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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी की माता जी 100 वर्ष की उम्र में निधन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी की माता जी 100 वर्ष की उम्र में निधन

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मोदी जी की अपनी माँ को श्रद्धांजलि - शानदार शताब्दी का ईश्वर चरणों में विराम… मां में मैंने हमेशा उस त्रिमूर्ति की अनुभूति की है, जिसमें एक तपस्वी की यात्रा, निष्काम कर्मयोगी का प्रतीक और मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध जीवन समाहित रहा है। मैं जब उनसे 100वें जन्मदिन पर मिला तो उन्होंने एक बात कही थी, जो हमेशा याद रहती है कि કામ કરો બુદ્ધિથી, જીવન જીવો શુદ્ધિથી यानि काम करो बुद्धि से और जीवन जियो शुद्धि से। ...
महंगा दूध : कारण का निवारण  नहीं

महंगा दूध : कारण का निवारण  नहीं

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, सामाजिक
 -राकेश  दुबे कितना अजीब है, जिस देश में वर्ष 1970 के दशक में हुई श्वेत क्रांति के बाद से ही देश में डेरी क्षेत्र में मजबूत और ऊंची वृद्धि देखने को मिलती रही है, अब दूध के भाव अंधाधुध तरीके से बढ़ रहे हैं | देश में दूध का उत्पादन अब मुश्किल दौर से गुजरता नजर आ रहा है। इस मुश्किल की  तह में पशु आहार तथा चारे की कम आपूर्ति एवं ऊंची लागत की वजह से पैदा हुई हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और प्रदेशों  में कई बड़ी दुग्ध सहकारी समितियों तथा निजी डेरी कंपनियों द्वारा इस वर्ष दूध की कीमतों में कई बार  की गई मूल्य वृद्धि इस संकटके और बढने  स्पष्ट संकेत दे रहा  है। इससे बड़ी और बुरी बात यह है कि यह बढ़ोतरी मॉनसून सीजन के बाद हो रही है जब दूध की आपूर्ति बहुत अधिक होती है और डेरी कंपनियां दूध पाउडर, मक्खन तथा अन्य दुग्ध उत्पादों का भंडार तैयार करती ह...
सभ्य समाज में जीवन से हार मानते लोगों का बढ़ना

सभ्य समाज में जीवन से हार मानते लोगों का बढ़ना

विश्लेषण, सामाजिक
 -ललित गर्ग- महज 20 वर्ष की उम्र में मशहूर टीवी एक्ट्रेस तनीषा शर्मा ने अपने सीरियल की शूटिंग के सेट पर फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। इसी तरह पिछले कुछ सालों में बालीवुड या टेलीविजन में अभिनय की दुनिया में अपनी अच्छी पहचान बनाने वाले सुशांत सिंह राजपूत, वैशाली ठक्कर, आसिफ बसरा और कुशल पंजाबी से लेकर परीक्षा मेहता जैसे अनेक कलाकारों ने आत्महत्या की। प्रश्न है कि इन स्थापित कलाकारों ने आत्महत्या क्यों की? आखिर मनोरंजन की दुनिया में अचानक आत्महत्या कर लेने की घटनाएं क्यों बढ़ रही है? निश्चित रूप से खुदकुशी सबसे तकलीफदेह हालात के सामने हार जाने का नतीजा होती है और ऐसा फैसला करने वालों के भीतर वंचना का अहसास, उससे उपजे तनाव, दबाव और दुख का अंदाजा लगा पाना दूसरों के लिए मुमकिन नहीं है। आत्महत्या शब्द जीवन से पलायन का डरावना सत्य है जो दिल को दहलाता है, डराता है, खौफ पैदा करता है, दर्द देता ...
संसद के शीतकालीन अधिवेशन में तीन आवश्यक संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश संशोधन विधेयक पारित

संसद के शीतकालीन अधिवेशन में तीन आवश्यक संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश संशोधन विधेयक पारित

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
महत्‍वपूर्ण बिंदु : संसद द्वारा पारित किए गए  : उत्तर प्रदेश के संबंध में, संविधान (अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां) आदेश (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2022 तमिलनाडु के संबंध में, संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (दूसरा संशोधन) बिल, 2022 कर्नाटक के संबंध में, संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (चौथा संशोधन) बिल, 2022 संसद के शीतकालीन अधिवेशन में तीन आवश्यक संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश संशोधन विधेयक पारित किए गए। तमिलनाडु राज्य के संबंध में, संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2022, राज्यसभा में 22.12.2022 को सर्वसम्मति से पारित किया गया। संसद में पारित होने के बाद यह विधेयक तमिलनाडु में अनुसूचित जनजातियों की सूची में नारिकोरवन और कुरीविकरण समुदायों को शामिल करेगा। यह विधेयक पहले 15.12.2022 को लोकसभा द्वारा पारित किया गया था। ...
गर्भस्थ शिशु और माता की चिकित्सीय देखभाल के लिए नया ऐप

गर्भस्थ शिशु और माता की चिकित्सीय देखभाल के लिए नया ऐप

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भारतीय शोधकर्ताओं ने गर्भस्थ शिशु और गर्भवती महिलाओं की चिकित्सीय देखभाल के लिए ‘स्वस्थगर्भ’ नामक नया मोबाइल ऐप विकसित किया है। यह ऐप दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जिनके लिए डॉक्टर तक पहुँचना कठिन होता है। यह गर्भावस्था के लिए विशेष रूप से विकसित किया गया ऐप है, जो चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित होने के साथ-साथ विश्वसनीय भी है। इसकी मदद से डॉक्टरों तक तुरंत ऑनलाइन पहुँचा जा सकता है, और चिकित्सीय सलाह प्राप्त की जा सकती है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के शोधकर्ताओं ने मिलकर यह मोबाइल ऐप विकसित किया है। मरीज और डॉक्टर दोनों ‘स्वस्थगर्भ’ मोबाइल ऐप का निशुल्क लाभ उठा सकते हैं। यह ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। ‘स्वस्थगर्भ’ चिकित्सीय जटिलताओं को कम करने और गर्भावस्था के दौरान के त...
भारतभूमि

भारतभूमि

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
दिल्ली में रहते हुए और लगभग तीन दशकों तक कभी कभार ही इधर उधर की यात्रा करते हुए मैं‌ इस भूमि से लगभग कटा रहा। किन्तु भारत के बड़े शहर इस भूमि को समझने का माध्यम-स्थल हो सकते हैं। दृष्टि होनी चाहिए। यहां के महानगर न्यूयॉर्क जैसे महानगर नहीं हैं। न्यूयॉर्क में अमीरी गरीबी की खाई है किन्तु सांस्कृतिक फांक नहीं है। यहां एक बड़ी सांस्कृतिक फांक है। सहजता से दृश्य भी। यहां सभ्यता और संस्कृति ग्राम्य जीवन के साथ प्रवहमान है। वह बड़े महानगरों में भी ग्राम्य चरित्र के साथ भासित होती है। मैंने इस महानगर में अतिसाधारण मनुष्यों के बीच होते हुए यह अनुभव किया है कि आधुनिकता ने हमें लीला नहीं है।‌ बल्कि भारतीयता यहां भाषा में अनुस्वार और अन्य वर्णों की तरह अनिवार्यत: उपस्थित है। किसी बुझते हुए घूरे को देखकर हम मान लेते हैं कि यह ठंडा पड़ चुका है।‌किन्तु जरा सा कुरेदने पर राख के नीचे से लहकती काष्...
विश्व शांति के लिए जरूरी है हिन्दुत्व : सुनील आंबेकर

विश्व शांति के लिए जरूरी है हिन्दुत्व : सुनील आंबेकर

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डॉ. इन्दु‍शेखर तत्पुरुष की पुस्तक 'हिन्दुत्व: एक विमर्श' का विमोचन प्रख्यात कवि, आलोचक एवं संपादक डॉ. इन्दु‍शेखर तत्पुरुष की पुस्तक 'हिन्दुत्व: एक विमर्श' का विमोचन करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री सुनील आंबेकर ने कहा कि विश्व शांति के लिए हिन्दुत्व बेहद जरूरी है। आधुनिक समय में हिन्दुत्व के नियमों को भूलने का परिणाम हम जीवन के हर क्षेत्र में महसूस करते हैं। इस अवसर पर भारतीय जन संचार संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी एवं पांचजन्य के संपादक श्री हितेश शंकर विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता एकात्म मानवदर्शन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ. महेश चंद्र शर्मा ने की। संचालन दिल्ली विश्वविद्यालय में वरिष्ठ आचार्या प्रो. कुमुद शर्मा ने किया। श्री आंबेकर ने कहा कि हिन्दुत्व का मूल तत्व एकत्व की...
शहादत के दांव और पूंछ पर बंधा कफन 

शहादत के दांव और पूंछ पर बंधा कफन 

सामाजिक
                                              हेमंत मुक्तिबोध कुत्ते दहशत में हैं । देश के प्रति उनकी वफादारी पर सवाल उठाए जा रहे हैं । सड़क से संसद तक उन्हें शक की निगाह से देखा जा रहा है । कुत्ता समुदाय में भयंकर रोष है। आक्रोश व्याप्त है । वो आहत भी  है और उदास भी । उसे सत्ता की राजनीति में आखेट बनाया जा रहा है।  एक राजनीतिक दल के बड़े नेता ने दूसरे दल पर अपने कुत्तों को शहादत के पुण्यलाभ से वंचित  रखने का इल्जाम लगा दिया है । कुत्ते इस नस्लीय भेदभाव से भी आहत हैं कि वफादारी की गौरवशाली परंपरा के बावजूद न सिर्फ उन पर संदेह किया जा रहा है बल्कि शहादत की अपेक्षा भी सिर्फ कुत्तों से ही की जा रही है और पार्टियों  के घोड़ों, गधों और खच्चरों को बख्श दिया गया है ।  सभी दलों के कुत्तों की जान सांसत में है । पॉलिटिकल डैमेज कंट्रोल के चक्कर में न जाने किसे कब फरमान मि...
अपने दोस्तों को करीब और दुश्मनों को और भी ज़्यादा करीब रखें।”

अपने दोस्तों को करीब और दुश्मनों को और भी ज़्यादा करीब रखें।”

BREAKING NEWS, सामाजिक
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देखिये ! आत्महत्या करते देश के भविष्य को

देखिये ! आत्महत्या करते देश के भविष्य को

TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
निश्चित ही यह आंकड़े ह्रदय विदारक है | भारत में दुर्घटनावश एवं आत्महत्या में करने वाले लोगों की राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो रिपोर्ट-2021सामने है | यूँ तो यह रिपोर्ट इस साल अगस्त में जारी हुई है। जो यह दर्शाती है कि पिछले साल देश भर में 13000 से अधिक छात्रों ने जान दी है। वास्तव में, 2016-2021 के दौरान छात्र-आत्महत्या के मामलों में 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 1832 मौतों के साथ महाराष्ट्र सूची में सबसे ऊपर है, इसके बाद मध्य प्रदेश (1,308) तमिलनाडु (1246) आते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच सालों में छात्र आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।अफ़सोस सरकारें दुःख व्यक्त करने से अधिक कुछ भी नहीं कर रहीं हैं | हाल ही में राजस्थान के कोटा में दाखिला परीक्षा की तैयारी कर रहे तीन किशोर छात्रों द्वारा की गई आत्महत्या ने पूरे देश को सकते में डाल दिया। उनमें दो, अंकुश और उज्ज्वल बिहार से थे और...