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तनाव पर भारी पड़ती मुस्कान

तनाव पर भारी पड़ती मुस्कान

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तनाव पर भारी पड़ती मुस्कान या तनाव से मुक्ति का मंत्र है मुस्कान डॉ. शंकर सुवन सिंह दया शब्द को कई नामों से जाना जाता हैं जैसे करुणा, सहानुभूति, अनुकंपा, कृपा, रहम, आदि। परिस्थिति जन्य की गई सेवा दया कहलाती है। मनोस्थिति जन्य की गई सेवा करुणा कहलाती है। करुणा स्वभाव गत होती है। जिस इंसान में करुणा है उसके लिए बाहर की कोई भी परिस्थिति उस पर प्रभाव नहीं डाल पाती। सामान्य भाषा में कहें तो करुणा का ही प्रतिरूप है दया। एक मनोस्थति जन्य और दूसरा परिस्थति जन्य है। दया परिस्थति पर निर्भर करती है। करुणा मन की स्थिति पर निर्भर करती है। करुणावान व्यक्ति दयालु भी होता है। दयालु व्यक्ति करुणामयी हो ऐसा जरुरी नहीं। महावीर, गौतम बुद्ध, स्वामी विवेकानंद आदि महापुरुष करुणामयी थे। इनमे दयालुता भी थी। हिन्दुओं के पवित्र ग्रन्थ रामचरित मानस के लेखक गोस्वामी तुलसीदास जी ने दया को धर्म का मूल कहा था। दया...
आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान

आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान

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आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान *रजनीश कपूर हाल ही में देश भर से परेशान करने वाली कुछ ऐसी खबरें आई जिनका सामना हम सभी को अपने-अपने इलाक़े कभी न कभी करना पड़ा है। हमारे शहरों में आवारा कुत्तों की समस्या हर दिन बढ़ती जा रही है। आम जनता को हर गली मोहल्ले में आवारा कुत्तों से खुद को बचा कर निकलना पड़ता है। यदि इन कुत्तों से बचने के लिए हम इन्हें लाठी, डंडा या पत्थर का डर दिखाते हैं तो समाज के कुछ सभ्य लोग, जो खुद को पशु प्रेमी कहते हैं, इसका विरोध करते हैं। कुछ जगहों पर तो ये लोग नागरिकों को पुलिस की कार्यवाही की धमकी तक दे देते हैं। ग़नीमत है कि आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में कुछ सुझाव आम नागरिकों के हित में दिये हैं। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी की खंडपीठ ने ऐसे एक मामले की सुनवाई के समय कहा कि ‘लोगों की ...
भागवत के विजय-उद्बोधन में नये भारत के सुखद संकेत

भागवत के विजय-उद्बोधन में नये भारत के सुखद संकेत

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भागवत के विजय-उद्बोधन में नये भारत के सुखद संकेत -ललित गर्ग- विजयदशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख श्री मोहन भागवत के वार्षिक विजय-उद्बोधन का न केवल राष्ट्रीय बल्कि सामाजिक एवं राजनीतिक महत्व है। सर संघचालक ने अपने विजय-उद्बोधन में राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय मुद्दों का उल्लेख करते हुए संघ सोच को एक बार फिर से स्पष्ट किया है। उन्होंने देश में साम्प्रदायिक सद्भाव पर अपना विस्तृत दृष्टिकोण पेश करते हुए न केवल हिन्दू शब्द का विरोध करने वालों पर करारा प्रहार किया है, बल्कि देश में अराजकता का माहौल पैदा करने वाले मुस्लिम संगठनों पर भी सीधी चोट की है। उन्होंने देश के समग्र एवं त्वरित विकास के लिये जनसंख्या नियंत्रण की नीति पर जोर दिया है। यह विजय-उद्बोधन देकर उन्होंने जहां देश की जनता को जगाया वहीं राजनीतिक दलों की नींद उड़ा दी। सरकार को कुछ जरूरी कार्यों का दिशा-निर्देश भी दिया ...
कमज़ोर कभी माफ नहीं कर सकते; क्षमा ताकतवर की विशेषता है।

कमज़ोर कभी माफ नहीं कर सकते; क्षमा ताकतवर की विशेषता है।

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(राष्ट्रीय क्षमा और खुशी दिवस - 7 अक्टूबर) कमज़ोर कभी माफ नहीं कर सकते; क्षमा ताकतवर की विशेषता है। सामाजिक जीवन तभी संभव है जब हम बात करें, चर्चा करें और एक-दूसरे की छोटी-छोटी गलतियों को क्षमा करें। क्षमा के लिए एक आवश्यक मूल्य इस प्रकार प्रत्येक मनुष्य के लिए सम्मान है। आतंकवादी गतिविधियां, उग्रवाद, नक्सलवाद, सांप्रदायिक दंगे आदि खुद को बदले की कार्रवाई के रूप में और अतीत में की गई गलतियों को सुधारने की कोशिश करने वाले कृत्यों के रूप में सही ठहराते हैं। इस तरह के कृत्यों का उद्देश्य गलत के बजाय गलत करने वाले का सफाया करना ही संघर्षों को बढ़ाता है। आज, भारतीय समाज उस चौराहे पर है जहां विभिन्न समुदाय या वर्ग समाहित हो रहे हैं, इसलिए शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व सुनिश्चित करने के लिए क्षमा और स्वीकृति के कार्य का अभ्यास करना चाहिए। चूँकि शांति प्रत्येक मनुष्य की मूलभूत आवश्यकता है जो बिना क...
अनचाहे गर्भ से कानूनी छुटकारा, क्या बदलेगी तस्वीर?

अनचाहे गर्भ से कानूनी छुटकारा, क्या बदलेगी तस्वीर?

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अनचाहे गर्भ से कानूनी छुटकारा, क्या बदलेगी तस्वीर? एक ऐसे समाज में जो अत्यधिक पितृसत्तात्मक है, महिलाओं को गर्भपात तक पहुंचना मुश्किल लगता है। स्वास्थ्य सेवा के लिए अक्सर महिलाओं से अपने पति, या परिवार के सदस्यों की अनुमति लेने के लिए कहते हैं, भले ही यह कानून द्वारा आवश्यक न हो।  परिवार हो या अस्पताल हर जगह महिलाओं की अबॉर्शन के मामले में मोरल पुलिसिंग की जाती है और यही वजह है कि असुरक्षित अबॉर्शन के कारण देश में आये दिन हजारों महिलाओं की जान चली जाती है।  अक्सर, महिला की गोपनीयता और गोपनीयता की रक्षा नहीं की जाती है। यौनकर्मी, एचआईवी पॉजिटिव महिलाएं, आदिवासी महिलाएं, एकल महिलाएं और युवाओं के लिए गर्भपात तक पहुंचना और भी मुश्किल हो जाता है। और पहुंच की कमी असुरक्षित गर्भपात की ओर ले जाती है। नए कानून से शायद अब ऐसा न हो। - प्रियंका सौरभ प्रजनन अधिकारों पर एक महत्व...
विदेशी पर्यटक कैसे आएं भारत

विदेशी पर्यटक कैसे आएं भारत

सामाजिक
विदेशी पर्यटक कैसे आएं भारत आर.के. सिन्हा कोरोना का असर कम होते ही देश भर के एयरपोर्ट तथा रेलवे स्टेशनों पर पर्यटकों की भीड़ रहने लगी है। दो-ढाई सालों से घरों में दुबके हुए हिन्दुस्तानी अब बाहर निकल रहे हैं। वे फिर से पहली वाली जिंदगी को जीना चाहते हैं। बेशक, कोरोना ने आम इंसान की सोच को भी बदला है। अब  बहुत से लोगों को लगने लगा है कि जीवन तो क्षणभंगुर है। इसलिए जितना जीवन है उसका उतना आनंद तो ले ही लिया जाए। निश्चित रूप से इस सोच के चलते लोग पर्यटन स्थलों पर जा रहे हैं।  इससे कोरोना के कारण तबाह हो गया पर्यटन क्षेत्र फिर से खड़ा होने लगा है।  इस उद्योग से जुड़े लाखों लोगों की फिर से कमाई चालू हो गई है। पर अब भी भारत में विदेशी पर्यटकों की आवक कायदे से चालू तो नहीं हुई है। कहना न होगा कि कोरोना के कारण विदेशी पर्यटकों ने भी भारत आना बंद ही कर दिया था। इंडिया टुरिज्म स्टटिस्टिक्स की...
ज्ञान और सत्य ही एकता के सुनिश्चित आधार हैं

ज्ञान और सत्य ही एकता के सुनिश्चित आधार हैं

सामाजिक, साहित्य संवाद
ज्ञान और सत्य ही एकता के सुनिश्चित आधार हैं :,प्रो रामेश्वर मिश्र पंकज हिंदू मुस्लिम एकता या हिंदू ईसाई एकता या हिंदू और किसी की भी एकता का एक मात्र मार्ग वह राजमार्ग है, वह सनातन मार्ग है जो हिंदू और हिंदू की एकता का मार्ग है। सार्वभौम नियमों के सनातन आधारों पर हिंदुओं के संप्रदाय एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और स्वतंत्र अपनी अपनी उपासना पद्धति और अपनी-अपनी आचार पद्धति सनातन नियमों की मर्यादा में चलाने की सब को स्वाधीनता प्राप्त है और वही उनका अनुशासन भी है। इसी सार्वभौम अनुशासन और सनातन नियमों के प्रतिपालन में हिंदू हिंदू एकता संभव रही है । हिंदू मुस्लिम एकता भी इसी आधार पर हो सकती है।हिन्दू ईसाई एकता का भी यही सुनिश्चितआधार है। भारत का राज्य सार्वभौमिक नियमों (Universal Laws)अर्थात सत्य ,ऋत(Cosmic order), अहिंसा,अचौर्य और मर्यादा पालन आदि प्रत्येक नागरिक को अनिवार्य घोषित करें। ...
अज्ञान से नही होगी एकता

अज्ञान से नही होगी एकता

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अज्ञान से नही होगी एकता प्रो रामेश्वर मिश्र पंकज इंडोनेशिया और मलेशिया का उदाहरण भारत के कतिपय हिंदू संगठन बारंबार देते रहे हैं। पहले मैं समझता था कि यह केवल कूटनीतिक वक्तव्य हैं। लेकिन भाजपा के सत्ता में आने के बाद भी वही वक्तव्य दोहराए जाते हैं । जिससे पता चलता है कि संघ और भाजपा के लोग इस विषय में आश्चर्यजनक अज्ञान में जीते हैं। अज्ञान से कभी किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। इंडोनेशिया और मलेशिया को मुस्लिम देश बताकर वहां अभी भी भारतीय संस्कृति की छाप होने को गरिमा मंडित करना अज्ञान की पराकाष्ठा है । सच यह है कि दोनों ही देशों में डेढ़ हजार वर्षो से अधिक तक हिंदू राज्य रहे हैं और मुस्लिम राज्य हाल ही में हुआ है । इसलिए मुसलमान अभी तक वहां हिंदू संस्कृति और परंपराओं को खा नहीं पाए हैं । धीरे-धीरे वे उस को पूरी तरह खा जाएंगे और खाने के लिए तत्पर हैं । इस तथ्य को जाने बिना ...
दिल्ली में पुरानी कारें ख़रीदने-बेचने वाले सावधान!

दिल्ली में पुरानी कारें ख़रीदने-बेचने वाले सावधान!

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दिल्ली में पुरानी कारें ख़रीदने-बेचने वाले सावधान! *रजनीश कपूर बॉलीवुड में ठग और ठगी करने वालों पर अनेकों फ़िल्में बनी हैं। इनमें से 1958 में बनी एक फ़िल्म का नाम था ‘दिल्ली का ठग’ जिसमें यह दिखाया गया था कि ठगी करने का आदि एक ठग दिल्ली छोड़ मुंबई जा कर ठगी करने लगता है। ठगी करने वाले चाहे दिल्ली के हों या किसी अन्य शहर के, वे पकड़े जाने के डर से अपना नाम और हुलिया बदल कर अलग-अलग शहरों में जाते हैं और अपना मक़सद पूरा करते हैं। पर आज के युग में पेशेवर ठगों को कहीं जाना नहीं होता। सोशल मीडिया ने उनका काम काफ़ी आसान कर दिया है। जिन लोगों को लुटने का शौक़ होता है वे किसी न किसी तरह से इन ठगों के जाल में फँस कर उनका शिकार बन ही जाते हैं। आज कल ‘दिल्ली के ठग’ आपको सोशल मीडिया पर बिना ज़्यादा मेहनत के बड़ी आसानी से मिल जाएँगे। इनका नया रूप खोजने के लिए आपको दिल्ली के सेकंड हैंड कार बाज़...
एक अच्छे पड़ोसी बने लेकिन जासूसी न करे।

एक अच्छे पड़ोसी बने लेकिन जासूसी न करे।

TOP STORIES, राज्य, सामाजिक
एक अच्छे पड़ोसी बने लेकिन जासूसी न करे। पड़ोसी देशों के रूप में, आपके घर, राज्यों आदि के रूप में हो सकता है। अच्छे पड़ोसी की योग्य गुणवत्ता पड़ोसियों के व्यवहार और कल्याण पर निर्भर करती है। यह गुण प्रकृति, उपचार के तरीके, एक दूसरे के बीच की जगह यानी सीमा पर निर्भर करता है। केवल गोपनीयता और व्यक्तिगत स्थान बनाए रखने के लिए बाड़ जो समाज के विकास के लिए बहुत आवश्यक है। एक अच्छे पड़ोसी को दयालु, विचारशील और सहयोगी होना चाहिए। पड़ोसी कितना भी अच्छा क्यों न हो, अपनी निजता को लेकर हमेशा संतुष्ट रहने का खतरा बना रहता है। इसका मतलब यह नहीं है कि वे आपको जानबूझकर परेशान करेंगे लेकिन हमेशा एक मौका होता है। -प्रियंका सौरभ अच्छे पड़ोसी लोगों के बीच बाधाओं, दोस्ती, संचार के साथ-साथ सुरक्षा की भावना को मजबूत करता है। मगर गोपनीयता बनाए रखने के लिए एक बाड़ एक अच्छी सीमा है। इसका मतलब है कि पड़ोसी ...