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मुर्मू के बहाने आदिवासी विकास का मर्म

मुर्मू के बहाने आदिवासी विकास का मर्म

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मुर्मू के बहाने आदिवासी विकास का मर्म -ः ललित गर्गः- आदिवासी लोगों के मूलभूत अधिकारों (जल, जंगल, जमीन) को बढ़ावा देने और उनकी सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और न्यायिक सुरक्षा के लिए द्रौपदी मुर्मू को राजग का राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया जाना एक सराहनीय एवं सूझबूझभरा कदम है। यह प्रशंसनीय एवं सुखद कदम इसलिये है कि आजादी के पचहत्तर वर्षांे के बाद देश के सर्वाेच्च संवैधानिक पद के लिये पहली बार आदिवासी महिला को सत्तारूढ़ दल द्वारा उम्मीदवार बनाया गया है। यदि कुछ असामान्य न हो तो वोटों के गणित के हिसाब से उनका राष्ट्रपति बनना तय है। भले ही मूर्मु को राष्ट्रपति बनाने के राजनीतिक निहितार्थ हो, लेकिन सदियों से वंचित रहे आदिवासी समाज को ऐसा प्रतिनिधित्व देना सराहनीय एवं उनके समग्र विकास की आहट है। सरकारों के विकास के दावों एवं सन्तुलित समाज निर्माण के संकल्प के बावजूद वर्तमान दौर की यह एक बहुत बड़...
खिलौनों की दुनिया के वो मिट्टी के घर याद आते हैं।

खिलौनों की दुनिया के वो मिट्टी के घर याद आते हैं।

सामाजिक
खिलौनों की दुनिया के वो मिट्टी के घर याद आते हैं। (आज के आधुनिक समय में सभी लोग सीमेंट से बने घर में रहना पसंद करते हैं और मिट्टी से बने घर में किसी को भी रहना अच्छा नहीं लगता है। अब तो ज्यादातर गाँव में ही मिट्टी से बने घर देखने को मिलते हैं नहीं तो शहर में तो हर कोई सीमेंट से बने घर में ही रहता है।) -प्रियंका 'सौरभ' सदियों से मिटटी के घर बनाने की जो परम्परा चली आ रही है; भारत में 118 मिलियन घरों में से 65 मिलियन मिट्टी के घर हैं? यह भी सच है कि कई लोग अपने द्वारा प्रदान किए जाने वाले लाभों के लिए मिट्टी के घरों को पसंद करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि हम शहरी केंद्रों में भी एक छोटा बदलाव देख रहे हैं, घर के मालिकों को लगता है कि उनके दादा-दादी के पास यह सही था। मिट्‌टी की झोपड़ी... फूस या खपरैल की छत। अगर यह विवरण सुनकर आप भारत के किसी दूर-दराज के पिछड़े गांव की तस्वीर दिमाग में बना...
अन्तत: बेनकाब हुई तीस्ता सीतलवाड़

अन्तत: बेनकाब हुई तीस्ता सीतलवाड़

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अन्तत: बेनकाब हुई तीस्ता सीतलवाड़  आर.के. सिन्हा  तीस्ता सीतलवाड़ अब पूरी तरह  बेनकाब हो चुकी हैं। गुजरात दंगों पर एहसान जाफरी की पत्नी जाकिया जाफरी  की याचिका सुप्रीम कोर्ट  में खारिज होने के अगले ही दिन गुजरात एटीएस की टीम मुंबई में तीस्ता सीतलवाड़ के घर पहुंची और गिरफ्तार कर अहमदाबाद ले आई। तीस्ता सीतलवाड़ पर जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र रचने  और अन्य कई धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने 2002 गुजरात दंगों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  को एसआईटी की क्लीन चिट के खिलाफ जाकिया जाफरी की याचिका को पूरी जांच पड़ताल के बाद चार सौ पृष्ठों से ज्यादा के अपने निर्णय में खारिज किया था। सुप्रीम कोर्ट की ओर से यह गंभीर टिप्पणी भी की गई थी कुछ लोग कड़ाही लगातार खौलाते रहना चाहते हैं। इस टिप्पणी को तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ के संदर्भ में देखा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जकिया...
जुबैर, तुम्हारी गिरफ्तारी गलत है, पर तुम उससे भी ज़्यादा!

जुबैर, तुम्हारी गिरफ्तारी गलत है, पर तुम उससे भी ज़्यादा!

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जुबैर, तुम्हारी गिरफ्तारी गलत है, पर तुम उससे भी ज़्यादा! नीरज बधवार ऑल्ट न्यूज़ के को-फाउंडर मोहम्मद ज़ुबैर की गिरफ्तारी हो गई। उन्हें 2018 में धार्मिक भावनाएं आहत करने वाले एक पोस्ट के लिए गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद एक वर्ग इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहा है। इसमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन देख रहा है। पर सवाल ये है कि क्या वाकई ऐसा है? क्या मोहम्मद जुबैर पूरी तरह निर्दोष हैं? क्या नुपूर शर्मा पर धार्मिक भावनाएं भड़काने वाले जुबैर ने खुद कभी हिंदुओं की भावनाएं नहीं भड़काई? जो लोग जुबैर की गिरफ्तारी को लोकतंत्र की हत्या बता रहे हैं, वो वाकई लोकतंत्र के समर्थक हैं या फिर ये एक Selective Outrage है? आइए एक-एक इन सवालों का जवाब देने की कोशिश करते हैं। नुपूर शर्मा विवाद से चर्चा में आए देखिए, पहली बात ये कि मेरा मानना है कि धार्मिक भावनाएं भड़काने जैसे मुद्दे पर किसी क...
महंगी होती खाद से खेती करना मुश्किल

महंगी होती खाद से खेती करना मुश्किल

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महंगी होती खाद से खेती करना मुश्किल -प्रियंका 'सौरभ' उत्पादन बढ़ाने के लिए उर्वरक खेतों की उर्वरता बनाए रखने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। भारत अपनी उर्वरक आवश्यकताओं के लिए आयात पर बहुत अधिक निर्भर करता है। भारत में उर्वरकों की वर्तमान लागत एक खनिज संसाधन-गरीब देश के लिए वहन करने के लिए बहुत अधिक है। 2021-22 में, मूल्य के संदर्भ में, सभी उर्वरकों का आयात $ 12.77 बिलियन के सर्वकालिक उच्च स्तर को छू गया। भारत द्वारा उर्वरक आयात का कुल मूल्य, घरेलू उत्पादन में उपयोग किए गए इनपुट सहित, 2021-22 में $ 24.3 बिलियन का विशाल मूल्य था। उर्वरकों की उच्च लागत के कारण देखे तो उर्वरकों का न केवल आयात किया जाता है, बल्कि भारतीय किसान भी आयातित आदानों का उपयोग करके आयात या निर्माण की लागत से कम का भुगतान करते हैं। अंतर का भुगतान सरकार द्वारा सब्सिडी के रूप में किया जाता है। महंगा कच्चा माल भी काफ...
कितने परोपकारी हैं भारत के पूंजीपति

कितने परोपकारी हैं भारत के पूंजीपति

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 कितने परोपकारी हैं भारत के पूंजीपति आर.के. सिन्हा गौतम अडाणी ने सेहत, शिक्षा और कौशल विकास के लिए 60 हजार करोड़ रुपए देने का संकल्प लिया है। जाहिर है कि यह कोई-छोटी मोटी राशि तो नहीं है न? देखिए , इससे सुखद कोई बात नहीं हो सकती कि देश में आप जो भी अपनी बुद्धि और मेहनत से दिन - रात एक करके पैसा कमाते हैं, उसे यदि वे उसी देश-समाज को वापस कर दें जिससे आपने कमाया है। बेशक, यह भारतीय कॉरपोरेट इतिहास के सबसे बड़े दानों  में से एक है। पर इतना कहना ही  होगा कि हमारे देश में अब भी गिनती के ही कारोबारी या पैसे वाले लोग हैं जो परोपकार के लिए अपना कमाया धन समाज के परोपकार में देते हैं। इस लिहाज से मोटा-मोटी अजीम प्रेमजी, शिव नाडार, मुकेश अंबानी, नंदन नीलकेणी, टाटा ग्रुप वगैरह का ही नाम मुख्य रूप से सबसे पहले जेहन में आता है। अजीम प्रेमजी के लिए कहा जाता है कि वे औसत रोज 22 करोड़ रुपए दान में...
जीवन में छोटी चीजों का आनंद लें। “इस लम्हे में खुश रहिये। ये लम्हा ही ज़िंदगी है।”

जीवन में छोटी चीजों का आनंद लें। “इस लम्हे में खुश रहिये। ये लम्हा ही ज़िंदगी है।”

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जीवन में छोटी चीजों का आनंद लें। “इस लम्हे में खुश रहिये। ये लम्हा ही ज़िंदगी है।” -सत्यवान 'सौरभ' जीवन में छोटी चीजों का आनंद लें क्योंकि एक दिन आप पीछे मुड़कर देखेंगे और महसूस करेंगे कि वे बड़ी चीजें थीं। छोटी चीजें जरूरी हैं क्योंकि वे हमारे जीवन के विशाल बहुमत को शामिल करती हैं। महत्वपूर्ण घटनाएं छिटपुट रूप से घटित होती हैं। छोटे-छोटे पल-पल होते रहते हैं। जब आप छोटी-छोटी चीजों की उपेक्षा करते हैं, तो आप अपने जीवन का काफी आनंद लेने से चूक जाते हैं। बचपन मे कहानी सुनी थी -एक मुर्गी रोज एक सोने का अन्डा देती थी पर उसके मालिक ने बडी खुशी के लिऐ उस मुर्गी को मारकर सब अन्डे साथ मे निकालने की सोची; न अन्डा मिला न मुर्गी बची तो तात्पर्य ये है की एक बडी खुशी से जीवन मे छोटी-छोटी खुशियां ज्यादा मायने रखती है। छोटी-छोटी बातों की सराहना किए बिना केवल बड़ी चीजों के...
क्यों अग्निवीर उठ खड़े है सरकार की अग्निपरीक्षा लेने को ?

क्यों अग्निवीर उठ खड़े है सरकार की अग्निपरीक्षा लेने को ?

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क्यों अग्निवीर उठ खड़े है सरकार की अग्निपरीक्षा लेने को ? (प्रदर्शनकारी पूछ रहे हैं कि वे चार साल बाद क्या करेंगे? उन उम्मीदवारों का क्या होगा जिन्होंने दो साल से शारीरिक और चिकित्सा परीक्षा उत्तीर्ण की और लिखित परीक्षा की प्रतीक्षा कर रहे थे।  यही 4 साल होते हैं जब बच्चे आगे पढ़कर करियर बनाते हैं, 4 साल बाद क्या करेंगे? सिक्योरिटी गार्ड, ग्रुप डी ? क्यूंकि पढ़ाई तो छोड़ चुके होंगे, वापिस आकर कितने पढ़ेंगे? ) -प्रियंका 'सौरभ' भले ही अग्निपथ योजना को बेरोजगारी कम करने वाली योजना बताया जा रहा हो पर योजना पर गौर करने पर पता चलता है कि यह योजना वेतन और पेंशन के बोझ को कम करने के लिए लाई गई है। सेना में अहम् पदों पर रहने वाले कुछ पूर्व सैनिकों ने इस योजना पर चिंता भी जताई है। कई सैनिकों ने विभिन्न अख़बारों में लिखे लेख में इस योजना इंडियन  आर्मी रिक्रूटमेंट 2022 से समाज के सैन्यीकरण को घातक बताय...
ओबीसी के साथ क्रीमीलेयर का भेदभाव क्यों?

ओबीसी के साथ क्रीमीलेयर का भेदभाव क्यों?

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ओबीसी के साथ क्रीमीलेयर का भेदभाव क्यों? (केवल आर्थिक आधार पर क्रीमी लेयर का निर्धारण करना गलत होगा। सामाजिक स्थिति में बढ़ोतरी, शिक्षा, रोजगार, आर्थिक हैसियत जैसे कई तरह के कारक मिलकर किसी की सामाजिक वंचना दूर करते हैं। अगर इस बहस को ईमानदारी से शांत करना है तो सरकार को चाहिए कि वह जातिगत जनगणना करवाए। उसके आधार पर नीति बनाए।) - सत्यवान 'सौरभ' आरक्षण, सात दशकों के बावजूद, हमारे विषम समाज में कई समूहों के लिए लाभों के समान वितरण में अनुवादित नहीं हुआ है। नतीजतन, कई समूहों को छोड़ दिया गया है। आरक्षण का लाभ नहीं उठा पाने वाले हाशिए के तबके के लोगों की जोरदार मांग है। इसके लिए कुछ नीति विकल्प तैयार करने की आवश्यकता है जो आरक्षण की मौजूदा प्रणाली को पूरा करने में सक्षम हो सकते हैं। इसका विस्तार से अध्ययन करने के लिए न्यायमूर्ति रोहिणी आयोग का गठन किया गया। न्यायमूर्ति जी. रोहिणी आयोग की ...
बुलडोज़र बनाम क़ानून

बुलडोज़र बनाम क़ानून

राज्य, विश्लेषण, सामाजिक
बुलडोज़र बनाम क़ानून विनीत नारायण प्रयागराज में मोहम्मद जावेद की पत्नी की मिल्कियत वाला मकान प्रशासन ने बुलडोज़र से ध्वस्त कर दिया। जावेद पर प्रयागराज में पत्थरबाज़ी करवाने व दंगे भड़काने का आरोप है। आरोप सिद्ध होने तक वो फ़िलहाल हिरासत में है। प्रशासन की इस कार्यवाही से कई क़ानूनी सवाल पैदा हो गए हैं। इस विषय में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गोविंद माथुर ने एक अख़बार से हुई बातचीत में बताया कि, 'ये पूरी तरह से गैरकानूनी है। भले ही आप एक पल के लिए भी मान लें कि निर्माण अवैध था, लेकिन करोड़ों भारतीय भी ऐसे ही रहते हैं, यह अनुमति नहीं है कि आप रविवार को एक घर को ध्वस्त कर दें जब उस घर का निवासी हिरासत में हों। यह कोई तकनीकी मुद्दा नहीं है बल्कि कानून के शासन का सवाल है।' जस्टिस माथुर ने समझाया कि प्रशासन द्वारा बुलडोज़र से केवल किसी संपत्ति...