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सामाजिक

शांति के शत्रुओं से सतर्कता जरूरी*

शांति के शत्रुओं से सतर्कता जरूरी*

सामाजिक
शांति के शत्रुओं से सतर्कता जरूरी*_- बलबीर पुंज_ क्या उत्तरप्रदेश के खिलाफ कोई षड़यंत्र रचा जा रहा है? क्या यह प्रदेश के विकास पथ को अवरुद्ध करके उसे सांप्रदायिक हिंसा की लपटों में झोंकने की साजिश है? हाल ही कुछ घटनाएं, जो सतह पर अलग-अलग दिखती है, परंतु उन्हें एक अदृश्य सूत्र आपस में जोड़ता है। अभी 2 नवंबर को शाहजहांपुर में क्या हुआ? यहां मस्जिद में घुसकर कुरान जलाने के प्रकरण से क्षेत्र में तनाव बढ़ गया। अपमान की सूचना मिलते ही सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम जुटे और उन्होंने भाजपा के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करते हुए आगजनी शुरू कर दी। माहौल बिगड़ता देख पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने हेतु लाठीचार्ज कर दिया। जब घटनास्थल के निकट लगे एक सीसीटीवी को खंगाला गया, तो खुलासा हुआ कि इस 'ईशनिंदा' का अपराधी ताज मोहम्मद है, जिसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसने ऐसा क्यों किया, इसपर मोहम्मद ने कहा, "मैंने नह...
वनवासी समाज को तोड़ने के पीछे

वनवासी समाज को तोड़ने के पीछे

सामाजिक
अंग्रेजों का भारत को शक्ति, संपदा और शिक्षा पर अधिकार करने का षड्यंत्र --रमेश शर्मा भारत में वनवासी या आज की भाषा में जनजाति समाज अलग है और ग्राम्य या नगरीय समाज अलग, यह अभियान पहले अंग्रेजों ने चलाया था अब वामपंथी चला रहे हैं। अंग्रेज ऐसा करके भारत की संपदा, शिक्षा और शक्ति पर पर अपना अधिकार करना चाहते थे, अपनी सत्ता को सशक्त करना चाहते थे । अब इसी रास्ते पर वामपंथी चल रहे हैं। उन्हे भी अपने राजनैतिक पकड़ बनाने के लिये यही मार्ग सूझा । हमें यदि भारत को उसके अतीत की प्रतिष्ठा के अनुरूप स्वर्णिम भविष्य का निर्माण करना है तो षड्यंत्र को समझना होगा ।अंग्रेजों को यह समझने में कठिनाई नहीं हुई कि "विश्व गुरु" और "सोने की चिड़िया" के रूप में भारत की छवि का आधार वन शक्ति है वन सम्पदा और वन्य समाज दोनों । भारत में शिक्षा, चिकित्सा, वैज्ञानिक अनुसंधान, सैन्य अभ्यास का केन्द्र वनों में ही होता...
आर्थिक क्षेत्र में भी राष्ट्रीयता का भाव होना आवश्यक

आर्थिक क्षेत्र में भी राष्ट्रीयता का भाव होना आवश्यक

आर्थिक, सामाजिक
युगदृष्टा एवं राष्ट्रऋषि श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी के जन्म दिवस (10 नवम्बर) पर लेख आर्थिक क्षेत्र में भी राष्ट्रीयता का भाव होना आवश्यक श्री दत्तोपंत जी ठेंगड़ी का जन्म 10 नवम्बर, 1920 को, दीपावली के दिन, महाराष्ट्र के वर्धा जिले के आर्वी नामक ग्राम में हुआ था। श्री दत्तोपंत जी के पित्ताजी श्री बापूराव दाजीबा ठेंगड़ी, सुप्रसिद्ध अधिवक्ता थे, तथा माताजी, श्रीमती जानकी देवी, गंभीर आध्यात्मिक अभिरूची से सम्पन्न थी। उन्होंने बचपन में ही अपनी नेतृत्व क्षमता का आभास करा दिया था क्योंकि मात्र 15 वर्ष की अल्पायु में ही, आप आर्वी तालुका की ‘वानर सेना’ के अध्यक्ष बने तथा अगले वर्ष, म्यूनिसिपल हाई स्कूल आर्वी के छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गये थे। आपने बाल्यकाल से ही अपने आप को संघ के साथ जोड़ लिया था और आपने अपने एक सहपाठी और मुख्य शिक्षक श्री मोरोपंत जी पिंगले के सानिध्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक सं...
राजनीतिक  असंवेदनशीलता का परिणाम है प्रदूषण

राजनीतिक  असंवेदनशीलता का परिणाम है प्रदूषण

TOP STORIES, राज्य, सामाजिक
-ललित गर्ग- दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में पराली एवं वायु प्रदूषण से उत्पन्न दमघोटू माहौल का संकट जीवन का संकट बनता जा रहा हैं। संपूर्ण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र घने कोहरे में डूबी हुई जानलेवा होती जा रही है। सब जानते हैं कि यह कोहरा नहीं, बल्कि प्रदूषण का ऐसा विकराल जाल है जिसमें मनुष्य सहित सारे जीव-जंतु फंसकर छटपटा रहे हैं, जीवन सांसों पर छाये संकट से जूझ रहे हैं। अस्पतालों के बाहर लम्बी कतारें देखने को मिल रही है। खासकर दिल्ली में दिवाली के बाद यह समस्या साल-दर-साल गंभीर होती जा रही है। इससे पार पाने के लिए दिल्ली सरकार ने कई उपाय आजमाए, प्रदूषण पर नियंत्रण के लिये निर्देश जारी किये गये मगर वे कारगर साबित नहीं हो पा रहे। प्रदूषण जानलेवा स्तर तक खतरनाक हो गया है, जिसके चलते स्कूल बंद करने और दिल्ली सरकार के आधे कर्मचारियों को घर से काम करने को कहा गया है। दिल्ली ...
राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार – 2021 प्रदान किए

राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार – 2021 प्रदान किए

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (7 नवंबर, 2022) राष्ट्रपति भवन में नर्सिंग पेशेवरों को वर्ष 2021 के लिए राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार प्रदान किए। राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कारों की स्थापना वर्ष 1973 में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समाज में नर्सों और नर्सिंग पेशेवरों द्वारा प्रदान की गई सराहनीय सेवाओं को मान्यता देने के रूप में की गई थी। पुरस्कार विजेताओं की सूची देखने के लिए यहां क्लिक करें। Click here to see the List of awardees . ...
घर पर मिली भावनात्मक और नैतिक शिक्षा बच्चों के जीवन का आधार है।

घर पर मिली भावनात्मक और नैतिक शिक्षा बच्चों के जीवन का आधार है।

TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
-सत्यवान 'सौरभ' बचपन एक बच्चे के विकास में एक महत्वपूर्ण समय होता है क्योंकि यह अवधि बच्चे के जीवन भर सीखने और कल्याण की नींव रखती है। इसलिए इसे जीवन में विकास का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है, जो वयस्कों और फलस्वरूप कल के समाज को आकार देता है। इसलिए इस अवधि में बच्चों के विकास की रक्षा करना माता-पिता, राज्यों और उन सभी व्यक्तियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जो एक बेहतर दुनिया के निर्माण में योगदान देना चाहते हैं।जैसे, बच्चों के शुरुआती अनुभव उनके पूरे जीवन को आकार देते हैं। ये शुरुआती अनुभव बच्चे के मस्तिष्क की वास्तुकला की नींव रखते हैं, और बच्चे की सीखने की क्षमता, उनके स्वास्थ्य और जीवन भर उनके व्यवहार की ताकत या कमजोरी को दृढ़ता से प्रभावित करते हैं। प्रत्येक बच्चा अपने पर्यावरण से प्रभावित होता है और बच्चे का सबसे पहला वातावरण घर होता है। माता-पिता बच्चे के जीवन में सबसे प्रभा...
गरीबों के लिए आरक्षण की अस्पष्टता

गरीबों के लिए आरक्षण की अस्पष्टता

TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
गरीबों के लिए आरक्षण की अस्पष्टता भारत का संविधान ऐतिहासिक अन्याय का निवारण करता है और “समानता” की भावना के साथ उच्च शिक्षा और सार्वजनिक रोजगार के मामलों में उत्पन्न असंतुलन को संतुलित करता है। अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता और सभी के लिए कानून के समान संरक्षण की गारंटी देता है। समानता का सिद्धांत मूल संरचना की एक अनिवार्य विशेषता है। इस ‘समानता संहिता’ में हुए किसी भी परिवर्तन के विभिन्न पहलुओं को एम.नागराज मामले में निर्धारित ‘पहचान’ और ‘आयाम’ के व्यापक रूप से स्वीकृत परीक्षणों से गुजरना चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए विकसित किया गया था कि जब भी आरक्षण के संबंध में कोई संशोधन किया जाता है तो कानून में समता और समानता के बीच संतुलन बना रहे। -प्रियंका सौरभ आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए विशेष उपायों और आरक्षण की शुरुआत करने वाले 103 वें संविधान संशोधन अधिनियम क...
औरत-मर्दः बाहरी एकरूपता

औरत-मर्दः बाहरी एकरूपता

TOP STORIES, सामाजिक
*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* न्यूयाॅर्क टाइम्स ने अपने मुखपृष्ठ पर एक खबर छापी है कि अमेरिका में कई आदमी अब औरतों का वेश धारण करने लगे हैं और औरतें तो पहले से ही वहां आदमियों की वेशभूषा पहनते रही हैं। उनका कहना है कि कपड़ों में भी औरत-मर्द का भेद क्या करना? वह जमाना लद गया जब औरतों के लिए खास तरह की वेशभूषा, जेवर और जूते-चप्पल पहनना अनिवार्य हुआ करता था। उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होती थी। घूंघट और बुर्का लादना आवश्यक माना जाता था। हमारे संस्कृत नाटकों को देखें तो कालिदास और भवभूति जैसे महान लेखकों की रचनाओं में उनकी महिला पात्राएं संस्कृत में नहीं, प्राकृत में संवाद करती थीं। महिलाओं को पुरुषों के समान न हवन करने का अधिकार था और न ही जनेऊ धारण करने का! वेदपाठ करना तो उनके लिए असंभव ही था। आर्यसमाज के प्रवर्तक महर्षि दयानंद सरस्वती की कृपा से भारतीय स्त्रियों को इन बंधनों से ...
हिंसक व जिहादी इस्लाम के प्रतिशोध में ईसाई राष्ट्र की अभिलाषा

हिंसक व जिहादी इस्लाम के प्रतिशोध में ईसाई राष्ट्र की अभिलाषा

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
*आचार्य श्री विष्णुगुप्त*=================== कुछ खबरें ऐसी होती हैं जो निराशा की ओर ले जाती हैं, हताशा की ओर ले जाती हैं और भविष्य अंधकार में होने का संकेत देती हैं। ऐसी ही निराशाजनक चिंताजनक और भविष्य को अंधकार में ढकेलने वाली एक खबर अमेरिका से आ रही है। अमेरिका को ईसाई राष्ट्र घोषित करने की मांग तेजी से बढ़ रही है । दुनिया के सबसे विकसित देश में मजहब आधारित देश घोषित करने की मांग एक आश्चर्य से कम नहीं है और निराशाजनक बात भी है। मजहर पर आधारित राष्ट्र की मांग के खतरे भी खतरनाक है , भीषण हैं और लोकतंत्र के भविष्य के प्रति नकारात्मक परिस्थितियां ही उत्पन्न करती हैं। मजहब आधारित व्यवस्था में लोकतंत्र की सभी प्रकार की संहिताएँ और प्रवृत्तियों का विलोप हो जाता है, एक तरह से लोकतंत्र का अस्तित्व ही समाप्त हो जाता है, जीवन की गतिशीलता टूट जाती है , भविष्य की उम्मीदें टूट जाती हैं , नए विचारो...
महिला सशक्तिकरण की दिशा में अड़ंगे लगा रहे है राजनीतिक दल

महिला सशक्तिकरण की दिशा में अड़ंगे लगा रहे है राजनीतिक दल

BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, सामाजिक
संपादकीय प्रकाशन के संदर्भ में महिला सशक्तिकरण की दिशा में अड़ंगे लगा रहे है राजनीतिक दल निखिल अरविन्दु@NikhilArvindu "खेत खलियान से लेकर, देश की सीमाओं तकगगन से लेकर, समुद्री नौकाओं तकहै अब ऐसा कोई क्षेत्र नहीजहां आज महिलाएं नही" भारत की महिलाएं अब देश ही नहीं विदेश में भी बुलंदियों के झंडे गाड़ रही हैं, जहां भी महिलाओं को मौका मिलता है वहां भी अपना बेहतर प्रदर्शन दे रही हैं। महिला सशक्तिकरण को ले करके एक बार फिर से भारत में चर्चाओं का बाजार गर्म है। वजह है विगत दिनों भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड द्वारा महिला मैच की फीस पुरुषों की मैच फीस के बराबर कर दी है। जो की एक सराहनीय कदम है। एक शब्दों में कहें तो भारत की संस्थाएं महिला सशक्तिकरण को क्रियान्वित करने का काम कर रही है, उसे धार देने का काम कर रही है, उसे मुख्यधारा में लाने का काम कर रही हैं। लेकिन बात जब राजनीतिक दलों की आ...