरस जिसे "एच3एन2वी" वायरस के रूप में भी जाना जाता है, यह पहली बार जुलाई 2011 में लोगों में पाए गए थे। वायरस को पहली बार 2010 में अमेरिका में  सूअरों में पहचान की गई थी। 20...
भारत की प्रतिष्ठा धूमिल करने के राहुली प्रयास

भारत की प्रतिष्ठा धूमिल करने के राहुली प्रयास

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-ललित गर्ग - देश पर सर्वाधिक समय शासन करने वाली कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर विदेशी की धरती पर होहल्ला मचाते हुए भारत की छवि को धूमिल करने का घृणित एवं गैरजिम्मेदाराना काम किया है। गांधी ने लंदन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में पेगासस को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। वह देश में इस तरह की बातें करते ही रहे हैं कि मोदी सरकार के चलते भारतीय लोकतंत्र खतरे में है और सरकार से असहमत लोगों के साथ विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है। वह वहां यह भी कह गए कि भारत की सभी संस्थाओं और यहां तक कि न्यायालयों पर भी सरकार का कब्जा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं उनके सरकार चलाने के तौर-तरीकों की तीव्र आलोचना की, जो महज खिसियाहट भरी अभद्र राजनीति का ही परिचायक नहीं था, बल्कि इसका भी प्रमाण था कि संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थों के लिए कोई किस हद तक जा सकता है, देश के गौरव को दाव पर लगा स...