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सामाजिक

CMS Founders Dr Jagdish Gandhi and  Dr Bharti Gandhi declare their personal Assets

CMS Founders Dr Jagdish Gandhi and Dr Bharti Gandhi declare their personal Assets

प्रेस विज्ञप्ति, सामाजिक
Lucknow, April 11 : Ex-MLA and Founder of City Montessori School Dr Jagdish Gandhi and his wife Dr Bharti Gandhi, Founder, CMS, have declared their personal assets totaling Rs. 14,00,238.04 on their website www.jagdishgandhiforworldhappiness.org/assets.html . They have also declared that they do not have any personal land, property or own house and are living in a rented house for the past 58 years. They have further declared that they do not possess any foreign currency, gold, silver, jewellery or ornaments and neither do they operate any current bank account or bank locker.  They do not have any fixed deposit.  Both these renowned educationists declared that besides the above mentioned properties, they do not possess any other personal property of their own. The break-up of the assets...
सही मायने में आज डॉ. भीमराव आम्बेडकर की जरुरत है

सही मायने में आज डॉ. भीमराव आम्बेडकर की जरुरत है

विश्लेषण, सामाजिक
  बोधिसत्त्व बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने महाराष्ट्र के नागपुर शहर में अशोक विजयदशमी के दिन 14 अक्टूबर, 1956 को अपने लाखों अनुयायियों के साथ बौद्ध धम्म की दीक्षा ली थी. यह दुनिया के इतिहास में एक प्रकार की शानदार रक्तहीन क्रान्ति ही थी, क्योंकि दुनिया में आज तक कभी कोई ऐसा उदाहरण नहीं मिलता है कि जहां आठ लाख लोग बिना किसी लोभ-लालच या भय के अपने नारकीय धर्म को त्यागकर किसी दूसरे धर्म में चले जाएँ. यह बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के जुझारू एवं करिश्माई व्यक्तित्व का ही आकर्षण था कि उनकी एक अपील पर, उनके लाखों अनुयायी बौद्ध हो गए थे. जबकि वे लाखों लोग बौद्ध धम्म और उसके दर्शन को दूर-दूर तक जानते भी नहीं थे, गौतम बुद्ध कौन हैं, उनके माता-पिता कौन थे, वे कहाँ के रहने वाले थे? बौद्ध धम्म के धार्मिक ग्रन्थ कौन से हैं? बौद्ध धम्म में कौन-कौन से अनुष्ठान और पर्व मनाये जाते हैं? बौद्ध धम्म क...
2025 तक टीबी मुक्त भारत के लिए जरुरी है स्वास्थ्य एवं गैर-स्वास्थ्य वर्गों में साझेदारी

2025 तक टीबी मुक्त भारत के लिए जरुरी है स्वास्थ्य एवं गैर-स्वास्थ्य वर्गों में साझेदारी

जीवन शैली / फिल्में / टीवी, सामाजिक
अब इसमें कोई संदेह नहीं कि टीबी मुक्त भारत का सपना सिर्फ स्वास्थ्य कार्यक्रम के ज़रिए नहीं पूरा किया जा सकता है. टीबी होने का खतरा अनेक कारणों से बढ़ता है जिनमें से कुछ स्वास्थ्य विभाग की परिधि से बाहर हैं. उसी तरह टीबी के इलाज पूरा करने में जो बाधाएं हैं वे अक्सर सिर्फ स्वास्थ्य कार्यक्रमों से पूरी तरह दूर हो ही नहीं सकतीं - उदहारण के तौर पर - गरीबी, कुपोषण, आदि. इसीलिए टीबी मुक्त भारत का सपना, सभी स्वास्थ्य और ग़ैर-स्वास्थ्य वर्गों के एकजुट होने पर ही पूरा हो सकता है. इसी केंद्रीय विचार से प्रेरित हो कर, विश्व स्वास्थ्य दिवस 2017 के उपलक्ष्य में, हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित, हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एचपीसीए) के परिसर में, टीबी मुक्त भारत सम्मेलन का आयोजन हुआ. इंटरनेशनल यूनियन अगेंस्ट टीबी एंड लंग डिजीज (द यूनियन) की पहल पर अनेक विशिष्ठ सह-आयोजकों के साथ संपन्न हुए इस सम्मे...
Food-wastage should be first prevented in marriage-celebrations and other functions

Food-wastage should be first prevented in marriage-celebrations and other functions

सामाजिक
It refers to welcome statement of Union Food Minister for government-initiative for imposing some checks on food served in hotels of the country, subsequent to concern expressed by Prime Minister on large-scale wastage of food in the country. But study reveals that food is largely wasted in marriage-celebrations and other functions where guests make such wastage because they have not to pay for food-items from their personal pockets, while those enjoying lunch-dinner at hotels otherwise are paying from their own pockets. Therefore restrictions are necessary for food served in marriage-celebrations and other functions like was imposed during emergency-era of 1975-77. Only beverages and snacks that too in some stipulated maximum number of items should be allowed to be served in gatherings of...
इंटरनेट के द्वारा वैश्विक स्तर पर सामाजिक परिवर्तन का जज्बा उभरा है

इंटरनेट के द्वारा वैश्विक स्तर पर सामाजिक परिवर्तन का जज्बा उभरा है

सामाजिक
आज हम इंटरनेट तथा सैटेलाइट जैसे आधुनिक संचार माध्यमों से लैस हैं। संचार तकनीक ने वैश्विक समाज के गठन में अहम भूमिका अदा की है। हम समझते हैं कि मानव इतिहास में यह एक अहम घटना है। हम एक बेहद दिलचस्प युग में जी रहे हैं। आओ, हम सब मिलकर एक अच्छे मकसद के लिए कदम बढ़ाएं। पिछले कुछ साल से विभिन्न देशों की दर्दनाक घटनाएं इंटरनेट के जरिये दुनिया के सामने आ रही हैं। इनसे एक बात तो तय हो गई कि चाहे हम दुनिया के किसी भी कोने में हों, हम सब एक ही समुदाय का हिस्सा हैं। इंटरनेट ने मानव समुदाय के बीच मौजूद अदृश्य बंधनों को खोल दिया है। दरअसल हम सबके बीच धर्म, नस्ल और राष्ट्र से बढ़कर आगे भी कोई वैश्विक रिश्ता है और वह रिश्ता नैतिक भावना पर आधारित है। यह नैतिक भावना न केवल हमें दूसरों का दर्द समझने, बल्कि उसे दूर करने की भी प्रेरणा देती है। यह भावना हमें प्रेरित करती है कि अगर दुनिया के किसी कोने में अत्याचा...
वंदे मातरम्-विवाद नहीं, विकास का माध्यम बने

वंदे मातरम्-विवाद नहीं, विकास का माध्यम बने

सामाजिक
वंदे मातरम् को लेकर फिर बहस छिड़ गई है। मेरठ, इलाहाबाद और वाराणसी की नगर निगमों के कुछ पार्षदों ने इस राष्ट्रगान को गाने पर एतराज किया है। हाल ही में इलाहाबाद में वंदे मातरम को लेकर हंगामा हुआ था, कई सभासदों ने इस पर नाराजगी जताई और बैठक का बॉयकॉट कर दिया। इससे पहले मेरठ नगर निगम बोर्ड की बैठक में भी वंदे मातरम् को लेकर विवाद हो गया था। बैठक में विपक्षी मुस्लिम पार्षद वंदे मातरम गाने के दौरान सदन से उठकर बाहर चले गये थे क्योंकि इसे वे इस्लाम-विरोधी मानते हैं। उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस तरह राष्ट्र-गीत को लेकर बनी संकीर्णता एवं उसे गाएं या ना गाएं कोे लेकर विवाद होने को चिन्ता का विषय बताया है। जो वंदे मातरम् आजादी की लड़ाई में देशभक्ति का पावर बैंक हुआ करता था, वही वंदे मातरम् आजादी के बाद बदले वक्त में एक अलग ही राजनीतिक राग एवं संकीर्णता का प्रतीक बन गया, यह दुर्भाग्यपूर्ण ...
स्कूलों में कब आएँगे गुरु जी

स्कूलों में कब आएँगे गुरु जी

addtop, सामाजिक
किसी भी देश-समाज की पहचान का पैमाना वहां के शिक्षा के स्तर से ही तय होता है। मोटे तौर पर जहां पर शिक्षा के प्रसार-प्रचार पर ईमानदारी से बल दिया जाता है, वे ही देश प्रगति की दौड में आगे निकल जाते हैं। दुर्भाग्यवश हमारे देश में स्कूली शिक्षा का स्तर तो दर्दनाक स्थितिपर पहुंच गई है। सरकार ने बीते सोमवार को संसद के पटल पर ‘एक स्कूल-एक अध्यापक’ विषय से संबंधित एक रिपोर्ट रखी। इसके अनुसार देश में 1,05,630 स्कूलों में मात्र एक ही शिक्षक है। यानि कक्षाएं 5 या 6 और शिक्षक एक। रिपोर्ट का तटस्थभाव से विश्लेषण करने से समझ आता है कि स्कूली शिक्षा को लेकर लगभग सभी राज्यों का प्रदर्शन निराशाजनक है। अब चूंकि यह आंकड़ा शुद्ध रूप से सरकारी है, इसलिए इस पर विवाद के लिए स्थान भी है। स्पष्ट है कि देश में लाखों शिक्षकों के पद रिक्त हैं। इन्हें क्यों नहीं भरा जा रहा? यह एक अहम सवाल है। अब आप खुद देख लें कि हमा...
हम क्यों मनुष्य को बाँट रहे हैं?

हम क्यों मनुष्य को बाँट रहे हैं?

सामाजिक
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका में भारतीयों पर हमले थम नहीं रहे हैं। दिनोंदिन भारतीय नागरिकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। न केवल अमेरिका बल्कि ऑस्ट्रेलिया की इन नस्ली हिंसा की घटनाओं के साथ-साथ नोएडा की ताजा नस्ली घटना चिन्ता पैदा करती है। इस तरह की घोर निन्दनीय घटनाओं से मानवता भी आहत एवं शर्मसार हो रही है। जब अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया में इस घृणा का शिकार कोई भारतीय नागरिक या भारतीय मूल का व्यक्ति बनता है, तो हमें चिंता होती है। जब उसी घृणा का शिकार किसी पश्चिम एशियाई देश का व्यक्ति या कोई पाकिस्तानी बनता है, तो हम बेपरवाह हो जाते हैं। अपने देश में अफ्रीकियों पर हमला हमें चिन्तित नहीं करता। यह कैसी संकीर्णता है? यह कैसा मानव समाज निर्मित हो रहा है? इस तरह हम क्यों मनुष्य को बाँट रहे हैं? क्यों सत्य को ढक रहेे हैं? बढ़ती नस्ली हिंसा, मारकाट, अभद्र व्यवहार की घटना...
भोजन की बर्बादी एक त्रासदी है

भोजन की बर्बादी एक त्रासदी है

सामाजिक
हर रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संवेदनशील एवं सामाजिक हो जाते हैं। देश की जनता से ‘मन की बात’ करते हुए वे सामाजिक, पारिवारिक एवं व्यक्तिगत मुद्दों को उठाते है और जन-जन को झकझोरते हैं। इसी श्ंाृखला की ताजा कड़ी में देशवासियों को भोजन की बर्बादी के प्रति आगाह किया। भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश के लिए यह पाठ पढ़ना जरूरी है। क्योंकि एक तरफ विवाह-शादियों, पर्व-त्यौहारों एवं पारिवारिक आयोजनों में भोजन की बर्बादी बढ़ती जा रही है, तो दूसरी ओर भूखें लोगों के द्वारा भोजन की लूटपाट देखने को मिल रही है। भोजन की लूटपाट जहां मानवीय त्रासदी है, वही भोजन की बर्बादी संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। एक तरफ करोड़ों लोग दाने-दाने को मोहताज हैं, कुपोषण के शिकार हैं, वहीं रोज लाखों टन भोजन की बर्बादी एक विडम्बना है। एक आदर्श समाज रचना की प्रथम आवश्यकता है अमीरी-गरीबी के बीच का फासला खत्म हो। शादियों, उत्सवों...
गणगौर: नारी शक्ति और संस्कार का पर्व

गणगौर: नारी शक्ति और संस्कार का पर्व

सामाजिक
गणगौर का त्यौहार सदियों पुराना हैं। हर युग में कुंआरी कन्याओं एवं नवविवाहिताओं का अपितु संपूर्ण मानवीय संवेदनाओं का गहरा संबंध इस पर्व से जुड़ा रहा है। यद्यपि इसे सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मान्यता प्राप्त है किन्तु जीवन मूल्यों की सुरक्षा एवं वैवाहिक जीवन की सुदृढ़ता में यह एक सार्थक प्रेरणा भी बना है। गणगौर शब्द का गौरव अंतहीन पवित्र दाम्पत्य जीवन की खुशहाली से जुड़ा है। कुंआरी कन्याएं अच्छा पति पाने के लिए और नवविवाहिताएं अखंड सौभाग्य की कामना के लिए यह त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मनाती हैं, व्रत करती हैं, सज-धज कर सोलह शृंगार के साथ गणगौर की पूजा की शुरुआत करती है। पति और पत्नी के रिश्तें को यह फौलादी सी मजबूती देने वाला त्यौहार है, वहीं कुंआरी कन्याओं के लिए आदर्श वर की इच्छा पूरी करने का मनोकामना पर्व है। यह पर्व आदर्शों की ऊंची मीनार है, सांस्कृतिक परम्पराओं की अद्वितीय कड़ी है एवं रीति...