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अम्मा ने बनाया भारत का सबसे बड़ा अस्पताल

अम्मा ने बनाया भारत का सबसे बड़ा अस्पताल

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अम्मा ने बनाया भारत का सबसे बड़ा अस्पताल विनीत नारायण आम तौर पर ज़्यादातर मशहूर धर्माचार्य कोरपोरेट ज़िंदगी जीते हैं। महलनुमा आश्रमों में रहते हैं। महंगी गाड़ियों में घूमते हैं। हीरे जवाहरात से लदे रहते हैं। सैंकड़ों करोड़ रुपए के निवेश करते हैं। अमीरों के पीछे भागते हैं और ग़रीबों को हिक़ारत की नज़र से देखते हैं। पर दक्षिण भारत के केरल राज्य में मछुआरों की बस्ती में एक दरिद्र परिवार में जन्मीं माता अमृतानंदमयी मां ‘अम्मा’ एक अपवाद हैं। जिनका पूरा जीवन ग़रीबों और ज़रूरतमंदों की सेवा के लिए ही समर्पित है। पूरी दुनिया में करोड़ों लोगों के जीवन में सुख देने वाली ‘अम्मा’ जनसेवा के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक कदम रखने जा रही हैं। आगामी 24 अगस्त को फ़रीदाबाद में अम्मा के नए अस्पताल का उद्घाटन प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। 133 एकड़ भूमि में फैला ये अस्पताल भारत का सबसे बड़ा निजी क्ष...
क्यों नहीं बदल रही भारत में बेटियों की स्थिति?

क्यों नहीं बदल रही भारत में बेटियों की स्थिति?

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क्यों नहीं बदल रही भारत में बेटियों की स्थिति? भारतीय परिवार कम से कम एक बेटा होना बहुत जरूरी मानते है। मगर बेटियां समाज और देश के लिए दशा और दिशा तय करती हैं। जिसके बिना न तो कोई तस्वीर मुकम्मल होती है न ही घर, न ही परिवार, न समाज, न देश। शायद समाज में अब भी ऐसे लोग होंगे जो बेटे की चाहत में जन्म से पहले ही बेटियों को मार देते होंगे। लेकिन इन सबके बीच देश के लिए एक सुकून भरी खबर ये है कि स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, मेडिकल, सिविल सेवा हर जगह बेटियां टॉप कर रही है।  फिर भी बेटियों की स्थिति में वैसे सुधार क्यों नहीं जिनकी वे पूरी तरह हक़दार है? -प्रियंका 'सौरभ' पितृसत्ता समाज में सत्ता और नियंत्रण की एक जटिल और रहस्यमय संस्था है। पितृसत्ता एक पुरुष प्रधान संरचना का प्रतीक है जिसका एक लंबा इतिहास है और दुनिया के हर समाज में मौजूद है। दस में से नौ भारतीय इस धारणा से सहमत हैं कि...
कैंसर केयर ग्रुप भिवानी परिवार मैत्री संघ द्वारा कैंसर केयर गोष्ठी, सम्मान समारोह एवं हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन

कैंसर केयर ग्रुप भिवानी परिवार मैत्री संघ द्वारा कैंसर केयर गोष्ठी, सम्मान समारोह एवं हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन

राष्ट्रीय, समाचार, सामाजिक, साहित्य संवाद
कैंसर केयर ग्रुप भिवानी परिवार मैत्री संघ द्वारा कैंसर केयर गोष्ठी, सम्मान समारोह एवं हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली। कैंसर केयर ग्रुप भिवानी परिवार मैत्री संघ द्वारा कैंसर केयर गोष्ठी, सम्मान समारोह एवं हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एण्ड रिसर्च सेंटर के इन्द्रप्रस्थ हॉल में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भिवानी गौरव एवं वरिष्ठ समाजसेवी आर.सी. मेहतानी ने की। कार्यक्रम में आरजीसीआइआरसी के चेयरमैन राकेश चोपड़ा मुख्य अतिथि के रूप में, आरजीसीआइआरसी के सीईओ डी.एस. नेगी समारोह गौरव के रूप में, आरजीसीआइआरसी के निदेशक  सुधीर रावल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस मौके पर आरजीसीआइआरसी के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. दिनेश भुरानी का अभिनन्दन करते हुए उन्हें विदाई भी दी गई। कार्यक्रम का शुभारंभ आरजीसीआइआरसी के मानद सचिव प्रमोद माहेश्वरी द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर ...
मानसून सत्र में असली मुद्दों पर सार्थक बहस हो

मानसून सत्र में असली मुद्दों पर सार्थक बहस हो

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मानसून सत्र में असली मुद्दों पर सार्थक बहस हो-ः ललित गर्ग :-संसद का मानसून सत्र आज 18 जुलाई से शुरू होकर और 12 अगस्त तक चलेगा। मानसून सत्र अनेक दृष्टियों से महत्वपूर्ण है, आजादी के अमृत महोत्सव का मानसून सत्र अमृतमय होना चाहिए। यह सत्र इसलिये भी महत्वपूर्ण है कि इसी समय राष्ट्रपति पद और उपराष्ट्रपति पद के चुनाव होकर देश को नए राष्ट्रपति, नए उपराष्ट्रपति का मार्गदर्शन मिलना प्रारंभ हो जायेगा। सत्र की शुरुआत टकराव से न होकर सकारात्मक संवाद से होे, यह अपेक्षित है। इसके लिये हर दल का प्रत्येक सांसद अपने दिमाग में आइस की फैक्ट्ररी एवं जुुबान पर शुगर फैक्ट्ररी स्थापित करें, यानी ठण्डे दिमाग एवं मधुर संवाद के माध्यम से सत्र की कार्रवाई को सकारात्मक बनाये एवं देश के लिये नई ऊर्जा भरते हुए विकास की नयी बहार लाये।हर संसदीय सत्र की शुरुआत से पहले ही पक्ष-विपक्ष के बीच टकराव शुरू हो जाता है, एक-दूसरे ...
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव व उनको रोकने में युवाओं व महिलाओं की भूमिका

जलवायु परिवर्तन के प्रभाव व उनको रोकने में युवाओं व महिलाओं की भूमिका

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साइंस लेटर संस्था द्वारा “जलवायु परिवर्तन के प्रभाव व उनको रोकने में युवाओं व महिलाओं की भूमिका” विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में व्यक्त किए गए मेरे विचारो के प्रमुख अंश - कारपोरेट और सरकारें बाज़ारवाद व उपभोक्तावाद के जिस रास्ते पर दुनिया को ले गयीं हैं उसने पृथ्वी के संसाधनों को तेजी से समाप्त करना शुरू कर दिया है। हमारी स्थिति टाईटेनिक जहाज जैसी हो चुकी है । जीवाश्म ईंधनो और मांसाहार के साथ ही प्लास्टिक, रासायनिक खादों व कीटनाशकों ने आग में चिंगारी का काम किया है। हर और प्रदूषण , कूड़े व गंदगी के ढेर और पश्चिमी जीवन शैली व भवन निर्माण ने हालात बद से बदतर कर दिए। बाज़ार ज़्यादा से ज़्यादा माल बेचना चाहता है इसलिए उसने संयुक्त परिवार व अब एकल परिवार भी तोड़ दिया है जिस कारण सब आत्मकेंद्रित व स्वार्थी हो गए हैं। सरकारें बस बातें करती हैं किंतु ज़मीनी सच्चाई अलग है। सरकारों क...
विकास का नया मार्ग बुंदेलखंड एक्सप्रसे -वे

विकास का नया मार्ग बुंदेलखंड एक्सप्रसे -वे

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विकास का नया मार्ग बुंदेलखंड एक्सप्रसे -वे अब समाप्त होगी मुफ्त रेवड़ी की राजनीति मृत्युंजय दीक्षित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी बुंदेलखंड यात्रा के दौरान जालौन के कैथेरी गांव में बने मंच से 14,800 करोड़ से निर्मित 296 किमी लम्बे 4 लेन(6 लेन विस्तारीकरण) बुंदेलखण्ड एक्सप्रेस वे राष्ट्र को समर्पित करते हुए भविष्य के विकास व राजनीति के नये आयामों का संदेश दिया । प्रधानमंत्री ने बुंदेली में जनसभा को संबोधित करना शुरू किया और हर बार की तरह इस बार भी प्रतीकों व महापुरूषों को नमन किया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कई बडे़ संदेश दिए जिनसे यह साफ हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी मिशन -2024 के कितनी सतर्क व सजग होकर अपनी तैयारी कर रही है। भाजपा आलाकमान स्वयं पूरी तरह सक्रिय है तथा अपने कार्यकर्ता को भी पूरी तरह से सक्रिय रख रहा है ताकि चुनावों के दौरान किसी प्रकार की कोई कमी न रह जाये। प्र...
समस्या बढ़ाता राष्ट्रवादी सोच का अभाव

समस्या बढ़ाता राष्ट्रवादी सोच का अभाव

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समस्या बढ़ाता राष्ट्रवादी सोच का अभाव" आर. विक्रम सिंह (लेखक पूर्व सैनिक अधिकारी एवं पूर्व प्रशासक हैं)  साभार::दैनिक जागरण 7.7.22 हमारे देश के कुछ समूहों, वर्गों और राजनीतिक एवं गैर राजनीतिक संगठनों में राष्ट्रवाद का अभाव ही हमारी कई समस्याओं की जड़ है। देशवासियों में प्रबल राष्ट्रवाद की भावना जगाकर अब तक हम वह सब कुछ हासिल कर सकते थे, जिनका सपना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था। यदि आपके पास धन है तो कोई जरूरी नहीं कि प्रबल राष्ट्रदृष्टि भी हो। हमारे क्रांतिकारियों को धन चाहिए था। मजबूरी में उन्हें अंग्रेजों का खजाना लूटना पड़ा। कोई बिड़ला, कोई डालमिया या कोई भी अनाम भामाशाह उन्हें धन दे रहा होता तो क्रांतिकारी आंदोलन नए स्तरों पर जाता, पर देश का जनमानस गांधी को महात्मा मान कर उधर चला गया। जज्बा हो, विचार हो, पर धन न हो तो कुछ न हो पाएगा। यह बड़ा संकट है। हम इससे अवगत हैं कि ...
राजनेता मोदी जी के पद चिह्नों पर चलें*

राजनेता मोदी जी के पद चिह्नों पर चलें*

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राजनेता मोदी जी के पद चिह्नों पर चलें* यह सर्वविदित है कि जब मोदी जी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के पद को त्यागकर प्रधानमंत्री के पद को गृहण किया तो उन्होंने अपने बैंक में संचित सम्पूर्ण धनराशि अपने सेवकों में वितरित कर दी और अपनी संचित निधि को शून्य कर दिया था। यदि वे चाहते तो उस संचित धनराशि को अपनी जन्मदात्री माता जी एवं अपने परिवार के सदस्यों को वितरित कर सकते थे। इतना ही नहीं अपितु उन्होंने समय-समय पर देश-विदेश के भ्रमण के पश्चात प्राप्त हुए कीमती उपहारों को तथा अपने बहुमूल्य वस्त्रों की भी निलामी कराकर उससे प्राप्त धनराशि को गरीबों के हितार्थ सरकारी कोषों में दान कर दिया। उन्होंने कभी भी निजी सेवाओं के लिए गुजरात सरकार से पेंशन अथवा अन्य कोई सरकारी सुविधा की मांग नहीं की। यह एक आदर्श नेता की पहचान है। आज भारतीय संसद में अधिकांश सांसद भाजपा के हैं, सम्भव है कि इस वर्ष राज्यसभा में भी...
कोरोना की संक्रमण क्षमता कम करने के लिए वैज्ञानिकों ने खोजा नया तंत्र

कोरोना की संक्रमण क्षमता कम करने के लिए वैज्ञानिकों ने खोजा नया तंत्र

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कोरोना की संक्रमण क्षमता कम करने के लिए वैज्ञानिकों ने खोजा नया तंत्र नई दिल्ली, 15 जुलाई (इंडिया साइंस वायर): भारतीय शोधकर्ताओं ने सिंथेटिक पेप्टाइड्स के एक नये वर्ग की संरचना का खुलासा किया है। है। यह पेप्टाइड संरचना, कोविड-19 के लिए जिम्मेदार कोरोना वायरस (SARS-CoV-2) के कोशिकाओं में प्रवेश को बाधित करने के साथ-साथ वायरॉन्स (Virions) को जोड़ सकती है, जिससे उनकी संक्रमित करने की क्षमता कम हो सकती है। वायरॉन संपूर्ण वायरस कण को कहते हैं, जिसमें आरएनए या डीएनए कोर होता है। वायरॉन के बाहरी आवरण के साथ प्रोटीन की परत होती है, जो वायरस का बाह्य संक्रामक रूप होता है। कोरोना वायरस के नये रूपों के तेजी से उभरने से कोविड-19 टीकों द्वारा दी जाने वाली सुरक्षा कम हो जाती है, जिससे वायरस संक्रमण रोकने के नये तरीके खोजना आवश्यक हो जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस अध्ययन से उभरा नया दृष्टिको...
क्या नयी शब्द नियमावली बदलेगी सदन का माहौल?

क्या नयी शब्द नियमावली बदलेगी सदन का माहौल?

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क्या नयी शब्द नियमावली बदलेगी सदन का माहौल? मृत्युंजय दीक्षित वर्ष- 2022 में संसद का मानसून सत्र एक नई कहानी लिखने जा रहा है क्योंकि इस बार सांसदों के लिए एक पुस्तिका जारी की गयी है जिसके अनुसार कम से कम 60 शब्दों के बोलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। विगत कई वर्षों से जब भी संसद कोई सत्र आहूत किया जाता है तो इसका कोई भी दिन बिना हंगामे और शोरगुल के नहीं बीतता है। इसी हंगामे और शोरगुल के बीच माननीय सांसद गण सदन कि मर्यादा को भूलकर असंसदीय शब्दावली का उपयोग करते जिन्हें बाद में सदन की कार्यवाही के रिकार्ड से बाहर किया जाता है। लेकिन इस बार संभवतः दृश्य अलग होगा क्योंकि अब नये नियमों के अनुसार लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान सदस्य चर्चा में हिस्सा लेते हुए जुमलाजीवी, बालबुद्धि, जयचंद, कोविड स्प्रेडर और स्नूपगेट जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं कर पाएंगे। लोकसभा सचिवालय ने दोहरा चरित्र...