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पाकिस्तान बदहाल: चिन्ता विश्व की

पाकिस्तान बदहाल: चिन्ता विश्व की

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वर्तमान में हमारा पड़ौसी पाकिस्तान देश, राजनीतिक, आर्थिक, प्रशासनिक एवं कुछ पड़ौसी देशों के साथ पारस्परिक संबंधो की समस्या से ग्रस्त है। इन समस्याओं के प्रमुख उदाहरण इन रूपों में देखने को मिलते हैं कि पाकिस्तान की सरकार अपने नागरिको की मूलभूत आवश्यकताओं यथा -खाने की वस्तुएँ आटा, दाल, सब्जी आदि को भी गरीब व मध्यम वर्ग तक उपलब्ध कराने में असमर्थ हो चुकी है। इन आवश्यकताओं की पूर्ति करने हेतु जनता में लूटमार की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। पेट्रोल, डीजल, गैस के भाव आसमान छू रहे हैं, जिस कारण से आज जनता के लिए कार तो क्या स्कूटर पर चलना भी सम्भव नहीं हो पा रहा है। सत्तासीन राजनेता, देश की जनता के हित की उपेक्षा कर अपने राजनीतिक विरोधियों को समाप्त करने में, सरकारी शक्तियों का दुरूपयोग कर रहे हैं। जनता का रूझान पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की ओर यथावत है, क्योंकि वो उनकी गिरफ्तारी का विरोध कर उन्...
Growing Rewards Market

Growing Rewards Market

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पुरस्कारों का बढ़ता बाजार* पुरस्कारों के बढ़ते बाजार के में देने और लेने वाले दोनों कि भूमिका है। देने वाले अपने आप खत्म हो जायेंगे अगर लेने वाले न बने। हमें किसी भी पुरस्कार के लिए पैसा देना पड़े तो समझ लीजिये वो पुरस्कार नहीं खरीद है। बात इतनी सी है। फिर हम और आगे क्यों बढे? एनजीओ रजिस्ट्रेशन के जरिये कई चरणों में राशि ऐंठते है या फिर धक्का डोनेशन लेते है। संस्थाएं एक दूजे की हो गयी है। एक दूसरे को सम्मानित करने और शॉल ओढ़ाने में लगी है। सरकारी पुरस्कार बन्दर बाँट कहे या लाठी का दम। जितनी जान-पहचान उतना बड़ा तमगा। ये प्रमाण “बिक्री के लिए” पुरस्कार विजेताओं की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हैं। *--प्रियंका सौरभ* आजकल सोशल मीडिया प्लेटफार्म ऐसी पोस्ट्स से भरे पड़े है जिसमें लिखा होता है कि उक्त को ये पुरस्कार (स्वर्ण) मिला है। यह पुरस्कार मिलने पर पुरस्कार प्राप्त करने वाले और देने ...
ऊर्जा भंडारण अनुप्रयोगों के लिए नया सुपरकैपेसिटर

ऊर्जा भंडारण अनुप्रयोगों के लिए नया सुपरकैपेसिटर

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इलेक्ट्रिक उपकरणों के संचालन में बैटरियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। लेकिन, समय के साथ बैटरियाँ विद्युतीय चार्ज का भंडारण करने की अपनी क्षमता खो देती हैं, और इसीलिए उनकी शेल्फ-लाइफ सीमित होती है। बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के शोधकर्ताओं ने एक नया अल्ट्रा-माइक्रो सुपरकैपेसिटर विकसित किया है, जिसके बारे में बताया जा रहा है कि यह भारी मात्रा में इलेक्ट्रिक चार्ज को स्टोर करने में सक्षम है। मौजूदा सुपरकैपेसिटर की तुलना में यह उपकरण आकार में बेहद छोटा और अधिक कॉम्पैक्ट है। संभावित रूप से इसका उपयोग स्ट्रीटलाइट्स से लेकर उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक कारों और चिकित्सा उपकरणों सहित विभिन्न उपकरणों में किया जा सकता है। भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के इंस्ट्रूमेंटेशन ऐंड एप्लाइड फिजिक्स विभाग (आईएपी) के शोधकर्ताओं द्वारा यह अध्ययन किया गया है। उनका कहना है ...
मोहम्मद फैज़ल की सदस्यता बहाल करना लोकसभा सचिवालय का एक गलत फैसला-

मोहम्मद फैज़ल की सदस्यता बहाल करना लोकसभा सचिवालय का एक गलत फैसला-

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मीलॉर्ड को राहुल के फंसने पर 10 साल बाद याद आया,अयोग्य ठहराने का फैसला “खतरनाक” है - 11 जनवरी, 2023 को लक्षद्वीप के NCP सांसद मोहम्मद फैज़ल को ट्रायल कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस मंत्री पीएम सईद के दामाद हत्या के आरोप में दोषी ठहराया और 10 वर्ष कारावास की सजा सुनाई और नियमों के अनुसार 12 जनवरी को तत्काल प्रभाव से लोकसभा सचिवालय ने उसे सांसदी से अयोग्य कर सदस्यता समाप्त कर दी - परंतु 25 जनवरी को केरल हाई कोर्ट ने उसकी सजा पर रोक लगा दी (Stay कर दिया) जिसे vacate कराने के लिए लक्षद्वीप प्रशासन सुप्रीम कोर्ट गया और फैज़ल ने अपनी सांसदी बहाल करने के लिए अभिषेक मनु सिंघवी से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करवा दी जबकि यह याचिका उसे हाई कोर्ट में ही लगानी चाहिए थी - अपनी ही पार्टी के नेता के दामाद की हत्या के आरोपी के लिए सिंघवी पापड़ बेल रहा है - उधर चुनाव आयोग ने फैज़ल की सीट पर चुनाव करान...
राहुल के सहारे चमकते नेता, पार्टी के लिए ख़तरनाक

राहुल के सहारे चमकते नेता, पार्टी के लिए ख़तरनाक

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी राजनीति के चक्रव्यूह में फंसे हुए नजर आ रहे हैं। अगर राहुल गांधी को अपने बचाव में ऊपरी अदालत में अपील करते हैं,तभी वह जेल जाने से बच सकेंगे एवं उसके बाद ही उनकी संसद की सदस्यता भी संभवतः बहाल हो पाएगी। अभी तो राहुल गांधी को अपने इर्द-गिर्द तैनात नेताओं में से उन लोगों को दूर कर देना चाहिए जो सिर्फ स्वयं को आगे बढ़ाने के लिए राहुल गांधी का सहारा ले रहे हैं। बहुत से जनाधार विहीन नेता राहुल गांधी के सहारे बड़े-बड़े पदों पर बैठे हुये हैं। इस मामले के तथ्य से सब परिचित हैं,सूरत कोर्ट द्वारा राहुल गांधी को सजा सुनाने के 26 घंटे बाद ही लोकसभा ने उन्हें सदस्यता के अयोग्य ठहरा दिया। यदि लोकसभा अध्यक्ष चाहते तो उन्हें ऊपरी अदालत के निर्णय होने तक संसद सदस्य रखा जा सकता था, शायद यहाँ राजनीति के दबाव में अति शीघ्रता में उनकी सदस्यता रद्द कर दी गयी। कोर्ट के निर्...
नया सेंसर बताएगा कितने पके हैं फल

नया सेंसर बताएगा कितने पके हैं फल

TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
फल-उत्पादकों के लिए पेड़ पर लगे फलों के पकने की अवस्था का समय पर आकलन महत्वपूर्ण होता है। फलों की छंटाई और उनके पकने का पता लगाने के लिए उपयोग होने वाले माइक्रोसेंसर रासायनिक विश्लेषण एवं इलेक्ट्रोकेमिकल सेंसिंग पर आधारित हैं, जिनकी अपनी सीमाएं हैं। एक ताजा अध्ययन में शोधकर्ताओं ने फल कितने पके हैं यह पता लगाने के लिए एक नया सेंसर विकसित किया है, जो सस्ता होने के साथ-साथ अत्यधिक संवेदी और स्पर्शनीय दाब (Tactile pressure) जैसे गुणों से लैस है। लिथोग्राफी-मुक्त इस नये सेंसर में नैनो-नीडल संरचना युक्त पॉलीडिमिथाइलसिलोक्सेन (पीडीएमएस) परत का उपयोग किया गया है, जो इसे लचीला और बड़े पैमाने पर निर्माण के लिए उपयुक्त बनाता है। शोधकर्ताओं ने इस कैपेसिटिव टैक्टाइल सेंसर के संवेदी स्तर और हिस्टीरिक्स प्रतिक्रिया की विशेषता बतायी है, और इसकी बदलती प्रतिक्रिया का परीक्षण किया है। उन्होंने लोचदार मा...
भारत के अंदर- बाहर सभी जगह राम का नाम

भारत के अंदर- बाहर सभी जगह राम का नाम

BREAKING NEWS, TOP STORIES, धर्म, सामाजिक
आर.के. सिन्हा भारत के कण-कण में राम बसे हैं। भारत की राम के बिना कल्पना करना ही असंभव है। सारा भारत राम को अपना आराध्य और पूजनीय मानता है। डॉ राम मनोहर लोहिया कहते थे कि भारत के तीन सबसे बड़े पौराणिक नाम – “राम, कृष्ण और शिव ही हैं।” उनके काम के बारे में थोड़ी-बहुत जानकारी प्राय: सभी को, कम से कम दो में एक भारतीय को तो होगी ही। उनके विचार व कर्म, या उन्होंने कौन-से शब्द कब कहे, उसे विस्तारपूर्वक दस में एक तो जानता होगा। कभी सोचिए कि एक दिन में भारत में कितनी बार यहां की जनता प्रभु राम का नाम लेती है।   पर भगवान राम को सिर्फ भारत तक सीमित करना उचित नहीं होगा। वैसे तो  थाईलैंड बौद्ध देश हैं, पर वहां भी राम आराध्य है। राजधानी बैंकॉक से सटा है अयोध्या शहर। वहां के लोगों की मान्यता है कि यहीं थी भगवान श्रीराम की राजधानी। थाईलैंड के बौद्ध मंदिरों में आपक...
बच्चों को बेचने वाला संवेदनहीन समाज

बच्चों को बेचने वाला संवेदनहीन समाज

विश्लेषण, सामाजिक, साहित्य संवाद
ललित गर्ग झारखण्ड में एक बच्चे को जन्म देने के तुरंत बाद कथित रूप से साढ़े चार लाख में बेच दिए जाने की शर्मनाक घटना ने संवेदनहीन होते समाज की त्रासदी को उजागर किया है। जहां इस घटना को मां की संवेदनहीनता और क्रूरता के रूप में देखा जा सकता है, वहीं आजादी के अमृत काल में भी मानव-तस्करी की घिनौनी मानसिकता के पांव पसारने की विकृति को सरकार की नाकामी माना सकता है। सरकार को बच्चों से जुड़े कानूनों पर पुनर्विचार करना चाहिए एवं बच्चों के प्रति घटने वाली ऐसी संवेदनहीनता की घटनाओं पर रोक लगाने की व्यवस्था की जानी चाहिए।झारखण्ड के चतरा में जिस बच्चे को साढ़े चार लाख रुपये में बेचे जाने की खबर आई, उसमें मां के हाथ में एक लाख रुपए आए। बाकी के साढ़े तीन लाख रुपये बिचौलियों या दलालों के हाथ लगे। चूंकि इसकी सूचना पुलिस तक पहुंच गई और समय रहते सक्रियता भी दिखी, इसलिए बच्चे को बरामद कर लिया गया और कई आरो...
श्रीराम हैं अनंत, रामकथा अनंता

श्रीराम हैं अनंत, रामकथा अनंता

Today News, धर्म, सामाजिक
सचमुच श्रीराम न केवल भारत के लिये बल्कि दुनिया के प्रेरक है, पालनहार है। भारत के जन-जन के लिये वे एक संबल हैं, एक समाधान हैं, एक आश्वासन हैं निष्कंटक जीवन का, अंधेरों में उजालों का। भारत की संस्कृति एवं  विशाल आबादी के साथ दर्जनभर देशों के लोगों में यह नाम चेतन-अचेतन अवस्था में समाया हुआ है, इस लोक की थाती श्रीराम हैं और व्याप्ति भी श्रीराम। श्रीराम अनंत हैं तो रामकथा भी अनंता हैं, श्रीराम केवल भारतवासियों या केवल हिन्दुओं के मर्यादा पुरुषोत्तम नहीं हैं, बल्कि बहुत से देशों, जातियों के भी मर्यादा पुरुष हैं जो भारतीय नहीं। रामायण में जो मानवीय मूल्य दृष्टि सामने आई, वह देशकाल की सीमाओं से ऊपर उठ गई। वह उन तत्वों को प्रतिष्ठित करती है, जिन्हें वह केवल पढ़े-लिखे लोगों की चीज न रहकर लोक मानस का अंग बन गई। हिन्दु धर्म शास्त्रों के अनुसार त्रेतायुग में रावण के अत्याचारों को समाप्त करने तथा ...
जान के दुश्मन बनते आवारा कुत्ते

जान के दुश्मन बनते आवारा कुत्ते

TOP STORIES, राज्य, विश्लेषण, सामाजिक
भारत के मीडिया में लगातार ‘आवारा कुत्तों का खतरा’ सुर्खियों में रहता है। पिछले पांच वर्षों से, 300 से अधिक लोग - ज्यादातर गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चे - कुत्तों द्वारा मारे गए हैं। 2017 के एक अध्ययन से पता चला है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेघर कुत्ते भी वन्यजीवों के लिए विनाशकारी हो सकते हैं। इसके बावजूद इन खबरों के प्रति समाज बेसुध बना रहता है। कभी-कभार यह जड़ता कुछ भयावह घटनाओं के साथ टूट जाती है। राज्यों, केंद्र, न्यायपालिका, नगर पालिका और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा इस संकट की स्वीकृति के बावजूद यह समस्या बढ़ती ही जा रही है। -प्रियंका सौरभ कुत्तों का मानव के विकास क्रम के साथ साहचर्य का एक अनूठा संबंध रहा है। यह उनके कल्याण के लिए जिम्मेदार होने की नैतिक दुविधा इंसान के सामने पैदा करता है, लेकिन इसके अपने खतरे भी हैं क्योंकि कुत्तों का विकास भेड़िये और उसकी प्रवृत्ति से जुड़ा ...