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विपक्षी एकता एक स्वप्न

विपक्षी एकता एक स्वप्न

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
राजनीति के अन्तर्गत लोकतंत्र में दो प्रमुख स्तम्भ पक्ष एवं विपक्ष की भागीदारी होती है, जिसमें दोनों पक्ष ही महत्वपूर्ण होते हैं। यदि सत्तापक्ष के समक्ष सकारात्मक विपक्ष नहीं है तो देश में सत्तापक्ष हिटलर के सदृश तानाशाह हो जाता है और देश के दुर्दिन प्रारम्भ हो जाते हैं।भारत देश में स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात सत्तापक्ष के समक्ष, विपक्ष का उत्पन्न होना, एक अच्छी शुरुआत थी। सर्वप्रथम भाकपा (भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी) विपक्षी और कांग्रेस सत्तासीन थी और भाकपा ने भारत के कुछ प्रदेशों यथा - पश्चिम बंगाल, आन्ध्र प्रदेश, केरल आदि में अपनी स्थिति सशक्त कर ली थी, परन्तु कुछ समय पश्चात ही उनके मध्य मतभेद प्रारम्भ हो गया और और वे दो भागों में विभाजित हो गए। पुनः कुछ समय पश्चात कांग्रेस पार्टी के सदस्यों में भी मतभेद प्रारम्भ हो गया तत्पश्चात भाजपा और जनता दल का उदय हुआ। दोनो पार्टियो ने अपनी अलग पहच...
जद याद करूँ हल्दीघाटी…! (9 मई विशेष)

जद याद करूँ हल्दीघाटी…! (9 मई विशेष)

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
हिंदुआ सूरज, वीरशिरोमणि, दृढ़-प्रतिज्ञ, सच्चे राष्ट्रभक्त, अदम्य साहसी,भीष्म प्रतिज्ञा, कर्तव्यनिष्ठ, छापामार युद्ध प्रणाली के जनक, शास्त्र और शस्त्र में सुशिक्षित, अनुशासनप्रिय, कुशल नेतृत्वकर्ता,कष्ट-सहिष्णु, त्याग और तप की प्रतिमूर्ति, सफल राष्ट्र निर्माता, चतुर राजनीतिज्ञ,सफल रण-नीतिज्ञ,प्रबंधन-कौशल,सब पंथों का समान आदर करने वाले, दार्शनिकों, कवियों, रचनाकारों, शिल्पियों व संतों के विशेष संरक्षक, अद्वितीय व्यक्तित्व के धनी, मेवाड़ के महान हिंदू शासक महाराणा प्रताप (सोलहवीं शताब्दी)  ऐसे शासक थे, जो मुगल शासक अकबर को लगातार टक्कर देते रहे थे। महाराणा प्रताप का जन्म राजस्थान के कुंभलगढ़ में महाराणा उदयसिंह के घर 9 मई, 1540 ई. को हुआ था।इनके पिता महाराजा उदयसिंह और माता राणी जीवत कंवर थीं। इसके साथ ही वह महान राणा सांगा के पौत्र थे। कहते हैं कि प्रताप का वजन 110 किलो और हाइट 7 फीट 5...
1 मई, मजदूर दिवस विशेष

1 मई, मजदूर दिवस विशेष

TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
दिहाड़ीदार मजदूरों की दुर्दशा के लिए जिम्मेवार कौन ?* (सामाजिक सुरक्षा कोष में तेजी लाने की आवश्यकता है ताकि देश के सबसे गरीब और कमजोर तबके को यह वित्तीय सुरक्षा की भावना प्रदान कर सके। एक मजदूर देश के निर्माण में बहुमूल्य भूमिका निभाता है। किसी भी समाज, देश संस्था और उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों की अहमियत किसी से भी कम नहीं आंकी जा सकती। इनके श्रम के बिना औद्योगिक ढांचे के खड़े होने की कल्पना भी नहीं की जा सकती।) --- डॉo प्रियंका सौरभ, बदलते दौर में विभिन्न आपदाओ के कारण सबसे बड़ा संकट दिहाड़ीदार मजदूरों के लिए हुआ है। जिनके बारे देश के अंदर बहुत ही कम चर्चा हुई और इनकी आर्थिक सहायता के लिए देश की सरकार ने कुछ नहीं सोचा। कोई संदेह नहीं कि देश का मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा शोषण का शिकार है। दिहाड़ीदार मजदूर के लिए भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है। शहरों में रोजी-रोटी की तलाश...
और हमारा ये “प्लास्टिक मोह”

और हमारा ये “प्लास्टिक मोह”

EXCLUSIVE NEWS, समाचार, सामाजिक
पता नहीं क्यों भारत के नागरिक क़ानून बनाए जाने के बाद भी ये बात मानने को तैयार नहीं है कि प्लास्टिक उनकी सेहत के लिए नुक़सानदेह है? तभी तो एक बार इस्तेमाल होने वाले (सिंगल यूज) प्लास्टिक उत्पादों पर प्रतिबंध लगाए जाने के तकरीबन 10 महीने बाद भी देश के अधिकांश हिस्सों में उसका इस्तेमाल आम है। हालांकि इनका थोक इस्तेमाल करने वाले कुछ कारोबारियों ने जैविक रूप से अपघटन योग्य विकल्प अपना लिए हैं, लेकिन अधिकांश अन्य उत्पादक, विक्रेता और उपभोक्ता अभी भी पहले की तरह बदस्तूर ऐसे प्लास्टिक का प्रयोग कर रहे हैं। ज्यादा चिंता की बात यह है कि त्यागे गए प्लास्टिक उत्पादों के संग्रह और सुरक्षित निपटारे के क्षेत्र में भी कोई खास सुधार देखने को नहीं मिला है। सार्वजनिक प्रदूषण की समस्या और बढ़ी है। सिंगल यूज प्लास्टिक न केवल सड़कों पर बिखरे रहते हैं बल्कि कचरा फेंकने की जगहों पर भी इन्हें बड़ी तादाद में द...
नक्सल समस्या : निगरानी में चूक

नक्सल समस्या : निगरानी में चूक

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राज्य, विश्लेषण, सामाजिक
कभी मध्यप्रदेश का हिस्सा रहे छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में पिछले दिनो एक बार फिर हुए नक्सली हमले के निष्कर्ष साफ हैं कि सरकारों के दावों के बावजूद नक्सलियों की ताकत पूरी तरह कम नहीं हुई है, इस लिहाज़ से मध्यप्रदेश में मुस्तैदी की ज़रूरत है । बार-बार बड़ी संख्या में जवानों को खोने के बावजूद अतीत की घटनाओं से कोई सबक नहीं सीखे गए हैं। दुर्भगाय, संचार क्रांति के दौर में मुकाबले के लिये उपलब्ध संसाधनों व हथियारों के बावजूद सरकार यदि उनके हमलों का आकलन नहीं कर पा रही हैं तो यह राज्यों के खुफिया तंत्र की विफलता का ही परिचायक है। सफल ऑपरेशन करके लौट रहे रिजर्व बल के जवानों का बारूदी सुरंग की चपेट में आना बताता है कि यह नक्सलियों की हताशा से उपजा हमला तो था ही, आगे की चुनौती और बड़ी है । इसमें कोई संदेह नहीं है कि हाल के दिनों में देश के कई इलाकों में सुरक्षाबलों के साझे अभियानों में नक्सलियों...
सम्राट चार्ल्स का राज्याभिषेक

सम्राट चार्ल्स का राज्याभिषेक

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आर.के. सिन्हा भारत के मित्र और ब्रिटेन के नए बनने जा रहे  सम्राट चार्ल्स-तृतीय के आगामी 6 मई को होने वाले राज्याभिषेक में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी उपस्थित रहेंगे। सम्राट चार्ल्स का राज्याभिषेक उस वक्त हो रहा है जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री भारत मूल के श्रषि सुनक हैं। सुनक की पत्नी भारत के प्रख्यात उद्योगपति एन. नारायणमूर्ति की सुपुत्री अक्षता हैं। यह भी मानना होगा कि दोनों देशों के आपसी संबंधों को मज़बूत रखने में ब्रिटेन में बसे हुए 15-16 लाख प्रवासी भारतीयों की अहम भूमिका तो रही ही है। इनमें अफ्रीकी और कैरिबियाई  देशों से आकर बसे भारतीय मूल के लोग भी हैं। ये सब ब्रिटेन और भारत के बीच एक पुल का काम कर रहे हैं। प्रवासी भारतीय ब्रिटेन में हर क्षेत्र में मौजूद हैं। अब चाहे वो व्यापार, राजनीति, खेल का क्षेत्र हो या कोई और, इन्होंने सबम...
विश्व पशु चिकित्सा दिवस (29 अप्रैल, 2023)

विश्व पशु चिकित्सा दिवस (29 अप्रैल, 2023)

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पोषण का रामबाण है भारत का पशुधन पशुपालन का अभ्यास अब एक विकल्प नहीं है, बल्कि समकालीन परिदृश्य में एक आवश्यकता है। इसके सफल, टिकाऊ और कुशल कार्यान्वयन से हमारे समाज के निचले तबके की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। पशुपालन को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, कृषि, शोध और पेटेंट से जोड़ने से भारत को दुनिया का पोषण शक्ति केंद्र बनाने की हर संभव क्षमता है। पशुपालन भारत के साथ-साथ विश्व के लिए अनिवार्य आशा, निश्चित इच्छा और अत्यावश्यक रामबाण है। -डॉ प्रियंका सौरभ पशुपालन का तात्पर्य पशुधन पालने और चयनात्मक प्रजनन से है। यह जानवरों का प्रबंधन और देखभाल है जिसमें लाभ के लिए जानवरों के अनुवांशिक गुणों और व्यवहार को और विकसित किया जाता है। भारत का पशुधन क्षेत्र दुनिया में सबसे बड़ा है। लगभग 20.5 मिलियन लोग अपनी आजीविका के लिए पशुधन पर निर्भर हैं। सभी ग्रामीण परिवारों के औसत 14% की तुलना में...
28 अप्रैल 1740 सुप्रसिद्ध सेनानायक बाजीराव पेशवा का निधन खरगौन में

28 अप्रैल 1740 सुप्रसिद्ध सेनानायक बाजीराव पेशवा का निधन खरगौन में

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मराठा साम्राज्य को विस्तार देने वाले सुप्रसिद्ध सेनानायक --रमेश शर्मा पिछले डेढ़ हजार वर्षों में पूरे संसार का स्वरूप बदल गया है । 132 देश एक राह पर, 57 देश दूसरी राह पर और अन्य देश भी अपनी अलग-अलग राहों पर हैं। इन सभी देशों उनकी मौलिक संस्कृति के कोई चिन्ह शेष नहीं किंतु हजार आक्रमणों के बाद यदि भारत में उसका स्वरूप है जो उसके पीछे बाजीराव पेशवा जैसी महान विभूतियों का बलिदान है । जिससे आज भारत का स्वत्व प्रतिष्ठित हो रहा है । ऐसे महान यौद्धा का आज 28 अप्रैल को निर्वाण दिवस है । उनका पूरा जीवन युद्ध में बीता । वे अपने सैन्य अभियान के अंतर्गत मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र में थे । यहीं स्वास्थ्य बिगड़ा और उनका निधन हो गया । तब उनकी आयु मात्र उन्नीस वर्ष के थे, बीसवाँ वर्ष आरंभ किया ही था । कि उनके पिता पेशवा बालाजी राव का निधन हो गया और मराठा साम्राज्य के अधिपति छत्रपति शाहूजी महाराज न...
भारत की ज़रूरत “राष्ट्रीय अनाज बोर्ड”

भारत की ज़रूरत “राष्ट्रीय अनाज बोर्ड”

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
भारत जनसंख्या के मामले में सबसे अव्वल है और इसी भारत में हर साल बारह से सोलह मिलियन टन अनाज पर्याप्त भंडारण सुविधा के अभाव में बर्बाद हो जाता है। इतने अनाज से देश के एक तिहाई गरीबों का पेट भरा जा सकता है। कृषि, उत्पादन, भंडारण और वितरण में सामंजस्य न बैठ पाने ऐसी तस्वीरें सामने का रही है जो विचलित करती है । जैसे - मंडियों व सरकारी गोदामों के बाहर पड़ा बारिश में भीगता अनाज। ग्लोबल वार्मिंग से मौसम के मिजाज में खासा बदलाव आया है। कब बारिश हो जाये कहना मुश्किल है। हालांकि, अब मौसम विभाग को उपग्रहों के संबल से मौसम की सटीक भविष्यवाणी करना संभव हुआ है। कुछ दिन पहले बता दिया जाता है कि फलां दिन मौसम खराब होगा या बारिश होगी। लेकिन वे तस्वीरें विचलित करती हैं जब मंडियों व सरकारी गोदामों के बाहर पड़ा गेहूं बारिश में भीगता दिखायी देता है। जाहिर है जिन विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों की जि...
पत्रकारिता विश्वविद्यालय में होगा स्वास्थ्य संसद 2023 का आयोजन

पत्रकारिता विश्वविद्यालय में होगा स्वास्थ्य संसद 2023 का आयोजन

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
28,29 एवं 30 अप्रैल को बिशनखेड़ी के नवीन परिसर में होगा तीन दिवसीय कार्यक्रम भोपाल : माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के बिशनखेड़ी स्थित नए परिसर में 28,29 एवं 30 अप्रैल को स्वास्थ्य संसद 2023 का आयोजन होने जा रहा है । आयोजन के संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन विश्वविद्यालय परिसर में किया गया । स्वस्थ भारत न्यास के अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक आशुतोष कुमार सिंह ने बताया कि स्वस्थ भारत न्यास के आठवें स्थापना दिवस के अवसर पर यह आयोजन होने जा रहा है, जिसका नाम स्वास्थ्य संसद 2023 है । उन्होंने स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता की बात करते हुए कहा कि इसका विषय अमृतकाल में भारत का स्वास्थ्य एवं मीडिया की भूमिका होगा । विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अविनाश वाजपेयी ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि यह बड़ा आयोजन होगा जिसमें स्वास्थ्य एवं अपने-अपने क्षेत्रों के जा...