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सामाजिक

अतिक्रमण रोधी अभियान की बाधाएं

अतिक्रमण रोधी अभियान की बाधाएं

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बलबीर पुंज हल्द्वानी में रेलवे जमीन अतिक्रमण मामले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में 7 फरवरी को सुनवाई होनी है। पिछली सुनवाई (4 जनवरी) में अतिक्रमण हटाने संबंधित उच्च न्यायालय के निर्णय पर रोक लगा दी गई थी। क्या इसके बाद क्षेत्र में अवैध निर्माण बढ़ने की आशंका है? गत 30 जनवरी को बनभूलपुरा स्थित नए अवैध निर्माणों की जानकारी प्रशासन को मिली। जब वे उसे हटाने पहुंचे, तो लोगों ने उनपर हमला और पथराव कर दिया। जिला प्रशासन द्वारा हाजी मोहम्मद इरशाद, सरफराज अहमद और मोहम्मद सलीम पर नगर-निगम कर्मियों पर हमला, जेसीबी पर पथराव करने, अवैध निर्माणस्थल में खनिज की चोरी करने, तो मोहम्मद गुरफान सहित 200 पर हिंसा हेतु उकसाने का मामला दर्ज करने का निर्देश दे दिया। अदालती निर्देश के बाद प्रशासन ने बनभूलपुरा में अतिक्रमण को लेकर पुन: सीमांकन किया है। इसका उद्देश्य जिला प्रशासन, नगर निगम और रेलवे— तीनों नक्शो...
रामचरित मानस पर विवाद, राजनीतिक फसाद  

रामचरित मानस पर विवाद, राजनीतिक फसाद  

EXCLUSIVE NEWS, राष्ट्रीय, समाचार, सामाजिक
दरअसल आजकल लोग जातिवाद के चलते चौपाई और श्लोकों के गलत अर्थ निकालने लगे हैं। उसके संदर्भ को काटकर वे उसके भाव को नहीं पकड़ते हैं। प्राचीन काल के गुरुकुल में हर जाति और संप्रदाय का व्यक्ति पढ़कर उच्च बनता था। वेदों को लिखने वाले ब्राह्मण नहीं थे। वाल्मीकि रामायण किसी ब्राह्मण ने नहीं लिखी। महाभारत और पुराण लिखने वाले वेद व्यास जी निषाद कन्या सत्यवती के पुत्र थे। रामचरितमानस हिंदुओं के लिए सिर्फ धार्मिक ग्रंथ ही नहीं बल्कि जीवनदर्शन है और संस्कारों से जुड़ा हुआ है। मानस कोई पुस्तक नहीं बल्कि मनुष्य के चरित्र निर्माण का विश्वविद्यालय है और लोगों के कार्य , व्यवहार में इसे स्पष्ट देखा जा सकता है। -डॉ सत्यवान सौरभ जब रामायण में प्रभु श्री राम के बारे में पढ़ते हैं और जो वर्तमान समाज में राम को जातीय, राजनीति के आधार पर बांटते है तो दोनों में जमीन आसमान का फर्क है। राम जैसा कोई नहीं वह सब...
सामाजिक ताने- बाने को कमजोर करती जातिगत कट्टरता

सामाजिक ताने- बाने को कमजोर करती जातिगत कट्टरता

सामाजिक
राजनीतिक लाभ के लिए जातिगत ध्रुवीकरण के अलावा उपरोक्त मांग के पीछे कुछ कारक सक्रिय नजर आते हैं। इस परिदृश्य में, यह कहना गलत नहीं होगा कि सामाजिक आर्थिक समानता लाने के उद्देश्य से की गई सकारात्मक कार्रवाई सत्ता हथियाने के एक उपकरण के रूप में अधिक हो गई है। जाति ने लोकतांत्रिक राजनीति के संगठन के लिए व्यापक आधार प्रदान किया। जातिगत पहचान और एकजुटता प्राथमिक चैनल बन गए जिसके माध्यम से चुनावी और राजनीतिक समर्थन जुटाया जाता है। राजनीतिक दलों को अपील करके जाति समुदाय के किसी सदस्य से सीधे समर्थन जुटाना आसान लगता है।  -डॉ सत्यवान सौरभ जाति आधारित आंदोलन मूल रूप से सामाजिक परिवर्तन के उद्देश्य से एक सामाजिक क्रांति है, जो सदियों पुराने पदानुक्रमित भारतीय समाज की जगह लेती है, और यह स्वतंत्रता, समानता और सामाजिक न्याय के लोकतांत्रिक आदर्शों पर आधारित है। भारत में जाति आधारित आंदोलनो...
कम उम्र की शादियों का नुकसान

कम उम्र की शादियों का नुकसान

TOP STORIES, सामाजिक
डॉ. वेदप्रताप वैदिक भारत में कन्याओं की शादी 18 साल से कम उम्र में करना जुर्म है। गैर-कानूनी है लेकिन इस कानून की कौन परवाह करता है? हिंदू, मुसलमान, ईसाई, आदिवासी, अगड़े-पिछड़े सभी इस जुर्म में शामिल होते हैं। हमारे देश में तो कई दुधमुंहे बच्चों की भी शादी करवा दी जाती थी। भारत में हर साल लगभग 15 लाख अवयस्क लड़कियों की शादी करवा दी जाती है। यह आंकड़ा तो अंतरराष्ट्रीय संस्था ‘युनिसेफ’ का है लेकिन यह विदेशी संस्था सभी ऐसी अवैध शादियों का ठीक से पता लगा पाती होगी, इसमें मुझे संदेह हैं। 2006 के बाल विवाह विरोधी कानून के मुताबिक अकेले असम प्रांत में इस बार 1800 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन शादियों को अवैध भी घोषित कर दिया गया है। अकेले असम में पिछले 10 दिन में ऐसी कम उम्र की 4000 शादियों के विरुद्ध पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की हैं। ज़रा सोचिए कि यदि पुलिस थोड़ी और सक्रिय हो जाए तो क्या लाख...
समाज विरोधी नैरेटिव

समाज विरोधी नैरेटिव

TOP STORIES, सामाजिक
मीडिया और राजनेता कैसे समाज विरोधी नैरेटिव सेट करते हैं इसे Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) के परम पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवतजी के हालिया बयान और उसकी व्याख्या से समझा जा सकता है। “सत्य यह है कि मैं सब प्राणियों में हूँ इसलिए रूप नाम कुछ भी हो लेकिन योग्यता एक है, मान सम्मान एक है, सबके बारे में अपनापन हैं। कोई भी ऊँचा नीचा नहीं है। शास्त्रों का आधार लेकर पंडित (विद्वान) लोग जो (जाति आधारित ऊँच-नीच की बात) कहते हैं वह झूठ है- डॉ. मोहन भागवतजी” अब इसकी व्याख्या ऐसे कि कई मानो सरसंघचालक ब्राह्मण विरोधी हों। इसी संदर्भ में पंडित और विद्वान की जो व्याख्या है उसे प्रस्तुत कर रहा हूँ ताकि सनद रहे कि जो कहा उसे विकृत करके समाज में कैसे विभेद डालने का प्रयास किया जा रहा है। “पंडित” नाम का अर्थ विद्वता होता है। किसी विशेष ज्ञान में पारंगत होने वाले को ही पंडित कहते हैं। पंडित क...
“पर्सनल लॉ” की 15 परेशानियाँ

“पर्सनल लॉ” की 15 परेशानियाँ

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*1. मुस्लिम पर्सनल लॉ में बहु-विवाह करने की छूट है लेकिन अन्य धर्मो में 'एक पति-एक पत्नी' का नियम बहुत कड़ाई से लागू है। बाझपन या नपुंसकता जैसा उचित और व्यावहारिक कारण होने पर भी हिंदू ईसाई पारसी के लिए दूसरा विवाह करना एक गंभीर अपराध है और भारतीय दंड संहिता की धारा 494 में बहुविवाह के लिए 7 वर्ष की सजा का प्रावधान है इसीलिए कई लोग दूसरा विवाह करने के लिए मुस्लिम धर्म अपना लेते हैं. भारत जैसे सेक्युलर देश में मौज मस्ती के लिए भी चार निकाह जायज है जबकि इस्लामिक देश पाकिस्तान में पहली बीवी की इजाजत के बिना शौहर दूसरा निकाह नहीं कर सकता हैं. मानव इतिहास में 'एक पति - एक पत्नी' का नियम सर्वप्रथम भगवान श्रीराम ने लागू किया था और यह किसी भी प्रकार से धार्मिक या मजहबी विषय नहीं बल्कि "सिविल राइट, ह्यूमन राइट, जेंडर जस्टिस, जेंडर इक्वालिटी और राइट टू डिग्निटी" का मामला है इसलिए यह जेंडर न्यूट...
आरक्षण से 75 साल में नहीं बल्कि 7500 साल में भी सबको समान अवसर नहीं मिलेगा

आरक्षण से 75 साल में नहीं बल्कि 7500 साल में भी सबको समान अवसर नहीं मिलेगा

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*सबको समान अवसर उपलब्ध कराना है तो 12वीं तक समान शिक्षा (एक देश एक शिक्षा बोर्ड और एक देश एक पाठ्यक्रम) लागू करिए* *बंगाल का युवा बंगाली में पढ़े और गुजरात का युवा गुजराती में लेकिन सिलेबस समान होना चाहिए* *स्कूल माफियाओं के दबाव में 12वीं तक एक देश एक शिक्षा बोर्ड लागू नहीं हुआ* *कोचिंग माफियाओं के दबाव में 12वीं तक एक देश एक पाठ्यक्रम लागू नहीं हुआ* *किताब माफियाओं के दबाव में हिंदी अंग्रेजी संस्कृत गणित भौतिक विज्ञान रसायन रसायन जीव विज्ञान वनस्पति विज्ञान की एक किताब लागू नहीं हुई* *समान शिक्षा बिना समता-समरसता मूलक समाज की स्थापना नामुमकिन है* *वर्तमान समय में स्कूलों की पांच कैटेगरी है और किताब भी पांच प्रकार की है। आर्थिक रूप से कमजोर और गरीबी रेखा से नीचे के बच्चों की किताब और सिलेबस अलग है, निम्न आय वर्ग के बच्चों की किताब और सिलेबस अलग है, मध्यम आय वर्ग के ...
मुसलमानों को मुसलमान मार रहे

मुसलमानों को मुसलमान मार रहे

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक पाकिस्तान के शहर पेशावर में हुए विस्फोट ने पूरे देश और सरकार को हिलाकर रख दिया है। शाहबाज़ सरकार आर्थिक संकट से पहले ही जूझ रही है, अब इस विस्फोट ने जले पर नमक छिड़क दिया है। इस विस्फोट में हताहतों की संख्या बढ़ती जा रही है। लगभग 100 लोग तो मर चुके हैं और डेढ़ सौ लोग बुरी तरह से घायल हो गए हैं। यह विस्फोट भी कहां हुआ है? पेशावर की एक मस्जिद में। और वह किस वक्त हुआ है? दोपहर की नमाज के वक्त! दूसरे शब्दों में तहरीके-तालिबान के आतंकवादियों ने इस्लाम का भी अपमान कर दिया है। वे लोग अपने को कट्टर इस्लामी कहते हैं और उन्होंने मस्जिद में ही विस्फोट करवा दिया। इस्लामी राष्ट्र होने का दावा करनेवाला पाकिस्तान इस घटना से कोई सबक सीखेगा या नहीं? उसने आतंकवाद को इसलिए बढ़ावा दिया कि वह भारत से कश्मीर छीन सकेगा। उसने भारत से लड़े युद्धों में विफल होने के बाद आतंकवाद को ही अपना...
सपा व राजद की शिकायत चुनाव आयोग से करेंगे: विहिप

सपा व राजद की शिकायत चुनाव आयोग से करेंगे: विहिप

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VHP to meet CEC for de-recognising SP & RJD Shri Alok Kumar, Central Working President of the Vishva Hindu Parishad has sought an appointment with the Chief Election Commissioner of India to request that the registration of the Samajwadi Party (SP) and Rashtriya Janta Dal (RJD) be cancelled. The VHP wishes to draw the attention of the CEC to Section 29A of the Representation of the People Act 1951 which requires that the memorandum of each registered political party to have a specific provision that the party shall bear true faith and allegiance including to the principles of secularism and democracy. The recent statements of Shri Swami Prasad Maurya of SP disparaging the Ramcharitmanas and the burning of its pages are deliberate and malicious acts of outraging the religious ...
आसमान की यात्राओं के अराजक होने की त्रासदी

आसमान की यात्राओं के अराजक होने की त्रासदी

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-ः ललित गर्ग:-आज देश ही नहीं, दुनिया में व्यक्ति हिंसक एवं अराजक होता जा रहा है। हिंसा का बढ़ता प्रभाव मानवीय चेतना से खिलवाड़ करता है और व्यक्ति स्वयं को निरीह अनुभव करता है। इन स्थितियों में संवेदनहीनता बढ़ जाती है और जिन्दगी सिसकती हुई प्रतीत होती है। ऐसी स्थितियों का बढ़ना गहन चिन्ता का विषय है। यह चिन्ता तब ज्यादा बढ़ जाती है एवं परेशान करती है जब अति संवेदनशील हवाई यात्रा के दौरान ऐसी घटनाएं देखने को मिलती है। शराब के नशे में उद्दण्डता करना, किसी पर थूक देना, किसी पर पेशाब कर देना या किसी को थप्पड मार देने जैसी घटनाएं हवाई सफर के दौरान होना विमान अधिनियमों का उल्लंघन होने के साथ-साथ हवाई सफर को खतरे में डालना है। सोमवार को अबू धाबी से मुंबई के लिए चले एक विमान में ऐसी ही अराजक स्थितियां उत्पन्न हुई, जब चालक दल के सदस्यों की ओर से अनधिकृत गतिविधि से रोके जाने पर एक महिला यात्री ने एक...