Shadow

सामाजिक

बादशाह अकबर का असीरगढ़ पर धोखे से कब्जा

बादशाह अकबर का असीरगढ़ पर धोखे से कब्जा

TOP STORIES, सामाजिक
खून-खराबा, लूट सप्ताह भर चला रमेश शर्मा बचपन की पाठ्यपुस्तकों में मुगल बादशाह अकबर को महान पढ़ा था । उन पुस्तकों में कुछ उदाहरण भी थे । इस कारण अकबर को और समझने की जिज्ञासा सदैव बनी रही । आगे चलकर उनकी महानता की अनेक कहानियाँ भी पढ़ी । हो सकता है वे सारी घटनाएं सही हों । पर अकबर के अधिकाँश सैन्य अभियान धोखे और चालाकियों से भरे हैं । भारत में अकबर के जितने सैन्य विजय हुईं । वे अकबर के शौर्य और सैन्य बल से कम अपितु कूटनीति, फूट डालकर, परिवार जनों को तोड़कर या किसी भेदिये को किले में भेजकर दरबाजा खुलवाने की युक्ति से भरीं हैं । उनमें एक है मध्यप्रदेश में सतपुड़ा के शिखर पर बने असीरगढ के किले पर अकबर महान के कब्जे का विवरण, जो उन्होंने धोखे से किया था । कब्जे के बाद किले में लूट और हत्याकांड का सिलसिला एक सप्ताह तक चला ।अकबर महान ने यह धोखा असीरगढ के सूबेदार बहादुर शाह फारुकी के साथ किय...
भारत में उपभोग की असमानता पिछले 40 वर्ष के सबसे निचले स्तर पर

भारत में उपभोग की असमानता पिछले 40 वर्ष के सबसे निचले स्तर पर

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, समाचार, सामाजिक
किसी भी देश की आर्थिक नीतियां सफल हो रही हैं, इसका एक पैमाना यह भी हो सकता है कि क्या समाज में अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक इन आर्थिक नीतियों का लाभ पहुंच रहा है? भारत में हाल ही के समय में इस संदर्भ में कुछ विशेष प्रयास किए गए हैं और यह प्रयास एक तरह से प्राचीन भारत में लागू की गई आर्थिक नीतियों की झलक दिखलाते नजर आ रहे हैं। भारत में अर्थ से सम्बंधित प्राचीन ग्रंथों, आध्यात्मिक ग्रंथों सहित, में यह कहा गया है कि यह राजा का कर्तव्य है कि वह अपनी प्रजा की अर्थ से सम्बंधित समस्याओं का हल खोजने का प्रयास करे। पंडित श्री दीनदयाल उपाध्याय जी ने भी एक बार कहा था कि किसी भी राजनैतिक दल के लिए केवल राजनैतिक सत्ता हासिल करना अंतिम लक्ष्य नहीं होना चाहिए बल्कि यह एक माध्यम बनना चाहिए इस बात के लिए कि देश के गरीब से गरीब व्यक्ति तक आर्थिक विकास का लाभ पहुंचाया जा सके। सामान्यतः विभिन्न देशों ...
अमेरिका हिंसामुक्त कैसे हो?

अमेरिका हिंसामुक्त कैसे हो?

TOP STORIES, सामाजिक
डॉ. वेदप्रताप वैदिक अमेरिका दुनिया का सबसे संपन्न और शक्तिशाली देश है लेकिन यह भी सच है कि व​ह सबसे बड़ा हिंसक देश भी है। जितनी हिंसा अमेरिका में होती है, दुनिया के किसी देश में नहीं होती। वैसे तो अमेरिका में ईसाई धर्म को माननेवालों की संख्या सबसे ज्यादा है लेकिन क्या वजह है कि ईसा की अहिंसा का वहां कोई खास प्रभाव दिखाई नहीं पड़ता। अभी-अभी लाॅस एंजिलिस के एक कस्बे में एक बंदूकची ने कहर ढा दिया। 60 हजार लोगों के इस कस्बे में एशियाई मूल के लोग बहुतायत में हैं, खास तौर से चीनी लोग। वे चीनी नव वर्ष का उत्सव मना रहे थे और उसी समय एक बंदूकची ने 10 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। कई लोग घायल भी हो गए। यह इस नए साल की पहली घटना नहीं है। ऐसी घटनाएं आए दिन अमेरिका में होती रहती हैं। पिछले साल बंदूक की गोलियां खाकर 40 हजार लोगों ने अपने प्राणों से हाथ धोए हैं। क्या इतनी हत्याएं किसी और मुल्क में क...
नये भारत को आकार देने के संकल्पों का गणतंत्र

नये भारत को आकार देने के संकल्पों का गणतंत्र

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
-ललित गर्ग- गणतंत्र दिवस हमारा राष्ट्रीय पर्व है, इसी दिन 26 जनवरी, 1950 को हमारी संसद ने भारतीय संविधान को पास किया। इस दिन भारत ने खुद को संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया। तेहत्तर वर्षों में हमारा गणतंत्र कितनी ही कंटीली झाड़ियों में फँसा रहा। लेकिन अब इन राष्ट्रीय पर्वों को मनाते हुए संप्रभुता का अहसास होने लगा है। गणतंत्र का जश्न सामने हैं, जिसमें कुछ कर गुजरने की तमन्ना भी है तो अब तक कुछ न कर पाने की बेचैनी भी है। हमारी जागती आंखो से देखे गये स्वप्नों को आकार देने का विश्वास है तो जीवन मूल्यों को सुरक्षित करने एवं नया भारत निर्मित करने की तीव्र तैयारी है। अब होने लगा है हमारी स्व-चेतना, राष्ट्रीयता एवं स्व-पहचान का अहसास। जिसमें आकार लेते वैयक्तिक, सामुदायिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, राष्ट्रीय एवं वैश्विक अर्थ की सुनहरी छटाएं हैं।राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस हमारी ...
भारत में विदेशी शिक्षण संस्थान नफ़ा या नुकसान

भारत में विदेशी शिक्षण संस्थान नफ़ा या नुकसान

BREAKING NEWS, TOP STORIES, सामाजिक
विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर स्थापित करने की अनुमति देने का सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का निर्णय एक स्वागत योग्य कदम है। यह पहल न केवल हमारे छात्रों को वैश्विक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच प्रदान करेगी बल्कि संस्थानों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी पैदा करेगी। लेकिन नया नियम विदेशी संस्था को मुक्त खेल की अनुमति देता है, और उन्हें अधिक स्वतंत्रता दी जाती है, जो भारतीय संस्थान को नहीं दी जाती है "उदाहरण के लिए, वे अपनी फीस, प्रवेश मानदंड तय कर सकते हैं, और संकाय नियुक्तियों में पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त कर सकते हैं। “नीति भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली को नुकसान, कमजोर और नष्ट कर देगी, जिससे व्यवसायीकरण हो जाएगा। -प्रियंका सौरभ विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर स्थापित करने की अनुमति देने का सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का निर्णय एक स्वागत योग्य कदम है। यह ...
केंद्र और राज्य सरकार के बीच पिसता आम आदमी

केंद्र और राज्य सरकार के बीच पिसता आम आदमी

विश्लेषण, सामाजिक
एक दशक से देश की सियासत में एक तरह की राजनीति कुछ अलग ही तरीके से चल पड़ी है, जिसके चलते छोटे-छोटे मामलों पर बड़े-बड़े पदों पर बैठे लोगों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। केंद्र से अलग पार्टी की सरकार वाले राज्यों  के पास अक्सर इस बात का रोना रहता है कि फलाँ-फलाँ काम यहाँ अटका पड़ा है। क्योंकि केंद्र में अलग पार्टी  की सरकार है। इसलिए काम की फाइल अटकना तो बहाना है, उसके पीछे की सियासत कुछ और ही है।  कुल मिलाकर निष्कर्ष यही निकलता है कि केंद्र और राज्य में अलग अलग पार्टी की सरकार होने के मायने विकास में असंतुलन और प्रचार की रस्साकसी है| इनके बीच खड़ा वोटर यानि की आम आदमी केंद्रीय और राज्य के संघीय ढांचे में काम के बटवारे से होने वाले नुकसान का भुगतभोगी है| -प्रियंका सौरभ संघवाद सरकार की एक प्रणाली है जिसमें शक्तियों को केंद्र और उसके घटक भागों जैसे राज्यों या प्रांतों ...
आपदा जोखिम की जड़ें कहीं? अंकुर कहीं।

आपदा जोखिम की जड़ें कहीं? अंकुर कहीं।

TOP STORIES, सामाजिक
अनियंत्रित शहरीकरण, भूकंपीय क्षेत्रों में निर्माण, तेजी से कटाव की गतिविधि ने इस क्षेत्र में गंभीर बाढ़ ला दी है। सरकार को इस प्रक्रिया को समाप्त करने के लिए कार्यप्रणाली विकसित करने की आवश्यकता है। नदियों को आपस में जोड़ने जैसी पहलों का स्वागत किया जाता है और इन्हें पूरी गति से आगे बढ़ाने की जरूरत है। ड्रेनेज सिस्टम को उचित और शहरी आवास योजनाओं के अनुरूप होना चाहिए। तैयारियों के संदर्भ में, मौसम पूर्वानुमान को मजबूत और टिकाऊ बनाए जाने की जरूरत है, विकास की पहल को और प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। आपदाओं की अनिश्चितता और तत्परता को ध्यान में रखते हुए, लचीलेपन को मजबूत करने के लिए तंत्र बनाने की तत्काल आवश्यकता है। बेशक सरकार इस दिशा में काम कर रही है लेकिन सामुदायिक भागीदारी की भी आवश्यकता है। -प्रियंका सौरभ प्राकृतिक आपदाएँ एक प्रमुख कारण हैं जो किसी राष्ट्र के जीवन और संपत्ति पर...
गंभीर घाव वाली टीवी बहसों पर रोक जरूरी

गंभीर घाव वाली टीवी बहसों पर रोक जरूरी

विश्लेषण, सामाजिक
 ललित गर्ग  समाज एवं राष्ट्र-निर्माण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाला मीडिया विशेषतः इलेक्ट्रोनिक मीडिया आजकल बहस के ऐसे अखाडे़ बन गये हैं, जहां राष्ट्र-विरोधी, नफरत एवं द्वेषभरी चर्चाओं ने समाज एवं राष्ट्र में जहर घोलने का काम किया है। युगयात्रा की आवाज बनने वाले टेलीविजन चैनलों का प्रभाव जैसे-जैसे बढ़ा है, वैसे-वैसे इस जिम्मेदारी को लेकर कोताही, लापरवाही एवं गैर-जिम्मेदाराने रवैये बढ़े हैं और अपने चैनल को अधिक आक्रामक बनाने के चलते बहसों का स्तर दिन-ब-दिन गिरता जा रहा है। यह एक राष्ट्रीय चिन्ता का विषय बन रहा है, सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे टीवी चैनलों के काम करने के तरीकों लेकर गहरी एवं गंभीर चिंता जताई और कहा कि घृणा भाषण एक खतरा बन गया है, उसे रोकना होगा। निश्चित ही मन की भड़ास निकालने, टीआरपी के लिए समाज में विभाजनकारी और हिंसक प्रवृत्ति पैदा करने वाले इन मंचों को नियंत्रित किया ज...
जीवन के संध्यकाल में बुजुर्गों की न हो अनदेखी

जीवन के संध्यकाल में बुजुर्गों की न हो अनदेखी

सामाजिक
आर.के. सिन्हा राजधानी दिल्ली का पॉश ग्रेटर कैलाश इलाका।  यहां समाज के सबसे सफल, असरदार और धनी समझे जाने वाले लोग ही रहते हैं। बड़ी-बड़ी कोठियों के उनके अंदर-बाहर लक्जरी कारें खड़ी होती हैं। लगता है, मानो इधर किसी को कोई कष्ट या परेशानी नहीं है। पर यह पूरा सच नहीं है। अभी हाल ही में यहां के एक बुजुर्गों के बसेरे, जिसे वृद्धाश्रम या “एज ओल्ड होम” भी कहते हैं, में आग लगने के कारण क्रमश: 86 और 92 वर्षों के दो वयोवद्ध नागरिकों की जान चली गई। जरा सोचिए, कि इस कड़ाके की सर्दी में उन्होंने कितने कष्ट में प्राण त्यागे होंगे। इस वृद्धाश्रम में रहने वाले हरेक व्यक्ति को हर माह सवा लाख रुपये से अधिक देना होता है। यानी यहां पर सिर्फ धनी-सम्पन्न परिवारों के बुजुर्गों को ही रख सकते हैं। अफसोस कि इन बुजुर्गों को इनके घर वालों ने इनके जीवन के संध्याकाल ...
राष्ट्रपति छह श्रेणियों में असाधारण उपलब्धि हासिल करने वाले 11 बच्चों को कल प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2023 प्रदान करेंगी

राष्ट्रपति छह श्रेणियों में असाधारण उपलब्धि हासिल करने वाले 11 बच्चों को कल प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2023 प्रदान करेंगी

BREAKING NEWS, Today News, समाचार, सामाजिक
राष्ट्रपति छह श्रेणियों में असाधारण उपलब्धि हासिल करने वाले 11 बच्चों को कल प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2023 प्रदान करेंगी राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू कल यानी 23 जनवरी, 2023 को विज्ञान भवन में पुरस्कार वितरण समारोह में 11 असाधारण बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार, 2023 प्रदान करेंगी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 24 जनवरी, 2023 को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेताओं के साथ बातचीत करेंगे। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी 24 जनवरी, 2023 को राज्य मंत्री डॉ.&nbs...