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जानलेवा बनती अजनबियों से अश्लील वीडियो कॉल्स

जानलेवा बनती अजनबियों से अश्लील वीडियो कॉल्स

TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
जानलेवा बनती अजनबियों से अश्लील वीडियो कॉल्स इस अपराध के पीछे संगठित अपराध समूह ज्यादातर विदेशों में स्थित हैं। उनके लिए यह पैसा कमाने का एक कम जोखिम वाला तरीका है और वे कई पीड़ितों तक आसानी से ऑनलाइन पहुंच सकते हैं। पीड़ित अक्सर पुलिस को इन अपराधों की रिपोर्ट करने से चिंतित होते हैं क्योंकि वे शर्मिंदा होते हैं। जबकि सेक्सटॉर्शनिस्ट पीड़ितों को परेशान करने, शर्मिंदा करने, आघात करने और उन्हें नियंत्रित करने के लिए सभी उपलब्ध साधनों का उपयोग कर सकते हैं, यह उच्च समय है कि दानव को सिर के बल ले जाया जाए और जागरूकता बढ़ाने और सेक्सटॉर्शन की बुराई के सामाजिक कलंक को दूर किया जाए। यह ध्यान देने योग्य है कि इंटरनेट कभी भी 'भूलता और माफ नहीं करता' और इसकी पहुंच और प्रसार बिजली से तेज और विशाल है। प्रभावशाली दिमाग वाली हमारी युवा पीढ़ी को यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया जाना चाहिए कि वे कभी...
दिल की बीमारियों का रिर्वसल जीरो ऑयल भोजन से

दिल की बीमारियों का रिर्वसल जीरो ऑयल भोजन से

TOP STORIES, सामाजिक
दिल की बीमारियों का रिर्वसल जीरो ऑयल भोजन से डॉ. विमल छाजेड़ निदेशक साओल हार्ट सेंटर, नई दिल्ली जीवन को जीने के लिए क्या जरूरी है-भोजन। लेकिन क्या ऐसा होता है कि हमें भोजन के नाम पर कुछ भी दे दिया जाए, तो हम खा लेंगे जब तक वह स्वाद से परिपूर्ण न हो और हम भारतीय तो अपने खान-पान की पौष्टिकता से अधिक स्वाद पर ही ध्यान देते हैं। क्या कभी आपने सोचा है कि हमारा मनपसंद व्यंजन हमें इतना स्वादिष्ट क्यों लगता है? ऐसा इसलिए होता है क्योंकि स्वाद पहचान कराने वाली कोशिकाएं, मनपसंद भोजन लेने पर या जो व्यंजन हमें स्वादिष्ट लगता है। लेने पर तीक्ष्ण उत्तेजना उत्पन्न करती हैं जो हमें स्वाद का एहसास कराती हैं। भोजन में मीठे के प्रति हमारा आकर्षण सर्वव्यापी है और भारतीयों का मीठे के प्रति कुछ विशेष ही लगाव है। वर्ष 1986 की अपेक्षा आज हम 20 प्रतिशत अधिक चीनी का उपयोग कर रहे हैं। हमारी मानसिक ध...
बाबा माधवदास की वेदना और ईसाई मिशनरियां

बाबा माधवदास की वेदना और ईसाई मिशनरियां

धर्म, सामाजिक
बाबा माधवदास की वेदना और ईसाई मिशनरियां...----------------------------------------------कई वर्ष पहले दूर दक्षिण भारत से बाबा माधवदास नामक एक संन्यासी दिल्ली में ‘वॉयस ऑफ इंडिया’ प्रकाशन के कार्यालय पहुँचे। उन्होंने सीताराम गोयल की कोई पुस्तक पढ़ी थी, जिसके बाद उन्हें खोजते-खोजते वह आए थे। मिलते ही उन्होंने सीताराम जी के सामने एक छोटी सी पुस्तिका रख दी। यह सरकार द्वारा 1956 में बनी सात सदस्यीय जस्टिस नियोगी समिति की रिपोर्ट का एक सार-संक्षेप था। यह संक्षेप माधवदास ने स्वयं तैयार किया, किसी तरह माँग-मूँग कर उसे छपाया और तब से देश भर में विभिन्न महत्वपूर्ण, निर्णयकर्ता लोगों तक उसे पहुँचाने, और उन्हें जगाने का अथक प्रयास कर रहे थे। किंतु अब वह मानो हार चुके थे और सीताराम जी तक इस आस में पहुँचे थे कि वह इस कार्य को बढ़ाने का कोई उपाय करेंगे।माधवदास ने देश के विभिन्न भागों में घूम-घूम कर ईसाई ...
क्यों पत्थर होती जा रही हैं हमारी करूणा एवं संवेदनाएं?

क्यों पत्थर होती जा रही हैं हमारी करूणा एवं संवेदनाएं?

राज्य, विश्लेषण, सामाजिक
क्यों पत्थर होती जा रही हैं हमारी करूणा एवं संवेदनाएं? ललित गर्ग  केरल के पथानामथिट्टा में अमीर बनने की चाहत में तांत्रिक के कहने पर दो महिलाओं की बलि देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मामले में नरभक्षण का भी संदेह जताया जा रहा है। संदेह है कि आरोपियों ने महिलाओं के लाश के टुकड़े पकाकर खाए। यह खौफनाक एवं डरावना घटनाक्रम एक शत प्रतिशत शिक्षित प्रांत के लिये लज्जाजनक होने के साथ-साथ नये भारत, सशक्त भारत पर नये सिरे से चिन्तन करने की जरूरत को व्यक्त करते हुए अनेक ज्वलंत प्रश्न खड़े करता है। निश्चित ही इस क्रूर घटनाक्रम से देश कांप उठा है। देश में धर्म के नाम पर बिखरी विसंगतियों एवं असुविधाजनक स्थितियों पर नियंत्रित करने की जरूरत है। ऐसे अनेक तांत्रिक एवं धर्म के ठेकेदार समृद्धि, सत्ता एवं सुख देने के नाम पर भोले-भाले लोगों को न केवल ठगते हैं, बल्कि उनसे आपराधिक कृत्य भी करवाते हैं। इ...
14 अक्टूबर 1999 सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी दुर्गा भाभी का गुमनामी में निधन

14 अक्टूबर 1999 सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी दुर्गा भाभी का गुमनामी में निधन

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
14 अक्टूबर 1999 सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी दुर्गा भाभी का गुमनामी में निधन अंग्रेजो की आँखों के सामने से भगतसिंह और राजगुरू को निकाला, गवर्नर हैली को गोली मारी थी --रमेश शर्मा सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी दुर्गा भाभी का नाम भारत में सबकी जुबान पर होगा पर उनका नाम इतिहास की पुस्तकों में शून्य के आसपास। वे स्वतंत्रता के बाद लगभग भी आधी शताब्दी जीवन जिया पर गुमनामी के अंधकार में।यह वही दुर्गा भाभी हैं, जो साण्डर्स वध के बाद सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी भगतसिंह और राजगुरू को अंग्रेजो की आँखों के सामने से कोलकत्ता ले गयी थीं । वे सभी क्रांतिकारियों का मानों एक संपर्क सूत्र थीं। क्राँतिकारी चंद्रशेखर आजाद ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में जिस माउजर पिस्तौल से अंग्रेजों से मुकाबला किया था, वह माउजर दुर्गा भाभी ने ही उनको दिया था.दुर्गा भाभी का जन्म 7 अक्टूबर 1907 को कौशांबी जिले के ग्राम शहजादपुर में हु...
समझें,संभले समाज में फैलते ‘सेक्सटॉर्शन’ से*

समझें,संभले समाज में फैलते ‘सेक्सटॉर्शन’ से*

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समझें,संभले समाज में फैलते ‘सेक्सटॉर्शन’ से* भारत में विशेषकर नगरों में बसे भारत में हर आदमी की कोशिश होती है कि समाज में उसकी इज्जत बनी रहे |व्यक्ति बच्चों व परिजनों की नजरों में न गिरे। सूचना विस्फोट के युग में जन्मे अपराध ‘सेक्सटॉर्शन’के मामले दिनोदिन बढ़ते जा रहे हैं | मध्यप्रदेश में यह मामले लगातार सुने जा रहे हैं | कुछ राज्यों में इनकी संख्या सैकड़ों में दर्ज है | हकीकत में जहां मोबाइल व इंटरनेट सुविधाओं के वाहक बने हैं, वहीं समाज में अपराधों के विस्तार की कड़ी भी बने हैं। सेक्सटॉर्शन ऑनलाइन धोखाधड़ी व ठगी का सम्मिलित रूप है | चंद सेकेंडों में लोगों की जीवन-भर की पूंजी चली जाती है। ऐसा ही एक और अपराध है अमेरिका व कनाडा से नजदीक के रिश्तेदारों के पुलिस की गिरफ्त में होने की झूठी खबर देकर पैसा वसूली की खबर साइबर क्राइम विभाग में लगातार दर्ज हो रही हैं। इसी कड़ी में साइबर अपराध ‘सेक...
मन की थोथ भरने आता हर साल करवा चौथ

मन की थोथ भरने आता हर साल करवा चौथ

सामाजिक
मन की थोथ भरने आता हर साल करवा चौथ बदलते समय में खासकर नवविवाहितों के बीच पतियों ने भी अपनी पत्नियों के लिए व्रत रखना शुरू कर दिया है। इस प्रकार अब, एक पुराना त्योहार ग्रामीण और शहरी सामाजिक परिवेश दोनों में अपने पुनर्निमाण के माध्यम से लोकप्रिय बना हुआ है। हमारे यहाँ करवा चौथ से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं हैं। मगर सबसे लोकप्रिय  सावित्री और सत्यवान से संबंधित है जिसमें सावित्री ने अपने पति को अपनी प्रार्थना और दृढ़ संकल्प के साथ मृत्यु के चंगुल से वापस लाया। जब भगवान यम सत्यवान की आत्मा को प्राप्त करने आए, तो सावित्री ने उन्हें जीवन प्रदान करने की भीख मांगी। जब उन्होंने मना कर दिया, तो उसने खाना-पीना बंद कर दिया और यम का पीछा किया जो उसके मृत पति को ले गया। यम ने कहा कि वह अपने पति के जीवन के अलावा कोई अन्य वरदान मांग सकती है। सावित्री ने उससे कहा कि उसे संतान की प्...
प्रधानमंत्री ने मध्य प्रदेश के उज्जैन में श्री महाकाल लोक में महाकाल लोक परियोजना का पहला चरण राष्ट्र को समर्पित किया

प्रधानमंत्री ने मध्य प्रदेश के उज्जैन में श्री महाकाल लोक में महाकाल लोक परियोजना का पहला चरण राष्ट्र को समर्पित किया

Current Affaires, Today News, सामाजिक
प्रधानमंत्री ने मध्य प्रदेश के उज्जैन में श्री महाकाल लोक में महाकाल लोक परियोजना का पहला चरण राष्ट्र को समर्पित किया प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज मध्य प्रदेश के उज्जैन में श्री महाकाल लोक में महाकाल लोक परियोजना का पहला चरण राष्ट्र को समर्पित किया। जब प्रधानमंत्री नंदी द्वार से श्री महाकाल लोक तक पहुंचे तो पारंपरिक धोती पहने हुए थे। आंतरिक गर्भगृह में पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री ने पूजा और दर्शन किए और मंदिर के पुजारियों की उपस्थिति में भगवान श्री महाकाल के सामने हाथ जोड़कर प्रार्थना की। आरती करने और पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद प्रधानमंत्री आंतरिक गर्भगृह के दक्षिणी कोने में बैठ गए और मंत्रों का जाप करते हुए ध्यान किया। प्रधानमंत्री नंदी प्रतिमा के बगल में भी बैठे और हाथ जोड़कर प्रार्थना की। प्रधानमंत्री ने श्री महाकाल लोक राष्ट्र को समर्पित करते हुए पट्टिका का अनावर...
नेहरू ने अँग्रेजों से गुप्त संधि की और कहा था कि “मैं भी मुसलमान हूं”

नेहरू ने अँग्रेजों से गुप्त संधि की और कहा था कि “मैं भी मुसलमान हूं”

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नेहरू ने अँग्रेजों से गुप्त संधि की और कहा था कि “मैं भी मुसलमान हूं”_  (विभाजनकालीन भारत के साक्षी )  इस शीर्षक को पढ़ कर आप अवश्य चौकेंगे, लेकिन सत्ता पिपासा के लिए जवाहरलाल नेहरू के ये कुछ व्यक्तिगत रहस्य भी जानने से यह स्पष्ट होता है कि स्वतंत्रता के उपरान्त भी भारत क्यों अपने गौरव को पुन: स्थापित न कर सका __ विनोद कुमार सर्वोदय   श्री नरेन्द्र सिंह जी जो ‘सरीला’ रियासत (टीकमगढ़ के पास,बुंदेलखंड) के प्रिंस थे तथा बाद में गवर्नर जनरल लार्ड वेवल व लार्ड माउण्टबैटन के वे ए.डी.सी. रहे थे। इस कारण 1942 से 1948 तक की वाइसराय भवन में घटित घटनाओं के वे स्वयं साक्षी थे। उनसे इस लेख के लेखक (प्रो सुरेश्वर शर्मा) की  प्रथम भेंट दिसम्बर 1966 में इण्डिया इण्टरनेशनल सेंटर दिल्ली में हुई थी l प्रिंस आफ़ सरीला श्री नरेंद्र सिंह उस समय काफी वृद्ध थे और इण्डिया इंटरनेशनल सेंटर में ही रहते थे। श्र...
दो पद-एक व्यक्ति: व्यवस्था पर प्रश्न*

दो पद-एक व्यक्ति: व्यवस्था पर प्रश्न*

सामाजिक
दो पद-एक व्यक्ति: व्यवस्था पर प्रश्न* ************* _-राजेश बैरागी-_ एक जनप्रतिनिधि और एक प्रशासनिक अधिकारी की योग्यता में कितना अंतर होता है? अधिकारी निस्संदेह अपने द्वारा ग्रहण किए जाने वाले पद के लिए निर्धारित परीक्षा पास करने के पश्चात ही उस पद पर आसीन हो सकता है। जनप्रतिनिधि की परीक्षा जनप्रिय होना है और उसे यह परीक्षा प्रत्येक पांच वर्ष में पुनः पुनः देनी पड़ती है। यह विश्लेषण इसलिए प्रासंगिक है कि चुनाव आयोग जनप्रतिनिधियों को एक से अधिक स्थानों पर चुनाव लड़ने के विरुद्ध है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में एक से अधिक स्थानों पर चुनाव लड़ने पर रोक नहीं है परंतु दोनों स्थानों पर चुनाव जीतने के बाद एक स्थान से ऐसे जनप्रतिनिधि को त्यागपत्र देने की अनिवार्यता है। ऐसे में उस स्थान पर उपचुनाव में होने वाले खर्च और प्रशासनिक भागदौड़ को रोकने के लिए भारत का निर्वाचन आयोग एक से अधिक स्थानों से च...