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सामाजिक

वैश्विक स्तर पर भारतीय सबसे अधिक प्रसन्नता प्राप्त करने की ओर अग्रसर 

वैश्विक स्तर पर भारतीय सबसे अधिक प्रसन्नता प्राप्त करने की ओर अग्रसर 

BREAKING NEWS, समाचार, सामाजिक
अभी हाल ही में वर्ष 2023 के लिए वैश्विक प्रसन्नता प्रतिवेदन (ग्लोबल हप्पीनेस रिपोर्ट 2023) जारी किया गया है। वैश्विक प्रसन्नता प्रतिवेदन को,  150 से अधिक देशों का विभिन बिंदुओं पर सर्वे करने के उपरांत, संयुक्त राष्ट्र दीर्घकालिक विकास समाधान तंत्र द्वारा प्रकाशित किया जाता है। वैश्विक प्रसन्नता प्रतिवेदन को अंतिम रूप देने के पूर्व, स्वस्थ जीवन प्रत्याशा, प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद, सामाजिक सहयोग, भ्रष्टाचार का स्तर, समाज में नागरिकों के बीच आपसी सदाशयता एवं निर्णय लेने की स्वतंत्रता जैसे बिंदुओं पर विभिन्न देशों का आंकलन किया जाता है। फिनलैंड, डेनमार्क, आइसलैंड, स्वीडन एवं नॉर्वे जैसे छोटे छोटे देश जिनकी जनसंख्या तुलनात्मक रूप से बहुत कम रहती है, इस सूची में शीर्ष स्थान प्राप्त करने में सफल हो जाते हैं। उक्त सर्वे के अनुसार सबसे अधिक प्रसन्न देश, फिनलैंड में केवल 55 लाख ...
औद्योगिक घरानों के बंटवारे कैसे प्रेम से हों

औद्योगिक घरानों के बंटवारे कैसे प्रेम से हों

EXCLUSIVE NEWS, राष्ट्रीय, सामाजिक
आर.के. सिन्हा  दीपक पारेख को भारत के कॉरपोरेट जगत में बहुत ही आदर भाव के साथ देखा जाता है। एचडीएफसी बैंक के चेयरमेन दीपक पारेख बीती आधी सदी से कॉरपोरेट जगत की हरेक घटना के अहम साक्षी हैं। वे जब किसी विषय पर बोलते हैं तो उसे नजरअंदाज करना संभव नहीं होता। उन्होंने हाल ही में एक सेमिनार में कहा कि भारत के बहुत से औद्योगिक-घरानों में संपत्ति बंटवारे को लेकर हुआ विवाद इतना गंभीर हो गया है कि वे घराने इस आघात से बुरी तरह से छलनी हो गए। इस पूरी प्रक्रिया में लंबा वक्त भी लगा सो अलग ।  उनकी सलाह थी कि जिन घरानों में विवाद हो तो उन्हें मध्यस्थता के रास्ते पर चलना चाहिए। इससे धन और वक्त भी बच जाएगा। दीपक पारेख की बात में दम है। हमने देखा है कि रिलायंस ग्रुप के चेयरमेन धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद उनके दोनों पुत्रों - मुकेश  और अनिल में संपत्ति विवाद गहरा होता चला गया। बात जब कोर्...
विनाशपर्व जालियांवाला बाग

विनाशपर्व जालियांवाला बाग

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
१३ अप्रैल १९१९.* आज ही के दिन, जालियांवाला बाग, अमृतसर मे अंग्रेजोंने सैंकडों निरीह, निरपराध, निर्दोष भारतीयोंको किडे-मकौडों जैसा मारा... विनाशपर्व- प्रशांत पोळ १९१९ की १३ अप्रैल को बैसाखी थी. रविवार का दिन था. रौलेट एक्ट के विरोध में सारे देश में प्रदर्शन हो रहे थे. उसी शृंखला मे, जालियांवाला बाग में एक सभा आयोजित की गई थी. बैसाखी और छुट्टी के कारण, अमृतसर के आजू-बाजू के लोग भी जालियांवाला बाग पहुंच रहे थे. धीरे – धीरे यह संख्या पांच हजार तक पहुंच गई. मैदान में भाषण चल रहे थे, और लोग शांति से बैठ कर उन्हे सुन रहे थे. लोगों में बच्चे, बूढ़े, महिलाएं... सभी थे. वातावरण में कही कोई उत्तेजना या असंतोष नहीं था. तभी अचानक ब्रिटिश सेना का एक अधिकारी, ब्रिगेडियर जनरल एडवर्ड डायर (मूलतः वह कर्नल था. किन्तु अस्थायी रूप से उसे ब्रिगेडियर का पद दिया गया था), हथियारों से सुसज्जित अपनी फौज ले...
बेमौसम बारिश से फसलों का खराबा !

बेमौसम बारिश से फसलों का खराबा !

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
पिछले कुछ समय से बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने कई राज्यों में किसानों के समक्ष बहुत बड़ी परेशानी खड़ी कर दी है। आंकड़़ें बताते हैं कि बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि व तेज हवाओं से क्रमशः मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में 5.23 लाख हेक्टेयर से अधिक गेहूं की फसल को प्रभावित किया है। इससे उपज का नुकसान तो हुआ ही है साथ ही साथ किसानों के समक्ष कटाई व फसलों के भंडारण की समस्या भी पैदा हो गई है। इस समय बेमौसम बारिश की मार से आधा भारत बेहाल है और रह-रहकर हो रही बारिश से फसलों का बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। ओलों व बर्फबारी से किसानों को बहुत समस्याओं का सामना करना पड़ता है और इस बार मौसम किसानों का साथ नहीं दे रहा है। फसलों के खराबे से करोड़ों का नुकसान हुआ है। गेहूँ की पकी फसलें तो अधिक बारिश से जमीन पर गिर गई और गेहूँ का दाना बारिश से काला पड़ गया। सरसों की फसलों को भी बहुत नुकसान हुआ ...
जाति पर आत्यंतिक आग्रहों का अर्थ

जाति पर आत्यंतिक आग्रहों का अर्थ

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
रामेश्वर मिश्र पंकज जाति की ही पहचान का अत्यंत आग्रह और अत्यंत निषेध,  दोनों के पीछे प्रयोजन एक ही  होता है।अन्य पहचानों को छिपाना।प्रत्येक संस्कारी और परंपरा से जुड़ा हुआ व्यक्ति जानता है कि प्रत्येक व्यक्ति की विशेषकर मनुष्य रूप में जन्म लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पहचान के अनेक स्तर हैं और अनेक आयाम हैं तथा उन पहचानों यानी उपाधियों के अनेक नाम भी हैं।व्यक्ति ब्रह्मांडीय इकाई है। वह मात्र सामाजिक इकाई नहीं है।समाज उसकी एक सामाजिक पहचान है। मूल रूप में आत्म सत्ता विराट है। परंतु परिवार के सदस्य के रूप में या किसी भी सामाजिक संस्था के रूप में वह आधारभूत सामाजिक इकाई भी हैं ।पर मात्र वही नहीं है।उससे परे भी वह है।तभी तो कहा है कि "आत्मार्थे पृथ्वीं त्यजेत।"इसी प्रकार राज्य के नागरिक के रूप में वह राजनीतिक इकाई भी है ।।जाति को हिंदुओं की एकमात्र पहचान मानने का आग्रह करने वाले...
अंतिम सत्य है मृत्यु , जीवन में कर्म प्रधान है !

अंतिम सत्य है मृत्यु , जीवन में कर्म प्रधान है !

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
अभी दो दिन पहले ही फेसबुक पर एक पोस्ट पढ़ने को मिली। पोस्ट लता मंगेश्कर जी, भारत की स्वर कोकिला के बारे में थी। पोस्ट पढ़कर दिल भर आया। पास बैठी मां को पोस्ट पढ़कर सुनाने लगा तो यकायक गला रूंध आया। नहीं जानता पोस्ट में लिखे शब्द स्वयं लता मंगेशकर जी के हैं भी या नहीं, लेकिन फेसबुक पर यह पोस्ट देखकर ऐसा महसूस हुआ कि शायद ये लता मंगेशकर जी के शब्द रहे हों,जब वह बीमार थीं और अस्पताल में थी। पोस्ट हमें गंभीर चिंतन कराती है। आप भी इसे एकबार जरूर पढ़िए, पोस्ट कुछ इस प्रकार से थी- 'इस दुनिया में मौत से बढ़कर कुछ भी सच नहीं है। दुनिया की सबसे महंगी ब्रांडेड कार मेरे गैराज में खड़ी है। लेकिन मुझे व्हील चेयर पर बिठा दिया गया। मेरे पास इस दुनिया में हर तरह के डिजाइन और रंग हैं, महंगे कपड़े, महंगे जूते, महंगे सामान। लेकिन मैं उस छोटे गाउन में हूं जो अस्पताल ने मुझे दिया था ! मेरे बँक खाते में बहुत पै...
बहुत याद आएंगे सलीम दुर्रानी

बहुत याद आएंगे सलीम दुर्रानी

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आर.के. सिन्हा सलीम दुर्रानी के बीते रविवार को निधन से भारत ने अपना 1960 और 1970 के दशकों के एक बेहद लोकप्रिय और लाजवाब क्रिकेटर को खो दिया। सलीम दुर्रानी ने गुजरात के जामनगर में आखिरी सांस ली।   सलीम दुर्रानी जब मैदान में होते थे, तो कोई भी लम्हा नीरस नहीं होता था। सलीम दुर्रानी के लिए मशहूर था कि वे दर्शकों की मांग पर छक्का मारते थे। उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल हरफनमौला क्रिकेटर माना जाता था। दर्शकों की छक्के की मांग को वे फौरन पूरा करते थे। वे राजधानी में सालों राजस्थान की तरफ से रणजी ट्रॉफी के मैच खेलने के लिए करनैल सिंह स्टेडियम में आया करते थे। राजस्थान की उस दौर की टीम में हनुमंत सिंह, लक्ष्मण सिंह तथा कैलाश गट्टानी जैसे स्टार प्लेयर होते थे। हनुमंत सिंह तो सेंट स्टीफंस कॉलेज के स्टुडेंट रहे थे। पर सलीम दुर्रानी की लोकप्रियता के सामने बाकी...
योग के दौरान हस्त मुद्राओं से शरीर को मिले बेहद लाभ

योग के दौरान हस्त मुद्राओं से शरीर को मिले बेहद लाभ

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अलका सिंहयोग  विशेषज्ञ योग में हस्त मुद्राएं बहुत ही महत्वपूर्ण और लाभदायक बताई गई हैं। हाथों को विभिन्न प्रकार से मोड़कर बनने वाली ये मुद्राएं योगी के उद्देश्य का प्रतीक होती हैं। ये मुद्राएं ही हैं जो योगी को उसके उद्देश्य के प्रति तत्पर बनाए रखने में मदद करती हैं। ये योगी के शरीर की आंतरिक और सुप्त ऊर्जा को जाग्रत करती हैं। प्राचीन भारतीय ग्रंथों और वेदों में करीब 399 योग मुद्राओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है।’ हस्त मुद्रा का योग में बड़ा महत्व व फायदा बताया गया है। हाथों की 10 अंगुलियों से विशेष प्रकार की आकृतियां बनाना ही हस्त मुद्रा कही गई है। हाथों की सारी अंगुलियों में पांचों तत्व मौजूद होते हैं जैसे अंगूठे में अग्नि तत्व, तर्जनी अंगुली में वायु तत्व, मध्यमा अंगुली में आकाश तत्व, अनामिका अंगुली में पृथ्वी तत्व और कनिष्का अंगुली में जल तत्व। पांच तत्वों पर मुद्रा का सारा...
सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी मंगल पाण्डेय का बलिदान

सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी मंगल पाण्डेय का बलिदान

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8 अप्रैल 1857 सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी मंगल पाण्डेय का बलिदान इन्ही के स्वाभिमान की चिंगारी क्राँति का दावानल बनी- रमेश शर्मा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में 1857 की क्रान्ति को सब जानते हैं। यह एक ऐसा सशस्त्र संघर्ष था जो पूरे देश में एक साथ हुआ । इसमें सैनिकों और स्वाभिमान सम्पन्न रियासतों ने हिस्सा लिया । असंख्य प्राणों की आहूतियाँ हुईं थी । इस संघर्ष का सूत्रपात करने वाले स्वाभिमानी सिपाही मंगल पाण्डेय थे । अपने स्वत्व और स्वाभिमान की रक्षा के लिये न केवल गाय की चर्बी वाले कारतूस लेने से इंकार किया अपितु दो अंग्रेज सैन्य अघिकारियों को गोली भी मार दी ।ऐसे इतिहास प्रसिद्ध क्राँतिकारी मंगल पाण्डेय का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के अंतर्गत नगवा नामक गांव में 19 जुलाई 1827 को हुआ था। इनके पिता दिवाकर पांडे था भारतीय परंपराओ से जुड़े थे । घर में पूजा पाठ का वातावरण था । मंगल पाण्डेय ...
जैव-विविधता के लिए जरूरी है हाथियों और बाघों का संरक्षण !

जैव-विविधता के लिए जरूरी है हाथियों और बाघों का संरक्षण !

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भारत का राष्ट्रीय पशु(जानवर) बाघ है। समय के साथ मानवीय हस्तक्षेप के कारण बाघों पर भी खतरा मंडराया और यह बात हमें आंकड़ों से पता चलती है। एक समय था जब बाघों की तेजी से कम होती संख्या को लेकर चिंता जताई जाने लगी थी, लेकिन अब धीरे-धीरे इसमें प्रोजेक्ट टाइगर व अन्य बाघ संरक्षण कार्यक्रमों से इसमें कुछ सुधार आ रहा है। समय के साथ ही वन्यजीवों के शिकार के संबंध में कानून को भी सख्त बनाया गया है। बहरहाल, एक अनुमान के अनुसार, विश्व भर के बाघों ने अपने प्राकृतिक निवास स्थान का तकरीबन 93 प्रतिशत हिस्सा खो दिया है। यह बहुत ही गंभीर व संवेदनशील है कि इन निवास स्थानों(अधिवासों) को अधिकांशतः मानव गतिविधियों द्वारा नष्ट किया गया है। वनों और घास के मैदानों को कृषि ज़रूरतों के लिये परिवर्तित किया जा रहा है। बाघों से मानव को कथित खतरे को देखते हुए और मौद्रिक लाभ कमाने के उद्देश्य से बाघों का शिकार मानव द...