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22 अप्रैल अक्षय तृतीया: भगवान परशुराम जी का अवतार दिवस

22 अप्रैल अक्षय तृतीया: भगवान परशुराम जी का अवतार दिवस

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सबसे व्यापक और प्रचण्ड अवतार है परशुरामजी का झूठी है उनके क्रोधी होने और क्षत्रिय क्षय की बातें --रमेश शर्मा पृथ्वी पर सत्य, धर्म और न्याय की स्थापना के लिये भगवान् नारायण ने अनेक अवतार लिये हैं। इनमें परशुरामजी का अवतार पहला पूर्ण अवतार है । जो सर्वाधिक व्यापक है । संसार का ऐसा कोई कोना, कोई क्षेत्र या कोई देश ऐसा नहीं जहाँ भगवान् परशुरामजी की स्मृति या चिन्ह नहीं मिलते हों । उन्होंने संसार में शाँति और मानवता की स्थापना के लिये पूरी पृथ्वी की सतत यात्राएँ की । यदि यह कहा जाय कि विश्व में आर्यत्व की स्थापना भगवान् परशुरामजी ने की तो यह सच्चाई का महत्वपूर्ण तथ्य होगा ।भगवान् परशुरामजी का चरित्र वैदिक और पौराणिक इतिहास में सबसे प्रचण्ड और व्यापक है । उन्हे नारायण के दशावतार में छठे क्रम पर माना गया । वे पहले पूर्ण अवतार हैं । उन्हे चिरंजीवी माना गया इसीलिए ऊनकी उपस्थित हरेक युग में म...
नया अवतार लेता खालिस्तान का विचार – डॉ प्रियंका सौरभ 

नया अवतार लेता खालिस्तान का विचार – डॉ प्रियंका सौरभ 

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हाल के दिनों में पंजाब में खालिस्तान अलगाववादी आंदोलन के विचार का प्रचार कर रहे सिख उग्रवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले का अनुयायी अमृतपाल सिंह भागने में सफल रहा है। हिंसक खालिस्तानी आंदोलन गायब हो गया है; हालाँकि, एक अलग सिख राष्ट्र यानी खालिस्तान का विचार अभी तक गायब नहीं हुआ है।   खालिस्तान आंदोलन वर्तमान पंजाब (भारत और पाकिस्तान दोनों) में एक अलग, संप्रभु सिख राज्य के लिए लड़ाई है। ऑपरेशन ब्लू स्टार (1984) और ऑपरेशन ब्लैक थंडर (1986 और 1988) के बाद भारत में इस आंदोलन को कुचल दिया गया था, लेकिन यह सिख आबादी के वर्गों के बीच सहानुभूति और समर्थन पैदा करना जारी रखता है, खासकर कनाडा,  ब्रिटेन, और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में सिख डायस्पोरा में। हाल के दिनों में पंजाब में खालिस्तान अलगाववादी आंदोलन के विचार का प्रचार कर रहे सिख उग्रवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले का अनुयायी अमृतपाल सिंह...
मेडिकल टूरिज्म में छलांग लगाता भारत

मेडिकल टूरिज्म में छलांग लगाता भारत

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आर.के. सिन्हा भारत को मेडिकल टूरिज्म के हब के रूप में स्थापित करने को लेकर जो कोशिशें बीते कुछ सालों से चल रही हैं उनके सुखद परिणाम अब सामने आने भी लगे हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री श्रीपद नाईक ने हाल ही में गोवा में आयोजित जी-20 से जुड़े के एक कार्यक्रम में बताया कि पिछले साल भारत में 14 लाख विदेशी पर्यटक मात्र इलाज के लिए भारत आए। जाहिर है, इनमें वे भी शामिल हैं जो  रोगियों के साथ आए थे। यह आंकड़ा ही साबित करता है कि भारत की मेडिकल सुविधाओं को लेकर दुनिया में भरोसा बढ़ रहा है।  यह तो अभी शुरुआत है। अभी तो भारत को बहुत सी मंजिलों को पार करना है। आप दिल्ली,चंडीगढ़,मुंबई वगैरह के किसी भी प्रतिष्ठित अस्पताल में खुद जाकर देख लें। वहां आपको अनेक विदेशी रोगी और उनके परिजन बैठे मिल जाएंगे। इनमें अफ्रीकी और खाड़ी देशों के रोगियों की तादाद भी खासी रहती है। भारत में ओम...
मौसम : लौटिए, पूर्वजों की संस्तुति की ओर

मौसम : लौटिए, पूर्वजों की संस्तुति की ओर

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बीते कल भोपाल बेहद गर्म था। तापमान 40 डिग्री को पार कर गया था, महसूस ज़्यादा हो रहा था। अब हमें बिना न-नुकुर इस हकीकत को स्वीकार लेना चाहिए कि जलवायु परिवर्तन के घातक प्रभावों ने हमारे जीवन को गहरे तक प्रभावित कर दिया है। इस माह के आरंभ में जहां लोग वातावरण में ठंड महसूस कर रहे थे, पहाड़ों में बर्फबारी हो रही थी और मैदानों में ओला व वर्षा जारी थी। वहीं पिछले कुछ दिनों में मौसम अचानक बदला और बात पारे के अनपेक्षित रूप से ऊपर जाने की भी सामने आ गई है। यहां तक कि मौसम विज्ञानी दिल्ली सहित कई राज्यों में लू की चेतावनी देने लगे हैं। निस्संदेह, मौसम में बदलाव कुदरत का नियम है। ठंड के बाद गरमी और गरमी के बाद बरसात कुदरत के शाश्वत नियम हैं। लेकिन यह परिवर्तन निर्धारित समय के साथ धीरे-धीरे होता है। जिसमें मानव शरीर धीरे-धीरे उसके अनुकूल खुद को ढाल लेता है। ऐसा ही फसलों व फलों के वृक्षों का भी है, व...
लोकसभा चुनाव- क्या मुद्दा बनेगा ‘राम मंदिर’?

लोकसभा चुनाव- क्या मुद्दा बनेगा ‘राम मंदिर’?

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आर.के.सिन्हा आगामी सितंबर के महीने में राजधानी में जी-20 शिखर सम्मेलन के फौरन बाद से ही देश में 2024 के लोकसभा चुनावों की हलचल तेज होने लगेगी। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव से पहले राम मंदिर के द्वार दुनिया भर के राम भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे। इससे दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार आदि स्थानों पर पर्यटन भी तेजी से बढ़ेगा I इसलिए यह सवाल तो पूछा ही जाएगा कि क्या अगले आम चुनावों में राम मंदिर चुनावी मुद्दा बनेगा? जिस तरह से भाजपा राम मंदिर को लेकर जनता के बीच जा रही है उससे तो यह स्पष्ट ही है कि पार्टी इसे अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश करेगी और करे भी क्यों नहीं जो काम 500 वर्षों के समय-समय पर हुये भयंकर रक्तपातों और लाखों राम भक्तों की कुर्वानियों से भी हासिल न हो सका, वह भाजपा के शासन में आसानी से हो भी गया और किसी को चूं चपड़ तक करने की हिम्मत तक न हुई । 1980 ...
विकास की दौड़, मौसम के कारण पिछड़ता किसान

विकास की दौड़, मौसम के कारण पिछड़ता किसान

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कहावत है कि मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती लेकिन यदि इंसान किसान की भूमिका में हो तो कृषि व्यवसाय में मेहनत भी शिकस्त का दंश झेलने को मजबूर रहती है। मार्च व अप्रैल महीने में रबी की फसल पूरे शबाब पर होती है। मगर बारिश व ओलावृष्टि के कहर ने किसानों व बागवानों की कई महीनों की मेहनत पर पानी फेर कर किसानों को मायूस कर दिया है। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में बेमौसम बरसात से ‘ब्लॉज्म ब्लाइट’ रोग ने आम की पैदावार को भारी नुकसान पहुंचाया है। कृषि अर्थशास्त्र की बुलंद इमारत अन्नदाता अतीत से एक बड़े परीक्षार्थी की तरह जीवनयापन करता आ रहा है। मौसम अपने तल्ख तेवरों व बेरूखे मिजाज से किसान वर्ग की सबसे बड़ी परीक्षा लेता है। फसल तैयार होने पर बाजार नाम की व्यवस्था व उपभोक्ता किसानों की परीक्षा लेते हैं। कभी व्यवस्थाओं में बैठे अहलकार तो कभी सरकारें किसानों की परीक्षा लेती हैं। कृषि उत्पादन में क...
क्यों उठते हैं एनकाउंटर पर सवाल?

क्यों उठते हैं एनकाउंटर पर सवाल?

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विनीत नारायणउत्तर प्रदेश के व्यापारी आजकल कहते हैं कि योगी राज में मुसलमानों का आतंक ख़त्म हो गया है। इसलिये माफिया डॉन अतीक अहमद के बेटे असद अहमद की एनकाउंटर में मौत का समाचार उन लोगों को सुखद लगा। एनकाउंटर के विषय में कुछ तथ्य और क़ानूनी पेचीदगियों का ज़िक्र मैं इस लेख में आगे करूँगा। पर यहाँ एक सवाल जो समाजवादी पार्टी ने उठाया है वो भी महत्वपूर्ण है। वो ये कि ऐन चुनावों के पहले ही इस एनकाउंटर को करने का योगी सरकार का क्या उद्देश्य था? सिवाय इसके कि इस एनकाउंटर की खबर को दिन-रात टीवी चैनलों पर चलवाकर इसका फ़ायदा अगले महीने होने वाले निकायों के चुनावों में लिया जाए। इसलिये सरकार की नीयत पर शक होता है। क़ानून की नज़र में सब बराबर होने चाहिए। किसी अपराधी का कोई जाति या धर्म नहीं होता। इसलिए बिना भय और पक्षपात के अगर प्रदेश के माफ़ियाओं के विरुद्ध योगी सरकार कड़े कदम उठाती है तो उसका स्...
त्योहार और परम्पराएँ

त्योहार और परम्पराएँ

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परम्पराएं पढ़ना भी सिखाती हैं। एक ख़ास आयातित विचारधारा के प्रभाव से शिक्षा का अच्छा ख़ासा नुकसान हुआ है। अभिभावकों को ये अच्छी तरह पता होता है कि स्कूल का पाठ्यक्रम उनके बच्चों को रट्टू तोता बना रहा है। जैसे रबी और खरीफ की फसलों का ही सोचिये, कौन सी कब उपजती-कटती है इसे याद क्यों करना पड़ता है? 14 जनवरी के आसपास मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा खाने कि परम्परा है, नए धान की फसल उस वक्त आती है तो चूड़ा। अप्रैल की शुरुआत का समय बिहार के लिए सतुआनी और मिथिलांचल में जूड़ शीतल नाम के पर्व का होता है। लिट्टी के अन्दर भरे होने, या घर से लौटते बिहारियों के पास होने के कारण जिस सत्तू को पहचाना जाता है, इस पर्व में उसे खाने की परम्परा है। अप्रैल दलहन की फसलों और गेहूं का समय होता है, इसलिए ये त्यौहार उससे जुड़ा है। परम्पराओं को पोंगापंथी बताने वालों को फसलों का समय रटना पड़ता है। ऐसे त्योहारों को मना...
वर्ण व्यवस्था और जाति व्यवस्था

वर्ण व्यवस्था और जाति व्यवस्था

EXCLUSIVE NEWS, विश्लेषण, सामाजिक
विभिन्न कालखंडों में समाज की समस्याएं भी भिन्न भिन्न रहीं हैं किन्तु कुछ समस्याएं समय बदलने पर भी नहीं बदलीं अपितु और विकृत हो गईं हैं । जाति व्यवस्था के प्रति समाज की मानसिकता और पहचान की राजनीति ने इस समस्या को और विकराल बना दिया है । स्थिति यह है कि संसाधनों की प्राप्ति की होड़ में कोई भी वर्ग अपनी जाति को छोड़ना भी नहीं चाहता । जाति क्या है और यह वर्ण व्यवस्था से कैसे भिन्न है इसे समझना अत्यंत आवश्यक है । भारत के ऋषि मुनियों ने जहां व्यक्ति के लिए धर्म परायण होने की व्यवस्था की वहीं समाज में उसका स्थान निश्चित कर सामाजिक व्यवस्था के स्वरूप को भी निर्धारित किया । जिस प्रकार उन मनीषियों ने जीवन को चार सोपानों में बांटा है उसी प्रकार समाज में भी चार वर्ग किये, जिन्हें हम "वर्ण" की संज्ञा देते हैं । ये चार वर्ण ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र हैं । इस वर्ण व्यवस्था का आधार "गुण और कर्म...
दबे-कुचले वर्गों के मसीहा अंबेडकर

दबे-कुचले वर्गों के मसीहा अंबेडकर

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
( अम्बेडकर जी ने कांग्रेस के पूर्ण स्वतंत्रता के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उन्होंने दलितों के उत्थान हेतु उच्च वर्गीय हिन्दुओं से ज़्यादा अंग्रेज़ों को सहायक माना। देश व दलितों के हितो के बीच टकराव की स्थिति में उन्होंने दलितों के हितों को वरीयता देने की बात कही। ) -प्रियंका 'सौरभ' देश बी आर अंबेडकर की 132वीं जयंती मना रहा है। एक समाज सुधारक, भारतीय संविधान की मसौदा समिति के अध्यक्ष और देश के पहले कानून मंत्री के रूप में उनकी भूमिका प्रसिद्ध है।वे एक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री, सक्रिय राजनेता, प्रख्यात वकील, श्रमिक नेता, महान सांसद, अच्छे विद्वान, मानवविज्ञानी, वक्ता थे। आजादी के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में देश ने आजादी का अमृत महोत्सव की शुरुआत की है। अम्बेडकर के विचारों की गंभीरता, राष्ट्र-निर्माता के रूप में उनकी भूमिका और उन पर किए गए कार्यों को समझने के लिए, सामाजिक ताने-बाने क...