सनातन परंपराओं से छेड़छाड़ ठीक नहीं
सबरी मलाई मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से हम सभी हिंदू उद्वेलित हैं। इसी हफ्ते एक व्याख्यान में सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश श्रीमती ज्ञान सुधा मिश्रा का कहना था कि जहां संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का पंरपराओं से टकराव होगा, वहां अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ेगा। उन्होंने सती प्रथा का उदाहरण देकर अपनी बात का समर्थन किया। किंतु पूजा पद्धति और उससे जुड़े कर्मकांड को बदलने का अधिकार अदालत का नहीं होना चाहिए। जैसे- जन जातीय समाजों में जो कानून की व्यवस्था है, उसमें भारत सरकार हस्तक्षेप नहीं करती। अंग्रेज हुकुमत ने भी नहीं किया। अण्डमान के पास सेंटीनल द्वीप में वनवासियों द्वारा तीर-कमान से मारे गऐ, ‘अमरीकी मिशनरी युवा’ के मामले में सरकार कोई कानूनी कार्यवाही नहीं कर रही। क्योंकि गत 60 हजार सालों से यह प्रजाति शेष दुनिया से अलग-थलग रहकर जीवन यापन कर र...









