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अब पूरी दुनिया में बजेगा मोटे अनाज का डंका 

अब पूरी दुनिया में बजेगा मोटे अनाज का डंका 

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अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज (मिलेट) वर्ष 2023  मृत्युंजय दीक्षित  एक जनवरी 2023 से अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष आरम्भ हो गया है इसके फलस्वरूप सभी घरों की थालियों से गायब हो चुके मोटे अनाज के दिन फिर से बहुरने वाले हैं। मोटा अनाज और इसकी कृषि को प्रोत्साहन देने के लिए स्वयं प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने कमर कस ली है। भारत इस वर्ष शंघाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (एससीओ) तथा जी 20 जैसे अंतरराष्ट्रीय समूहों की अध्यक्षता कर रहा है देश के 55 शहरों में जी 20 सम्मेलन होने जा रहे हैं इसके अतिरिक्त भी इस वर्ष कई मेगा इवेंट देश में होने जा रहे हैं। मोटे अनाज को प्रोत्साहन देने के लिए  इन अवसरों का भरपूर लाभ लिया जायेगा। सभी सम्मेलनों में कृषि मंत्रालय व खाद्य मंत्रालय तथा राज्य सरकारों के सहयोग से मोटे अनाजों  से बने उत्पादों  का ही प्रदर्शन  किया जायेगा व देश व...
प्रधानमंत्री ने सावित्रीबाई फुले को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की

प्रधानमंत्री ने सावित्रीबाई फुले को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सावित्रीबाई फुले को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की है। अपने एक ट्वीट में, प्रधानमंत्री ने कहा; “मैं प्रेरणादायी सावित्रीबाई फुले जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। वह हमारी नारी शक्ति की अदम्य भावना की प्रतीक हैं। उनका जीवन महिलाओं को शिक्षित करने और उन्हें सशक्त बनाने के लिए समर्पित था। उनके द्वारा सामाजिक सुधार और सामुदायिक सेवा पर दिया गया ध्यान भी समान रूप से प्रेरक है।" ...
वोट और इलाजः दो सुंदर पहल

वोट और इलाजः दो सुंदर पहल

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*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* आज दो खबरें ऐसी हैं, जो भारत ही नहीं, सारे पड़ौसी देशों के लिए भी लाभकारी और प्रेरणादायक हैं। पहली खबर तो यह है कि भारत के चुनाव आयोग ने एक ऐसी मशीन बनाई है, जिसके जरिए लोग कहीं भी हों, वे अपना वोट डाल सकेंगे। अभी तो मतदान की जो व्यवस्था है, उसके अनुसार आप जहाँ रहते हैं, सिर्फ वहीं जाकर वोट डाल सकते हैं। लगभग 30 करोड़ लोग इसी कारण वोट डालने से वंचित रह जाते हैं। भारत के लोग केरल से कश्मीर तक मुक्त रूप से आते-जाते हैं और एक-दूसरे के प्रांत में रहते भी हैं। जरा सोचिए कि कोई मलयाली आदमी सिर्फ वोट डालने के लिए कश्मीर से केरल क्यों जाएगा? कोई हारे या जीते, वह अपने हजारों रूपए और कई दिन उनके लिए क्यों खपाएगा? यदि देश में यह नई सुविधा कायम हो गई तो कुल मतदाताओं की संख्या 100 करोड़ से भी ज्यादा हो जाएगी। भारतीय लोकतंत्र की यह बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। कई देशों में तो अ...
भारत के पुनर्जागरण का अमृत वर्ष 

भारत के पुनर्जागरण का अमृत वर्ष 

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मृत्युंजय दीक्षित  वर्ष 2022 का प्रारम्भ कोविड काल की त्रासद स्मृतियों के साथ हुआ था लेकिन शनैः शनैः यह वर्ष नई आकांक्षाओं  के साथ नई ऊँचाइयों को छूता गया।आज भारत का जनमानस नये उत्साह, उमंग, ऊर्जा के साथ अपने भविष्य को और अधिक उज्जवल तथा विकासपरक बनाने की ओर अग्रसर होकर गतिशक्ति के साथ चल पड़ा है। आज सम्पूर्ण विश्व भारत की ओर आशा भरी निगाहों से देख रहा है। भारत अपने यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में विश्व में एक नया स्थान प्राप्त कर रहा है जिनकी वैश्विक लोकप्रियता चरम पर है । आज सम्पूर्ण विश्व  के नेता मोदी जी के विचारों  को सुनने तथा अपनाने के लिए अधीर हो रहे हैं। यही कारण है कि आज भारत जी- 20 देशों की अध्यक्षता कर रहा है।भारत के लिए जी -20 की अध्यक्षता करना एक सुनहरा अवसर है। भारत जी- 20 देशों की अध्यक्षता करते हुए एक- पृथ्वी, एक परिवार, एक...
महान फुटबॉलर पेले का निधन

महान फुटबॉलर पेले का निधन

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महान फुटबॉलर पेले का निधन:82 साल की उम्र में साओ पाउलो के अस्पताल में ली अंतिम सांस, पेट के कैंसर से पीड़ित थे ब्राजील के महान फुटबॉलर पेले का गुरुवार देर 82 साल की उम्र में निधन हो गया। उनकी बेटी कैली नैसिमेंटो ​​​​​ने सोशल मीडिया पर उनके निधन की जानकारी दी। पेले पेट के कैंसर से जूझ रहे थे। उन्हें 29 नवंबर को साओ पाउलो के अल्बर्ट आइंस्टीन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कीमोथेरेपी के जरिए उनका ट्रीटमेंट किया गया, लेकिन उन्हें कोई फायदा नहीं हो रहा था। इसके बाद कीमोथेरेपी बंद कर उन्हें दर्द कम करने की दवाइयां दी जाने लगीं। उन्हें किडनी और कार्डियक डिसफंक्शन भी था। बेटी ने कहा - हम जो भी हैं सब आपकी बदौलतपेले की बेटी कैली ने इंस्टाग्राम पर लिखा, 'हम जो कुछ भी हैं, आपकी बदौलत हैं। हम आपको बहुत प्यार करते हैं। रेस्ट इन पीस।' 25 दिसंबर को परिवार ने क्रिसमस का त्योहार पेले के साथ अस्प...
राहुल गांधी की तुलना राम से?

राहुल गांधी की तुलना राम से?

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*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* कांग्रेस के नेता सलमान खुर्शीद के बयान पर आजकल काफी लत्तम-धत्तम चल रही है। उन्होंने कह दिया कि जहाँ राम नहीं पहुँच सकते, वहाँ उनकी खड़ाऊ पहुंच जाएगी याने राहुल गांधी जहाँ-जहाँ नहीं पहुंच पाएंगे, वहाँ-वहाँ उनकी खड़ाऊ पहुंचाने की कोशिश की जाएगी। यह तो सबको पता है कि उन्होंने राहुल को राम नहीं कहा है। मैंने उनके वाक्यों को पढ़कर नहीं, सुनकर यह लिखा है लेकिन कुछ भाजपा नेताओं ने खुर्शीद को यह कहकर निंदा की है कि उन्होंने राहुल को राम बना दिया है। उन्होंने राहुल को राम नहीं बताया है बल्कि सिर्फ खड़ाऊ पर जोर दिया है। राहुल के जो फोटो अखबारों में छप रहे हैं और टीवी पर दिखाई पड़ रहे हैं, उनमें वे जूते पहने दिखाई पड़ रहे हैं तो फिर खुर्शीद के बयान का अर्थ क्या निकला? यही कि उन्होंने उपमा का इस्तेमाल किया है। क्या सलमान खुर्शीद जैसे पढ़े-लिखे नेता इतनी बड़ी गलती कर सकते ...
ये दोनों थे, विलक्षण प्रधानमंत्री*

ये दोनों थे, विलक्षण प्रधानमंत्री*

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ये दोनों थे, विलक्षण प्रधानमंत्री* *डॉ. वेदप्रताप वैदिक* आज (25 दिसंबर) श्री अटलबिहारी वाजपेयी का जन्म-दिवस है और परसों (23 दिसंबर) नरसिंहरावजी और स्वामी श्रद्धानंदजी की पुण्य तिथि थी। इन तीनों महानुभावों से मेरी व्यक्तिगत और आध्यात्मिक घनिष्टता रही है। स्वामी श्रद्धानंद आर्यसमाज और कांग्रेस के बड़े नेता थे। उन्होंने ही देश में गुरुकुल व्यवस्था को पुनर्जीवित किया, जिसका गुणगान नरेंद्र मोदी ने कल ही किया है। उनकी गणना स्वातंत्र्य संग्राम के सर्वोच्च सैनानियों में होती है। उन्होंने भारत की शिक्षा-व्यवस्था और हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में अपूर्व प्रतिमान कायम किए हैं। 23 दिसंबर 1926 को एक मूर्ख मजहबी ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। वे विद्वान, तपस्वी तथा त्यागी संन्यासी थे। वैसे ही आर्यसमाजी परिवार में श्री अटलबिहारी वाजपेयी ने जन्म लिया था। अटलजी और नरसिंहरावजी मेरे अभिन्न मित्र ...
फिर कोरोना की दस्तक: कोई चूक न हो

फिर कोरोना की दस्तक: कोई चूक न हो

राष्ट्रीय, समाचार
-ः ललित गर्ग:- चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील, अमेरिका सहित कई देशों में कोरोना के नये वेरिएंट के मामलों और उससे हुई मौतों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। भारत में भी चीन में तबाही लाने वाले एवं भयंकर तबाही की आहट देने वाले बेरिएंट बीएफ. 7 के 4 नये मामले मिले हैं, जो गहरी चिन्ता बढ़ा रहे हैं। सरकार सर्तक हो गयी है, आम जनता को भी सावधान रहना होगा। मास्क पहनने एवं बूस्टर डोज लगवाने के अभियान को गति देनी होगी। सार्वजनिक भीड़ को कम करना होगा, सभाओं, त्यौहारों, राजनीतिक आयोजनों पर नियंत्रण करना होगा, स्कूलों को भी सावधान एवं चौकना रहना होना होगा। जरूरत पड़े तो लॉकडाउन भी लगाया जाये। सब जानते हैं कि इस विषाणु और उसके संक्रमण से उपजी बीमारी की शुरुआत चीन से हुई थी और उसके बाद दुनिया का अनुभव बेहद त्रासद, डरावना एवं विस्फोटक रहा। यही वजह है कि अब एक बार फिर चीन में जब कोरोना स...
श्रीनिवास रामानुजन की जयंती पर…(२२ दिसंबर )

श्रीनिवास रामानुजन की जयंती पर…(२२ दिसंबर )

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यह बड़ी अजीब सी बात है कि साहित्यिक होते हुए भी मैं किसी कवि या लेखक की जीवनगाथा पढ़ कर उतना द्रवित कभी न हो सका जितना श्रीनिवास रामानुजन के बारे में पढ़ते हुए होता रहा। रामानुजन का छोटा सा जीवन शीत की कुहेलिका में डूबे किसी दिव्य सरोवर सा है जो क्षण-क्षण अपना रूप खोलता है । उसमें अनिर्वच काव्यात्मकता,करुणा, ताप, आह और आनंद है। उस सरोवर में उतरना तो हम जैसे मनुष्यों के लिए असंभव ही है--उसकी दिव्यता को छू भर लेना ही हमारे लिए परमाद्भुत रत्न को पाने जैसा है । उनके जन्म की कहानी, बचपन की विस्मयकारी प्रज्ञा, बहुत छोटी उम्र में उनके द्वारा पूछे गए गूढ़ प्रश्न और धीरे-धीरे गणित में धंसते हुए कुछ विलक्षण सोचना या करना, यह सब अपवादात्मक या प्रतीयमान ही है । रामानुजन की दिव्यता का आभास यों तो छोटी आयु से ही होने लगता है तथापि उनकी अपूर्व प्रतिभा का प्राकट्य तेरह-चौदह वर्ष की उम्र में होता ह...
सरपंचपति खत्म कर रहे महिलाओं की राजनीति

सरपंचपति खत्म कर रहे महिलाओं की राजनीति

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सरपंच पति प्रथा ने महिलाओ को पहले जहा थी वही लाकर खड़ा कर दी है। इसके लिये सरकार को सरपंच पति चलन को एक प्रभावी कानून के माध्यम से नियंत्रित करना चाहिये। शासन के मामले में क्षमता निर्माण पर आगे अतिरिक्त काम की आवश्यकता है। महिलाओ के अधिकार के बारे में समाज में जागरूकता बढाने और  पंचायत स्तर पर महिलाओ की भागीदारी के महत्व के बारे में नौकर शाही को संवेदनशील बनाने की आवश्यकता है।  महिलाओं को राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में पुरुषों के समान अधिकार होने चाहिए। भले ही संविधान महिलाओं को सभी क्षेत्रों में समान अधिकार की गारंटी देता है, सामाजिक-सांस्कृतिक कारकों को समानता के आधुनिक लोकाचार के अनुकूल बनाने की आवश्यकता है। शासन के संस्थानों जैसे अदालतों, पुलिस, प्रशासनिक निकायों आदि को लैंगिक समानता पर ध्यान देना चाहिए। -प्रियंका सौरभ भारत में, लोकसभा में महिलाओं का अनुपा...