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मोहन भागवत को राष्ट्रपिता कहने का इस्लामिक एजेंडा

मोहन भागवत को राष्ट्रपिता कहने का इस्लामिक एजेंडा

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राष्ट्र-चिंतन* *मोहन भागवत को राष्ट्रपिता कहने का इस्लामिक एजेंडा* *आचार्य श्री विष्णुगुप्त* ==================== सरकारी सड़क के गोल चक्कर को घेर कर बैठने वाले और इमामों का संगठन चलाने वाले ऑल इंडिया इमाम ऑगनाइजेशन के अध्यक्ष इमाम उमर अहमद इलियासी वर्तमान में बहुत ही चर्चित है, उनकी चर्चा सिर्फ राजनीति में ही नहीं है बल्कि मुस्लिम पंथ में भी खूब हो रही है। चर्चा होनी भी स्वाभिवक है। आखिर उनके दर पर मोहन भागवत जो पहुंच गये, उमर इलियासी भी मोहन भागवत को राष्ट्रपति करार जो दिया।खासकर मुस्लिम राजनीति भी उबल पड़ी। मुस्लिम राजनीति में उनकी चर्चा कुछ ज्यादा ही हो रही है। अधिकतर मुस्लिम राजनीति के सहचर उन्हें खलनायक और भस्मासुर की उपाधि दे रहे हैं, उन्हें इस्लाम का सत्यानाशी करार दे रहे हैं, कुछ मुस्लिम संगठन तो उन्हें अपशब्द भी कह रहें हैं और न लिखने योग्य गालियां भी बक रहे हैं। जहां तक इमामों ...
बदनाम होंगे तो क्या नाम न होगा?

बदनाम होंगे तो क्या नाम न होगा?

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बदनाम होंगे तो क्या नाम न होगा? *विनीत नारायण मशहूर शायर नवाब मुस्तफ़ा ख़ाँ शेफ़्ता का शेर, ‘हम तालिब-ए-शोहरत हैं हमें नंग से क्या काम, बदनाम अगर होंगे तो क्या नाम न होगा’ काफ़ी लोकप्रिय हुआ। इसका अर्थ है जिन्हें शोहरत की भूख होती है वो शोहरत पाने के लिए किसी भी हद तक जाने तैयार हो जाते हैं। ऐसा करने पर यदि उन्हें बदनामी भी मिले तो वे उसी में शोहरत के अवसर खोज लेते हैं। सुप्रीम कोर्ट की मीडिया ऐंकरों को पड़ी फटकार का कुछ ऐसा ही अर्थ निकाला जा सकता है। दरअसल हेट स्पीच के एक मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने टीवी एंकरों को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि “नफरती भाषा एक जहर की तरह है जो भारत के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा रही है। पिछले कुछ समय से चैनलों पर बहस बेलगाम हो गई है। देश के राजनैतिक दल इस सब में भी लाभ खोज रहे हैं। अदालत ने कहा कि ऐसी नफ़रत फैलाने वाले ...
लड़कियों को लड़कों से कमतर आंकना समाज की भूल है।

लड़कियों को लड़कों से कमतर आंकना समाज की भूल है।

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लड़कियों को लड़कों से कमतर आंकना समाज की भूल है। हमेशा देश में 10वीं और 12वीं कक्षा के रिजल्ट में लड़कियां ही पहले पायदान पर रहती हैं। चाहे आईएएस बनने की होड़ हो, विमान या लड़ाकू जहाज उड़ाने की या फिर मैट्रो चलाने की, लड़कियां हर क्षेत्र में अपनी सफलता के झंडे गाड़ रही हैं।  कौन कहता है कि लड़कियां बोझ है? आज की  लड़की अपना बोझ तो क्या, परिवार का बोझ भी अपने कंधों पर उठाने की हिम्मत रखती है। बेटों की तरह वह भी पूरी निष्ठा के साथ जिम्मेदारियां संभाल रही है। देश की बेटियां अब सिर्फ सिलाई- कढ़ाई या ब्यूटी पार्लर तक ही सीमित नहीं रह गई है बल्कि वह तो दुश्मनों के छक्के छुड़ाने के लिए तैयार हैं। -प्रियंका सौरभ आज की लड़कियां तमाम बंधनों को तोड़कर आसमान छू रही हैं और समाज के लिए आदर्श बनी हुई हैं। अमूमन समाज में लड़कियों को लड़कों से कमतर आंका जाता है। शारीरिक सामर्थ्य ही नहीं अन्य कामों म...
श्री ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने हिंदू समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करने के प्रयास किए

श्री ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने हिंदू समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करने के प्रयास किए

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26 सितम्बर 2022 - श्री ईश्वरचंद्र विद्यासागर जी के जन्म दिन पर विशेष लेख श्री ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने हिंदू समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करने के प्रयास किए श्री ईश्वरचंद्र बंद्योपाध्याय “विद्यासागर” का जन्म दिनांक 26 सितंबर, 1820 को पश्चिम बंगाल  (बंगाल प्रेसीडेंसी) के  जिला मेदिनीपुर के ग्राम बिरसिंह में हुआ था। आपके पिता का नाम श्री हकुरदास बंद्योपाध्याय और आपकी माता का नाम श्रीमती भगवती देवी था। आप महान समाज सुधारक,  दार्शनिक, शिक्षाविद्, लेखक, अनुवादक, मुद्रक, प्रकाशक, उद्यमी, परोपकारी और संस्कृत के विद्वान माने जाते है। संस्कृत भाषा और दर्शन में आपका अगाध ज्ञान होने के कारण विद्यार्थी जीवन में ही संस्कृत कॉलेज ने उन्हें “विद्यासागर” की उपाधि प्रदान की थी। इसके बाद से उनका प्रचिलित नाम श्री ईश्वरचंद्र विद्यासागर हो गया था। श्री ईश्वरचंद्र विद्यासागर को आधुनिक बंगाली भ...
सोशल मीडिया पर स्क्रॉल होती जिंदगी

सोशल मीडिया पर स्क्रॉल होती जिंदगी

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सोशल मीडिया पर स्क्रॉल होती जिंदगी (हम में से ज्यादातर लोग आज सोशल मीडिया के आदी हैं। चाहे आप इसका इस्तेमाल दोस्तों और रिश्तेदारों से जुड़ने के लिए करें या वीडियो देखने के लिए, सोशल मीडिया हम में से हर एक के लिए जाना-पहचाना तरीका है। प्रौद्योगिकी और स्मार्ट उपकरणों के प्रभुत्व वाली दुनिया में नेटफ्लिक्स को बिंग करना या फेसबुक पर स्क्रॉल करना, इन दिनों मिनटों और घंटों को खोना बहुत आम है। ये वेबसाइट और ऐप हमारा ज्यादातर समय खा रहे हैं, इतना कि यह अब एक लत में बदल गया है। सोशल मीडिया की लत जल्दी से उस कीमती समय को खा सकती है जो कौशल विकसित करने, प्रियजनों के साथ समय का आनंद लेने या बाहरी दुनिया की खोज में खर्च किया जा सकता है।) -डॉ सत्यवान सौरभ अगर आप समाज से अलग-थलग महसूस करते हैं, और सोशल मीडिया प्लेटफार्म जैसे फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम जैसे ऐप्स पर ज्यादा समय बिताते हैं तो एक नए...
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने कल सांकेतिक भाषा दिवस मनाया

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने कल सांकेतिक भाषा दिवस मनाया

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सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने कल सांकेतिक भाषा दिवस मनाया भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के तत्वावधान में भारतीय सांकेतिक भाषा अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र (आईएसएलआरटीसी), नई दिल्ली 23 सितंबर, 2022 सांकेतिक भाषा दिवस-2022 मना रहा है। यह कार्यक्रम सी.डी. देशमुख ऑडिटोरियम, इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी), नई दिल्ली मे आयोजित हुआ । जब से संयुक्त राष्ट्र ने 23 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस घोषित किया है, तब से आईएसएलआरटीसी हर साल 23 सितंबर को इसे मनाता है। इस वर्ष गृह मंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय कार्यान्वयन समिति (एनआईसी) ने अन्य बातों के साथ-साथ सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग) द्वारा 23 सितंबर, 2022 को आयोजित और मनाए जाने वाले 'सांकेतिक भाषा दिवस' ​​कार्यक्रम को 'आजादी का अमृत ...
ईरान में हिजाब पर कोहराम

ईरान में हिजाब पर कोहराम

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ईरान में हिजाब पर कोहराम* *डॉ वेदप्रताप वैदिक* मुस्लिम औरतें हिजाब पहने या नहीं, इस मुद्दे को लेकर ईरान में जबर्दस्त कोहराम मचा हुआ है। जगह-जगह हिजाब के विरूद्ध प्रदर्शन हो रहे हैं। कई लोग हताहत हो चुके हैं। तेहरान विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने हड़ताल कर दी है। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह खोमनई के खिलाफ खुले-आम नारे लग रहे हैं। विभिन्न शहरों और गांवों में हजारों पुलिसवाले तैनात कर दिए गए हैं। ऐसा लग रहा है कि ईरान में शहंशाह के खिलाफ जो माहौल सन 1975-78 में देखने में आया था, उसकी पुनरावृत्ति हो रही है। कई बड़े शिया नेता भी हिजाब का विरोध करने लगे हैं। यह कोहराम इसलिए शुरु हुआ है कि महसा आमीनी (22 साल) नामक युवती को तेहरान में गिरफ्तार कर लिया गया था, क्योंकि उसने हिजाब नहीं पहना हुआ था। गिरफ्तारी के तीन दिन बाद 16 सितंबर को जेल में ही उसकी मौत हो गई। उसके सिर तथा अन्य अंगों पर...
अलविदा राजू श्रीवास्तव, अब सबको कौन हंसायेगा

अलविदा राजू श्रीवास्तव, अब सबको कौन हंसायेगा

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अलविदा राजू श्रीवास्तव, अब सबको कौन हंसायेगा आर.के. सिन्हा राजू श्रीवास्तव की सेहत को लेकर बीच-बीच में खबरें आने लगीं थीं कि वे कुछ बेहतर हो रहे हैं। उनके स्वास्थ्य में कुछ सुधार हो रहा है। पिछले सप्ताह जब मैं उन्हें देखने एम्स गया था। जब उनकी श्रीमती जी ने आवाज़ लगाई कि “आर. के. भाई साहब आये हैं तो उन्होंने आंखें खोलने की असफल चेष्टा भी की थी।“ एक उम्मीद बंधने लगी थी कि वे फिर से ठीक होकर देश को अपने चुटीले व्यंग्यों से हंसानें लगेंगे। पर अफसोस कि राजू श्रीवास्तव नहीं रहे। एम्स जैसे प्रख्यात अस्पताल के डॉक्टर भी उन्हें बचा न सके। कानपुर से मुंबई जाकर अपने फिल्मी करियर को बनाने-संवारने गए राजू श्रीवास्तव ने सफलता को पाने से पहले बहुत पापड़ बेले थे। राजू श्रीवास्तव ने स्टैंड अप कॉमेडियन के रूप में अपनी साफ-सुथरी क़मेडी से करोड़ों लोगों को आनंद के पल दिये हैं। उनके काम में ...
भारत में कैंसर के बढ़ते मामले, समाज के स्वास्थ्य पर बोझ

भारत में कैंसर के बढ़ते मामले, समाज के स्वास्थ्य पर बोझ

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22 सितंबर - रोज डे (कैंसर रोगियों का कल्याण) भारत में कैंसर के बढ़ते मामले, समाज के स्वास्थ्य पर बोझ लोगों को अपने खान-पान के प्रति सचेत रहना चाहिए और किसी न किसी प्रकार का व्यायाम नियमित रूप से करना चाहिए। इसमें योग अहम भूमिका निभाता है। मरीजों को लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए और नियमित जांच करानी चाहिए। प्रदूषण नियंत्रण तंत्र का तत्काल आधार पर पालन किया जाना चाहिए। कैंसर को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाना महत्वपूर्ण है। सरकार को कैंसर की दवाओं की कीमतों को सीमित करना चाहिए क्योंकि ये बहुत महंगी हैं। अंत में, आहार में परिवर्तन कैंसर की रोकथाम में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। सामुदायिक भागीदारी के साथ कारणों और लक्षणों के बारे में जागरूकता समय की आवश्यकता है। -डॉ सत्यवान सौरभ कैंसर के बढ़ते मामले हमारे समाज के स्वास्थ्य को खराब कर रहे हैं क्योंकि यह भारत में मृत्यु के प्रमुख कारणों मे...
राष्ट्र-चिंतन

राष्ट्र-चिंतन

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*राष्ट्र-चिंतन* *ब्रिटेन के लेस्टर में हिंदुओं के खिलाफ मुसलमानों के दंगे रोंगटे खडे करने वाले हैं* *क्या ये मुसलमान भारतीय हो सकते हैं ?* *विदेशों में भारत की कब्र खोदने वाले भारतीय मुसलमानों से* *भारतीय पासपोर्ट छीना जाना चाहिए* *आचार्य श्री विष्णुगुप्त* =================== ब्रिटेन के लेस्टर में मुस्लिम दंगाइयों द्वारा हिन्दू मंदिरों और हिन्दू प्रतीकों के साथ ही साथ हिन्दुओं पर हिंसा बरपाने और तालिबनी-जिहादी मानसिकता का प्रदर्शन करने की लोमहर्षक घटना से यूरोप के बहुलतावाद पर प्रश्न चिन्ह खड़े हुए हैं और यह बात प्रमाणित हो रही है कि इस्लाम की अवधारणा पर आधारित मुस्लिम हिंसा अब नियंत्रण से बाहर है तथा यूरोप व अमेरिका में भी मुस्लिम आबादी हिंसा, आतंकवाद, जिहाद की प्रतीक बन गयी है। अब मुस्लिम आबादी इस्लाम के आधार पर राष्टवाद की अवधारणा को भी झूठा साबित कर रही है। लेस्टर दंगे म...