Shadow

सामाजिक

<em>आखिर क्यों बंद होने जा रहे हैं दो हजार रूपये के नोट ?</em>

आखिर क्यों बंद होने जा रहे हैं दो हजार रूपये के नोट ?

BREAKING NEWS, Today News, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
डॉ. अजय कुमार मिश्राभारतीय रिज़र्व बैंक ने अपने एक आदेश के तहत दो हजार के नोटों को वापस लेने का फैसला लिया है | वर्ष 2016 में जब नोटबंदी हुई थी तब उस समय की आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए इन्हें बाजार में लाया गया था | नोटों को वापस लेने के पीछे आर.बी.आई. का कहना है की 89% दो हजार के नोट मार्च 2017 के पहले जारी किये थे और ये नोट अपनी अवधि पूरी कर चुके है | प्रचलन में इन बैंक नोटों का कुल मूल्य, 31 मार्च, 2018 को अपने चरम पर ₹6.73 लाख करोड़ से घटकर ₹3.62 लाख करोड़ हो गया है | 31 मार्च, 2023 तक, प्रचलन में कुल नोटों का केवल 10.8% ही दो हजार के नोट थे | आर.बी.आई. का यह भी कहना है की दो हजार के नोट साधारणतया प्रयोग में नहीं है | ऐसे में दो हजार की नोट को लेकर आम आदमी के जेहन में कई बातें है जिसकी जानकारी से ही उद्देश्यों की पूर्ति हो पायेगी | आइये जानते है की आखिर क्यों बंद होने जा रहें ह...
उत्तर प्रदेश में नाकाम हुई मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति

उत्तर प्रदेश में नाकाम हुई मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राज्य, सामाजिक
मृत्युंजय दीक्षितउत्तर प्रदेश नगर निकाय चुनाव- 2023 मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करने वाले सभी छद्म धर्मनिरपेक्ष दलों की राजनीति के लिए बड़ा झटका हैं। इन चुनावों में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी सहित लगभग सभी दलों ने दलित और मुस्लिम समाज के मतों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए पूरी ताकत व संसाधन झोंक दिये थे और समीकरण भी बिठाने के प्रयास किये थे लेकिन परिणाम दिखाते हैं कि उनकी ये रणनीति बेबस रही ।उत्तर प्रदेश के निकाय चुनावों में समाजवादी पार्टी के बहुत सारे कद्दावर नेता, उनके परिवार के सदस्य व समर्थकों ने चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा का दामन थाम लिया था जिसका असर चुनाव परिणामों में दिखाई पड़ा है।समाजवादी पार्टी के लिए सबसे बड़ी हार चाचा शिवपाल यादव और रामगोपाल यादव के गढ़ में तो हुई ही है साथ ही रामपुर की स्वार विधानसभा उपचुनाव सीट पर सपा नेता आजम खां अपने बेटे अब्दुल्ला आजम का किला भी न...
संघीय ढांचे व लोकतांत्रिक मूल्यों के लिये जरूरी ये फ़ैसले

संघीय ढांचे व लोकतांत्रिक मूल्यों के लिये जरूरी ये फ़ैसले

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों ने देश की शीर्ष अदालत के उन फ़ैसलों से जनमत को जोड़ा है जो देश में कथित “डबल इंजिन” की सरकार जैसी कल्पनाओं को नकारता हैं। आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव के नतीजे शायद यही संदेश की ओर इशारा करते दिखे कि “जिन मुद्दों को लोकतांत्रिक मूल्यों व सर्वमान्य कायदों के आधार पर सुलझाया जा सकता है, उन्हें राजनीतिक जिद और अहंकार इतना जटिल बना देता है कि उन पर अदालतों को निर्णय देने पड़ते हैं।“ इस सबमें जन कल्याण और विकास पीछे छूट जाता है। देश के बड़े दलों के लिए जनता का कर्नाटक और सुप्रीम कोर्ट के ताजे फ़ैसले मर्गदर्शी सिद्धांत हो सकते हैं। चुनी हुई सरकार गिराने [महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे सरकार] के लिये चले राजनीतिक प्रपंच में राज्यपाल की भूमिका और गुट विशेष की राजनीतिक तिकड़मों पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाये, वहीं एक अन्य फैसले में दिल्ली सरकार को अधिकार देकर दायि...
द केरल स्टोरी’ और ‘रैंट’ का राजरोग…

द केरल स्टोरी’ और ‘रैंट’ का राजरोग…

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
------------------------------------- कथित बुद्धिजीवियों, लिबिर-लिबिर गैंग और कौमियों का प्रिय शब्द है- 'रैंट'। इसका ढीला-ढाला अनुवाद तो बकवास या फिर प्रलाप होगा, लेकिन 'लेली' (लेफ्ट-लिबिर)गैंग के मुताबिक उनके अलावा दुनिया में जिस किसी ने दूसरे तरह की कोई भी बात कही तो वह रैंट है, उसे डिस्क्रेडिट करने का जरिया है। जैसे, अब्राहमिक मजहब बताते हैं कि उनके पैगंबर और उनकी किताबों में दुनिया का सारा सत्य समाहित है, उसके अलावा कुछ भी कहना 'कुफ्र' है, कहना क्या सोचना भी और दुनिया को एकरंगा कर देना उनकी पवित्र ड्यूटी है।--------------'द केरल स्टोरी' रैंट है, 'द कश्मीर फाइल्स' रैंट है, सीताराम गोयल के सवाल रैंट हैं, राम जन्मभूमि मामले में के के मोहम्मद की गवाही रैंट है, लेकिन डी एन झा की 'हिंदू भी गोमांस खाते थे' वाली बात आप्तवचन हैं, अल्लाह का हुक्म है और जीजस की मंशा है। यही बात रोमिला थापर के...
सशक्त देश के निर्माण में परिवार अभूतपूर्व संस्था (15 मई विशेष

सशक्त देश के निर्माण में परिवार अभूतपूर्व संस्था (15 मई विशेष

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
प्रत्येक वर्ष 15 मई को इंटरनेशनल फैमिली डे यानी कि 'विश्व परिवार दिवस' के रूप में मनाया जाता है। देखा जाए तो यह संपूर्ण धरती ही एक परिवार है और दुनिया के हरेक देश में परिवार है। वास्तव में, परिवार के साथ हमें बड़ों ,अपने बुजुर्गों की छांव मिलती है, प्रेम , सहानुभूति परवरिश, देखभाल, परम्परा, संस्कृति से जुड़ाव के साथ-साथ अकेलेपन से दूर रखने में अहम भूमिका परिवार ही निभाता है।संस्कृत में 'वसुधैव कुटुम्बकम'( संपूर्ण धरती ही परिवार है) की कल्पना यूं ही नहीं की गई है। यहाँ हम यह बात कह सकते हैं कि परिवार का प्राथमिक कार्य बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करना है, जैसे-भोजन, आश्रय, शिक्षा, स्वास्थ्य और भावनात्मक समर्थन आदि लेकिन एक परिवार की भूमिका केवल इन कार्यों तक सीमित नहीं है, वास्तव में, यह नागरिकता का पहला स्कूल भी है। परिवार से ही समाज बनता है और समाज से ही देश। परिवार है तो सबकुछ है, परिवा...
जय मराठा

जय मराठा

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
जिन कुत्सित और घृणित इतिहासकारों द्वारा यह लिखा जाता है कि मराठों का दृष्टिकोण बहुत संकुचित था, उनमें अखिल भारतीय नेतृत्व और साम्राज्य निर्माण की क्षमता नहीं थी, साथ ही वे लुटेरे, डाकू तथा विश्वासघाती थे ! उनकी राजनयिक क्षमता, राजनीतिक कौशल तथा दूरदर्शिता मध्यम स्तर से भी कम थी.....आदि, आदि ! अब इन दो टकिया इतिहासकारों से प्रश्न पूछा जाए कि अगर मराठों का उदय नहीं हुआ होता और भारतवर्ष सीधे मुसलमानों की ओर से अंग्रेजों को हस्तान्तरित किया जाता तो काशी, नासिक, प्रयाग, गढ़मुक्तेश्वर, ऋषिकेश, अयोध्या, मथुरा, उज्जैन...इन सबकी महिमा और ऐश्वर्य बचा रहता क्या ? इसका उत्तर तो राजमाता अहिल्याबाई के जीवन दृष्टान्त को सम्मुख रखकर कोई पा सकता है और इन कुत्सित, विकृतचित्त इतिहासकारों के दुरंगेपन को तुरत फुरत समझ सकता है ! हिन्दू पद पादशाही के आगमन के साथ सिर्फ मुगल साम्राज्यवाद के ही पर नहीं...
कर्नाटक का झटका

कर्नाटक का झटका

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राज्य, समाचार, सामाजिक
किसी भी चुनाव में हारना अथवा विजय प्राप्त करना मात्र एक सामान्य सी बात है, परन्तु कर्नाटक विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार, भाजपा के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। कर्नाटक प्रदेश, भारतीय जनता पार्टी के दक्षिण भारतीय अभियान का मुख्य द्वार था। इसी प्रदेश के द्वारा, भाजपा पार्टी का दक्षिण भारत का विजय अभियान होकर जाता था, परन्तु अब यदि कोई विशेष घटना घटित नहीं होती है तो, यह द्वार बंद होता प्रतीत हो रहा है। इस द्वार के बंद होने से आगामी वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में, पार्टी के लिए नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।कर्नाटक विधानसभा चुनाव में मिली हार का निष्पक्ष मंथन करना भाजपा पार्टी के लिए अत्यंत आवश्यक है। भाजपा, भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत, संस्कारवान, ईमानदार, लोकप्रिय और जनता के हित को सर्वोपरी रखने वाली एक राजनीतिक पार्टी है, जिसको राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने सीचा एवं पल्लवित किया है।कर्...
सही साबित हुआ डायलॉग इंडिया का आँकलन – हिमाचल के बाद कर्नाटक से क्यों सिमटी भाजपा ?-अनुज अग्रवाल

सही साबित हुआ डायलॉग इंडिया का आँकलन – हिमाचल के बाद कर्नाटक से क्यों सिमटी भाजपा ?-अनुज अग्रवाल

BREAKING NEWS, TOP STORIES, समाचार, सामाजिक
सही साबित हुआ डायलॉग इंडिया का आँकलन -हिमाचल के बाद कर्नाटक से क्यों सिमटी भाजपा ? - अनुज अग्रवाल1) अपनों (येदियुरप्पा एवं जगदीश शेट्टियार) को दरकिनार कर पराये (बासवराव बोम्मई) को मुख्यमंत्री बनाने का संदेश पार्टी व वोटरो में बहुत ख़राब गया। पार्टी कार्यकर्ता भी हाशिए पर आते गए और नवआगंतुकों का पार्टी पर कब्जा हो गया।2) बासवराव बोम्मई कभी भी येदियुरप्पा के साए से बाहर नहीं निकल पाए और अपनी बड़ी व अच्छी छवि नहीं बना पाए। साथ में येदियुरप्पा की समानांतर सरकार चलती रही। मोदी - शाह का राज्यो में मैनेजर बैठाकर अपनी छवि के भरोसे चुनाव जीतने की रणनीति इस बार बिखर गयी।3) अटल आडवाणी युग के नेताओ को किनारे करने व भक्तों और लाभार्थी जाति के भरोसे बैठे मोदी शाह की जोड़ी ने जब जगदीश शेट्टियार को भी पार्टी छोड़ने पर मजबूर कर दिया तो पार्टी के परंपरागत समर्थकों व संघ के स्वयंसेवकों का मनोबल टूट ...
द केरल स्टोरी: “अल्लाह सब ठीक करेगा’

द केरल स्टोरी: “अल्लाह सब ठीक करेगा’

EXCLUSIVE NEWS, Today News, TOP STORIES, समाचार, सामाजिक
--------- #विजयमनोहरतिवारी यह भारत के दुर्भाग्य की कथाएँ हैं। अंतहीन दुर्भाग्य की रुला देने वाली आपबीतियाँ। यह किसी मिशनरी या मजहब की बात ही नहीं है। यह भारत को तिल-तिलकर नष्ट करने के प्रयासों की एक सामान्य सी झलक है, जो केरल की पृष्ठभूमि से सिनेमा के परदे पर प्रस्तुत हुई है। मैं "द केरल स्टोरी' की बात कर रहा हूँ। एक फिल्म, जो इन दिनों सर्वाधिक चर्चा में हर कहीं हाऊस फुल है। होनी भी चाहिए। मैंने इसे रिलीज होने के बाद चौथे दिन देखा। यह किसी कोण से किसी भी धर्म विशेष को अपमानित नहीं करती। धर्मांतरण भारत के लिए नया विषय नहीं है। छल और बल से यह होता ही रहा है। अखंड भारत के तीन टुकड़ों में जनसांख्यिकी का विस्तार सदियों के उसी फैलाव का फल है। यह फिल्म केरल में जारी धर्मांतरण के सर्वाधिक भयावह पक्ष को संसार के सामने लाती है। किसी पारसी, सिख, ईसाई या हिंदू कन्या से किसी मुस्लिम का...